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Jammu

03/08/2026

आदित्यहृदय स्तोत्र’

*तिलक लगाने के चमत्कारिक प्रभाव और लाभ :-*●*तिलक लगाने की परंपरा कब से और कैसे शुरू हुई यह बताना थोड़ा कठिन है, लेकिन यह...
31/07/2026

*तिलक लगाने के चमत्कारिक प्रभाव और लाभ :-*
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*तिलक लगाने की परंपरा कब से और कैसे शुरू हुई यह बताना थोड़ा कठिन है, लेकिन यह परंपरा भारत में प्राचीनकाल से ही चली आ रही है। किसी आयोजन में आने वाले व्यक्ति का स्वागत-सत्कार तिलक लगाकर ही करते हैं। विवाहित स्त्री अपने मस्तक पर कुंकुम का तिलक धारण करती है। शादी-विवाह या किसी मांगलिक कार्य में बहन-बेटी या महिलाएं एक दूसरे का स्वागत हल्दी कुंकुम लगाकर करती है। पूजा और भक्ति का एक प्रमुख अंग तिलक है। भारतीय संस्कृति में पूजा-अर्चना, संस्कार विधि, मंगल कार्य, यात्रा गमन, शुभ कार्यों के प्रारंभ में माथे पर तिलक लगाकर उसे अक्षत से विभूषित किया जाता है।*

*तिलक लगाने का स्थान : - तिलक लगाने के 12 स्थान हैं। सिर, ललाट, कंठ, हृदय, दोनों बाहुं, बाहुमूल, नाभि, पीठ, दोनों बगल में, इस प्रकार बारह स्थानों पर तिलक करने का विधान है। मस्तक पर तिलक जहां लगाया जाता है वहां आत्मा अर्थात हम स्वयं स्थित होते हैं।* *तिलक मस्तक पर दोनों भौंहों के बीच नासिका के ऊपर प्रारंभिक स्थल पर लगाए जाते हैं जो हमारे चिंतन-मनन का भी स्थान है।*

*यह स्थान चेतन-अवचेतन अवस्था में भी जागृत एवं सक्रिय रहता है, इसे आज्ञा-चक्र भी कहते हैं। इन दोनों के संगम बिंदु पर स्थित चक्र को निर्मल, विवेकशील, ऊर्जावान, जागृत रखने के साथ ही तनावमुक्त रहने हेतु ही तिलक लगाया जाता है। इस बिंदु पर यदि* *सौभाग्यसूचक द्रव्य जैसे चंदन, केशर, कुमकुम आदि का तिलक लगाने से सात्विक एवं तेजपूर्ण होकर आत्मविश्वास में अभूतपूर्ण वृद्धि होती है, मन में निर्मलता, शांति एवं संयम में वृद्धि होती है।*

*तिलक लगाने का वैज्ञानिक महत्व !!!!!*

*ललाट पर तिलक धारण करने से मस्तिष्क को शांति और शीतलता मिलती है तथा बीटाएंडोरफिन और सेराटोनिन नामक रसायनों का स्राव संतुलित मात्रा में होने लगता है। इन रसायनों की कमी से उदासीनता और निराशा के भाव पनपने लगते हैं अत: तिलक उदासीनता और निराशा से मुक्ति प्रदान करने में सहायक है। वि‍भिन्न द्रव्यों से बने तिलक की उपयोगिता और महत्व अलग-अलग हैं।*

*किस अंगुलि से लगाएं तिलक तो क्या होगा ?????*

*अनामिका अंगुली से तिलक करने से मन और मस्तिष्क को शांति मिलती है, मध्यमा से आयु बढ़ाती है, अंगूठे से तिलक करना पुष्टिदायक कहा गया है और तर्जनी से तिलक करने पर मोक्ष मिलता है। विष्णु संहिता के अनुसार देव कार्य में अनामिका, पितृ कार्य में मध्यमा, ऋषि कार्य में कनिष्ठिका तथा तांत्रिक कार्यों में प्रथमा अंगुली का प्रयोग होता है।*

*मान्यता है कि विष्णु आदि देवताओं की पूजा में पीत चंदन, गणेश पूजा में हरिद्रा चंदन, पितृ कार्यों में रक्त चंदन, शिव पूजा में भस्म, ऋषि पूजा में श्वेत चंदन, मानव पूजा में केसर और चंदन, लक्ष्मी पूजा में केसर एवं तांत्रिक कार्यों में सिंदूर का प्रयोग तिलक के लिए करना चाहिए।*

*तिलक कई प्रकार के होते हैं:- मृतिका, भस्म, चंदन, रोली, केसर, सिंदूर, कुंकुम, गोपी आदि। सनातन धर्म में शैव, शाक्त, वैष्णव और अन्य मतों के अलग-अलग तिलक होते हैं। तिलक केवल एक तरह से नहीं लगाया जाता। हिंदू धर्म में जितने संतों के मत हैं, जितने पंथ है, संप्रदाय हैं उन सबके अपने अलग-अलग तिलक होते हैं।*

*शैव परंपरा में ललाट पर चंदन की आड़ी रेखा या त्रिपुंड लगाया जाता है।*

*शाक्त सिंदूर का तिलक लगाते हैं। सिंदूर उग्रता का प्रतीक है। यह साधक की शक्ति या तेज बढ़ाने में सहायक माना जाता है।*

*वैष्णव परंपरा में चौंसठ प्रकार के तिलक बताए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं- लालश्री तिलक-इसमें आसपास चंदन की व बीच में कुंकुम या हल्दी की खड़ी रेखा बनी होती है।*

*विष्णुस्वामी तिलक यह तिलक माथे पर दो चौड़ी खड़ी रेखाओं से बनता है। यह तिलक संकरा होते हुए भौंहों के बीच तक आता है।*

*रामानंद तिलक विष्णुस्वामी तिलक के बीच में कुंकुम से खड़ी रेखा देने से रामानंदी तिलक बनता है।*

*श्यामश्री तिलक इसे कृष्ण उपासक वैष्णव लगाते हैं। इसमें आसपास गोपीचंदन की तथा बीच में काले रंग की मोटी खड़ी रेखा होती है।*

*अन्य तिलक गाणपत्य, तांत्रिक, कापालिक आदि के भिन्न तिलक होते हैं। कई साधु व संन्यासी भस्म का तिलक लगाते हैं।*

*चांदन का तिलक : चंदन का तिलक लगाने से पापों का नाश होता है, व्यक्ति संकटों से बचता है, उस पर लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है, ज्ञानतंतु संयमित व सक्रिय रहते हैं। चंदन का तिलक ताजगी लाता है और ज्ञान तंतुओं की क्रियाशीलता बढ़ाता है। चन्दन के प्रकार : हरि चंदन, गोपी चंदन, सफेद चंदन, लाल चंदन, गोमती और गोकुल चंदन।*

*कुमकुम का तिलक:- कुमकुम का तिलक तेजस्विता प्रदान करता है।*

*मिट्टी का तिलक:- विशुद्ध मिट्टी के तिलक से बुद्धि-वृद्धि और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।*

*केसर का तिलक:- केसर का तिलक लगाने से सात्विक गुणों और सदाचार की भावना बढ़ती है। इससे बृहस्पति ग्रह का बल भी बढ़ जाता है और भाग्यवृद्धि होती है।*


*दही का तिलक:- दही का तिलक लगाने से चंद्र बल बढ़ता है और मन-मस्तिष्क में शीतलता प्रदान होती है।*

*इत्र का तिलक:- इत्र कई प्रकार के होते हैं। अलग अलग इत्र के अलग अलग फायदे होते हैं। इत्र का तिलक लगाने से शुक्र बल बढ़ता हैं और व्यक्ति के मन-मस्तिष्क में शांति और प्रसन्नता रहती है।*

*तिलकों का मिश्रण:- अष्टगन्ध में आठ पदार्थ होते हैं- कुंकुम, अगर, कस्तुरी, चन्द्रभाग, त्रिपुरा, गोरोचन, तमाल, जल आदि। पंचगंध में गोरोचन, चंदन, केसर, कस्तूरी और देशी कपूर मिलाया जाता है। गंधत्रय में सिंदूर, हल्दी और कुमकुम मिलाया जाता है। यक्षकर्दम में अगर, केसर, कपूर, कस्तूरी, चंदन, गोरोचन, हिंगुल, रतांजनी, अम्बर, स्वर्णपत्र, मिर्च और कंकोल सम्मिलित होते हैं।*

*गोरोचन की गौर कानूनी तरीके से प्राप्त न करें, हम इसकी सलाह बिल्कुल भी नहीं देते।*

22/07/2026

*🌄🌹ॐनमो नारायणाय🌹🙏*

*भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जीवन में वही व्यक्ति प्रसन्नता के साथ आगे बढ़ता है जो कठिनाइयों को सहन कर स्वयं को स्थापित करता है, साथ ही संघर्ष को अपनाने वाला असाधारण बन जाता है,अतः जीवन में हमेशा प्रसन्न रहिये।*

*🌅आपका हर पल आनंदमय हो😍*

*🌹कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्🙏*

23/03/2026

💥 अंतिम सत्य (जो हर सनातनी को जानना चाहिए)
👉 ऋग्वेद सिखाता है सोचना
👉 सामवेद सिखाता है महसूस करना
👉 यजुर्वेद सिखाता है करना
👉 अथर्ववेद सिखाता है जीना
👉 उपनिषद सिखाता है समझना
👉 महाभारत सिखाता है लड़ना (धर्म के लिए)

🚩 आखिरी लाइन (दिल में उतर जाने वाली)
वेद सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं बने…
वेद “जीने” के लिए बने हैं।

जिस दिन तुमने इन्हें अपने जीवन में उतार लिया…

👉 उसी दिन तुम्हारा जीवन साधारण से असाधारण बन जाएगा।
🙏
सनातन कोई धर्म नहीं…
यह जीवन जीने का सबसे श्रेष्ठ मार्ग है।

Admissions for new batch
07/03/2026

Admissions for new batch

16/01/2026

He is a monk of the Ramakrishna Mission. For the first time, heard a clear and truthful statement from a monk.🙏

15/12/2025

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Prem Kutir
Jammu
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