*मांसाहार पर वैज्ञानिकों की शोध*
*प्राकृतिक आपदाओं पर हुई नई खोजों के नतीजें मानें तो इन दिनों बढ़ती मांसाहार की प्रवृत्ति भूकंप और बाढ़ के लिये जिम्मेदार है! आइंस्टीन पेन वेव्ज के मुताबिक मनुष्य की स्वाद की चाहत खासतौर पर मांसाहार की आदत के कारण प्रतिदिन मारे जाने वाले पशुओं की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है*
*सूजडल (रूस) में पिछले दिनों हुए भूस्खलन और प्राकृतिक आपदा पर हुए एक सम्मेलन में भारत से गए भौतिकी के तीन वैज्ञानिकों ने एक शोधपत्र पढ़ा*
*डा. मदन मोहन बजाज, डा. इब्राहीम और डा. विजयराजसिंह के अलावा दुनियाँ भर के 23 से अधिक वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए शोधपत्र के आधार पर कहा गया कि भारत, जापान, नेपाल, अमेरिका, जार्डन, अफगानिस्तान, अफ्रीका में पिछले दिनों आए तीस बड़े भूकंपों में आइंस्टीन पैन वेव्ज (इपीडबल्यू) या नोरीप्शन वेव्ज बड़ा कारण रही है*
*इन तरंगों की व्याख्या यह की गई है कि कत्लखानों में जब पशु काटे जाते हैं तो उनकी अव्यक्त कराह, फरफराहट, तड़प वातावरण में तब तक रहती है जब तक उस जीव का माँस, खून, चमड़ी पूरी तरह नष्ट नही होती*
*उस जीव की कराह खाने वालों से लेकर पूरे वातवरण मे भय रोग और क्रोध उत्पन्न करती है। यों कहें कि प्रकृति अपनी संतानों की पीड़ा से विचलित होती है। अध्ययन मे बताया गया है कि प्रकृति जब ज्यादा क्षुब्ध होती है तो मनुष्य आपस में भी लड़ने भिड़ने लगते हैं चिड्चिडे हो जाते हैं और विभिन्न देश प्रदेशों में दंगे होने लगते हैं*
*सिर्फ स्वाद के लिये बेकसूर जीव जंतुओं की हत्या ही इस तरह के दंगों का कारण बनती है और कभी कभी आत्महत्या का भी*
*ज्यादातर मामलों में प्राकृतिक उत्पात जैसे अज्ञात बीमारियाँ, हार्टअटेक, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, बाढ़, भूकंप, ज्वालामुखी के विस्फोट जैसे संकट आते हैं*
*इस अध्ययन के मुताबिक एक कत्लखाने से जिसमें औसतन पचास जानवरों को मारा जाता है 1040 मेगावाट ऊर्जा फेंकने वाली इपीडब्लू पैदा होती है*
*दुनिया के करीब 50 लाख छोटे बड़े कत्लखानों में प्रतिदिन 50 लाख करोड़ मेगावाट की मारक क्षमता वाली शोक तरंगे या इपीडव्लू पैदा होती है*
*विश्व के 700 से अधिक वैज्ञानिकों सहित अनेक डाक्टरों के सम्मेलन में माना गया कि कुदरत कोई डंडा ले कर तो इन तंरगों के गुनाहगार लोगों को दंड देने नहीं निकलती। उसकी एक ठंडी सांस भी धरती पर रहने वालों को कंपकंपा देने के लिये काफी है*
*कत्लखानों में जब जानवरों को कत्ल किया जाता है तो बहुत बेरहमी के साथ किया जाता है बहुत हिंसा होती है बहुत अत्याचार होता है*
*जानवरों का कतल होते समय उनकी जो चीत्कार निकलती है, उनके शरीर से जो स्ट्रेस हारमोन निकलते है और उनकी जो शोक वेभ निकलती है वो पूरी दुनिया को तरंगित कर देती है कम्पायमान कर देती है। परीक्षण के दौरान लैबरोट्री में भी जानवरों पर ऐसा हीं विभत्स अत्याचार होता है*
*जानवरों को जब काटा जाता है तब बहुत दिनों तक उनको भूखा रखा जाता है और कमजोर किया जाता है फिर इनके ऊपर 80 डिग्री सेंट्रीगेड गर्म पानी की बौछार डाली जाती है उससे शरीर फूलना शुरु हो जाता है तब गाय भैंस बकरी तड़पना और चिल्लाने लगते हैं तब जीवित स्थिति में उनकी खाल को उतारा जाता है और खून को भी इकठ्ठा किया जाता है फिर धीरे धीरे गर्दन काटी जाती है, एक एक अंग अलग से निकला जाता है*
*आज का आधुनिक विज्ञानं ने ये सिद्ध किया है के मरते समय जानवर हो या इन्सान अगर उसको क्रूरता से या उम्र पूरी होने के पहले मारा जाता है तो उसके शरीर से निकलने वाली जो चीख पुकार है उसकी वाइब्रेशन में जो नेगेटिव वेव्स निकलते हैं वो पूरे वातावरण को बुरी तरह से प्रभावित करता है और उससे सभी मनुष्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है*
*खासतौर पर सबसे ज्यादा असर ऐसे जीव का उन मनुष्यों पर पड़ता है जो उसका माँस खाते है और ये दुष्प्रभाव एक बार खाने के बाद कम से कम 18 महीने तक रहता है बड़ी बात ये है कि खाने वाले के परिजन और अधिक तनावग्रस्त,दुखी व भयंकर रोगॊ से पीडित होते जाते है इससे मनुष्य में जिद करने गाली देने,चोरी करने,दूसरो का धन हड़पने, के साथ अत्यंत क्रोध व हिंसा करने की प्रवृत्ति बढ़ती है जो अत्याचार और पाप पूरी दुनिया में बढ़ा रही है*
*अफ्रीका के दो प्रोफेसर,दो जर्मनी,दो अमेरिका के,एक भारतीय मदनमोहन और चार जर्मनी के वैज्ञानिकों ने अपने अपने हेड मार्क फीस्ट्न,डेविड थामस, जुँनस अब्राहम व क्रिओइबोँद फिलिप् के साथ बीस साल इस विषय पर रिसर्च किया है और उनकी रिसर्च ये कहती है*
*कि जानवरों का जितना ज्यादा कत्ल किया जायेगा जितना ज्यादा हिंसा से मारा जायेगा उतना ही अधिक दुनिया में भूकंप आयेंगे, जलजले आयेंगे, प्राकृतिक आपदा आयेगी उतना ही दुनिया में संतुलन बिगड़ेगा और लोग दु:खी,तनावयुक्त व हार्टअटेक से पीडित होंगे*
*लाश खाना छोड़ो और शाकाहारी बनो...*
जीवन्तं मृतवन्मन्ये देहिनं धर्मवर्जितम्।
मृतो धर्मेण संयुक्तो दीर्घजीवी न संशयः।।
*जनजागृति हेतु लेख प्रसारण अवश्य करें...*
*नए भारत का वैश्विक संकल्प...*
Unique Paramount Science Academy Gk Group, Jalore By R. V Sir
Hard work is a key of success
गहनों का वैज्ञानिक महत्व....
औरतों का शरीर और मन पुरुषों की अपेक्षा कोमल, संवेदनशील माना गया है. औरतों के शरीर में हारमोंस के उतार चढाव का शरीर और मन, विचारों पर काफी प्रभाव होता है. घर परिवार की जिम्मेदारियों की बात की जाय तो औरतें तन-मन से समर्पित रहती है...ऐसे में प्राचीन ऋषियों ने कुछ ऐसे उपकरण बनाये जिससे औरतों के मन और स्वास्थ्य की रक्षा हो सके. प्रचलन में बढ़ने पर इनको सुन्दर गहनों का रूप मिलने लगा और यह नियमपूर्वक पहने जाने लगे... सोने के गहने गर्मी और चांदी के गहने ठंडी का असर शरीर में पैदा करते हैं. कमर के ऊपर के अंगों में सोने के गहने और कमर से नीचे के अंग में चांदी के आभूषण पहनने चाहिए. यह नियम शरीर में गर्मी और शीतलता का संतुलन बनाये रखता है..
1. चूड़ी पहनने के फायदे -
चूड़ी कलाई की त्वचा से घर्षण करके हाथों में रक्त संचार बढाती है. यह घर्षण ऊर्जा भी पैदा करता है जोकि थकान को जल्दी हावी नहीं होने देता..कलाई में गहने पहनने से श्वास रोग, ह्रदय रोग की सम्भावना घटती है. चूड़ी मानसिक संतुलन बनाने में सहायक है चटकी हुई या दरार पड़ी हुई चूड़ियाँ नहीं पहननी चाहिए. इससे नकारात्मक ऊर्जा बढती है.. लाल रंग और हरे रंग की चूड़ियाँ सबसे अच्छे असर वाली मानी जाती हैं.
2. बिछिया पहनने के फायदे -
विवाहित महिलाएं पैरो में बीच की 3 उँगलियों में बिछिया पहनती है. यह गहना सिर्फ साज-श्रृंगार की वस्तु नही है.. दोनों पैरों में बिछिया पहनने से महिलाओं का हार्मोनल सिस्टम सही रूप से कार्य करता है, बिछिया पहनने से थाइराइड की संभावना कम हो जाती है... बिछिया एक्यूप्रेशर उपचार पद्दति पर कार्य करती है जिससे शरीर के निचले अंगों के तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियां सबल रहती हैं... बिछिया एक खास नस पर प्रेशर बनाती है जोकि गर्भाशय में समुचित रक्तसंचार प्रवहित करती है. इस प्रकार बिछिया औरतों की गर्भधारण क्षमता को स्वस्थ रखती है... मछली की आकार की बिछिया सबसे असरदार मानी जाती है. मछली का आकार मतलब बीच में गोलाकार और आगे पीछे कुछ नोकदार सी.
3. पायल पहनने के फायदे -
पायल पैरों से निकलने वाली शारीरिक विद्युत ऊर्जा को शरीर में संरक्षित रखती है...पायल महिलाओं के पेट और निचले अंगों में वसा (फैट) बढ़ने की गति को रोकती है... वास्तु के अनुसार पायल की छनक निगेटिव ऊर्जा को दूर करती है...चांदी की पायल पैरो से घर्षण करके पैरों की हड्डियाँ मजबूत बनाती हैं.. पैर में पायल पहनने से महिला की इच्छा-शक्ति मजबूत होती है.जिससे औरतें अपने स्वास्थ्य की चिंता किये बिना पूरी लगन से परिवार के भरण-पोषण में जुटी रहती हैं.. पैरों में हमेशा चांदी की पायल पहने. सोने की पायल शारीरिक गर्मी का संतुलन खराब करके रोग उत्पन्न कर सकती हैं
4. अंगूठी पहनने के फायदे -
अँगूठी ऊर्जा के विकास, मानसिक तनाव दूर करने, जननेन्द्रिय पर नियंत्रण पाने, कामवासना पर नियंत्रण रखने और पाचनतंत्र को मजबूत बनाने हेतु मिलावटरहित सोने की अँगूठी पहनी जाती है । विभिन्न धातुओं की अँगूठी का शरीर पर अलग- अलग प्रभाव पड़ता है, ऐसे ही अलग-अलग रत्नों (नगों) का भी अपना अलग-अलग प्रभाव होता है
5. कर्ण-कुंडल पहनने के फायदे -
कर्ण-कुंडल भारतीय संस्कृति कर्ण-छेदन का भी एक विशेष महत्त्व है । चिकित्सकों और भारतीय दर्शनशास्त्रियों का मानना है कि कर्णछेदन से बुद्धिशक्ति, विचारशक्ति और निर्णयशक्ति का विकास होता है । वाणी के व्यय से जीवनशक्ति का ह्रास होता है । कर्णछेदन से वाणी के संयम में सहायता मिलती है इससे उच्छृंखलता नियंत्रित होती है और कर्णनलिका दोषरहित बनती है । यह विचार पाश्चात्य जगत के लोगों को भी जँचा और वहाँ आज फैशन के रूप में कर्णछेदन कराकर कुंडल पहने जाते हैं ।
6. करधनी पहनने के फायदे -
करधनी यह मूलाधार केन्द्र को जागृत करके किडनी और मूत्राशय की कार्यक्षमता को बढ़ाती है तथा कमर आदि के दर्दों में राहत देती है..
जय सनातन धर्म, जय श्रीराम, जय गोविंदा ✨🙏💖
Good Read..
*बहुत पुरानी बात है*
*दशहरा बीत चुका था, दीपावली समीप थी, तभी एक दिन कुछ युवक-युवतियों की NGO टाइप टोली किसी कॉलेज में आई!*
*उन्होंने छात्रों से कुछ प्रश्न पूछे; किन्तु एक प्रश्न पर कॉलेज में सन्नाटा छा गया!*
*उन्होंने पूछा, "जब दीपावली भगवान राम के १४ वर्षो के वनवास से अयोध्या लौटने के उतसाह में मनाई जाती है, तो दीपावली पर "लक्ष्मी पूजन" क्यों होता है ? श्री राम की पूजा क्यों नही?"*
*प्रश्न पर सन्नाटा छा गया, क्यों कि उस समय कोई सोशियल मीडिया तो था नहीं, स्मार्ट फोन भी नहीं थे! किसी को कुछ नहीं पता! तब, सन्नाटा चीरते हुए, एक हाथ, प्रश्न का उत्तर देने हेतु ऊपर उठा!*
*उसने बताया कि "दीपावली उत्सव दो युग "सतयुग" और "त्रेता युग" से जुड़ा हुआ है!"*
*"सतयुग में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी उस दिन प्रगट हुई थी! इसलिए "लक्ष्मी पूजन" होता है!*
*भगवान श्री राम भी त्रेता युग मे इसी दिन अयोध्या लौटे थे! तो अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था! इसलिए इसका नाम दीपावली है!*
*इसलिए इस पर्व के दो नाम हैं, "लक्ष्मी पूजन" जो सतयुग से जुड़ा है, और दूजा "दीपावली" जो त्रेता युग, प्रभु श्री राम और दीपो से जुड़ा है!*
*उसके उत्तर के बाद थोड़ी देर तक सन्नाटा छाया रहा, क्यों कि किसी को भी उत्तर नहीं पता था! यहां तक कि प्रश्न पूछ रही टोली को भी नहीं!*
*खैर कुछ देर बीद। सभीने खूब तालियां बजाई!*
*उसके बाद, एक समाचारपत्र ने साक्षात्कार (इंटरव्यू) भी किया!*
*बाद में पता चला, कि वो टोली आज की शब्दावली अनुसार "लिबरर्ल्स" (वामपंथियों) की थी, जो हर कॉलेज में जाकर युवाओं के मस्तिष्क में यह बात डाल रही थी, कि "लक्ष्मी पूजन" का औचित्य क्या है, जब दीपावली श्री राम से जुड़ी है?" कुल मिलाकर वह छात्रों का ब्रेनवॉश कर रही थी!*
*लेकिन उस उत्तर के बाद, वह टोली गायब हो गई!*
*एक और प्रश्न भी था, कि लक्ष्मी और। श्री गणेश का आपस में क्या रिश्ता है?*
*और दीपावली पर इन दोनों की पूजा क्यों होती है?*
*सही उत्तर है :*
*लक्ष्मी जी जब सागर मन्थन में मिलीं, और भगवान विष्णु से विवाह किया, तो उन्हें सृष्टि की धन और ऐश्वर्य की देवी बनाया गया! तो उन्होंने धन को बाँटने के लिए मैनेजर कुबेर को बनाया!*
*कुबेर कुछ कंजूस वृति के थे! वे धन बाँटते नहीं थे, सवयं धन के भंडारी बन कर बैठ गए!*
*माता लक्ष्मी परेशान हो गई! उनकी सन्तान को कृपा नहीं मिल रही थी!*
*उन्होंने अपनी व्यथा भगवान विष्णु को बताई! भगवान विष्णु ने उन्हें कहा, कि "तुम मैनेजर बदल लो!"*
*माँ लक्ष्मी बोली, "यक्षों के राजा कुबेर मेरे परम भक्त हैं! उन्हें बुरा लगेगा!"*
*तब भगवान विष्णु ने उन्हें श्री गणेश जी की दीर्घ और विशाल बुद्धि को प्रयोग करने की सलाह दी!*
*माँ लक्ष्मी ने श्री गणेश जी को "धन का डिस्ट्रीब्यूटर" बनने को कहा!*
*श्री गणेश जी ठहरे महा बुद्धिमान! वे बोले, "माँ, मैं जिसका भी नाम बताऊंगा, उस पर आप कृपा कर देना! कोई किंतु, परन्तु नहीं! माँ लक्ष्मी ने हाँ कर दी!*
*अब श्री गणेश जी लोगों के सौभाग्य के विघ्न/रुकावट को दूर कर उनके लिए धनागमन के द्वार खोलने लगे!*
*कुबेर भंडारी ही बनकर रह गए! श्री गणेश जी पैसा सैंक्शन करवाने वाले बन गए!*
*गणेश जी की दरियादिली देख, माँ लक्ष्मी ने अपने मानस पुत्र श्री गणेश को आशीर्वाद दिया, कि जहाँ वे अपने पति नारायण के सँग ना हों, वहाँ उनका पुत्रवत गणेश उनके साथ रहें!*
*दीपावली आती है कार्तिक अमावस्या को! भगवान विष्णु उस समय योगनिद्रा में होते हैं! वे जागते हैं ग्यारह दिन बाद, देव उठावनी एकादशी को!*
*माँ लक्ष्मी को पृथ्वी भ्रमण करने आना होता है शरद पूर्णिमा से दीवाली के बीच के पन्द्रह दिनों में, तो वे सँग ले आती हैं श्री गणेश जी को! इसलिए दीपावली को लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है!*
🙏🌹🙏
(यह कैसी विडंबना है, कि देश और हिंदुओ के सबसे बड़े त्यौहार का पाठ्यक्रम में कोई विस्तृत वर्णन नहीं है? औऱ जो वर्णन है, वह अधूरा है!)
*इस लेख को पढ़ कर स्वयं भी लाभान्वित हों, अपनी अगली पीढी को बतायें और दूसरों के साथ साझा करना ना भूलें !*
🙏🏼🚩
#डॉक्टरों की हड़ताल पर CI सरदारशहर श्रीमान अनिलजी विश्नोई ने बहुत ही सटिक और मार्मिक टिप्पणी (पोस्ट) की जिसे आप सबके साथ शेयर कर रहा हूँ । आप सबसे भी निवेदन हैं, कि ज्यादा से ज्यादा डॉक्टर्स तक इसे पहुंचाए शायद उनके अन्दर की ईन्सानियत जाग जाए और सेवा ग्रहण करते वक्त ली गई शपथ याद आ जाए।
.........................( #हड़ताल) ....................
..कल रात मुझे एक सपना आया.. कि.मेरी पोस्टींग...... शहर कोतवाली मे एक..... एस.आई.के रूप मे हो गई है....
.....मेरी पोस्टींग के ...कुछ दिनो बाद डाक्टरों ने पहली बार इस तरह की मानवताविहिन... हड़ताल की .. जिसकी वजह से कई मासुमो को अपनी जान से हाथ धोना पडा...
प्रदेश मे चल रही डाक्टरों की हड़ताल कुछ दिनो बाद खत्म हो गई ...सरकार ने डाक्टरों की सभी मांगे मान ली है ....सब कुछ पहले की तरहा सुचारू होगया ....था
मेरे घर के नजदीक मेरे शहर के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित सरकारी डाक्टर का घर था.......
डाक्टर सहाब के दो जवान बेटीया व पत्नी थी ...जो डाक्टर सहाब के साथ उसी घर मे रहती थी ...बेटीया व पत्नी तीनो ही बहुत सुन्दर थी...
हमारे मोहल्ले के कुछ अपराधी प्रवृति के लड़के हमेशा उन तीनो को भूखे भेड़ियों की तरह घुरते रहते थे ...........
....लेकिन कानून के डर की वजह से वह उनका कुछ नही कर पा रहे थे ..........
.....अचानक कुछ दिनो बाद पुलिस फोर्स ने भी सरकार से कुछ मांगो को लेकर हड़ताल कर दी है ....वेसे तो पुलिस फोर्स मे कभी हडताल नही होती........... लेकिन ....फोर्स ने सोचा की जब डाक्टर जितनी जिम्मेदार पोस्ट के लोग अपने छोटे से लालच के लिये हड़ताल जैसा कदम उठा सकते है ....तो ...पुलिस फोर्स क्यो नही हड़ताल कर सकती यही सोच कर सब हडताल ...पर चले गऐ....
पुलिस के हड़ताल पर जाते ही हर तरफ अपराध का बोलबाला....हर तरफ लुट खसोठ छिनाझपठी का माहोल ....बन गया ....मैं भी थाने से अपने घर के लिये यह सोच कर निकला की दो चार दिन तक आराम करूगा .....यही सोच कर अपने घर की और पैदल ही निकल पडा.....
अचानक मेरे कानो मे किसी के चिखने पुकारने की आवाज आई ....यह आवाज मेरे पड़ोस मे रहने वाले डाक्टर सहाब के घर से आ रही थी ....मैं जब वहां दौड़ कर पहुँचा तो मेरे होश ऊड गऐ .....डाक्टर सहाब एक कुर्सी पर लहु लुहान पड़े हुऐ .....उनकी दोनो बेटीया ओर पत्नी की इज्जत को लुटने के लिये कुछ भूखे भेडिये आतुर थे......जिन्होने उनके बदन से सभी कपडे भी एक हबसी की तरहा फाड दिये थे....
वो मासुम बच्चीयो ने मुझे देखकर जोर से आवाज लगाई.....अंकल हमे इन शैतानो से बचा लो ...हम आपके हाथ जोडते है....
यह सब देख..कर मेरी आखों ...मे लहू उतर आया ......
लेकिन मुझे देखकर वो गुंडे बहुत तेज हंसने लगे ....और हं सते . हुऐ कहने लगे की यह ....इन्सपेक्टर तुम्हारी कुछ मदद नही कर सकता ....
यह भी तुम्हारे पापा की तरहा आज हडताल पर है ....और जब तक इनकी मांगे सरकार नही मानेगी तब तक यह अपनी हडताल नही तोडगे ....समझी .....
..उस अपराधी की बात जैसे ही मेरे कानो मे गई मेरे मदद के बडे कदम रूक गऐ ....और मुझे याद आया की हम तो हडताल पर है.....
लेकिन एक बार फिर उस मासुम बच्ची की आवाज मेरे दिल तक पहुची और दिल ने कहा की हमारी .....मांगे और आवश्यकता तो हमेशा यूंही बनी रहेगी......
लेकिन मेरी गैर जिम्मेदारी ...और अपने कर्तव्य से मुहं मोड ....लिया ...तो तीन मासुमो की जिन्दगिया ....नरक हो जाऍगी .........इस कशमकश...मेरा हाथ कब मेरी सर्विस रिवालवर पर चला गया ....मेने...लगातार उन दरिंदो पर फायर किये ...जिसकी वजह से दो दरिंदे वही ढेर हो गऐ और बाकी के चार मोका देखकर फरार ....होगऐ....उन ...तीनो मासुमो ने भरी आंखो से और हाथ जोड कर मेरा ....आभार व्यक्त किया......
में ....वहा से वापस अपने थाने पर अपनी डूयुटी पर आ गया ....मेरे साथीयो ....ने हडताल ....के बारे मे मुझसे कहा .....तो ....मेने ....कहा की कुछ पेशे ......शायद पेसा कमाने के लिये नही ......सिर्फ ....और ....सिर्फ ....सेवा के लिये होते......चाहै .....वो सेना की नोकरी बॉर्डर पर खड़े होकर देश की रक्षा करना हो .....या ....डाक्टर की नोकरी .....जो ...मरीज को मोत के मुह से निकाल लाता है.....डाक्टरों .....की ..हडताल से.......किसी का इकलोता बेटा....या ..बेटी.....या ....किसी मां बाप....या किसी मासुम ....की ...जान जा सकती है ....इन लोगो की हडताल मे इन सब निर्दोष लोगो का क्या दोष.......है............
........सियाचिन की बॉर्डर पर कपकपाती ठंड मे खड़ा वो सैनिक पैसा कमाने के लिये नोकरी नही कर रहा .....वो इस लिये नोकरी कर रहा है ताकि उसके त्याग से उसके देश के और भाई ...बहन शुकुन से रह सके ...सेवा का और देशभक्ति का भाव उसके मन मे है.........
दोस्तो अगर यह कहानी आपको पंसद आऐ तो अपने सभी ग्रुपो मे भेजे.....ताकि हमारे समाज के सम्माननीय व जिम्मेदार हमारे सरकारी डाक्टर अपनी जिम्मेदारी को समझते हुये ...अपने अपने कर्तव्य का निर्वाह करे ...क्योकि इस देश की जनता आपके अन्दर ईश्वर को देखती है....
.......जय हिन्द ...........जय भारत.....देश के लिये जीना सीखे.................. देश के लिये मरें ।
#राईट_टू_हेल्थ_संजीवनी_है
राजस्थानी लोगों को छोड़कर शेष दुनिया को लगता है कि राजस्थान में पानी नहीं है और यहाँ खून सस्ता व पानी महँगा हैं...
जबकि यहाँ सबसे शुद्धता वाला पानी जमीन में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
राजस्थान के लोगों को पूरे विश्व में सबसे बड़े कंजूस कृपण समझा जाता है...
जबकि पूरे भारत के 95% बड़े उद्योगपति राजस्थान के हैं, राममंदिर के लिए सबसे ज्यादा धन राजस्थान से मिला है...
राममंदिर निर्माण में उपयोग होने वाला पत्थर भी राजस्थान का ही है..!
राजस्थान के लोगों के बारे में दुनिया समझती है ये प्याज और मिर्च के साथ रोटी खाने वाले लोग हैं...
जबकि पूरे विश्व मे सर्वोत्तम और सबसे शुद्ध भोजन परम्परा राजस्थान की हैं...
पूरे विश्व मे सबसे ज्यादा देशी घी की खपत राजस्थान में होती हैं,
यहाँ का बाजरा विश्व के सबसे पौष्टिक अनाज का खिताब लिये हुए है..!
राजस्थानी लोगों को छोड़कर शेष दुनिया को लगता है कि राजस्थान के लोग छप्पर और झौपड़ियों में रहते हैं इन्हें पक्के मकानों की जानकारी कम हैं...
जबकि यहाँ के किले,इमारतें और उन पर अद्भुत नक्काशी विश्व में दूसरी जगह कहीं नही हैं...
यहाँ अजेय किले और हवेलियाँ हजारों वर्ष पुरानी हैं...
मकराना का मार्बल,जोधपुर व जैसलमेर का पत्थर अपनी अनूठी खूबसूरती के कारण विश्व प्रसिद्ध हैं !
राजस्थान में चीन की दीवार जैसी ही दूसरी उससे मजबूत दीवार भी है जिसे दुनिया में पहचान नहीं मिली..!
राजस्थानी लोगों को छोड़कर शेष दुनिया को लगता है कि राजस्थान में कुछ भी नहीं...
जबकि यहाँ पेट्रोलियम का अथाह भंडार मिला है... गैसों का अथाह भंडार मिला है...
यहाँ कोयले का अथाह भंडार मिला है..!
अकेले राजस्थान में यहाँ की औरतों के पास का सोना इक्ठ्ठा किया जाए तो शेष भारत की औरतों से ज्यादा सोना होगा।
सबसे ज्यादा सोने की बिक्री भी राजस्थान के जोधपुर में होती हैं !
राजस्थान के जलवायु के बारे में दुनिया समझती है यहाँ बंजर भूमि और रेतीले टीले हैं जहाँ आँधियाँ चलती रहती है...
जबकि राजस्थान में कई झीलें ,झरने और अरावली पर्वतमाला के साथ रणथम्भौर पर्वतीय शिखर हैं जो विश्व के टॉप टूरिज्म पैलेस हैं,
इसके अलावा राजस्थान में झीलों से निकला नमक शेष भारत में 80% नमक की आपूर्ति करता है जो 100%शुद्ध प्राकृतिक नमक हैं,
इसके अलावा भी बहुत सारी ऐसी बातें हैं जिन्हें दुनिया नहीं जानती और यह सब गलत शिक्षा नीति की वजह से राजस्थान का नकारात्मक चरित्र गढ़ा गया जिसे दुनियाभर में सच समझा गया..!
राजस्थान में बहन को प्यार से ' *बाईसा* ' कहा जाता है,
यहाँ चार बाईसा हुई जिन्हें हर राजस्थानी बाईसा कहकर ही सम्बोधित करते हैं...
मीरां बाई, करमा बाई, सुगना बाई, नानी बाई और मीरां ने ईश्वर को प्रेम भक्ति से ऐसा वशीभूत किया कि ईश्वर को आना पड़ा...!
करमा बाई ने निष्ठा भक्ति से ईश्वर को ऐसा अभिभूत किया कि ईश्वर को करमा के हाथ से खाना पड़ा...।
सुगना बाई ने राजस्थान की पीहर और ससुराल परम्परा का ऐसा अनूठा स्त्रीत्व भक्ति पालन किया कि ईश्वर को उनका उद्गार सुनना पड़ा
और नानी बाई ने ईश्वर की ऐसी विश्वास भक्ति की की ईश्वर को उनके घर आना पड़ा।
ये सब इसी युग में वर्तमान में हुआ जिनकी भक्ति आस्था और निष्ठा को राजस्थान के हर मंच से गाया जाता है...
नारी भक्ति का ऐसा उदाहरण शेष विश्व में और कहीं नही।
यहाँ राजस्थान की बलुई मिट्टी पूनम की रात में कुंदन की तरह चमककर स्वर्ण का आभास कराती हैं...
इन्ही पहाड़ो की वजह से इसे 'मरुधरा' कहा जाता है..!
राजस्थान का इतिहास गर्व से लबरेज और यहाँ का जीवन सबसे शुद्ध हैं..!
कण कण वंदनीय और गाँव- गाँव एक इतिहास में दर्ज कहानियों पर खड़ा है..!
✍️आनंद के चर्मोत्कर्ष पर 🙏🙏
आज आपको #मरुधरा🐪 के दर्शन करवाते हैं.. जो प्रकृति के बेहद करीब है।
इसी #राजस्थान को देखने, #पधारो_म्हारे_देश🐪
#हमारा_राजस्थान खास क्यों हैं❓
1.👉भारत के 100 सबसे अमीर व्यक्तियो में से 35 राजस्थानी व्यापारी हैं।
2.दंगो में हज़ारो लोग मारे गए हैं लेकिन राजस्थान में 1 भी नहीं ..!
3.राजस्थान अकेले इतने सैनिक देश को देता है जितना केरला, आन्ध्र-प्रदेश और गुजरात मिलकर भी नहीं दे पाते.....!!
4.कर्नल सूबेदार सबसे ज्यादा राजस्थान से है...!!
5.उच्च शिक्षण संस्थानों में राजस्थानी इतने हैं कि महाराष्ट्र और गुजरात के मिलाने से भी बराबरी नहीं कर सकते.........
6.राजस्थान अकेला ऐसा राज्य है जहाँ किसान कृषि कारणों से आत्म-हत्या नहीं करतें जैसा कि मीडिया अन्य राज्यों में दिखाता है, जबकि सबसे अधिक सूखा यहाँ पड़ता है, क्यूकि राजस्थान में बुज़दिल नही दिलेर पैदा होते है...!!
7.आज भी राजस्थान में सबसे ज्यादा संयुक्त परिवार बसते है...!!
8.यहां एक रिक्शा चलाने
वालों को भी 'भाई' कह कर
बुलाते हैं...!!
अतिथि को यहां आज भी देवता के समान दर्जा देते हैं
और यहां पर अतिथियों की #खातिरदारी में कोई कसर नहीं छोड़ते
जय भारत .....
जय राजस्थान.....
म्हारो प्यारो राजस्थान
म्हारो रंगीलो राजस्थान
ताज महल अगर प्रेम की निशानी है.
तो "गढ़ चित्तोड़" एक शेर की कहानी है.
"कुछ लोग हार कर भी जीत जाते हैं !
कुछ लोग जीत के भी हार जाते हैं !!
नहीं दिखते है अकबर के निशान यहाँ कहीं पर भी,
. . . . . .लेकिन. . . . . . .
"राणा के घोड़े हर चौराहे पर आज भी नज़र आते हैं।
___" जय जय राजस्थान "______
🐪🐪🐪..
28/06/2022
26/06/2022
मंदी क्यों है व्यापार में ???
बर्तन का व्यापारी परिवार के लिये जूते ऑनलाइन खरीद रहा है...
जूते का व्यापारी परिवार के लिये मोबाइल ऑनलाइन खरीद रहा है...
मोबाइल का व्यापारी परिवार के लिए कपडे ऑनलाइन खरीद रहा है...
कपड़े का व्यापारी परिवार के लिये घड़ी ऑनलाइन ख़रीद रहा है...
घडी का व्यापारी बच्चों के लिए खिलोने ऑनलाइन ख़रीद रहा है...
खिलोने का व्यापारी घर के लिये बर्तन ऑनलाइन खरीद रहा है ...
और ये सब रोज सुबह अपनी-अपनी दुकान खोल कर अगरबत्ती लगा कर भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि आज धंधा अच्छा हो जाये...
कहाँ से होगी बिक्री ???
खरीददार आसमान से नहीं आते हम ही एक दूसरे का सामान खरीद कर बाजार को चलाते हैं क्योंकि हर व्यक्ति कुछ न कुछ बेच रहा है और हर व्यक्ति खरीददार भी है...
ऑनलाइन खरीदी करके आप भले 50-100 रु की एक बार बचत कर लें लेकिन इसके नुक्सान बहुत हैं क्योंकि ऑनलाइन खरीदी से सारा मुनाफा बड़ी बड़ी कंपनियों को जाता है जिनमें काफी विदेशी कंपनियां भी हैं...
ये कम्पनियाँ मुठ्ठीभर कर्मचारियों के बल पर बाजार के एक बहुत बड़े हिस्से पर कब्जा कर लेती हैं, ये कम्पनियां बेरोजगारी पैदा कर रही हैं और इनके द्वारा कमाये गये मुनाफे का बहुत छोटा हिस्सा ही पुनः बाजार में आता है...
यदि आप सोचते हैं कि मैं तो कोई दुकानदार नहीं हूं और ना ही व्यापारी , मैं तो नौकरी करता हूँ ऑनलाइन खरीदी से मुझे सिर्फ फायदा है नुक्सान कोई नहीं तो आप सरासर गलत हैं क्योंकि जब समाज में आर्थिक असमानता बढ़ती है या देश का पैसा देश के बाहर जाता है तो, देश के हर व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसका नुक्सान उठाना पड़ता है चाहे वह अमीर हो या गरीब, व्यापारी हो या नौकरी करने वाला,बीमा ऐजेंट, दुकानदार हो या किसान हर कोई प्रभावित होता है...
धन्यवाद। ,,,,🙏🙏
03/05/2022
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Jalore
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