21/07/2026
हिमालय में "नागपुष्प" के 36 साल बाद खिलने का दावा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई पोस्ट में कहा जा रहा है कि यह दुर्लभ फूल शेषनाग की आकृति जैसा दिखता है और 36 साल में केवल एक बार ही खिलता है। लेकिन उपलब्ध वैज्ञानिक और वनस्पति संबंधी जानकारी के आधार पर यह दावा पूरी तरह सही नहीं है।
जिस फूल को लोग "नागपुष्प" कह रहे हैं, वह आमतौर पर हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाली कुछ दुर्लभ ऑर्किड या कोबरा लिली (Arisaema) प्रजातियों से मिलता-जुलता दिखाई देता है। इन पौधों का फूल वास्तव में सांप के फन जैसा दिख सकता है, इसलिए इन्हें स्थानीय स्तर पर नागपुष्प या नागफूल जैसे नामों से भी जाना जाता है। हालांकि "नागपुष्प" कोई एक आधिकारिक वैज्ञानिक नाम नहीं है, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग पौधों के लिए यह नाम इस्तेमाल किया जाता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक किसी भी विश्वसनीय वैज्ञानिक शोध, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) या मान्यता प्राप्त वनस्पति संस्थान ने यह प्रमाणित नहीं किया है कि यह फूल ठीक 36 साल में केवल एक बार ही खिलता है। कुछ दुर्लभ पौधों में लंबे अंतराल पर फूल आने की विशेषता होती है, लेकिन सभी नागपुष्प या सांप जैसी आकृति वाले फूलों पर यह बात लागू नहीं होती। सोशल मीडिया में "36 साल" का दावा बिना किसी प्रमाण के बार-बार साझा किया जा रहा है।
यदि किसी विशेष स्थान पर यह फूल कई वर्षों बाद दिखाई देता है, तो उसका कारण स्थानीय मौसम, ऊंचाई, वर्षा, तापमान और पौधे की प्राकृतिक वृद्धि हो सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि पूरी दुनिया में यह प्रजाति 36 साल में केवल एक बार ही फूल देती है।
इसलिए "हिमालय में शेषनाग जैसा दिखने वाला नागपुष्प 36 साल में सिर्फ एक बार खिलता है" वाला दावा प्रमाणित नहीं है। सही बात यह है कि हिमालय में सांप जैसी आकृति वाले कुछ दुर्लभ फूल जरूर पाए जाते हैं, लेकिन उनके 36 साल में एक बार खिलने का कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। ऐसे दावों पर विश्वास करने से पहले आधिकारिक वैज्ञानिक स्रोतों की पुष्टि जरूर करनी चाहिए।