16/03/2023
आज दुखभरे दिल के साथ उंगलियों के टखनों ने कलम पकड़कर कुछ शब्दों को संजोया है
राजस्थान में विद्यार्थियों के वार्षिक परीक्षाओं का समय चल रहा है
सभी विद्यार्थी अपनी परीक्षाओं की तैयारियों में मशगूल है
एक विद्यार्थी
बेटी लता
पढाई में अव्वल
चेहरे से तो ईश्वर ने खूबसूरती तराशने में कोई कमी नही छोड़ी थी
ईश्वर ने समय लेकर इस बीटिया को सुंदरता के साथ तराशा था , क्योकि ईश्वर स्वयं इस गुड़िया को अपने पास बुलाना चाहते थे ।
शायद यही ऊपर वाले का मकसद था
पढ़ाई में अव्वल
बौद्धिक कौशल में तो मानो वह एक उदाहरण थी
हस्ती ,खेलती , मुस्कुराती जीवन की राह में अपना सफर तय कर रही थी
एक शाम
खाना खाया
मां बोली-- बेटी जल्दी सो जाओ परीक्षाओं का समय है सुबह विद्यालय जाना है
लता- - जी मां सही बात है आपकी , मैं सो जाती हूँ
पर सुनो मां मुझे सुबह समय पर जगाना जल्दी तैयार होकर थोड़ा पढ़ाई करूंगी ।
मां -- जी बेटी रानी ठीक है समय पर आपको जगा दूंगी ।
माँ के गले मे एक प्रेम की झपकी
लता बिस्तर में जाकर सुबह विद्यालय जाने का सपना , पढ़ लिखकर कुछ बनने का सपना , मां बाप का नाम रोशन करने का सपना
ऐसे और कई सपनों की जोड़ तोड़ के साथ आंखे मूंदते हुए नींद में सो गई ।
रात का समय नींद में बीत गया
सुबह भोर भई
माँ की आवाज लता के कानों में पड़ी
बेटी उठो , जागो ,तैयार हो जाओ , विद्यालय जाने का समय हो जाएगा
बेटी की आंखे खुली
लता ने अंगड़ाई ली
आंखों पर हाथों को फेरा
नींद खुल गई
बिस्तर छोड़ माँ के पास गई
पापाजी को प्रणाम किया
माँ को प्रणाम किया
बेटी लता दैनिक क्रियाकर्म करके विद्यालय जाने की तैयारी में जुट गई
स्वयं तैयार होते होते माँ की मदद की
माँ के घर के कार्य में , पशुओं के कार्य में कुछ हाथ बटाया
माँ ने बेटी के लिए दूध गर्म किया
नाश्ता बनाया
बेटी लता ने अपना पुस्तकों का थैला तैयार किया
विद्यालय का गणवेश पहना
खाना खाया
एक हंसी
एक मुस्कान
एक उमंग
एक अलग सा तेज
कई सारे ख्वाब
कई सारे सपने
दिल में अपनों के प्रति स्नेह
माता पिता भाई बहन के प्रति प्रेम
सहेलियों से मिलने की जल्दबाजी
कंधे पर पुस्तकों का थैला
लेकर लता माँ को प्रणाम करते हुए
पापा को प्रणाम करते हुए
अपने इष्ट देव को नमन करते हुए
हाथ हिलाते हुए
मंद मंद मुस्कुराते हुए विद्यालय की ओर अग्रसर हो गई
लता विद्यालय पहुंची
गुरुजनों को प्रणाम किया
सारी छात्राएं सहेलियां भाई बन्धु विद्यार्थी मिलकर एक दूसरे के गले मिलकर खुश हुए
प्रार्थना हुई
विद्यालय शुरुआत के संस्कार पूर्ण हुए
बेटी कक्षा कक्ष में पहुंची
-----------------------------------–----------------------------------------------------------बीच की घटना से मैं वाकिफ नही हूँ
माफ करना -------------- -----------
दिन की शुरुआत के कुछ समय बाद
पापाजी / माताजी के पास फोन आया
हेलो
जी हां बोलिये
एक दबी सी आवाज में कोई बोला
कुछ उलझे हुए शब्दों में
कुछ दबे हुए शब्दों में
कुछ दुख भरे स्वर में
उन्हें किसी अनहोनी का एहसास करवाया ।
इधर बेटी लता संसार से विदा ले चुकी थी
लेकिन माँ बाप कभी यह स्वीकार नही कर सकते
जी हाँ ऐसा ही हुआ होगा
उन्हें भी विस्वास नही हुआ होगा
पर
आत्मा एक ईश्वर है जो समझ जाती है
आखीर यह अनहोनी खबर माता पिता को मिली
है ईश्वर
है प्रभु
एक बेटी
एक लक्ष्मी
एक माँ पार्वती का रूप बेटी जिस घर से ये सन्सार छोड़ जाए
उस परिवार
भाई बहन माँ बाप पर क्या बितती होगी
यह तो सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है
कुछ और समय बिता
बेटी के पार्थिव शरीर को उस आंगन में लाया गया
जिस आंगन से वह बेटी सुबह
कई सारे सपने लेकर विद्यालय को चली थी ।
परिवार में स्थिति को बयान नही किया जा सकता
माँ का रूदन
बाप की वेदना
भाई बहन की पीड़ा
रुदन में , पीड़ा में प्रयोग हो रहे शब्द अनकहे ही , अनलिखे ही रखने उचित है ।
पूरा परिवार
पूरा गांव
समस्त विद्यालय परिवार
इस वक्त दुख से तड़पता हुआ
निःशब्द है ।
किसी को यह विश्वास नही हो रहा
कोई यह मानने को तैयार नही कि लता हमारे बीच नही रही ।
वक्त बिता
संसार का नियम है
प्रेम जीवित शरीर है
पार्थिव शरीर से नही
प्रेम आत्मा से है
हाड़ मांस के शरीर से नही
बीटिया की अंतिम यात्रा की अर्थी सजाई गई
पूरा परिवार
पूरा गांव
विद्यालय परिवार
सगे सम्बन्धी
सब नम आंखों से रुदन करते हुए
राम राम का नाम लेते हुए
ईश्वर से इस आत्मा को स्वर्ग में शांति मिलने और परिवार को दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हुए
उस अंतिम सत्य की और ले चले
जो हमारे सबके जीवन का एकमात्र सत्य है ।
रास्ते में लोग अपना काम छोड़कर खेतों में खड़े हो गये
हाथ जोड़कर ईश्वर से शिकायत करने लगे
रास्ते में मिलने वाले पशु, पक्षी भी कलकल की ध्वनि से अपना रुदन और वेदना प्रकट करने लगे ।
इस तरह यह अंतिम यात्रा
उस गंतव्य स्थान पर पहुंची जो हम सबका अंतिम गंतव्य स्थान है
जो दुनिया के , हर प्राणी के जीवन के समस्त झूठ को छोड़कर एकमात्र सत्य है
शमशान घाट
बेटी लता के जीवन की अंतिम यात्रा को विराम हेतु
कुछ पल रोका गया
उधर उस अंतिम गंतव्य स्थान पर
अंतिम क्रिया
हिन्दू धर्म के 16वे और अंतिम संस्कार की तैयारी होने लगी
कुछ लोग उस तैयारी में लगे है
पूरा गांव नम आंखों के साथ भरी दुपहरी कड़कती धूप में बैठा हुआ है
ठीक उसी वक्त ईश्वर की आवाज आई
आसमान से एक वाणी गूंजी
एक स्वर गुंजा
है बेटी लता
तेरी उम्र इतनी ही लिखी थी
होता वही है जो होनहार है
जो कमाना था
जो कर्म करना था
जो परिवार से स्नेह और लगाव प्रेम करना था
वो सब आपने इस उम्र में कर लिया है
अब आप ईश्वर के घर जाकर अपनी आत्मा को शांति प्रदान करो ।
साथ ही साथ
वह ईश्वर की भविष्यवाणी के रूप में एक आवाज जारी रही
वह आवाज यह कह रही थी कि
क्यो व्यर्थ में हाय तौबा करता हैं
क्यों जीवन को व्यर्थ के कार्यों में लगाता है
यहाँ सब समान है
इस जगह पर
राजा
रंक
फकीर
रावण
गरीब
अमीर
शिक्षित
अशिक्षित
सब एक समान है
यहां पर सबको एक जैसी मिट्टी मिली है ।
बस इसको अपने जीवन का अंतिम सत्य जो सत्य है शास्वत है
इसको स्वीकार करना ही होगा ।
इसी के साथ
बेटी लता की आत्मा को स्वर्ग में शांति मिले , परिवार को यह सदमा ,यह दुख सहन करने की शक्ति मिले ।
ओम शांति ओम
लेखक :- रमेश भाई आँजणा (Adv)
सेवानिवृत्त भारतीय वायु सेना
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