पुरुष बूढ़ा होता है, और स्त्री परिपक्व। जब पुरुष अपने बच्चों की शादी कर देता है और परिवार की आर्थिक स्थिति स्थिर कर देता है, तो परिवार में उसका वरिष्ठ और सम्मानित स्थान धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है। इसके बाद, उसे बोझ समझा जाने लगता है — चिड़चिड़ा, गुस्सैल और अनिश्चित स्वभाव वाला बुजुर्ग व्यक्ति। जिन कठोर निर्णयों को उसने कभी अपनी पत्नी और बच्चों के लिए लिया था, अब उनकी आलोचना होती है; हर बात में उसे दोषी ठहराया जाता है। और यदि उसने सच में कुछ गलतियाँ की हों — तो भगवान ही उसकी रक्षा करें।लेकिन बुजुर्ग स्त्री को बच्चों और बहुओं से सहानुभूति मिलती रहती है — क्योंकि उससे अभी भी कई काम करवाने होते हैं।
अगर पति उम्र में बड़ा है, तो पत्नी बहू का साथ पकड़ लेती है ताकि बेटा उससे दूर न हो जाए और उसकी देखभाल करता रहे। चाहे किसी पुरुष की जवानी में कितनी भी बड़ी उपलब्धियाँ रही हों, बुज़ुर्गावस्था में उसका कोई फायदा नहीं होता।
पंडित पवन कालिया
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30/10/2024
किन शब्दों में लिखूँ तेरी कमी को...,
बस...! तेरे बिना हर दिन अधूरा सा लगता है...!!
साँसों का टूट जाना तो बहुत छोटी सी बात है दोस्तों,
जब अपने याद करना छोड़ दे, मौत तो उसे कहते हैं
ब्राह्मणाः पादतो मेध्या गावो मेध्याश्च पृष्ठतः।
अजाश्वा मुखतो मेध्याः स्त्रियो मेध्यास्तु सर्वतः।।
अर्थात् ब्राह्मण के पैर शुद्ध माने जाते हैं, गाय का पृष्ठ-भाग शुद्ध माना जाता है, बकरी और घोड़े का मुख शुद्ध माना जाता है और स्त्री को पूर्णतः/सर्वांगीण शुद्ध माना जाता है।
वृहत संहिता
पृथ्वी एक ग्रह है सभी ज्योतिष को जानने वाले जानते हैं, मनुष्य पर सभी ग्रहों का प्रभाव पड़ रहा है परंतु अधिक प्रभाव पृथ्वी का पड़ता है पृथ्वी की ग्रेविटेशन भी होती है।। मनुष्य पृथ्वी के नजदीक है किसी विद्वान व्यक्ति ने प्रश्न किया "पृथ्वी की ग्रेविटेशन कौन से ग्रहों से देखी जाती है"
बुरी नजर से ना देखना मुझे , ऐ देखने वाले
मै लाख बुरा सही.... तु,अपना नजरीया खराब ना कर
12/02/2024
प्रिय बंधु जनों आज शादी की हमारी 35वी वर्षगांठ है हमारी शादी का 35 वां माइलस्टोन पूरा हो गया है! आज जब मैं अपनी पत्नी की और देखता हूं; उसका पहले वाला "शांत स्वभाव एवम हंसमुख चेहरा" ! हां उसमें कुछ परिवर्तन हुआ है, वह काफी "व्यवहारिक एवं समझदार" हो गई है अब शायद मैं अल्पमत में आ गया हूं क्योंकि माता पिता साथ छोड़ गए बहन भाइयों की शादी हो गई जब संयुक्त परिवार था तब मेरी अर्धांगिनी ने इस पुरुष के तूफान को झेलना एक चुनौती समझी थी जिसमें उसने सफलता पाई परंतु अब अल्पमत में होते हुए भी 35 साल से परिवार रूपी राज्य में राज कर रहा हूं शादी की वर्षगांठ पर मैं अपनी अर्धांगिनी का दिल से सम्मान करता हूं कि उसने मेरे हर सुख दुख में साथ दिया गृहस्थी की गाड़ी को खींचते हुए 35 वर्ष हो गए औरत एक सागर है। और पुरुष एक आवारा बूंद! जो कि सागर में मिलने के लिए तड़प रही थी अतः 13 फरवरी 1991 को एक आवारा एवम दिशाहीन बूंद सागर में मिल गई। आज भी उसी समुद्र में समाई हुई है ओर मैं भी उसके प्यार में सागर बन चुका हूं मेरी पहचान भी अब मेरी अर्धांगिनी है। आप सभी विद्वानों से मैं आशीर्वाद का अभिलाषी हूं
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"पत्नी का बिछुड़ना, अपने बन्धु बांधवों से अपमानित होना अपने कर्ज पर चढ़े रहना, दुष्ट अथवा बुरे मालिक की सेवा में रहना , निरन्तर निर्धन वन रहना , ये सब बातें हैं जो बिना अग्नि के शरीर को हर समय जलाती रहती हैं।"
यदि लग्न में बुध व शुक्र स्थित हो तो वह स्त्री दर्शनीय रूप वाली , पति की प्रितमा व कला निपुण होती है
“जीवन में खुशी का अर्थ लड़ाइयां लड़ना नहीं, बल्कि उन से बचना है। कुशलतापूर्वक पीछे हटना भी अपने आप में एक जीत है।”
पितृपक्ष में अपने मृत पितरों का श्राद्ध नहीं करते, वे अभागे होते हैं, यानी उन्हें उनके कर्मों का उचित फल नहीं मिलता।
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