07/08/2022
गायों में बीमारी, सरकार की कमी
#धन्य_है_हमारा_सिस्टम
#पशु_चिकित्सा_मे_इन्वेस्टमेंट ?
#राम_भरोसे_पशुपालन_विभाग
😢🙏😢
सरकार चाहती तो इन 4 महीनों में बहुत कुछ चीजों में परिवर्तन कर सकती थी। 4 महीने पहले यह रोग जैसलमेर और बीकानेर तक ही था, समय रहते पशु चिकित्सक और पशु कंपाउंडर (पशुधन सहायक ) के खाली पड़े पदों को भर देती तो यह बीमारी आज सम्पूर्ण राजस्थान में इतना बड़ा रूप धारण नहीं कर पाती। लेकिन सरकार जीडीपी में पशुपालन के 13% योगदान को भूलकर सोती रही, 10 वर्षों से पशु चिकित्सक की स्थाई भर्ती नहीं की । प्रदेश के वेटरिनरी हॉस्पिटल और वेटेरिनरी उपकेंद्र ताले के अंदर बंद पड़े हैं।
पशु पालन विभाग में बड़े परिवर्तनों की जरूरत है, पशु चिकित्सा कैसे मानव स्वास्थ्य और प्रदेश की जीडीपी को प्रभावित कर सकता है, सरकार को शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं है । आज दुनिया भर में "वन हेल्थ " को बड़ा गंभीरता से लिया जा रहा हैं, जिसमें मानव में पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के कारण आने वाले रोगों को रोकने के लिए पशु को स्वस्थ रखने पर जोर दिया जा रहा है, वेटेरिनरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया है ताकि जूनोटिक रोगों को रोक सके /मानव में दूध, अण्डा , मांस आदि जानवरो से प्राप्त खाने से रोग न फैले ।
लेकिन राजस्थान सरकार ने 10 साल से पशु चिकित्सा की और ध्यान ही नही दीया 70% पद खाली, 3 साल से विभाग में निदेशक नहीं है, अतिरिक्त निदेशक, उपनिदेशक पद खाली या सब पदों पर अस्थाई रूप अन्य अधिकारी कार्यभार संभाल रहे हैं। और सरकार आज राजस्व विभाग और कृषि विभाग के कर्मचारियों को रोग नियंत्रण में लगा रही हैं, जबकि आज की तारीख में राज्य की वेटेरिनरी यूनिवर्सिटी RAJUVAS बीकानेर से 5.5 साल की वेटेरिनरी डिग्री B.V.Sc. & A.H. करवा कर डॉक्टर बनाने वाले आज 9 से ज्यादा पशु चिकित्सा महाविद्यालय चल रहे हैं । 2013 के बाद में वेटेरिनरी युनिवर्सिटी राजूवास बीकानेर के विभिन्न महाविधालयो से डिग्री कर निकले प्रशिक्षित युवा डॉक्टर्स बेरोजगार हैं ,विभाग में 70% पद रिक्त हैं फिर भी सरकार भर्ती नहीं करवा रही , जिसका खामियाजा आज प्रदेश का पशुपालक भुगत रहा है।
Kumawat
13/06/2022
कलेक्टर साहिबा का प्रयास
#हमारी_बेटियां, #हमारा_गौरव
आप सभी समस्त नारी शक्ति की प्रेरणास्रोत है, हमें आप सभी पर गर्व है।
08/12/2020
शानदार पहल Dr Kamal Prajapat Kanoi
16/10/2020
सुनो! NEET का रिजल्ट आ गया है।
अब तुम अपने मार्क्स या रैंक से इतने ज्यादा परेशान नही होगे, जितना तुम कोचिंग वालो के दावों से परेशान हो जाओगे। टॉपर्स के 720 में 720 देखकर, सोशल मीडिया में पोस्ट देखकर, हमने भी किया है करना पड़ता है।
"टॉप 10 में मेरे कोचिंग से 9 है, मेरे कोचिंग से 7 है, मेरे कोचिंग से टॉपर है, मेरे कोचिंग में इस कैटेगरी का टॉपर है वो DLP है वो क्लासरूम है, वो मेरे कोचिंग में पानी भरने आया था, उसने मेरी कोचिंग का पोस्ट लाइक किया है"
मेरी मानो तो तुम्हारे मन की मनोस्थिति ऐसी होनी चाहिए "हमको घण्टा फर्क नही पड़ता"।
क्योंकि जहाँ इतने सारे बच्चे पढ़ रहे है रैंक भी वही से आएगा ।अच्छे बच्चों का सलेक्शन वैसे भी किसी भी कोचिंग से पॉसिबल है, जो औसत बच्चों का सलेक्शन करवा दो तो मानें हम भी, लाखों बच्चे में से हजार की भी सलेक्शन दे रहे हो तो फिर आपको ढिंढोरा पीटने से पहले अपने सिलेक्शन रेश्यो पर काम करना चाहिए ।
जीतू भैया याद है? अरे कोटा फैक्ट्री वाले?
उन्होंने कहा था की औसत बच्चे बस फी भरने के लिए होते है जिस से की कोचिंग वाले टॉपर दे सके (पहले एपिसोड में)
कभी सोचा की उन्होंने सही कहा या गलत? अरे एकदम सही कहा बे।
1 लाख बच्चों में से अगर कुछ बच्चों का सलेक्शन हो रहा तो बाकी बच्चों ने तो बस फी ही भरा न ? कोचिंग इंडस्ट्री को ग्रो करने में हेल्प की।
अब मुझे नही पता की तुम्हारे NEET में क्या बने कितने बने, लेकिन ठोकर तो लगा है तुम्हें? तो अब सम्भलोगे क्या? या अभी भी ट्रेंड ही फॉलो करोगे?
और आँख बन्द कर के बिना कुछ सोचे समझे अपने अंतर मन को संतुष्ट करने की जिद में ड्राप काहे ले लेते हो?
ड्रॉप का मतलब समझते हो? टॉपर को देख के तुरंत ड्राप करने को रेडी हो जाते हो, टॉपर को देख को तुरंत उसकी कोचिंग जॉइन कर लेते हो ।
तो क्या करोगे?
1. ड्रॉप तभी लेना जब अंदर का आग अभी भी जल रहा हो और उसमे NEET को जलाने की ताकत बची हो । औकात समझते हो? पैसे वाला नहीं, पढ़ाई वाला... हालाँकि जरूरत दोनों की पड़ेगी।
2.अगर अपने होमटाउन में ही अच्छे से कर सकते हो तो स्टडी मटेरियल है तुम्हारे पास कोटा का जो बेस्ट है, ऑनलाइन फ्री लेक्चर्स मिल जाते हैं थोड़े बहोत हिले हुए कांसेप्ट को सही करने के लिए, कोटा माहौल जरूर देता है, लेकिन कई बार लोग उस माहौल में इतने खो जाते है की नींद फिर अगले NEET रिजल्ट के बाद खुलता है।
3.अगर कोटा आते भी हो तो बिल्डिंग और टॉपर देख के कोचिंग जॉइन मत करना, औसत बच्चों पर किये गए मेहनत को देखना, ये देखना की कितने बच्चों ने एग्जाम दिया था और कितने मेडिकल कॉलेज जा रहे, क्वालीफाई तो 147 मार्क्स वाले भी है, लेकिन उनको कॉलेज मिलेगा क्या?
यकीन करो ये ट्रेंड बहूत जरूरी है, नही तो हर साल ऐसे ही तुम बेवकूफ बनते रहोगे और अपने माँ बाप की मेहनत की कमाई इस कोचिंग इंडस्ट्री में लुटाते रहोगे ।
तुम जहाँ से आते हो और जहाँ तुम्हें जाना है इनके बीच के रास्ते को अपने तरीके से चुनो न।
अब कोचिंग कोई भी जॉइन करना लेकिन रिसेप्शन पर बैठी उस लड़की से पूछना "mam what about selection ratio?"
ये पोस्ट बस इसलिए था की इन चीजों पर बात करना जरूरी है, कोई भी नही करता लेकिन बहूत जरूरी है करना तुम्हारे पैसे लग रहे है, तुम्हारा साल खराब हो रहा है और कोचिंग वाले 720/720 की फ़ोटो छापकर खुश है ।
टॉपर को बधाई और उनके कोचिंग को भी बधाई, दोनों हकदार है ।
लेकिन उस से तुम्हें क्या?? डिप्रेस नहीं होना है, इन्सपायर होना है। आगे का सोचो, माँ-बाप को BMW में घुमाने के और भी तरीके है, तो सोच समझ कर ही कुछ निर्णय लेना।
"जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं" ये डॉयलोग बहूत सटीक है लेकिन उसने जब तक तोड़ा था तब तक सबकुछ छूट गया था उसका।
ध्यान रहे "NEET है जिंदगी नहीं"
बाकी हम है इधर हमेशा की तरह तुम्हारी
04/09/2020
Congratulations 🎉🎈🎉
कनोई ग्राम के द्वारकादास कुमावत का राज्य स्तर पर शिक्षक सम्मान में होंगें सम्मानित, कुमावत वर्तमान में साधना की राजकीय विद्यालय में सेवा दे रहे हैं।