MTM Public Secondary School
A school which is situated at karbala
Required Pre-primary Experienced teachers (salary 10000), Pre primary Co-Ordinator (salary 15000), English, maths, science, Hindi, political science teacher for secondary/ Senior secondary classes in Jaipur local area (Salary 15000) Address- 110A Hazrat ali colony Ramgarh mode, Second branch Bundu pahalwan ka chowk subhash chowk Mail Resume- [email protected] 8824439101, 9024243670,
इस्लाम का स्वर्ण युग: क्या खास हुआ जो मुस्लिमों में इतना जज़्बा आया?
इस्लाम का स्वर्ण युग (लगभग 8वीं से 13वीं सदी तक, ख़ासकर अब्बासिद ख़िलाफ़त के दौरान) वो दौर था जब मुस्लिम सभ्यता ने विज्ञान, दर्शन, कला और तकनीक में दुनिया को नई दिशा दी। ये सिर्फ़ जीत की बात नहीं थी, बल्कि जिज्ञासा, एकता और मेहनत का कमाल था। आइए देखें क्या-क्या खास हुआ:
1. ज्ञान की भूख और अनुवाद आंदोलन
• बैतुल हिक्मा (बग़दाद) में यूनानी, भारतीय, फ़ारसी ग्रंथों का अरबी में अनुवाद हुआ।
• अल-ख़्वारिज़्मी ने बीजगणित (Algebra) की नींव रखी, ज़ीरो का कॉन्सेप्ट भारत से लिया और दुनिया को दिया।
• इब्न सीना (Avicenna) ने दवा की किताब “क़ानून” लिखी, जो सदियों तक यूरोप में पढ़ाई गई।
2. विविधता में एकता
• मुस्लिम, ईसाई, यहूदी, ज़रथुस्त्री विद्वान एक साथ काम करते थे।
• कोई जाति-धर्म का भेद नहीं—बस ज्ञान का आदर। यही जज़्बा था जो नई खोज को जन्म देता था।
3. व्यावहारिक नवाचार
• एस्ट्रोलैब से नेविगेशन, पेपर मिल से किताबें सस्ती, अस्पताल (बिमारिस्तान) मुफ़्त इलाज के साथ।
• अल-जज़ारी ने ऑटोमैटिक मशीनें बनाईं—आधुनिक रोबोटिक्स की जड़।
आज के मुस्लिम बच्चों के लिए क्या सीख?
ज्ञान कोई सीमा नहीं मानता—ना धर्म की, ना देश की।
1. जिज्ञासा जगाओ:�हर सवाल पूछो, हर किताब पढ़ो। अल-ख़्वारिज़्मी ने भारतीय गणित सीखा, यूनानी दर्शन पढ़ा—तब जाकर बीजगणित बना।�→ आज का बच्चा: कोडिंग, AI, स्पेस साइंस में कूदो। कोई नया ऐप बनाओ जो दुनिया बदले।
2. टीमवर्क में ताक़त:�स्वर्ण युग में अकेले नहीं, टीम ने कमाल किया।�→ आज: अपने दोस्तों के साथ प्रोजेक्ट करो—रोबोट बनाओ, सोलर कार चलाओ।
3. मेहनत और सब्र:�इब्न अल-हैथम ने सैकड़ों प्रयोग किए तब ऑप्टिक्स की नींव रखी।�→ आज: फेल होना सीखना है। 10 बार कोशिश करो, 11वीं में कामयाबी मिलेगी।
4. देने का जज़्बा:�वो विद्वान अमीर बनने नहीं, दुनिया को देने के लिए काम करते थे।�→ आज: जो सीखो, उसे फ्री में शेयर करो—यूट्यूब, ब्लॉग, ओपन-सोर्स कोड।
एक छोटी सी प्रेरणा (बच्चों के लिए कहानी स्टाइल):
अब्दुल 12 साल का था। उसे लगा, ‘मेरे पूर्वजों ने तारे गिने, दवा बनाई—मैं क्या करूँ?’
उसने अपने मोहल्ले के बच्चों को इकट्ठा किया। सबने मिलकर एक सोलर लैंप बनाया जो बिना बिजली के जलता है।
गाँव में अंधेरा खत्म हुआ। अब्दुल ने कहा—
‘हमारा स्वर्ण युग अभी शुरू हुआ है।’”
आखिरी बात:
स्वर्ण युग कोई पुरानी कहानी नहीं—ये एक नज़रिया है।
अगर आज का मुस्लिम बच्चा सीखे, साझा करे, और सपने देखे बिना डरे—तो नया स्वर्ण युग शुरू हो सकता है।
तुम्हारा अगला क़दम क्या होगा?
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21/06/2025
*“MTM स्कूल जहाँ शिक्षा और सफलता एक साथ मिलते हैं!*
एम टी एम स्कूल पर सभी अभिभावकों को गर्व है कि एम टी एम स्कूल के छात्रों ने 12वीं कक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है। इस वर्ष, इस स्कूल की छात्रा आयरा पठान को उसके बेहतरीन रिजल्ट के लिए 1 लाख रुपये का अवॉर्ड दिया गया , सारा खातून को 51,000 रुपये और फातिमा मेहरीन को 51,000 रुपये का अवॉर्ड एक हौसला अफजाई प्रोग्राम में दिया गया l
साथ ही, एम टी एम स्कूल के होनहार छात्र मोहम्मद रेहान पहली बार में ही नीट में कामयाबी हासिल की, अबू तुराब, और आयशा खान ने NEET में शानदार कामयाबी हासिल की है। इसके अलावा, एम टी एम स्कूल के पुराने होनहार विद्यार्थी मोहम्मद दानिश लाहौरी ने सरकारी द्वितीय श्रेणी उर्दू शिक्षक के रूप में सेलेक्ट होकर स्कूल और कौम का नाम रोशन किया है।
यह उपलब्धियाँ इन स्टूडेंट्स की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण, और MTM स्कूल के प्रेरणादायी दृष्टिकोण का परिणाम हैं। हमारे यहाँ, एम टी एम स्कूल न केवल पढ़ाई को बढ़ावा देता हैं, बल्कि छात्रों को उनके सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करता हैं।
एम टी एम स्कूल मुस्लिम अभिभावकों के सपनों का स्कूल बन चुका है जहां पढ़ाई, खेल , और करियर बनाने पर पूरा ध्यान दिया जाता है
MTM स्कूल – जहाँ भविष्य की नींव रखी जाती है! आइए, एम टी एम स्कूल के साथ जुड़ें और अपने बच्चो की सफलता की कहानी लिखें!”
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https://youtu.be/_xL5n4Ld_s8?si=_M1oXBsMUJKUdegB
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