12/06/2020
श्रीशुकदेवजी कहते हैं-परीक्षित् ! नन्दबाबा जब मथुरासे चले, तब रास्तेमें विचार करने लगे कि वसुदेवजीका कथन झूठा नहीं हो सकता । इससे उनके मनमें उत्पात होनेकी आशङ्का हो गयी। तब उन्होंने मन-ही-मन ‘भगवान् ही शरण हैं, वे ही रक्षा करेंगे' ऐसा निश्चय किया ॥१॥ पूतना नामकी एक बड़ी क्रूर राक्षसी थी। उसका एक ही काम था-बच्चोंको मारना । कंसकी आज्ञासे वह नगर, ग्राम और अहीरोंकी बस्तियोंमें बच्चोंको मारनेके लिये घूमा करती थी॥२॥ [ 762 more words ]
भागवत महापुराण इन हिंदी (छठा अध्याय) (पूतना का उद्धार) (Part-1 of 3) श्रीशुकदेवजी कहते हैं-परीक्षित् ! नन्दबाबा जब मथुरासे चले, तब रास्तेमें विचार करने लगे कि वसुदेवजीका कथन झूठा नही....
12/06/2020