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03/04/2023

एक आम डॉक्टर की आम जनता से आत्ममंन्थ की अपील

आख़िर डॉक्टर हड़ताल क्यों किए है??

सबसे पहले मैं यह जानना चाहता हूँ कि डॉक्टर को सरकार सेवक मानती है या व्यवसायी??

अगर सेवक मानती है तो उसको हॉस्पिटल की ज़मीन, मशीन, स्टाफ फ्री दे और योग्यतानुसार न्युनतम सेलरी दे जिस से घर चला सके।। कंज्यूमर कोर्ट से मुक्ति दे !!

मगर इसके विपरीत कॉमर्शियल रेट पर बिजली पानी फायर UDT और 54 तरह के लाइसेंस पूरी फ़ीस देकर लेने पड़ते हैं! सरकार का एक भी लाइसेंस फ्री नहीं हैं सबका मूल्य चुकाना पड़ता हैं।

अगर सरकार व्यवसायी मानती है तो हमने माँ-बाप के पैसे से पढ़ाई की, ज़मीन ख़रीदी, मशीनें लगायी, स्टाफ रखा तो हमें भी एक आम व्यवसायी की तरह शांति से अपना कम करने दे और कमाई के अनुसार टैक्स ले!!

हड़ताल इसलिए नहीं है कि डॉक्टर्स की कोई माँग है मगर इसलिए है कि सरकार की एक माँग प्राइवेट हॉस्पीटल पूरा नहीं कर पा रहें ।

सरकार की माँग है कि प्राइवेट हॉस्पीटल में कोई भी मरीज आकर कहे कि इमरजेंसी है तो आप ना नहीं कह सकते।

आप के पास वो स्पेशलिटी नहीं है तो सही अस्पताल तक पहुँचाना आपकी जिम्मेदारी।

अब चार बातें है विचार करने योग्यः

1. मरीज के लिये हर तकलीफ़ इमरजेंसी है क्योंकि हॉस्पीटल पिकनिक की जगह नहीं है तो सारी ही इमरजेंसी हैं तो क्या हॉस्पीटल सबका इलाज फ्री करे??

2. चूँकि मैं बच्चों के रोग का डॉक्टर हूँ और हर्टअटैक का मरीज आ गया तो क्या होगा?? अगर मैं इलाज करूँ तो करूँ क्या मुझे आता नहीं और अगर कुछ करना शुरू किया तो मैंने मरीज का टाइम ख़राब कर दिया अब उसको गंभीर परिणाम की संभावना बढ़ गयी क्योंकि इमरजेंसी में तो खेल टाइम का ही हैं।

अब क्या होगा मरीज़के रिश्तेदार मेरे साथ मार पिटाई, अस्पताल में तोड़ फोड्ड और कोर्ट केस करेंगे और अगर मैं अपनी स्पेशलिटी का हवाला देकर इलाज के लिये मनाकर दूँ तो मेरी RTH के तहत शिकायत। मतलब अब हॉस्पिटल में लीगल प्रॉब्लम्स बढ़नी तय हैं।

3. अब रही बात मरीज को सही स्पेशलिटी के हॉस्पीटल में पहुँचाना तो 80% से ज़्यादा छोटे हॉस्पीटल के पास अपनी एम्बुलेंस नहीं होती तो अब डॉक्टर अपनी कार से मरीज छोड़ने जाये? कितना तर्कसंगत हैं???

4. अब मानलो कि मेरी ख़ुद की स्पेशलिटी का मरीज़ आ गया तो मैं उसका इलाज कर दूँगा मगर मरीज ने कह दिया कि मेरी तो इमरजेंसी है तो सरकार कहती है कि इस से आप पैसे नहीं लोगे तो मैं हॉस्पीटल व घर के खर्चे कैसे चलाऊँगा??? हर व्यक्ति अपने व्यवसाय के संदर्भ में सोच कर देखे और फ़ैसला करे कि सरकार का ये बिल कितना प्रैक्टिकल हैं??

हम सभी प्राइवेट हॉस्पीटल से ही इलाज क्यों करवाना चाहते हैं ख़ास कर इमरजेंसी में ??

क्योंकि हमें तुरंत अच्छे से अच्छा इलाज मिल जाता है और जान बच पाती हैं।ऐसा इसलिए संभव हो पाता है कि प्राइवेट के पास बेस्ट मशनरी, बेस्ट मेडिसिन व रिर्सोस होते है क्योंकि आप उसके लिये पेमेंट करते हो।।

तो अगर ये सब अब प्राइवेट को फ्री करना है तो आपको पता ही है कि कैसा स्टाफ, मेडिसिन व मशीने मिलने वाली है और उसका परिणाम कैसा आने वाला हैं…….गई जान तो …….ऐसा सिर्फ़ सरकार की वोट की राजनीति के चलते प्राइवेट सिस्टम को ख़त्म करने से हुआ!!

अधिकार की बात करें तो संविधान में हर नागरिक को रोटी, कपड़ा और मकान सरकार का दायित्व है । फिर २०-३० % लोग इन से वंचित क्यों हैं ?
६०-७०% धन सरकार अपने ख़ुद के लिए उपयोग कर रही है ! क्या यह उचित है ?

स्वास्थ्य सिर्फ़ इलाज ही नहीं हैं….. शुद्ध भोजन, साफ़ पानी, हवा व कोई नशा न करना भी ज़रूरी है। तो सरकार पहले स्वस्थ रहने के लिए ये सब तो उपलब्ध करवाये।

शराब व तम्बाकू बेचना ज़रूरी है क्योंकि मोटा टैक्स जो मिलता है!

और सरकार चाहती है कि रात भर कोई शराब पी कर 2 बजे उलटियाँ करता हुआ आये और हम उनका फ्री में इलाज कर दे क्योंकि इमरजेंसी हैं???

हम सभी GST, Income tax और भी कई Tax दे रहें है तो basic सुविधाएँ सरकार की ज़िम्मेदारी है इसलिए स्वास्थ्य, इलाज की गारंटी सरकार दे वो अपने तंत्र की असमर्थता के लिए प्राइवेट की क्यों बलि चढ़ा रहा हैं?

कल को सरकार राइट टू राशन, फ़ूड, ट्रैवल, कपड़ा, मकान सब ले आएगी तो क्या सभी ढाबों, रेस्टोरेंट, होटल, टैक्सी, प्रचून वाले को, कपड़े वाले को बाध्य थोड़े ही कर सकते हो कि ज़रूरतमंद को फ्री दो ??? क्या दे पाओगे??

एक ज़ोरदार बात ये है इस बिल में कि एक रेगुलेटरी अथॉरिटी बना दी जिसमें पंच, सरपंच, पार्षद्, ज़िला प्रमुख , आईएएस और एक दो मेडिकल वाले होंगे जो हॉस्पिटल की शिकायत का निवारण करेंगे, जुर्माना लगाएँगे!

तो क्या होगा, इंस्पेक्टरी राज और आगे चल कर भ्रष्टाचार??? निवारण का तरीक़ा वही जो आप लाल बती जम्प करने पर करते हो !!

इस देश में आतंकवादी, देशद्रोही को भी कोर्ट जानेका अधिकार है ।

मगर इस बिल के अनुसार रेगुलेटरी अथॉरिटी का फ़ैसला ही आख़िरी होगा। डॉक्टर या अस्पताल इसके ख़िलाफ़ न्यायाल्य नहीं जा सकता!!! ये कितना तर्कसंगत हैं??

अब सरकार इसका प्रचार कर रही है कि हमने प्राइवेट में फ्री इलाज की गारंटी दी है तो रोज़ लड़ाई झगड़ें, केस मुक़दमे होंगे अंततःप्राइवेट हॉस्पिटल, ख़ास कर छोटे को बंद होना पड़ेगा!!

प्राइवेट मेडिकल कॉलेज एक-एक करोड़ में एमबीबीसी, एमडी करवा रहे है। फ़ीस का निर्धारण सरकार की सहमति से और फिर सरकार चाहती है कि ये डॉक्टर फ्री इलाज करे। सरकार कह रही है कि चिकित्सक अपना सेवा धर्म भूल गया । सरकार ने ख़ुद इतनी फ़ीस की अनुमति देकर सेवा धर्म भूलने पर मजबूर किया हैं!!

इस बिल से आम जानता को क्या नुक़सान होने वाला हैः

1. डॉक्टर पेशेंट के रिश्ते ख़राब होंगे और इसका दुष्परिणाम् दोनों को भुगताना पड़ेगा सरकार का कुछ नहीं बिगड़ेगा

2. प्राइवेट हॉस्पीटल में त्वरित्, उच्च गुणवत्ता का इलाज नहीं मिल पाएगा और ज़्यादा जानें जाएगी और एक बार फिर सरकार को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा भुगतो जिसके.

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