19/05/2026
इतिहास दोहराया जाता है
[email protected]
It is a non-profit organisation at jaipur for promote to GOLDS
19/05/2026
इतिहास दोहराया जाता है
13/05/2026
05/05/2026
CONGRATULATIONS
Dr. Priyanka Soni IAS
Ambala District Collector
कुंदन जड़ाऊ (Kundan Jadau) भारत की एक प्राचीन और शाही आभूषण कला है, जो विशेष रूप से राजस्थान (जयपुर व बीकानेर) से उपजी है। इसमें 24 कैरेट शुद्ध सोने की पन्नी (कुंदन) का उपयोग करके कीमती रत्नों या काँच को सोने के ढांचे में जड़ा जाता है, जिसे जड़ाऊ प्रक्रिया कहते हैं। यह आभूषण अपनी चमक, जटिल कारीगरी, और पीछे की तरफ की गई मीनाकारी के लिए प्रसिद्ध है, जो पारंपरिक शादियों में दुल्हन के लिए पसंदीदा विकल्प है।
कुंदन जड़ाऊ के प्रमुख पहलू:
अर्थ: 'कुंदन' का अर्थ है अत्यधिक शुद्ध सोना, और जड़ाऊ का अर्थ है पत्थरों को जड़ना। इसमें रत्नों को फंसाने के लिए लाह (wax) और शुद्ध सोने का उपयोग होता है।
इतिहास: यह कला 2,500 साल से अधिक पुरानी है, जो राजस्थान के शाही दरबारों में शुरू हुई और मुगल काल में काफी फली-फूली।
निर्माण प्रक्रिया: इसे बनाने में 4 मुख्य परतें होती हैं- सोने का ढांचा, चांदी की पन्नी (चमक के लिए), रत्न/पोल्की, और सबसे ऊपर 24 कैरेट सोने की जड़ाऊ।
विशेषताएं: यह आमतौर पर पारंपरिक दुल्हन वेशभूषा का हिस्सा है और इसमें अक्सर पीछे की तरफ जटिल मीनाकारी (मीनाकारी) की जाती है।
कुंदन बनाम पोल्की: कुंदन में काँच (glass) या रंगीन रत्न जड़े जाते हैं, जबकि पोल्की में बिना तराशे हुए हीरे (uncut diamonds) का उपयोग होता है।
यह आभूषण कला बीकानेर और जयपुर में बहुत प्रचलित है और 20,00,000 कुशल कारीगर इसमें शामिल हैं।
START YOUR OWN EXPORT BUSINESS
Now you can start your export Import Business, You can start your export business with our expertise team in any sectors or with your products.
For Swarnkar, starting cunsultancy, advises like (Organisation, Company Formation ) are FREE T&C
You can contact or call for further details, +91 8875198888
https://www.facebook.com/EXPORTSolutionConsultancy
Export Import Solution EXIM
A Business Service Consultancy Organisation
Team For Exports Import
Business Solution
31/01/2026
क्या 'सोनार' अब बनेंगे 'सब्जी-फल विक्रेता'? 2026 में गहराया छोटे स्वर्णकारों की विरासत पर संकट
"बोर्ड पर लिखा है 'ज्वेलर्स', लेकिन नीचे चमक रहे हैं सेब और संत्रे। यह कोई भूल नहीं, बल्कि 2026 की वो कड़वी हकीकत है जिसे 'प्लान B' का नाम दिया जा रहा है।"
सोने और चांदी की कीमतें जिस रफ़्तार से रॉकेट बनी हैं, उसने न केवल आम आदमी की पहुँच से गहनों को दूर कर दिया है, बल्कि उन छोटे स्वर्णकारों (Traditional Goldsmiths) की कमर तोड़ दी है जो पीढ़ियों से इस धंधे में थे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 'सागर ज्वैलर्स' और 'श्री राधे कृष्णा ज्वैलर्स' की तस्वीरें इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि महंगाई ने कैसे एक कलाकार को व्यापारी से भी नीचे लाकर खड़ा कर दिया है।
ज्वैलरी शॉप या फलों की दुकान?
वायरल हो रही तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि एक चमचमाते शोरूम के बाहर, जहाँ कभी ग्राहकों की भीड़ गहने देखने के लिए लगती थी, अब वहाँ फलों के क्रेट रखे हैं। 'सागर ज्वैलर्स' के काउंटर पर सोने की अंगूठियों की जगह अब ताजे फल सजे हैं। इसे सोशल मीडिया पर लोग व्यंग्य में "प्लान B एक्टिवेटेड इन 2026" कह रहे हैं, लेकिन यह व्यंग्य नहीं, एक समाज की आर्थिक त्रासदी है।
विरासत (Virasat) पर सबसे बड़ा हमला
सवाल यह है कि क्या यह बढ़ते रेट छोटे स्वर्णकार से उसकी पहचान छीन लेंगे? जवाब डराने वाला है।
कला का अंत: स्वर्णकारी (Goldsmithing) केवल व्यापार नहीं, एक कला है जो बाप-दादा से अगली पीढ़ी को मिलती थी। जब दुकान में ग्राहक ही नहीं चढ़ेगा, तो वह कारीगर अपनी छेनी-हथौड़ी छोड़कर तराजू-बाट उठाने को मजबूर हो जाएगा। जैसा कि इन तस्वीरों में दिख रहा है, पीढ़ियों का हुनर अब पेट पालने की मजबूरी के आगे घुटने टेक रहा है।
पूंजी का अभाव: सोने का भाव बढ़ने का मतलब है कि दूकान में माल भरने के लिए अब 4 गुना अधिक पूंजी चाहिए। छोटा सुनार इतनी पूंजी कहाँ से लाएगा? नतीजा—दुकान का शटर या तो हमेशा के लिए गिर रहा है, या फिर वहां किराना और फल बेचे जा रहे हैं।
विश्वास और रिश्ते का खात्मा: छोटे शहरों में सुनार केवल दुकानदार नहीं, परिवार का हिस्सा होता था। सुख-दुस में लोग जेवर गिरवी रखने या बनवाने उसी के पास जाते थे। अब कॉर्पोरेट शोरूम और ऑनलाइन मार्केट ने उस 'पर्सनल टच' को खत्म कर दिया है, और बची-कुची कसर महंगाई ने पूरी कर दी।
कारीगर का दर्द
एक पुराने स्वर्णकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "साहब, मेरे दादा जी ने इसी दुकान में राजा-महाराजाओं के लिए जेवर बनाए थे। आज हालत यह है कि मैं अपने बेटे को यह काम नहीं सिखाना चाहता। जिस दुकान में लक्ष्मी जी की मूरत थी, वहां अब केले बेचकर गुजारा करना पड़ रहा है। डर है कि आने वाले वक्त में 'सुनार' शब्द केवल इतिहास की किताबों में रह जाएगा।"
निष्कर्ष
ये तस्वीरें एक चेतावनी हैं। अगर यही हाल रहा, तो हम न केवल छोटे व्यापारियों को खो देंगे, बल्कि भारत की उस समृद्ध 'स्वर्ण-कला' को भी खो देंगे जो हमारी संस्कृति की पहचान थी। सोने की चमक तो बरकरार है, लेकिन उसे गढ़ने वाले हाथों की लकीरें मिटती जा रही हैं।
31/01/2026
सोने की रिकॉर्ड कीमतों ने बुझाई सर्राफा बाजार की चमक, 'वेंटिलेटर' पर स्वर्णकार और कारीगर
नई दिल्ली / ब्यूरो रिपोर्ट
देश भर के सर्राफा बाजारों में इन दिनों एक अजीब सा सन्नाटा पसरा है। जहाँ कभी गहनों की खनक और ग्राहकों की चहल-पहल होती थी, वहां आज मायूसी का मंजर है。 सोने और चांदी की कीमतों ने आसमान छू लिया है, जिसके कारण मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों के लिए अब सोना खरीदना एक सपना बनता जा रहा है。
📉 बाजार सूना, कारीगर बेरोज़गार
बाजार की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि इसे 'वेंटिलेटर' जैसी स्थिति बताया जा रहा है。
ग्राहकों की कमी: बढ़ती महंगाई के कारण ग्राहक बाजारों से पूरी तरह गायब हैं。
ठप पड़ा काम: शादी-ब्याह के सीजन के बावजूद पारंपरिक खरीदारी लगभग बंद है, जिससे कारीगरों के पास कोई नया ऑर्डर नहीं है。
आर्थिक और मानसिक संकट: आमदनी रुक जाने से लाखों कारीगरों और छोटे स्वर्णकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, जिससे वे भारी मानसिक तनाव में हैं。
🏙️ हर शहर का एक ही हाल
कानपुर, आगरा, वाराणसी, लखनऊ, मेरठ और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों में करीब 75 फीसदी कारीगर इस समय भयंकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं。 हालात यहाँ तक बिगड़ गए हैं कि कई पुश्तैनी कारीगर अब अपना हुनर छोड़कर पेट पालने के लिए दूसरे काम (जैसे मोबाइल रिपेयरिंग या मजदूरी) ढूंढने को मजबूर हो रहे हैं。
⚠️ अस्तित्व का संकट
स्वर्णकार समाज का कहना है कि यह केवल व्यापारिक उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि उनके पारंपरिक हुनर और अस्तित्व पर आया संकट है。 छोटे ज्वेलर्स और कारीगरों पर टैक्स का बढ़ता दबाव और नए नियमों ने व्यापार की कमर तोड़ दी है。
सवाल यह है: जब सोना अपनी ऐतिहासिक ऊँचाइयों पर चमक रहा है, तो इसे गढ़ने वाले और बेचने वाले बाजारों की चमक क्यों बुझ रही है?
सरकार से मांग: स्वर्णकार समाज ने सरकार से अपील की है कि इस संकट को 'सामाजिक आपदा' बनने से रोकने के लिए जल्द ही कोई ठोस राहत पैकेज या प्रभावी कदम उठाए जाएं|
19/01/2026
Now Power Of Swarnakar
7.2 K Followers
Thanks....🙏
19/01/2026
2 साल पहले 70 किलो सोना जयपुर से भी लेके एक व्यापारी भगा था व्यापारी का