Advance Learners

Advance Learners "Advance Learners" An Institute for Educational Development we are serving in Education Sector since 2008. Objectives:-
To contribute in social development.

Vision Statement:-
Recognise the path to success by adapting to the changes, knowledge, management and acquiring skills to work with future environment influenced by technological and other changes. Direction is important than speed, we gives the best direction to the youth

Our Business:-
"We serve qualitative Education"
"We produce Value Added Knowledge"

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Today's storyलड़कियों के एक विद्यालय में आई नई अध्यापिका बहुत खूबसूरत थी, बस उम्र थोड़ी अधिक हो रही थी लेकिन उसने अभी तक...
24/06/2023

Today's story
लड़कियों के एक विद्यालय में आई नई अध्यापिका बहुत खूबसूरत थी, बस उम्र थोड़ी अधिक हो रही थी लेकिन उसने अभी तक शादी नहीं की थी...

सभी छात्राएं उसे देखकर तरह तरह के अनुमान लगाया करती थीं। एक दिन किसी कार्यक्रम के दौरान जब छात्राएं उसके इर्द-गिर्द खड़ी थीं तो एक छात्रा ने बातों बातों में ही उससे पूछ लिया कि मैडम आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की...?

अध्यापिका ने कहा- "पहले एक कहानी सुनाती हूं। एक महिला को बेटे होने की लालच में लगातार पांच बेटियां ही पैदा होती रहीं। जब छठवीं बार वह गर्भवती हुई तो पति ने उसको धमकी दी कि अगर इस बार भी बेटी हुई तो उस बेटी को बाहर किसी सड़क या चौक पर फेंक आऊंगा। महिला अकेले में रोती हुई भगवान से प्रार्थना करने लगी, क्योंकि यह उसके वश की बात नहीं थी कि अपनी इच्छानुसार बेटा पैदा कर देती। इस बार भी बेटी ही पैदा हुई। पति ने नवजात बेटी को उठाया और रात के अंधेरे में शहर के बीचों-बीच चौक पर रख आया। मां पूरी रात उस नन्हीं सी जान के लिए रो रोकर दुआ करती रही। दूसरे दिन सुबह पिता जब चौक पर बेटी को देखने पहुंचा तो देखा कि बच्ची वहीं पड़ी है। उसे जीवित रखने के लिए बाप बेटी को वापस घर लाया लेकिन दूसरी रात फिर बेटी को उसी चौक पर रख आया। रोज़​ यही होता रहा। हर बार पिता उस नवजात बेटी को बाहर रख आता और जब कोई उसे लेकर नहीं जाता तो मजबूरन वापस उठा लाता। यहां तक कि उसका पिता एक दिन थक गया और भगवान की इच्छा समझकर शांत हो गया। फिर एक वर्ष बाद मां जब फिर से गर्भवती हुई तो इस बार उनको बेटा हुआ। लेकिन कुछ ही दिन बाद ही छह बेटियों में से एक बेटी की मौत हो गई, यहां तक कि माँ पांच बार गर्भवती हुई और हर बार बेटे ही हुए। लेकिन हर बार उसकी बेटियों में से एक बेटी इस दुनियां से चली जाती।"

अध्यापिका की आंखों से आंसू गिरने लगे थे। उसने आंसू पोंछकर आगे कहना शुरु किया।

"अब सिर्फ एक ही बेटी ज़िंदा बची थी और वह वही बेटी थी, जिससे बाप जान छुड़ाना चाह रहा था। एक दिन अचानक मां भी इस दुनियां से चली गई। इधर पांच बेटे और एक बेटी सब धीरे धीरे बड़े हो गए।"

अध्यापक ने फिर कहा- "पता है वह बेटी जो ज़िंदा बची रही, मैं ही हूं। मैंने अभी तक शादी इसलिए नहीं की, कि मेरे पिता अब इतने बूढ़े हो गए हैं कि अपने हाथ से खाना भी नहीं खा सकते और अब घर में और कोई नहीं है जो उनकी सेवा कर सकें। बस मैं ही उनकी सेवा और देखभाल किया करती हूं। जिन बेटों के लिए पिताजी परेशान थे, वो पांच बेटे अपनी अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ अलग रहते हैं। बस कभी-कभी आकर पिता का हालचाल पूछ जाते हैं।"

वह थोड़ा मुस्कराई। फिर बोली -

"मेरे पिताजी अब हर दिन शर्मिंदगी के साथ रो-रो कर मुझ से कहा करते हैं, मेरी प्यारी बेटी जो कुछ मैंने बचपन में तेरे साथ किया उसके लिए मुझे माफ कर देना।"

दोस्तों, बेटी की बाप से मुहब्बत के बारे में एक प्यारा सा किस्सा यह भी है कि एक पिता बेटे के साथ खेल रहा था। बेटे का हौंसला बढ़ाने के लिए वह जान बूझ कर हार जा रहा था। दूर बैठी बेटी बाप की हार बर्दाश्त ना कर सकी और बाप के साथ लिपटकर रोते हुए बोली- "पापा ! आप मेरे साथ खेलिए, ताकि मैं आपकी जीत के लिए हार सकूँ।"

ऐसी होती हैं बेटियां!!

भोपाल में एक दुकान पर लस्सी का ऑर्डर देकर हम सब दोस्त आराम से बैठकर एक दूसरे की खिंचाई और हंसी-मजाक में लगे ही थे कि एक ...
23/06/2023

भोपाल में एक दुकान पर लस्सी का ऑर्डर देकर हम सब दोस्त आराम से बैठकर एक दूसरे की खिंचाई और हंसी-मजाक में लगे ही थे कि एक लगभग 70-75 साल की बुजुर्ग माँ पैसे मांगते हुए मेरे सामने हाथ फैलाकर खड़ी हो गई।

उनकी कमर झुकी हुई थी, चेहरे की झुर्रियों में भूख तैर रही थी। नेत्र भीतर को धंसे हुए किन्तु सजल थे। उनको देखकर मन मे न जाने क्या आया कि मैने जेब मे सिक्के निकालने के लिए डाला हुआ हाथ वापस खींचते हुए उनसे पूछ लिया,

अम्मा जी लस्सी पियोगी ?

मेरी इस बात पर दादी कम अचंभित हुईं और मेरे मित्र अधिक। क्योंकि अगर मैं उनको पैसे देता तो बस 5 या 10 रुपए ही देता लेकिन लस्सी तो 25 रुपए की एक है। इसलिए लस्सी पिलाने से मेरे गरीब हो जाने की और उस बूढ़ी अम्मा के द्वारा मुझे ठग कर अमीर हो जाने की संभावना बहुत अधिक बढ़ गई थी।

दादी ने सकुचाते हुए हामी भरी और अपने पास जो मांग कर जमा किए हुए 6-7 रुपए थे वो अपने कांपते हाथों से मेरी ओर बढ़ाए। मुझे कुछ समझ नही आया तो मैने उनसे पूछा

ये किस लिए?

इनको मिलाकर मेरी लस्सी के पैसे चुका देना बाबूजी !

भावुक तो मैं उनको देखकर ही हो गया था... रही बची कसर उनकी इस बात ने पूरी कर दी।

एकाएक मेरी आंखें छलछला आईं और भरभराए हुए गले से मैने दुकान वाले से एक लस्सी बढ़ाने को कहा... उन्होने अपने पैसे वापस मुट्ठी मे बंद कर लिए और पास ही जमीन पर बैठ गई।

अब मुझे अपनी लाचारी का अनुभव हुआ क्योंकि मैं वहां पर मौजूद दुकानदार, अपने दोस्तों और कई अन्य ग्राहकों की वजह से उनको कुर्सी पर बैठने के लिए नहीं कह सका।

डर था कि कहीं कोई टोक ना दे.....
कहीं किसी को एक भीख मांगने वाली बूढ़ी महिला के उनके बराबर में बिठाए जाने पर आपत्ति न हो जाये...
लेकिन वो कुर्सी जिसपर मैं बैठा था मुझे काट रही थी

लस्सी कुल्लड़ों मे भरकर हम सब मित्रों और बूढ़ी दादी के हाथों मे आते ही मैं अपना कुल्लड़ पकड़कर दादी के पास ही जमीन पर बैठ गया क्योंकि ऐसा करने के लिए तो मैं स्वतंत्र था...
इससे किसी को आपत्ति नही हो सकती थी...
हां! मेरे दोस्तों ने मुझे एक पल को घूरा... लेकिन वो कुछ कहते उससे पहले ही दुकान के मालिक ने आगे बढ़कर दादी को उठाकर कुर्सी पर बैठा दिया और मेरी ओर मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर कहा

ऊपर बैठ जाइए साहब! मेरे यहां ग्राहक तो बहुत आते हैं
किन्तु इंसान कभी कभार ही आते हैं

अब सबके हाथों मे लस्सी के कुल्लड़ और होठों पर सहज मुस्कुराहट थी,
बस एक वो दादी ही थीं जिनकी आंखों मे तृप्ति के आंसूं...
होंठों पर मलाई के कुछ अंश और दिल में सैकड़ों दुआएं थीं।

न जानें क्यों जब कभी हमें 10-20-50 रुपए किसी भूखे गरीब को देने या उसपर खर्च करने होते हैं तो वो हमें बहुत ज्यादा लगते हैं लेकिन सोचिए कि क्या वो चंद रुपए किसी के मन को तृप्त करने से अधिक कीमती हैं?

दोस्तों...
जब कभी अवसर मिले ऐसे काम करते रहें भले ही कोई अभी आपका साथ दे या ना दे , समर्थन करे ना करें... आप आगे बढ़िए
सच मानिए इससे आपको जो आत्मिक सुख मिलेगा वह अमूल्य है ।

"मॉम मेरे नए लेपटॉप का क्या हुआ?" आदित्य ने विभा से पूछा ।।"पैसे आते ही खरीद देंगे बेटा।" विभा ने धीरे से जवाब दिया।"क्य...
23/06/2023

"मॉम मेरे नए लेपटॉप का क्या हुआ?" आदित्य ने विभा से पूछा ।।

"पैसे आते ही खरीद देंगे बेटा।" विभा ने धीरे से जवाब दिया।

"क्या मतलब है पैसे आते ही? आपको पता भी है मेरी पढ़ाई, मेरे प्रोजेक्ट्स का कितना नुकसान हो रहा है। रिजल्ट खराब आया तो मुझे कुछ मत कहना" आदित्य गुस्से से भुनभुनाया।

"पर बेटा तुझे लैपटॉप का जो मॉडल चाहिए वो बहुत महंगा है। पापा अभी इतने पैसे कहाँ से लाएँगे। अभी तो तेरे ट्यूशन वाले सर को भी पूरे साल भर की फीस...." विभा कहते हुए चुप हो गई।

"तो ये सब मुझे इंजीनियरिंग में दाखिल करवाने से पहले ही सोचना चाहिए था। पैसा नहीं था तो..."

बेटे की बात विभा को अंदर तक चुभ गयी। हर साल कॉलेज की फीस, हर विषय की ट्यूशन फीस अलग से, आने-जाने के लिए मोटरसाइकिल भी ले दी थी कि बस में समय खराब न हो। फिर भी जैसे -तैसे ही पास होता है। और अब ये इतने महंगे लेपटॉप का खर्च, एक मध्यमवर्गीय पिता कितना करे। उस पर अभी भी दो साल बचे हैं, फिर बेटे का एहसान भी सर पर की आपके सपने पूरे करने के लिए ही तो पढ़ रहा हूँ।

विभा बाहर आँगन में आकर खड़ी हो गई। मन बुझा सा हो रहा था बेटे के व्यवहार से। एक लड़का पडौसी की गाड़ी धो रहा था। आदित्य का ही हमउम्र था। विभा के मन में सहज करुणा हो आयी। पढ़ाई करने की जगह बेचारा मेहनत करके परिवार के लिए पैसे जोड़ता है।

"कहाँ तक पढ़े हो बेटा।" अचानक ही विभा के मुँह से सवाल निकल गया।

लड़के ने ऊपर देखा और मुस्कुरा कर कहा "इंजीनियरिंग के तीसरे साल में हूँ आँटी।"

"क्या?" विभा चौंक गयी। "तुम तो काम करते हो। फिर पढ़ते कब हो?"

"सुबह काम करता हूँ, दस बजे कॉलेज जाता हूँ, पढ़ाई बस में आते जाते और रात में कर लेता हूँ। शाम को सेकंड, और फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स को ट्यूशन पढ़ाता हूँ। पिताजी कपड़ों पर प्रेस करने का काम करते हैं न, मेरी फीस नहीं दे सकते तो मैं खुद अपनी फीस कमाता हूँ।" सहज से उसने बताया। वो आदित्य के कॉलेज का ही छात्र था और हर साल क्लास में टॉप करता था।

"मॉम पापा को बोलो मुझे आज ही लेपटॉप चाहिए नहीं तो कल से मैं कॉलेज नहीं जाऊँगा।" विभा के कानों में थोड़ी देर पहले बोले गए आदित्य के शब्द गूँज गए और अचानक उसने एक सवाल कर दिया-

"तुम्हे गुस्सा नही आता कि तुम्हे खुद ही कमाकर पढ़ना पड़ रहा है। तुम्हारे पिताजी...कभी मन नहीं करता कि पढ़ना छोड़ दूँ?"

"कभी नहीं मैडम। मैं पढ़ रहा हूँ तो मेरा ही भविष्य सुधरेगा न। मैं कोई अपने माता-पिता पर थोड़े ही अहसान कर रहा हूँ। अपना ही जीवन बना रहा हूँ।" लड़के ने सहज भाव से उत्तर दिया।

लेपटॉप के लिए माँ के पास तकाजा करने के लिए आते हुए आदित्य के पाँव लड़के की बात सुनकर दरवाजे पर ही ठिठक गए।

अपनी पढ़ाई को मां बाप पर बोझ ना बनने दें
मां बाप ने आपके लिए कितने त्याग किए हैं
ये आप सोच भी नही सकते

"Yoga means addition – addition of energy, strength and beauty to body, mind and soul.” —Advance Learnets
21/06/2023

"Yoga means addition – addition of energy, strength and beauty to body, mind and soul.” —Advance Learnets

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