13/10/2021
*लौह स्तम्भ* :- (आयरन पिल्लर) , महरौली, दक्षिण दिल्ली, भारत
लौह स्तम्भ, ध्रुव स्तम्भ (क़ुतुब मीनार) के निकट स्थित एक विशाल स्तम्भ है।
इस स्तंभ की ऊँचाई 22 फ़ीट है। और यह आधार से 1.6 फ़ीट नीचे भी है। स्तम्भ का कुल वजन 6096 कि.ग्रा. है। लौह-स्तम्भ में लोहे की मात्रा करीब 98% है।
लगभग 1600 से अधिक वर्षों से यह खुले आसमान के नीचे सदियों से सभी मौसमों में अविचल खड़ा है। इतने वर्षों में आज तक उसमें जंग नहीं लगी, यह बात दुनिया के लिए आश्चर्य का विषय है।
इस स्तंभ का निर्माण गर्म लोहे के 20-30 किलो के कई टुकड़ों को जोड़कर बनाया गया है। 1600 साल पहले गर्म लोहे के टुकड़ों को जोड़ने की तकनीक थी? क्योंकि उन टुकड़ों को इस तरीके से जोड़ा गया है कि पूरे स्तंभ में एक भी जोड़ दिखाई नहीं देता।
माना जाता है कि स्तंभ को बनाते समय इसमें फास्फोरस की मात्रा अधिक मिलाई गई थी, इसीलिए इसमें आज तक जंग नहीं लगा।
लेकिन सोचने की बात ये है कि फास्फोरस की खोज तो 1669 ईस्वी में हैम्बुर्ग के व्यापारी हेनिंग ब्रांड ने की थी।
जबकि स्तंभ का निर्माण उससे करीब 1200 साल पहले किया गया था। तो क्या उस समय के लोगों को फास्फोरस के बारे में पता था? अगर हां, तो इसके बारे में इतिहास की किसी भी किताब में कोई जिक्र क्यों नहीं मिलता?
इस स्तम्भ पर संस्कृत में जो खुदा हुआ है, उसके अनुसार इसे ध्वज स्तंभ के रूप में खड़ा किया गया था।
चन्द्रराज द्वारा मथुरा में विष्णु पहाड़ी पर निर्मित भगवान विष्णु के मंदिर के सामने इसे ध्वज स्तंभ के रूप में खड़ा किया गया था। इस पर गरुड़ स्थापित करने हेतु इसे बनाया गया होगा, अत: इसे गरुड़ स्तंभ भी कहते हैं।
1050 में यह स्तंभ दिल्ली के संस्थापक अनंगपाल द्वारा लाया गया।
राजा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य (375 - 413) द्वारा इसका निर्माण कराया गया था, किन्तु कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इसका निर्माण और पहले किया गया था।
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