06/03/2025
"डूबते बॉलीवुड" ने इमोशनल मैनिपुलेशन के ज़रिए ताबड़तोड़ कमाई का नया जरिए ढूंढ निकाला है, पहले अक्षय कुमार की "पृथ्वीराज" जिसमें उन्होंने पृथ्वीराज को मुहम्मद गौरी को मारते हुए दिखाया जबकि खुद पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु ही गौरी के पहले हो गई थी।
अब बढ़ते हैं विक्की कौशल की "छावा" की तरफ जिसमें सबने पूरी कोशिश की उसे हिन्दू-मुसलमान करने की।
कहा जाता है औरंगजेब क्रूर था उसने अपने तख्त के लिए अपने भाई की जान लेली, अब उन्हें कौन बताए कि पहले राजपाठ में ऐसा ही होता था खुद सम्राट अशोका ने अपने भाईयों [siblings] की हत्या की, महाराजा विक्रमादित्य ने भी अपने बड़े भाई की हत्या करके उनके साम्राज्य के साथ साथ पत्नी भी उठा ली, राजा उदय सिंह ने भी अपने पिता राणा कुम्भा की हत्या की जब वो शिव मंदिर में पूजा कर रहे थे।
अगर ये धर्मयुद्ध था तो भूपलगढ़ की जंग में संभाजी ने मुगलों के परचम तले, औरंगजेब के कमांडर दिलेर खान के साथ मिलके खुद अपने पिता छत्रपति शिवाजी के खिलाफ क्यों लड़ाई लड़ी? ज़ाहिर है कि पहले धर्म नहीं सत्ता के लिए लड़ाइयां लड़ी जाती थी, अब ये बात नफरतियों को कौन बताए।
अगर औरंगजेब हिन्दू विरोधी था तो राजस्थान के ज्यादातर राजपूतों ने औरंगजेब का साथ क्यों दिया, क्या राजपूत हिन्दू नहीं थे? उदयभान सिंह, मेवाड़ के जसवंत सिंह, और अंबर के राजा जय सिंह जिन्होंने शाहजहां के साथ साथ औरंगजेब के हुक्म पर कई जंगो की पेशवाई की और विजय प्राप्त की, अंबर के राम सिंह, मारवाड़ के किशन सिंह और लिस्ट बहुत लंबी है।
बात खुलेगी तो बहुत दूर तक जाएगी इसलिए इतिहास को धर्म के नजरिए से कतई न पढ़िए/देखिए।
भूपलगढ़ की जंग के बारे में पंडित जोशी कहते हैं: "मुगलों के साथ मिल जाने और भूपलगढ़ तथा उसके रक्षकों पर हमला करने के कारण संभाजी को इतिहास में हमेशा निंदनीय व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा। संभाजी के ये कार्य यह साबित करते हैं कि वे तर्कहीन चरित्र के व्यक्ति थे।"
[Source: Chhatrapati Sambhaji 1657-1689 AD, S.Chand Page 176-179]
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