04/08/2019
कक्षा एक से छः (6-12 yrs age) तक के बच्चों के माता पिता और अभिभावक ध्यान दें !
इनकी फितरत समझें, इनके सामान्य लक्षण जानें,
ताकि आपकी समझ से इनका विकास शानदार ढंग से हो सके और
इनकी यह ‘बाल्यावस्था’ सार्थक हो सके.
1. इन बच्चों की लम्बाई अब कम गति से बढ़ेगी. इसलिए इनकी लम्बाई को लेकर टेंशन न लें ! अभी इनके भीतर के अंगों का विकास अधिक होना है.
2. मानसिक रूप से ये मौजी किस्म के बच्चे हैं ! ये चाँद तारों का या किसी भी चीज को निहारते रहते हैं, बिना वजह और बिना वजह घूमते रहने का भी इनको शौक होता है. इसलिए माता पिता और शिक्षक इस बात को लेकर ज्यादा टोका टोकी न करें बल्कि इनकी इस आदत के अनुसार ही इनके सीखने की व्यवस्था करें. रूटीन की बातों में इनका मन लम्बे समय तक नहीं टिकता है, इसलिए रोचक सामग्री और विधि से पढ़ाने का कष्ट करें.
3. ये बहुत अधिक सामाजिक होते हैं ! रिश्तेदारों में इनकी गहरी रुचि होती है. ब्याव या किसी अन्य प्रोग्राम में इनको मेहमानों को सब्जी रोटी परोसने का काम सौंपो, इनको मजा आ जायेगा और आपको वालंटियर्स मिल जायेंगे. बड़े वाले बच्चे ‘मैं नहीं’ मैं नहीं’ करेंगे जबकि ये ‘मुझे दो मुझे दो’ कहते हैं. स्कूल में पौधों को पानी देना है तो इनको ही भेजो. यानी इनकी सामाजिकता का सम्मान करो. इनको समूह में काम करने दो.
4. इनको यह ‘गलतफहमी’ भी रहती है कि ये ‘बड़े’ हो गए हैं. इनको लगता है कि इनका पूरा मान सम्मान हो. आप इनको ‘टींगर’ समझने की भूल मत करो. घर में कोई महत्वपूर्ण निर्णय हो रहा हो तो इनसे सलाह लो, इनको मजा आ जायेगा. स्कूल में भी इनके माथे जिम्मेदारी डाल दो. ये भी खुश और आप भी.
5. अपनी भावनाओं को कंट्रोल करना इनको खूब आता है. पर इसका अर्थ यह न लगायें कि इनकी सहनशक्ति का फायदा उठायें.
एक पूरा चैप्टर हो जाएगा इन पर, लेकिन कुछ इशारे मैंने किये हैं.
देखिये, माता पिता होना या शिक्षक होना मजाक नहीं है, यह जिम्मेदारी का काम है. हम भारतीय हर मामले में जीवन को मजाक की तरह लेते हैं और यही हमारे दुनिया में पिछड़ने का कारण है. हम वोट देकर आगे की जिम्मेदारी नहीं निभाते तो बच्चों को पैदा करके उनको ठीक ढंग से बड़ा करने का सही तरीका भी नहीं अपनाते हैं. इसीलिये मानव विकास सूचकांक में हम 130 वें स्थान से ऊपर नहीं बढ़ पाते हैं. विश्व गुरु मजाक में नहीं बनते हैं. जब हम विश्व गुरु थे तो बहुत जिम्मेदार थे.
सादर