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06/03/2023

आपको और आपके परिवार को अन्याय असत्य की प्रतीक होलिका का दहन एवं सत्य धर्म पर चलने वाले भक्त शिरोमणि प्रल्हाद की जय - जयकार रंगो के इस पावन पर्व होली व फाल्गुनी चतुर्दशी महापर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ।
*!!राधे राधे!!*

20/12/2019

इनर लाइन परमिट सिस्टम (ILP) क्या है?

इनर लाइन परमिट (Inner Line Permit) सिस्टम पासपोर्ट की तरह एक यात्रा दस्तावेज़ है। जिसे भारत सरकार भारतीय को जारी करती है जिससे वह किसी संरक्षित क्षेत्र में निर्धारित अवधि के लिए यात्रा कर सकें। आईएलपी के तहत आने वाले तीन राज्यों को ब्रिटिश राज के काल से ही बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 कानून के तहत संरक्षण प्रदान है। अरुणाचल, नागालैंड और मिजोरम में प्रवेश के लिए भारतीय समेत किसी भी बाहरी नागरिक को आईएलपी की जरूरत होगी। केवल क्षेत्रीय समुदाय ही वहां बस सकते हैं, नौकरी के हकदार हैं और जमीन के मालिक बन सकते हैं।

मणिपुर इन प्रावधानों के बाहर था। लिहाजा, 9 दिसंबर 2019 को केंद्र सरकार ने इसे भी आईएलपी के दायरे में लाने का निर्णय लिया। वही चर्चित नागरिकता संशोधन विधेयक लागू होने के बाद अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से 31 दिसंबर 2014 से पहले आए हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन और ईसाई यानी गैर-मुसलमान शरणार्थी भारत की नागरिकता हासिल करके भी असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम में किसी तरह की ज़मीन या क़ारोबारी अधिकार हासिल नहीं कर पाएंगे।

आपको बता दे कि औपनिवेशिक भारत में, वर्ष 1873 के बंगाल-ईस्टर्न फ्रंटियर रेग्यूलेशन एक्ट में ब्रितानी हितों को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया गया था। आज़ादी के बाद भारत सरकार ने कुछ बदलावों के साथ इसे अभी तक कायम रखा है। लेकिन पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम, त्रिपुरा और मेघालय में आईएलपी लागू नहीं है। जिसके लिए वहां बराबर मांग उठती रहती है। साल 2018 में मणिपुर में एक विधेयक पारित किया गया था जिसमें 'गैर-मणिपुरी' और 'बाहरी' लोगों पर राज्य में प्रवेश के लिए कड़े नियमों की बात कही गई थी।

22/11/2019

जानिये, भारत के मुख्य न्यायाधीश, कार्य व कार्यकाल

● भारत में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत् 26 जनवरी, 1950 को की गई थी तथा 28 जनवरी को इसका उद्घाटन किया गया। यह देश में सबसे उच्च अपीलीय अदालत है, जो राज्यों व केन्द्रशासित क्षेत्रों के उच्च न्यायालयों के फैसलों के विरुद्ध अपीली सुनवाई करता है। इनके अतिरिक्त राज्यों के बीच के विवादों तथा मौलिक अधिकारों व मानव अधिकारों के गम्भीर उल्लधंन सम्बन्धित मामालों की सीधे ही सर्वोच्च न्यायालय के समझ रखा जा सकता है।
● स्थापना के समय सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त 7 न्यायाधीशों का प्रावधान था। कार्यभार में वृद्धि के चलते अब न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या 31 (मुख्य न्यायाधीश सहित) होती है।
● न्यायमूर्ति हरिलाल जे. कानिया भारत के पहले सर्वोच्च न्यायाधीश थे। इस पर पर उनकी नियुक्ति 26 जनवरी, 1950 को की गई थी तथा 6 नवम्बर, 1951 तक वह इस पद पर रहे थे।
● सर्वोच्च न्यायालय के 67 वर्षों के इतिहास में केवल 6 महिलाओं ने ही इसमें न्यायाधीश के पद को सुशोभित किया है। न्यायामूर्ति एम. फातिमा देवी सर्वोच्च न्यायालय में पहली महिला न्यायाधीश थी।
● वर्तमान में न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे (Justice Sharad Arvind Bobde) भारत के 47वें मुख्य न्यायाधीश है। वह 18 नवम्बर, 2019 से सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश हैं तथा मुख्य न्यायाधीश पद पर उनका कार्यकाल 23 अप्रैल, 2021 तक रहेगा।

भारत के मुख्य न्यायाधीशों की सूची
1. हरिलाल जे. कानिया : 26 जनवरी, 1950 से 6 नवम्बर, 1951
2. पतंजलि शास्त्री : 7 नवम्बर, 1951 से 3 जनवरी, 1954
3. मेहरचन्द्र महाजन : 4 जनवरी, 1954 से 22 दिसम्बर, 1954
4. बी. के. मुखर्जी : 23 दिसम्बर, 1954 से 31 जनवरी, 1956
5. एस. आर. दास : 1 फरवरी, 1956 से 30 सितम्बर, 1959
6. भुवनेश्वर प्रसाद सिन्हा : 1 अक्टूबर, 1959 से 31 जनवरी, 1964
7. पी. बी. गजेन्द्र गडकर : 1 फरवरी, 1964 से 15 मार्च, 1966
8. ए. के. सरकार : 16 मार्च, 1966 से 29 जून, 1966
9. के. सुब्बाराव : 30 जून, 1966 से 11 अप्रैल, 1967
10. के. एन. वांचू : 12 अप्रैल, 1967 से 24 जनवरी, 1968
11. एम. हिदायतुल्ला : 25 फरवरी, 1968 से ​16 दिसम्बर, 1970
12. जे. सी. शाह : 17 दिसम्बर, 1970 से 21 जनवरी, 1971
13. एस. एम. सीकरी : 22 जनवरी, 1971 से 25 अप्रैल, 1973
14. ए. एन. रे. : 26 अप्रैल, 1973 से 28 जनवरी, 1977
15. एम. एच. बेग : 29 जनवरी, 1977 से 21 फरवरी, 1978
16. वाई. वी. चन्द्रचूड़ : 22 फरवरी, 1978 से 11 जुलाई, 1985
17. प्रफुल्लचंद्र नटवरलाल भगवती : 12 जुलाई, 1985 से 20 दिसम्बर, 1986
18. रघुनन्दन स्वरूप पाठक : 21 दिसम्बर, 1986 से 18 जून, 1989
19. ई. एस. वेंकटरमैया : 19 जून, 1989 से 17 दिसम्बर, 1989
20. सव्यसाची मुखर्जी : 18 दिसम्बर, 1989 से 25 सितम्बर, 1990
21. रंगनाथ मिश्र : 26 सितम्बर, 1990 से 24 नवम्बर, 1991
22. के. एन. सिंह : 25 नवम्बर, 1991 से 12 दिसम्बर, 1991
23. एम. एच. कानिया : 13 दिसम्बर, 1991 से 17 नवम्बर, 1992
24. एल. एम. शर्मा : 18 नवम्बर, 1992 से 11 फरवरी, 1993
25. एम. एन. वेंकटचलैया : 12 फरवरी, 1993 से 24 अक्टूबर, 1994
26. ए. एम. अहमदी : 25 अक्टूबर, 1994 से 24 मार्च, 1997
27. जे. एस. वर्मा : 25 मार्च, 1997 से 17 जनवरी, 1998
28. एम. एम. पुंछी : 18 जनवरी, 1998 से 9 अक्टूबर, 1998
29. आदर्श सेन आनन्द : 10 अक्टूबर, 1998 से 31 अक्टूबर, 2001
30. एस. पी. भरूचा : 1 नवम्बर, 2001 से 5 मई, 2002
31. बी. एन. किरपाल : 6 मई, 2002 से 7 नवम्बर, 2002
32. गोपाल बल्लभ पटनायक : 8 नवम्बर, 2002 से 18 दिसम्बर, 2002
33. वी. एन. खरे : 19 दिसम्बर, 2002 से 1 मई, 2004
34. एस. राजेन्द्र बाबू : 2 मई, 2004 से 31 मई, 2004
35. रमेश चन्द्र लाहोटी : 1 जून, 2004 से 31 अक्टूबर, 2005
36. योगेश कुमार सब्बरवाल : 1 नवम्बर, 2005 से 13 जनवरी, 2007
37. के. जी. बालकृष्णन : 14 जनवरी, 2007 से 11 मई, 2010
38. एस. एच. कपाड़िया : 12 मई, 2010 से 28 सितम्बर, 2012
39. अल्तमस कबीर : 29 सितम्बर, 2012 से 18 जुलाई, 2013
40. पी. सदाशिवम : 19 जुलाई, 2013 से 26 अप्रैल, 2014
41. आर. एम. लोढ़ा : 27 अप्रैल, 2014 से 27 सितम्बर, 2014
42. एच. एल. दत्तू : 28 सितम्बर, 2014 से 2 दिसम्बर, 2015
43. टी एस ठाकुर : 3 दिसम्बर 2015 से 3 जनवरी, 2017
44. जगदीश सिंह खेहर : 4 जनवरी, 2017 से 27 अगस्त, 2017
45. दीपक मिश्र : 28 अगस्त, 2017 से 1 अक्टूबर, 2018
46. रंजन गोगोई : 2 अक्टूबर, 2018 से 17 नवम्बर, 2019
47. शरद अरविंद बोबडे : 18 नवम्बर, 2019 से (कार्यकाल तक)

Photos from GurjarKing's post 22/11/2019

85 भारत के प्रसिद्ध व्यक्तित्व – हुए दुनिया में लोक​प्रिय

भारत के प्रसिद्ध व्यक्तित्व, जिन्होंने दुनियाभर में लोकप्रियता हासिल की और भारत के झंडे गाड़े। इन भारतीय व्यक्तित्वों में विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोग मौजूद है। सभी सरकारी परीक्षाओं के हिसाब से विश्व प्रसिद्ध 85 व्यक्तित्व की सूची संक्षिप्त परिचय के साथ यहां उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे आप किसी भी परीक्षा में 5 नंबर पक्के कर सकते है।

1. अबुल फजल (1561-1602) – मुगल सम्राट अकबर के 9 रत्नों में से एक 'आइने अकबरी' तथा 'अकबर नामा' के लेखक हैं। ये अकबर के प्रधानमंत्री थे।

2. आर्यभट्ट (476—520 ई.) – आर्यभट्ट के नाम पर प्रथम भारतीय उपग्रह का नाम रखा गया है। आर्यभट्ट प्राचीन भारत के महान खगोलविद् थे। ये चंद्रगुप्त विक्रमादित्य द्वितीय के दरबार में थे।

3. आचार्य विनोबा भावे (1895–1982) – आचार्य विनोबा भावे 'सर्वोदय' व 'भूटान' आंदोलन के जनक थे। मरणोपरान्त 1983 में इन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।

4. आचार्य नरेन्द्र देव (1819–1956) – सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक नरेन्द्र देव प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ व विद्वान थे।

5. आर्देशिर कर्सेट जी वाडिया (1808–1877) – प्रसिद्ध यांत्रिक एवं समुद्री इंजीनियर। ये रॉयल सोसाइटी, लंदन के फैलो चुने जाने वाले प्रथम भारतीय थे।

6. ईश्वर चंद्र विद्यासागर (1820–1891) – प्रसिद्ध समाज सुधारक व शिक्षाविद् ईश्वर चद्र विद्यासागर ने प्राथमिक शिक्षा व विधवा विवाह के ​लिए सराहनीय कार्य किये।

7. उत्पल दत्त (1929–1993) – हिंदी तथा बांग्ला फिल्मों के विख्यात अभिनेता।

8. कृष्णदेव राय – कृष्णदेव राय ने दक्षिण भारत के विजनगर साम्राज्य पर 1509 से 1529 ई. तक राज्य किया। कृष्णदेव राय उत्कृष्ट योद्धा व कला व साहित्य के संरक्षक थे। इसके शासनकाल में विजयनगर साम्राज्य समृद्ध हुआ।

9. कनिष्क – कनिष्क कुषाण वंश का सबसे प्रतापी राजा था। अश्वघोष व चरक जैसे साहित्यकार व वैद्य इसके दरबार में थे। कनिष्क ने चौथे बौद्ध संगीतिका का कश्मीर में आयोजन करवाया। कनिष्क बौद्ध धर्म का अनुयायी व संरक्षक था।

10. कबीरदास (1398–1518) – महान कवि व समाज सुधारक कबीर ने अपनी कविताओं के द्वारा समाज की रूढ़िवचादी परंपराओं पर प्रहार किया। निगुर्ण भक्ति धारा का यह महान कवि साम्प्रदायिकता व जाति—पाति का प्रबल विरोधी था। कबीर की रचनायें 'साखी', 'सबद' का 'रमैनी' में मिलती है।

11. कानन देवी – भारतीय फिल्म जगत् की महान अभिनेत्री, दादा साहब फाल्के सम्मान सम्मानित किया गया था। इंदिरा गांधी स्मारक पुरस्कार भी इन्हें प्रदान किया गया था।

12. कृतिवाद – 14वीं सदी के प्रमुख बांग्ला कवि, जिन्होंने रामायण (बाल्मीकी कृत) का बांग्ला में अनुवाद किया।

13. काश्यप मातंग – लगभग 67 ई पू में चीन की यात्रा पर जाने वाला प्रथम बौद्ध भिक्षु। मगध में जन्मे मातंग गंधार में रहते थे।

14. कल्हण – कश्मीर के प्रसिद्ध इतिहासकार एवं कवि। इन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना 'राजतरंगिणी में कश्मीर का तिथिवार एवं व्यवस्थित इतिहास लिखा है।

15. के कामराज नाडार (1903–1975) – प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ। ये 'जनता के नेता' उपनाम से भी प्रसिद्ध थे। इन्हें मरणोपरांत 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था।

16. कन्हैयालाल माणिक लाल मुंशी (1887-1971) – गुजराती एवं अंग्रेजी भाषाओं के प्रसिद्ध विद्वान, लेखक, कानूनविद्, स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ। इन्होंने देश में 'वन महोत्सव' का आरंभ किया था। इन्होंने मुंबई में भारतीय विद्याभवन की स्थापना भी की थी। ये मुंबई के गृहमंत्री (1937-39) ​केंद्र सरकार के खाद्य मंत्री (1950-51) तथा उत्तर प्रदेश के राज्यपाल (1952-57) भी रहे।

17. गुरु गोविंद सिंह – सिक्खों के 10वें व अंतिम गुरु, गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना कर सिक्ख शक्ति की स्थापना की। गुरु गोविंद सिंह जीवनपर्यन्त मुगलों से संघर्षरत रहे।

18. गुरु नानक (1469–1538) – सिक्ख धर्म के संस्थापक व प्रथम गुरु, गुरु नानक का जन्म पाकिस्तान के तलवंडी नामक गांव में हुआ।

19. गणेश शंकर विद्यार्थी (1890–1931) – गणेश शंकर विद्यार्थी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में पूर्ण ऊर्जा के साथ भागीदारी की, ये एक प्रबुद्ध पत्रकार थे। इन्होंने राष्ट्रवादी पत्रिका 'प्रताप' का संपादन किया। अंग्रेजी सरकार विरोधी लेखन के कारण इन्होंने कई बार जेल यात्रा की।

20. गोपाल कृष्ण गोखले (1866-1915) – भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ एवं महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु। इन्होंने 'सर्वेन्ट ऑफ इंडिया सोसाइटी' की स्थापना की। इन्होंने 1907 में 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' की अध्यक्षता भी की।

21. गोपीकृष्ण (1933–94) – देश के सुविख्यात कत्थक नर्तक,​ जिन्होंने 800 से भी अधिक फिल्मों में नृत्य निर्देशन किया। इन्होंने 9 घंटे 20 मिनट तक लगातार नृत्य कर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया।

22. गुरु अर्जुनदेव – सिक्खों के 5वें गुरु एवं 'गुरु ग्रंथ साहिब' के संकलनकर्त्ता। इन्होंने अमृतसर में स्वर्णमंदिर का निर्माण करवाया। सम्राट जहांगीर ने इन्हें, इस्लाम विरोधी घोषित कर इनकी हत्या करवा दी।

23. गोविन्द वल्लभ पंत (1887–1961) – प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, जो अपनी प्रशासनिक नीतियों के कारण विख्यात रहे। ये उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री तथा बाद में केंद्र सरकार के गृहमंत्री भी रहे।

24. चाणक्य – प्रसिद्ध नीतिज्ञ चाणक्य, मौर्य वंश के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य के गुरु थे। इनका प्रसिद्ध ग्रंथ अर्थशास्त्र है।

25. चवार्क – भारतीय दर्शन में सर्वप्रथम चर्वाक ने भौतिक विचारधारा का समावेश किया। इस आदि वैज्ञानिक ने प्रचलित धार्मिक विश्वासों व ग्रंथों की प्रासंगिकता को स्वीकारने से इंकार कर दिया।

26. चितरंजन दास (1970–1925) – 1923 में मोतीलाल नेहरू के साथ मिलकर स्वराज पार्टी बनाई। प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को 'देशबंधु' के नाम से भी जाना जाता है।

27. तेज बहादुर सप्रू (1875–1945) – भारत के प्रमुख बैरिस्टर एवं न्यायविद्। इन्हें वायसराय की कार्यकारिणाी परिषद् की न्यायिक सदस्य बनाया गया था।

28. दादाभाई नौरोजी (1825–1917) – कांग्रेस के संस्थापक सदस्य दादा भाई नौरोजी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की तीन बार अध्यक्षता की। इन्हें 'भारत के महान वृद्ध पुरुष' (The Great old Man of India) की संज्ञा दी गई है। इन्होंने अपनी पुस्तक 'पावर्टी एंड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया' में भारत के धन के ब्रिटेन की ओर प्रवाह का वर्णन किया है। ये पहले भारतीय थे, जिन्हें लंदन काउंटी से ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉतन्स का सदस्य चुना गया था।

29. नंदलाल बोस – प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार नंदलाल बोस शांति निकेतन स्थित भारतीय कला भवन के निदेशन थे।

30. नागार्जुन (दूसरी सदी) – भारत के प्रसिद्ध बौद्ध दार्शनिक। ये कनिष्क के समकालीन थे तथा उसका संरक्षण प्राप्त था। 'मध्यकारिका' इनकी प्रसिद्ध कृति है। यह ग्रंथ महायान का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। 'सुहल्लेख' में इन्होंने बौद्ध धर्म के सिद्धान्तों का उल्लेख किया है।

31. नागार्जुन (7-8वीं सदी) – प्रसिद्ध भारतीय रसायनशास्त्री, जिन्होंने रस चिकित्सा पद्धति का सूत्रपात किया। इनके प्रसिद्ध ग्रंथ 'रसरत्नाकार' में धातुओं के शोधन एवं उनके गुण—दोष का विवेचन किया गया है। इस ग्रंथ में पारद (पारा) का उल्लेख अति महत्वपूर्ण है।

32. पाणिनि – वैदिक काल से संंबंधित महान व्याकरणार्थ पाणिनि ने 'अष्टाध्यायी' व्याकरण ग्रंथ लिखा।

33. पं. रवि शंकर – प्रख्यात् शास्त्रीय गायक रवि शंकर किचलू आगरा घराने से संबंधित थे।

34. पृथ्वीराज चौहान – दिल्ली का शासक पृथ्वीराज चौहान अत्यंत वीर व साहसी यौद्धा था। 1192 में मुहम्मद गोरी के साथ तराइन के युद्ध में पराजित किया। यह युद्ध भारत में मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

35. पोरस – सिकन्दर के आक्रमण के समय पंजाब का राजा, जिसे सिकन्दर ने युद्ध में पराजित कर गिरफ्तार कर लिया था। बाद में पोरस की बहादुरी से प्रभावित होकर उसे और उसके विजित क्षेत्र को छोड़ दिया।

36. फिराक गोरखपुरी (1896–1982) – उर्दू के प्रसिद्ध शायर फिराक गोरखपुरी को 'गुल-ए-नग्मा' के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

37. फिरोजशाह मेहता (1845–1915) – 'बंबई का जननायक' के रूप में प्रसिद्ध समाज सुधारक, देशभक्त व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मेहता ने 1883 में बदरूद्दीन तैयबजी तथा के टी तेलंग के साथ मिलकर बंबई प्रेसीडेंस एशोसिएशन की स्थापना की।

38. फूदोरजी – पहला भारतीय जिसने बिना आॅक्सीजन के एवरेस्ट पर विजय की। एवरेस्ट पद दो बार फतह करने के बाद दोरजी ने कंचनजंघा पर भी आरोहण किया।

39. बाणभट्ट – ये संस्कृत के विद्यान थे और सम्राट हर्षवर्धन के दरबारी थे। इनकी प्रसिद्ध रचनाये 'कादम्बरी' 'हर्षचरितम्' व 'सूर्यशतकम्' है।

40. बंकिम चंद्र चटर्जी (1838–1894) – बंकिम चंद्र चटर्जी की प्रसिद्ध रचना 'आनन्द मठ' है जिससे राष्ट्रीय गीत 'वंदेमातरम्' लिया गया है। इनकी अन्य रचनायें 'दुर्गेशनन्दिनी' एवं 'कपाल कुंडला' है।

41. बालकृष्ण भट्ट (1844–1914) – बालकृष्ण भट्ट हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार व नाटककार थे।

42. बैरम खां – प्रसिद्ध मुगल सम्राट अकबर महान् के चाचा, जिन्होंने अकबर के शिक्षक एवं अभिभावक की भूमिका निभाई।

43. ब्रह्मगुप्त (598–680) – भारत के प्रमुख गणितज्ञ। इन्होंने 'ब्रहा सिद्धांत' ग्रंथ की रचना की।

44. भारतेन्दु हरिशचन्द्र (1850–1883) – भारतेन्दु युग के प्रमुख लेखक ने 'चंद्रावली', 'भारत दुर्दशा' व 'अंधेर नगरी' जैसे प्रसिद्ध नाटक लिखे। भारतेन्दु हरिशचन्द्र आधुनिक हिंदी खड़ी बोली के संस्थापकों में प्रमुख थे।

45. भास्कराचार्य – महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने 'शिरोमणि' नामक ग्रंथ की रचना की जिसके प्रथम भाग को लीलावती भी कहा जाता है। पद्य के रूप में लिखी यह पुस्तक 12 वीं शताब्दी में भारतीय गणित की उपलब्धियों का एक उत्कृष्ट नमूना है।

46. भवभूति (8वीं शताब्दी) – संस्कृत के महान् नाटककार। इन्होंने मालतीमाधवम्, महावीरचरितम्, उत्तरामचरितम् नामक तीन प्रसिद्ध नाटकों की रचना की।

47. भास्कर I (7वीें शताब्दी) – ब्रह्मगुप्त के समकालीन प्रसिद्ध नक्षत्रविज्ञानी। भारत के दूसरे उपग्रह का नाम इन्हीं के नाम पर रखा गया है।

48. भर्तृहरि (7वीं शताब्दी) – प्रसिद्ध वैयाकरण, संस्कृत कवि एवं तत्वज्ञानी थे। इन्होंने नीतिशतकम्, श्रृंगारशतकम् एवं वैराग्यशतकम् काव्य ग्रंथों की रचना की थी। ये उज्जैन के महाराजा थे। इनकी पत्नी का नाम पिंगला था।

49. भदंत आनन्द कौशल्यायन (1900-1988) – अखिल भारतीय बौद्ध भिक्षु संघ के अध्यक्ष तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि प्राप्त बौद्ध विद्यान। इन्होंने बौद्ध धर्म की उपयोगिता को वर्तमान परिप्रेक्षय में रेखांकित किया तथा पूरे जीवन बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार में अपना योगदान दिया।

50. मेघनाद साहा (1853-1956) – उष्ण उपवन (Thermal Ionisation) सिद्धांत द्वारा पाने वाले भारतीय, नाभिकीय भौतिक विज्ञानी मेघनाद साहा भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे। इन्होंने 'हिस्ट्रीय ऑफ हिन्दू साइंस' लिखी।

51. मदर टेरेसा (1910) – 1946 से भारत में जरूरतमंद लोगों की नि:स्वार्थ सेवा करने वाली मदर टेरेसा को भारत की नागरिकता प्राप्त है। इन्हें पद्मश्री (1962), रेमन मैग्ससे पुररस्कार, जवाहर लाल नेहरू शांति पुरस्कर, नोबेल शांति पुरस्कार (1979), भारत रत्न (1980), ब्रिटिश आर्डर ऑफ येरिट (1993) जैसे सम्मानित परस्कारों से सम्मानित किया गया है।

52. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (1861–1962) – 1955 में 'भारत रत्न' से सम्मानित विश्वेश्वरैया का भारत के औद्योगिक व तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। विश्वेश्वरैया एक कुशल प्रशासक व प्रबुद्ध अभियंता थे। इन्होंने अनेक बहुद्देश्यीय परियोजनाओं को अपने पर्यवेक्षण में संपन्न कराया, जिसमें कावेरी नदी पर बना विशाल बांध महत्वपूर्ण है।

53. मेजर ध्यानचंद (1905-1979) – भारतीय हॉकी को विश्व-स्तर तक प्रतिष्ठा दिलाने व 'हॉकी के जादूगर' नाम से विख्यात ध्यानचंद्र भारतीय हॉकी के उत्कृष्ट खिलाड़ी थे। इनके नेतृतव में भारत ने हॉकी के लिए अनेक विश्वस्तरीय प्रतियोगितायें जीतीं।

54. मुहम्मद गोरी – भारत में मुस्लिम साम्राज्य के संस्थापक मुहम्मद गोरी ने 1192 में दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान को हरा कर दिल्ली पर अधिकार किया।

55. मुंशी प्रेमचन्द (1880–1937) – हिन्दी भाषा के उपन्यास सम्राट, जिन्होंने अनेक उत्कृष्ट उपन्यासों तथा कहानियों की रचना की। इनके उपन्यासों एवं कहानियें में सामाजिक समस्याओं खासकर 'ग्रामीण परिवेश की समस्याओं' का यथार्थ चित्रण मिलता है।

56. मलिक मुहम्मद जायसी – 16वीं शताब्दी के अवधि भाषा के प्रसिद्ध कवि। इन्होंने पद्मावत महाकाव्य की रचना की। ये सूफी विचारधारा से प्रभावित थे।

57. महाराजा रणजीत सिंह – पंजाब के विख्यात राजा। इन्होंने आधुनिक ढंग से सुसज्जित सेना रखी।

58. मनु – प्राचीन भारत के विधि निर्माता, जिन्होंने देश के तत्कालीन परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखकर अनेक विधियों (कानूनों) का निर्माण किया। इन विधियों का संग्रह 'मनुस्मृति' नामक ग्रंथ के रूप में है।

59. रजिया बेगम (1236-40) – दिल्ली के सिंहासन पर बैठने वाली प्रथम मुस्लिम शासिका। इल्तुतमिश ने अपने पुत्रों को गद्दी के अयोग्य समझकर अपनी पुत्री रजिया को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।

60. राणासांगा – मेवाड़ के प्रसिद्ध राजा, जिन्होंने युद्धों में अपने अंगों–आंख, एक पैर एवं एक हाथ–को गंवा देने के बावजूद खुद को एक महान् योद्धा के रूप में स्थापित किया। खानवा के युद्ध (1527) में (बाबर में) इनकी हार हो गई।

61. राजशेखर (10वीं शताब्दी) – महान् संस्कृत विद्वान, जिन्होंने विद्धिशालभंजिका, कर्पूरमंजरी, बालरामायण, बालभारत, प्रचण्डपाण्डवम् जैसे नाटकों तथा काव्यमीमांसा जैसे श्रेष्ठ काव्यशास्त्र की रचना की। ये प्रतिहार शासक महेन्द्रपाल (890-910 ई.) के गुरु थे।

62. रघुनन्दन (स्मार्त भट्टाचार्य) – विख्यात धर्मशास्त्री। इनके 'नवस्मृति' तथा 'अष्टाविंशति तत्व' नामक धर्मशास्त्र असम एवं बंगाल में उत्तराधिकार का प्रमाणिक आधार माना जाता है।

63. रामकृष्ण बजाज (1923-1994 ई.) – भारत के स्वतंत्रता सेनानी एवं लोकसेवक तथा देश के अग्रणी उद्योगपति।

64. राजराज – चोल साम्राज्य के प्रसिद्ध शासक, जिन्होंने चोल साम्राज्य को एकता के सूत्र में बांधा तथा शासन में महत्वपूर्ण सुधार किया। इन्होंने तंजौर (तंजावुर) में वृहदेश्वर (राजराजेश्वर) नामक शिव मंदिर का निर्माण करवाया।

65. होमी जहांगीर भाभा (1909–1966) – भारतीय नाभिक भौतिक विज्ञानी डा. होमी जहांगीर भाभा 'कॉस्म्कि किरणों में कास्केड शावर घटना' की सैद्धान्तिक व्याख्या व परमाणु के इलेक्ट्रॉन पोजिट्रॉन प्रकीर्णन की संभावनाओं के निर्धारण करने की प्रक्रिया के क्षेत्र में सुझाव महत्वपूर्ण थे। भाभा भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे और परमाणु ऊर्जा के शांन्तिप्रिय उपयोग संबंधी संयुक्त राष्ट्र की पहली कान्फ्रेंस के अध्यक्ष रहे।

66. विक्रमादित्य (चंद्रगुप्त द्वितीय) – गुप्तवंश का श्रेष्ठतम शासक। इनका शासनकाल भारतीय इतिहास में 'स्वर्णयुग' के नाम से जाना जाता है। इनके काल में कला एवं साहित्य में विशेष उन्नति हुई। महाकवि कालिदास इनके नवरत्नों में से एक थे।

67. वाल्मीकि – प्राचीन भारत में संस्कृत जगत् के महान कवि। रामायण इनकी प्रसिद्ध रचना है।

68. वाराहमिहिर – प्राचीन भारत के महान् गणितज्ञ, ज्योति​षविद् एवं दार्शनिक। चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के नवरत्नों में से एक थे।

69. वेद व्यास (महर्षि कृष्ण द्वैपायन) – इन्होंने महाभारत महाकाव्य की रचना की। इस महाकाव्य का एक खंड 'श्रीमद्भागवतगीता' हैं, जो हिंदुओं का पवित्र ग्रंथ है। इसमें हिंदुओं को नैतिक विधि-निषेधों का वर्णन है।

70. वायकोम मोहम्मद बशीर (1908-94) – प्रसिद्ध मलयालम साहित्यकार, जिन्होंने अपनी रचनाओं द्वारा 50 वर्षों तक मलयालम साहित्य को समृद्ध एवं प्रभावित किया। इन्हें 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया।

71. शंकराचार्य – भारत के ​प्रसिद्ध हिंदू चिन्तक व दार्शनिक, जिन्होंने हिन्दू धर्म की एकता के लिए विशिष्टा प्रयास किये और भारत में चार मठों की स्थापना की।

72. शांति स्वरूप भटनागर (1894-1955) – भारतीय विज्ञान की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभान वाले भटनागर चुंबकत्व व इमल्सनों का रसायन संबंधी कार्य के लिए सुविख्यात है। डॉ. भटनागर ने सी एस आई आरा (Council for Scientific and Industrial Reserch) की स्थापना में महत्वपूर्ण सहयोग दिया व इसके प्रथम निदेशक भी रहे। 1943 में इन्हें 'फैलो ऑफ रायल सोसायटी' चुना गया।

73. शेख मोहम्मद अब्दुल्ला (1906-42) – पांच दशक से भी अधिक समय तक जम्मू-कश्मीर की राजनीति पर छाय रहने वाले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे। इनके उपनाम 'शेर-ए-कश्मीर' से भी जाना जाता है।

74. श्री निवास रामानुज (1887-1948) – मात्र 33 वर्ष की आयु में मृत्यु हो जाने पर भी रामानुज ने संख्या सिद्धांत पर महत्वपूर्ण कार्य किया।

75. सरोजिनी नायडू (1879-1948) – सरोजिनी नायडू प्रमुख स्वतंत्रता संग्रामी व भारत की अंग्रेजी भाषा की प्रसिद्ध कवयित्री थी। 1925 में भारतीय कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं। स्वतंत्र भारत के उत्तर प्रदेश राज्य की पहली महिला राज्यपाल थी।

76. स्वामी विवेकानन्द (1863–1902) – वेदांत दर्शन के प्रचारक विवेकानन्द ने 1893 में शिकागो में संपन्न विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लिया व ​विश्व को हिंदू धर्म दर्शन से प्रभावित किया।

77. सर आशुतोष मुखर्जी (1864–1924) – बंगाल के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं बैरिस्टर। ये 1899 में बंगाल विधान परिषद् के सदस्य मनोनीत किए गए। ये कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भी थे।

78. सायण – चारों वेदों – ऋग्वेद, यर्जुवेद, सामवेद तथा अर्थववेद – पर प्रामाणिक भाष्यों के रचनाकार, कुशल राजनीतिज्ञ एवं संस्कृत के महान विद्यान्। ये विजयनगर शासक हरिहर II के मंत्री थे।

79. सुश्रुत – चौथी शताब्दी ई पू के महान् चि​कित्सक, जिन्होंने 'सुश्रुत संहिता' की रचना की। ये शल्य चिकित्सा के बहुत बड़े जानकार थे।

80. सी एफ एंड्रयुज (1871–1902) – 1904 से भारत में निवास करने वाले ब्रिटिश नागरिक, जो दीनबंधु के उपनाम से विख्यात थे। ये भारतीय नेताओं के साथ मिलकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया।

81. सूरदास – भक्ति काव्य में श्रीकृष्ण भक्ति शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि। 'सूरसागर' इनका प्रसिद्ध ग्रंथ है। ये अंधे होने के बावजूद प्रकृति, बालवर्णन (श्रीकृष्ण का) का अत्यंत सजीव चित्र खींचा है।

82. राजेन्द्रचोल – चोल साम्राज्य का श्रेष्ठ शासक। इसने अपनी शक्तिशाली नौसेना द्वारा पेगू, श्रीलंका, अंडमान निकोबार को जीतकर चोल साम्राज्य में मिलाया।

83. हरिषेण – गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त (330-380 ई.) के दरबारी कवि एवं एक सेनापति। इन्होंने प्रयाग प्रशस्ति की रचना की, जिसमें समुद्रगुप्त की विजय यात्राओं का वर्णन है।

22/11/2019

महात्मा गांधी का जीवन परिचय तिथि अनुसार 1869-1948

महात्मा गांधी का जीवन परिचय– मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था। वह अपने माता पिता पुतलीबाई और करमचंद गांधी के तीन बेटों में सबसे छोटे थे। उनके पिता करमचंद गांधी कठियावाड़ रियासत के दीवान थे। गांधी की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई स्थानीय स्कूलों में हुई। वो पहले पोरबंदर के प्राथमिक पाठशाला में और उसके बाद राजकोट स्थित अल्बर्ट हाई स्कूल में पढ़े। वर्ष 1883 में करीब 13 साल की उम्र में उनका ब्याह कस्तूरबा से हो गया, जो उनसे 6 महीने बड़ी थी। महात्मा गांधी का जीवन से जुड़ी सभी प्रमुख तिथियों के अनुसार उनका जीवन परिचय यहां दिया गया है। जो सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए काफी उपयोगी साबित होगा।

2 अक्टूबर, 1869 – पोरबंदर, गुजरात में जन्म।
1882 – कस्तूरबा से विवाह।
4 सितंबर, 1888 – उच्च अध्ययन के लिए इंग्लैड गए।
6 नवंबर, 1888 – इंग्लैंड के इनर टेंपल में शामिल।
14 मई, 1892 – काठियावाड़ की अदालत में वकालत शुरु, विफल।
अप्रैल, 1893 – दक्षिण अफ्रीका की समुद्री यात्रा, दादा अब्दुल्ला एंड कंपनी के कानूनी सलाहकार बने।
26 मई, 1893 – अदालत में पगड़ी हटाने से इनकार, बाहर निकाले गए।
7 जून, 1893 – पीटरमारिट्जबर्ग स्टेशन पर ट्रेन के प्रथम श्रेणी डिब्बे से बाहर फेंके गए। अहिंसक प्रतिरोध का संकल्प लिया।
22 अगस्त, 1894 – दक्षिण अफ्रीका में नेशनल इंडियन कांग्रेस की स्थापना।
1901-1902 – कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में शामिल। बंबई में वकालत की कोशि​श भी कामयाब नहीं।
फरवरी 1903 – जोहानिसबर्ग में कानूनी कार्यालय खोला।
4 जून, 1903 – इंडियन ओपिनिशन का पहला अंक प्रकाशित।
दिसंबर 1904 – फीनिक्स बस्ती की स्थापना।
जुलाई 1906 – ब्रहमचर्य का संकल्प लिया।
11 सितंबर, 1906 – जोहानिसबर्ग के एंपायर थिएटर में सत्याग्रह शुरु, एशियाटिक रजिस्ट्रेशन बिल (द ब्लैक एक्ट) का विरोध।
10 जनवरी, 1908 – दक्षिण अफ्रीका में दो महीने की कैद।
16 अगस्त, 1908 – जोहानिसबर्ग में सभाएं कीं, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेशन जलाए गए।
14 अक्टूबर, 1908 – वॉक्सरस्ट में गिरफ्तारी, दो महीने का कारावास।
25 फरवरी, 1909 – बॉक्सररस्ट में फिर गिरफ्तारी, तीन महीने की कैद।
24 अक्टूबर, 1909 – लंदर में दशहरा उत्सव में शामिल, जिसमें वीर सावरकर भी थे।
13-22 नवंबर, 1909 – दक्षिण अफ्रीका गए। समुद्री यात्रा के दौरान हिंद स्वराज लिखी, लियो टॉलस्टॉय के 'अ लैटर टु अ हिंदू' का अनुवाद।
जून 1910 – हर्मन कैलेनबाख के साथ मिलकर टॉलस्टॉय फॉर्म की स्थापना।
अक्टूबर 1912 – गोपालकृष्ण गोखले के साथ दक्षिण अफ्रीका का भ्रमण।
13 जनवरी, 1914 – जनरल स्मॅट से वार्ता के बाद इंडिया रिलीफ एक्ट पास, सत्याग्रह स्थगित।
19 दिसंबर, 1914 – लंदन होते हुए हिंदुस्तान लौटे।
17 फरवरी, 1915 – रवींद्रनाथ टैगोर के शांति निकेतन पहुंचे।
20 मई, 1915 – अहमदाबाद के करीब सत्याग्रह आश्रम की स्थापना।
26 जून, 1915 – 'कैमर ए हिंद' स्वर्ण पदक मिला।
26 दिसंबर, 1916 – लखनऊ के कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार जवाहरलाल नेहरू से मिले।
अप्रैल 1917 – बिहार के चंपारण में नील पर कर के खिलाफ सत्याग्रह। गिरफ्तारी, रिहा।
जून 1917 – अहमदाबाद के करीब साबरमती आश्रम की स्थापना।
15 मार्च, 1918 – गुजरात के मिल मालिकों और मिल कामगारों का विवाद हल करने के लिए पहली बार उपवास।
24 फरवरी, 1919 – रॉलेट एक्ट के खिलाफ सत्याग्रह की प्रतिज्ञा।
13 अप्रैल, 1919 – जलियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में उपवास।
7 सितंबर, 1919 – नवजीवन का प्रकाशन शुरु।
8 अक्टूबर, 1919 – यंग इंडिया का पहला अंक निकला।
1 अगस्त, 1920 – अंग्रेज सरकार को 'कैसर-​ए-हिंद' पुरस्कार वापस लौटाया। अहसयोग आंदोल शुरु।
31 जुलाई, 1921 – मुंबई मे विलायती कपड़ों की होली।
22 सितंबर, 1921 – देश की गरीबी देखकर सिर्फ आधी धाती पहनने का संकल्प।
19 नवंबर, 1921 – प्रिंस ऑफ वेल्स की यात्रा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा पर पांच दिन का उपवास।
24 दिसंबर, 1921 – सामूहिक सविनय अवज्ञा। कांग्रेस ने गांधी जी को फैसले के अधिकार दिए।
29 जनवरी, 1922 – गुजरात के बारदोली तालुका में लगान के खिलाफ सविनय अवज्ञा।
4 फरवरी, 1922 – संयुक्त प्रांत चौरी-चौरा में दंगे के बाद आंदोलन स्थगित।
10 मार्च, 1922 – यंग इंडिया में प्रकाशित लेख पर गिरफ्तारी। छह साल का कारावास।
3 फरवरी, 1928 – साइमन कमीशन का बहिष्कार।
27-31 दिसंबर, 1929 – लाहौर के कांग्रेस अधिवेशन में 'पूर्ण स्वराज' और विधान परिषद का बहिष्कार।
26 जनवरी, 19630 – पूर्ण स्वतंत्रता का एलान।
6 अप्रैल, 1930 – दांडी के समुद्र तट पर नमक कानून तोड़ा।
5 मार्च, 1931 – गांधी इरविन समझौते पर हस्ताक्षर। सविनय अवज्ञा आंदोलन खत्म।
सितंबर दिसंबर, 1931 – लंदन में द्वितीय गोलमेज कॉन्फ्रेस में शामिल।
25 जून, 1934 – पूना में गांधी जी की कार पर बम फेंका गया।
30 अक्टूबर, 1934 – कांग्रेस से त्यागपत्र।
15 जनवरी, 1942 – जवाहरलाल नेहरू को राजनीतिक उत्तराधिकारी बताया।
8 अगस्त, 1942 – कांग्रेस द्वारा 'भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित। 'करो या मरो' के नारे के साथ सत्याग्रह।
10 फरवरी, 1943 – वायसराय से वार्ता में गतिरोध दूर करने का दबाव बनाने को आगा खां पैलेस में 21 दिन का उपवास।
22 फरवरी, 1944 – कस्तूरबा का निधन।
2 सितंबर, 1946 – जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी।
2 जून, 1947 – देश के विभाजन मंजूर करने के कांग्रेस के फैसले का विरोध।
30 जनवरी 1948 – बिड़ला हाउस (नई दिल्ली) में नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर हत्या की।

22/11/2019

जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर

जैन धर्म की वास्तविक संस्थापक 24वें तीर्थकर भगवान माहवीर है। यद्यपि जैन धर्म को संगठित व विकसित करने का श्रेय वर्धमान महावीर को दिया जाता है, तथापि वे इस धर्म के संस्थापक नहीं थे। जैनधर्म की स्थापना का श्रेय जैनियों के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव को जाता है। जैन शब्द संस्कृत के 'जिन' शब्द से बना जिसका अर्थ विजेता (जितेन्द्रिय) है। जैन महात्माओं की​ निर्ग्रन्थ (बंधन रहित) तथा जैन धर्म के अधिष्ठाता को तीर्थकर कहा गया। जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव या आदिनाथ थे। ऋषभदेव व अरिष्टनेम का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है।

24वें तीर्थकर माहवीर (जैन धर्म के वास्तविक संस्थापक)
जन्म – 540 ई पू (पुरानी इतिहास NCERT)
जन्मस्थान – कुंडग्राम (निकट वैशाली) बिहार
पिता – सिद्धार्थ (वज्जि संघ के, कुंड ग्राम के ज्ञातृक क्षत्रिय के प्रधान)
माता – त्रिशला (लिच्छवी शासक चेटक की बहन)
पत्नी – यशोदा (कुण्डिन्य गोत्र के राजा समरवती की कन्या)
दामाद – जामालि (प्रथम विरोधी) (ज्ञान प्राप्ति के 14वें वर्ष)
द्वितीय विरोधी – तिसगुप्त (ज्ञान प्राप्ति के 16वें वर्ष)
गृह त्याग – 30 वर्श की आयु में बड़े भाई नन्दिवर्धन की आज्ञा से।
शिष्य – मक्खलि पुत्र गोशाल (आजीवक संप्रदाय के संस्थापक)
बचपन का नाम – वर्धमान
गोत्र/वंश – कश्यप/इक्ष्वाकु
प्रतीक – सिंह
प्रथम वर्षावास – अस्ति का नाम
अंतिम वर्षावास – पावापुरी
पुत्री – प्रियदर्शना (अणोज्जा)
ज्ञान प्राप्ति – 12 वर्ष की तपस्या।
ज्ञान प्राप्त स्थल – 42 वर्ष की अवस्था में जृम्भिका ग्राम में ऋजुपालिका नदी के तट पर।
साल वृक्ष – इसी वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति
प्रथम शिष्य – जामालि (दामाद व भांजा) प्रियदर्शना का पति
प्रथम शिष्या – चंदना (भिक्षुणी संघ की प्रमुख)
प्रथम उपदेश – राजगृह में विपुलांचल पहाड़ी पर वाराकर नदी के तट पर।
प्रमुख उपाधि – केवलिन (कैवल्य : सर्वोच्च ज्ञान प्राप्त व्यक्ति) जिन (विजेता) अर्हत् (पूज्य), निर्ग्रन्थ (बंधनरहित)
जीवन के अंत में निर्वाण– पावापुरी (​नालंदा) विहार में 72 वर्श की आयु में दीपावली के दिन 468 ई पू को निर्वाण।
​– सस्तिपाल (मल्ल गणराज्य के प्रधान) का शासित क्षेत्र।

महावीर जयंती – प्रत्येक वष 9 अप्रैल को मनाया जाता है।
स्पष्टीकरण 1. जृम्भिका ग्राम हजारीबाग के निकट पार्श्वनाथ की पहाड़ियों में स्थित है। ऋजुपालिका नदी की पहचान बराकर नदी (दामोदर नदी के निकट) से की गई है।
2. अनेक विद्वानों का मानना है कि महावीर की वास्तविक निर्वाण स्थली बिहार के पावापुरी (नालंदा जिला) में है परंतु डॉ. ओ पी एल श्रीवास्तव का मत उत्तर प्रदेश के कुशीनगर निकट पड़रौना (वीरभारी) से है।
3. अनेक विद्वान महावीर की जन्म तिथि 30 मार्च 599 ई पू और निर्वाण तिथि 15 अक्टूबर 527 ई पू मानते हैं। जबकि प्राचीन इतिहास (पुरानी NCERT) लेखक रामशरण शर्मा ने पृष्ठ संख्या 101 पर जन्म 540 ई पू व निर्वाण 468 ई पू तिथि को उचित माना है।

22/11/2019

बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध एवं बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे उनके पिता शुद्धोधन कपिलवस्तु के थे। गौतम गोत्र में पैदा होने के कारण गौतमी कहा जाता है। इनके जन्म के 1 सप्ताह यानि 7 दिन में माता की मृत्यृ हो गई। बालक का पालन पोषण उनकी मौसी महाप्रजापती गौतमी ने किया तथा बालक का नाम सिद्धार्थ रखा। ये ज्ञान प्राप्त के बुद्ध कहलाये।

बौद्ध धर्म के वास्तविक संस्थापक महात्मा बुद्ध
जन्म – 563 ई पू ( प्राचीन भारत, NCERT पुरानी)
जन्मस्थल – लुम्बिनी वन (कपिलवस्तु – वर्तमान रूम्मिनदेई, नेपाल)
पिता – शुद्धोधन (शाक्यों के राज्य कपिलवस्तु के शासक)
माता – महामाया देवी
बचपन का नाम – सिद्धार्थ (गोत्र – गौतम)
पालन पोषण – गौतमी विमाता प्रजा​पति
विवाह – 16 वर्ष की अवस्था में यशोधरा से (कोलिय गणराज्य की राजकुमारी)
पुत्र – राहुल
शिष्य – आनंद व उपालि (अप्प दीपो भव)।
गृह त्याग की घटना – 29वे वर्ष में महाभिनिष्क्रमण
सारथी – चन्ना
प्रिय घोड़ा – कंथक
ध्यान गुरु – आलार कालाम
ज्ञान प्राप्ति – 35 वर्श की आयु में वैशाख पूर्णिमा के दिन बुद्ध कहलाए।
प्रथम वर्षावास – सारनाथ (गूलगंध कुटि बिहार)।

ज्ञान प्राप्ति स्थल – गया (बोध गया, बिहार) निरंजना (फल्गु) नदी का तट (घटना – संबोधी 35 वे वर्ष ज्ञान प्राप्ति) महाबोधि मंदिर
बोधि वृक्ष – इसी वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति।
प्रथम उपदेश (पाली भाषा) – स्थल ऋषि पत्तन के मृगदाव (सारनाथ) आचरण की शुद्धता
स्थाल वाली – पांच ब्राह्राण (पंचवर्गीय) घटना – धर्मचक्र प्रवर्तन।
अंतिम उपदेश – सुभद्र (कुशीनगर) (मल्ल)।

8 धर्मप्रचार स्थल – अंग, मगध, काशी, मल्ल, शाक्य, वज्जि, कोशल राज्य।
जीवन का अंत – 483 ई.पू. (प्राचीन भारत NCERT पुरानी) कुशीनारा आयु – 80 वर्ष, दिन - वैशाख पूर्णिमा, स्थल – कुशीनगर (उत्तर प्रदेश), कसया गांव - महापरिनिर्वाण (मृत्यु के बाद)।
विशेष – बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति व महापरिनिर्वाण तीनों वैशाख पूर्णिमा के दिन हुआ था इसीलिए वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
नोट – 18 मई, 1974 को राजस्थान के पोखरण में भारत का प्रथम सफल परमाणु परीक्षण बुद्ध पूर्णिमा के दिन बुद्धा स्माइलिंग मिशन के अंतर्गत किया गया था। बुद्ध के सर्वाधिक उपदेश कोसल की राजधानी श्रावस्ती में दिये गये थे। श्रावस्ती में ही बुद्ध ने अंगुलिमाल डाकू को बौद्ध धर्म की शिक्षा दिये थे।
स्पष्टीकरण – बुद्ध का जन्म 563 ई पू व मृत्यु 483 ई. की तिथि चीन के कैन्टोन अभिलेख के आधार पर NCERT पुस्तक में भी निर्धारित किया गया है।

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