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22/12/2025

डीएचआरयूवी64: भारत का पहला 1.0 गीगाहर्ट्ज, 64-बिट डुअल-कोर माइक्रोप्रोसेसर

प्रमुख उपलब्धियाँ
डीएचआरयूवी64, भारत का पहला घरेलू 1.0 गीगाहर्ट्ज, 64-बिट डुअल-कोर माइक्रोप्रोसेसर है, जो स्वदेशी प्रोसेसर तंत्र को मज़बूत बनाता है।
डिजिटल इंडिया और आरआईएससी-वी (RISC-V) जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के तहत यह स्वदेशी चिप डिजाइन, निर्माण और प्रोटोटाइप विकास को बढ़ावा देता है।
डीएचआरयूवी64 की सफलता के बाद अगली पीढ़ी के उच्च और मध्यम प्रदर्शन प्रोसेसर विकसित करने का कार्य जारी है।
परिचय
भारत ने डीएचआरयूवी64 के शुभारंभ के साथ अपनी सेमीकंडक्टर यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
यह माइक्रोप्रोसेसर माइक्रोप्रोसेसर विकास कार्यक्रम (MDP) के अंतर्गत सी-डैक (C-DAC) द्वारा विकसित किया गया है।
यह पूरी तरह स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर है जो:
सुरक्षित और विश्वसनीय कंप्यूटिंग प्रदान करता है
रणनीतिक और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों को समर्थन देता है
उन्नत चिप डिजाइन में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है
क्या आप जानते हैं?
माइक्रोप्रोसेसर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे:
मोबाइल फोन
कंप्यूटर
ऑटोमोबाइल
चिकित्सा उपकरण
रक्षा प्रणाली
उपकरणों का मूल आधार हैं
विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए ऐसे स्वदेशी प्रोसेसर अत्यंत आवश्यक हैं।
डीएचआरयूवी64 की विशेषताएँ
64-बिट डुअल-कोर प्रोसेसर
1.0 GHz पर कार्य करने की क्षमता
उच्च दक्षता और बेहतर विश्वसनीयता
आउट-ऑफ-ऑर्डर प्रोसेसिंग सपोर्ट
सुपरसकैलर एक्ज़ीक्यूशन
इन-बिल्ट कम्युनिकेशन और कंट्रोल फंक्शन्स
FC-BGA पैकेजिंग, जिससे विभिन्न हार्डवेयर सिस्टम के साथ आसान एकीकरण
उपयोग क्षेत्र:
5G इंफ्रास्ट्रक्चर
ऑटोमोटिव सिस्टम
औद्योगिक ऑटोमेशन
इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)
रणनीतिक एवं रक्षा क्षेत्र
भारत के लिए डीएचआरयूवी64 का सामरिक महत्व
सुरक्षित और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दिशा में बड़ा कदम
आयातित माइक्रोप्रोसेसर पर निर्भरता कम करता है
भारत को वैश्विक चिप डिजाइन हब बनाने में सहायक
भारत के स्वदेशी प्रोसेसर प्रयास (पूर्व उदाहरण)
शक्ति (2018, IIT मद्रास): रक्षा और अंतरिक्ष अनुप्रयोग
अजित (2018, IIT बॉम्बे): औद्योगिक और रोबोटिक्स
विक्रम (2025, ISRO): नेविगेशन, मार्गदर्शन और मिशन नियंत्रण
तेजस64 (2025, C-DAC): औद्योगिक स्वचालन

10/11/2025

वंदे मातरम् के 150 वर्ष

मुख्य बिंदु
• 1950 : संविधान सभा ने “वंदे मातरम्” को भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया।
• रचना सबसे पहले अलग से स्वतंत्र रूप से लिखी गयी थी।
• बाद में इस रचना को बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने अपने उपन्यास “आनन्दमठ” (1882) में शामिल किया।
• 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इसे सार्वजनिक मंच पर पहली बार गाया।
• 7 अगस्त 1905 – “वंदे मातरम्” का पहला प्रयोग राजनीतिक नारे/आन्दोलन के नारे के रूप में हुआ (स्वदेशी आन्दोलन की शुरुआत – बंगाल विभाजन के विरोध में)
• इस गीत ने 1905-1911 के स्वदेशी आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना बनाने में सबसे बड़ा प्रतीकात्मक योगदान दिया।

12/01/2025
12/01/2025

रीट : अब तक करीब 9 लाख आवेदन जमा ✅

अजमेर | राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 27 फरवरी को कराई जाने वाली रीट के आवेदन के लिए अब 6 दिन ही शेष है। 16 जनवरी आवेदन की आखिरी तारीख है। इधर 10 जनवरी शाम 5 बजे तक आवेदनों की संख्या 9 लाख के करीब पहुंच गई है। शाम पांच बजे तक हुए कुल आवेदनों की तादाद 8 लाख 99 हजार 55 हो चुकी है। जिसमें एल-1 के 2 लाख 29 हजार 142, एल-II के 5 लाख 99 हजार 416 और दोनों श्रेणियों में 70 हजार 499 आवेदन जमा हो चुके है।

Rajasthan Public Service Commission (RPSC) Old Question Paper and Answer Key of compitation exam Examisthan com 27/03/2024

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