05/06/2025
कुछ लोगों की नापसंदगी से डरिए मत, क्योंकि जिन्हें शिकायत करनी हो, वे आपकी साँस की गति पर भी सवाल खड़ा कर सकते हैं। ऐसे लोगों से मानसिक दूरी बनाना आत्मसम्मान की पहली शर्त है। जीवन किसी की स्वीकृति की मोहताज नहीं, बल्कि अपने विवेक और आत्मबोध पर टिका होता है।
जो लोग हर वक्त आपको असहज करें, आपकी उपस्थिति में खुद को बड़ा साबित करने की कोशिश करें, वे आपके लिए विषाक्त वातावरण का हिस्सा हैं। यह आवश्यक नहीं कि आपकी अनुपस्थिति से उनकी सोच बदले, पर यह तय है कि उनकी अनुपस्थिति से आपकी साँसें सहज होंगी। हमारे चारों ओर का दायरा ही हमें गढ़ता है — जैसे मिट्टी पौधे को आकार देती है।
इसलिए यह तय करिए कि आप किस तरह के लोगों के बीच रहना चाहते हैं — वे जो सुनते हैं, समझते हैं, या वे जो बस दूसरों को नीचा दिखाने में लगे रहते हैं। हर मुस्कान, हर चुप्पी, हर असहमति एक फ़िल्टर है — और इस फ़िल्टर से छनकर ही आपकी असली दुनिया बनती है। बदलना पाप नहीं, पर ख़ुद को खो देना मूर्खता है।
इसलिए अपने जीवन-दायरे को पहचानिए, चिन्हित करिए — और ज़रूरत हो तो रेखा खींच दीजिए।
Ram choudhary