18/01/2026
एक और दिल दहला देने वाली साइबर क्राइम की घटना हाल ही में दिल्ली के ही एक पॉश इलाके में हुई, जहां एक 69 साल की बुजुर्ग बिजनेसवुमन को ठगों ने डिजिटल अरेस्ट में फंसाकर 6.9 करोड़ रुपये ठग लिए। यह मामला जनवरी 2026 में सामने आया और पिछले हफ्ते ही रिपोर्ट हुआ – यानी एनआरआई डॉक्टर दंपति वाली घटना के ठीक बाद।
कहानी इस तरह शुरू हुई
दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में रहने वाली ये महिला एक सफल बिजनेस चलाती थीं। उनका जीवन व्यस्त था – मीटिंग्स, फैमिली, और घरेलू काम। एक दिन उनके फोन पर कॉल आई। कॉलर ने खुद को CBI अधिकारी बताया और कहा कि आपके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग से जुड़ा केस दर्ज है। फर्जी वॉरंट और दस्तावेज दिखाए गए – वीडियो कॉल पर पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप, वर्दी वाले लोग, गंभीर बातें।
ठगों ने डराया, “अगर किसी को बताया तो आपकी जान जा सकती है। हम आपको डिजिटल अरेस्ट में रख रहे हैं – घर से बाहर मत निकलना, किसी से बात मत करना।” फिर शुरू हुआ 9 दिनों का खौफनाक कैद का दौर। सुबह से रात तक वीडियो कॉल ऑन रहती। अगर महिला किचन जातीं, बाहर का सामान मंगवातीं, या परिवार से बात करने की कोशिश करतीं, तो तुरंत धमकी – “कॉल काटो, वरना गिरफ्तारी हो जाएगी!”
पैसे कैसे ठगे गए?
ठग रोज बड़ी रकम मांगते – “जांच फीस है, जमानत है, नाम क्लियर करने के लिए ट्रांसफर करो।” कभी 1 करोड़, कभी 2 करोड़ की किस्तें। महिला ने अपनी बिजनेस सेविंग्स, फिक्स्ड डिपॉजिट्स, और अन्य अकाउंट्स से कुल 6.9 करोड़ अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिए। पैसे mule अकाउंट्स में घुमाए गए ताकि ट्रेस मुश्किल हो।
आखिरकार ठगों ने कहा, “नाम क्लियर हो गया, पुलिस स्टेशन जाओ, रिफंड मिलेगा।” महिला स्टेशन पहुंचीं, तो SHO ने बताया – “ये सब फर्जी है! कोई केस नहीं, कोई अरेस्ट नहीं।” सदमे में महिला ने तुरंत शिकायत की।
पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और IFSO यूनिट ने जांच शुरू की। अब तक 1.9 करोड़ रुपये फ्रीज कर लिए गए हैं। जांच में पता चला कि ये स्कैम अंतरराष्ट्रीय है – साउथईस्ट एशिया (कंबोडिया, वियतनाम जैसे देशों) से चल रहे कॉल सेंटरों से जुड़ा, जहां AI और डीपफेक से फर्जी वीडियो/कॉल बनाए जाते हैं।
यह दिल्ली में एक हफ्ते के अंदर दूसरा बड़ा डिजिटल अरेस्ट केस था – पहले एनआरआई दंपति का 15 करोड़ का मामला, अब ये। पुलिस का कहना है कि 2025-2026 में ऐसे स्कैम बहुत बढ़ गए हैं, खासकर बुजुर्गों और अमीर परिवारों को टारगेट करके।
कैसे बचें?
• सरकारी अधिकारी कभी फोन/वीडियो पर पैसे नहीं मांगते।
• शक हो तो कॉल काटें और 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या थाने जाकर वेरिफाई करें।
• वीडियो कॉल पर फर्जी बैकग्राउंड देखकर डरें नहीं – ये AI से बनते हैं।
• परिवार को बताएं, अकेले कोई फैसला न लें।
• पैसे ट्रांसफर करने से पहले हमेशा दो-तीन बार चेक करें।
इस तरह की घटनाएं अब रोज की बात हो गई हैं। इस खबर को अपने परिवार, दोस्तों, व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें – खासकर बुजुर्ग रिश्तेदारों को बताएं। जागरूकता से ही हम इन ठगों को रोक सकते हैं। अगर कोई संदिग्ध कॉल आए, तो फौरन 1930 डायल करें – देर न करें!
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