20/11/2021
स्वामी सूर्यदेव जी की पोस्ट:
आगे सिर्फ इनकी केंचुलियाँ ही बचेंगी,,,
#वामपंथी या अंग्रेजों या #क्रिश्चियनो का लिखा इतिहास पढ़ो तो सब बातें दो ढाई हजार साल में सिमट जाती हैं,,,
क्रिश्चियन और वामपंथी जीसस से पहले कुछ मान ही नहीं सकते,,,
ज्यादा ही मारा मारी होगी तो 4 से 5 हज़ार साल पीछे तक मान लेंगे,,
लेकिन उससे ज्यादा कह दिया तो उनके प्राण निकलने को तैयार हो जाते हैं,,,
जबकि सनातन वैदिक धर्म कहता है कि #ब्रह्म का दिन होता है और रात्रि भी,, दिन को ही सृष्टि कहते हैं और #प्रलय को ही रात्रि,,,
तो ब्रह्म का जो दिन है वह होता है चार अरब बत्तीस करोड़ वर्ष का,, यानी सृष्टि की आयु,,
लेकिन #ब्रह्मकुमारी से लेकर तमाम नवोदित सम्प्रदाय तो बस कुछ दिनों में प्रलय होगी यह राग अलापते रहते हैं,, वास्तव में सत्य क्या है??
तो देखिए बन्धु,,
जब हम लोग यज्ञ करते हैं तो संकल्प करते हैं,,
मैंने अपना पहला संकल्प गुरुकुल में जब किया तब-- #एकवृन्दषणणवतिकोटि अष्टलक्षत्रिपंचाशतसहस्र त्रयोदशउत्तरशततमे बोला था,,,यानी एक अरब,,96 करोड़,, आठ लाख 53 हजार 113 साल हो चुके हैं सृष्टि में,,,
होता यह है कि जब सृष्टि की शुरुआत में किसी ने प्रथम यज्ञ किया होगा तब प्रथम: बोला होगा,,,फिर दूसरे दिन द्वितीय: तीसरे दिन तृतीय:,, ऐसे ही यज्ञ होते गए संकल्प पाठ में दिन जुड़ते गए,,,
आज मैंने सुबह हवन किया तो -- #द्वविंशतीउत्तरशततमे--122 साल बोला,,यानी जब मैंने पहली बार यज्ञ किया तब सृष्टि को एक अरब,,96 करोड़,8 लाख,53 हजार 113 साल हुए थे,,,आज 122 वां साल लग गया,,,
आप या हम चाहे कितने ही दिन में यज्ञ करें, महीने में, साल में या कई साल में एक बार,, उस दिन वही तिथि और वार बोला जाएगा जो था,, और हम प्रतिदिन करें न करें कहीं न कहीं संसार में हमेशा यज्ञ होते रहते हैं और संकल्प पाठ बोला जाता है,, तिथियाँ जुड़ती रहती हैं,,जब तक सृष्टि रहेगी यज्ञ होते रहेंगे,, कहीं शादी के, कहीं पूर्णिमा #अमावस्या के, कहीं जन्मदिन के, कहीं भूमिपूजन के,,
कहीं #उदघाटन के, कहीं चुनाव विजय के, कहीं होली दीपावली के,, कहीं सक्रांति या शिवरात्रि के अवसर पर,, तिथियाँ जुड़ती रहेंगी,,, लगभग आधा दिन ही व्यतीत हुआ है अभी तो ब्रह्म का,, यानी आधी सृष्टि अभी बाकी है,,,
इतना वैज्ञानिक #केलकुलेशन और दृष्टिकोण संसार में अन्य किसी के पास न है जो वैदिक धर्मियों को उपहार में मिला है,,, बस उसकी कदर करें,, थोड़ा अध्धयन करें,,
अपने धर्म,, अपनी संस्कृति के संवाहक बनें,, अपने #धर्मग्रंथों अपने पूर्वजों को मान दें,, अपने देवताओं को प्रसन्न करें,,, पूजा उपासना से,, ध्यान धर्म से,,जिस भी तरीके से सम्भव हो कीजिए,,, अपने ज्ञान विज्ञान पर गर्व कीजिए,,, आप हम सबसे #सुसंस्कृत और #सुशिक्षित संस्कृति के हिस्से हैं,,, डटकर जवाब दीजिए लिब्रान्दुओ को,, खदेड़ दीजिए,,पलटकर हमला कीजिए,,,
आप देखेंगे कि वे जो नाग की तरह फुफकारते हैं हमारी परम्पराओं मान्यताओं को लेकर,,एकदिन उनकी सिर्फ #केंचुलियाँ बच जाएंगी,,,
आखिर कालिया मर्दन करने वाले की संताने हैं हम,,, समुद्र पार जाकर राक्षसों का वध करने वाले #देवताओं का रक्त है हममें,,,
मित्रों को नूतनवर्ष की शुभकामनाएं, मंगलकामनाएं,,
#हिन्दूराष्ट्र विजयतां
*सूर्यदेव*