17/07/2019
"श्रीराम ही पार लगायेंगे"
तैं राम राम भजु राम रे, राम गरीब निवाज हो ।।
राम कहे सुख पाइहो, सुफल होइ सब काज ।
परम सनेही रामजी, रामहिं जनकी लाह हो ।।
जनम दीन्ह है रामजी, राम करत प्रतिपाल ।
राम राम रट लाव रे, रामहिं दीनदयाल हो ।।
मात पिता गुरु रामजी, रामहिं जिन बिसराव ।
रहो भरोसे रामके, तैं रामहिं से चित चाव हो ।।
घर बन निसु दिन रामजी, भक्तनके रखवार ।
दुखिया दूलनदासको रे, राम लगइहैं पार हो ।।
संत दूलनदासजी
( गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित ‘कल्याण –रामाङ्क’से )