17/07/2019
"श्रीराम ही पार लगायेंगे"
तैं राम राम भजु राम रे, राम गरीब निवाज हो ।।
राम कहे सुख पाइहो, सुफल होइ सब काज ।
परम सनेही रामजी, रामहिं जनकी लाह हो ।।
जनम दीन्ह है रामजी, राम करत प्रतिपाल ।
राम राम रट लाव रे, रामहिं दीनदयाल हो ।।
मात पिता गुरु रामजी, रामहिं जिन बिसराव ।
रहो भरोसे रामके, तैं रामहिं से चित चाव हो ।।
घर बन निसु दिन रामजी, भक्तनके रखवार ।
दुखिया दूलनदासको रे, राम लगइहैं पार हो ।।
संत दूलनदासजी
( गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित ‘कल्याण –रामाङ्क’से )
17/02/2019
फ़िज़िकल एक्टिविटी के ज़रिये हम डायबिटीज़ को रिवर्स करने और स्वस्थ होने में कामयाब हो सकते हैं. - http://bit.ly/2TL3BlO
23/08/2018
Chant Always Hare Krishna
Maha Mantra
25/07/2018
सामान्यत: सभी देवी-देवताओं की एक ही परिक्रमा की जाती है परंतु शास्त्रों के अनुसार अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए परिक्रमा की अलग संख्या निर्धारित की गई है।इस संबंध में धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान की परिक्रमा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और इससे हमारे पाप नष्ट होते है.सभी देवताओं की परिक्रमा के संबंध में अलग-अलग नियम बताए गए हैं.
1. - महिलाओं द्वारा "वटवृक्ष" की परिक्रमा करना सौभाग्य का सूचक है.
2. - "शिवजी" की आधी परिक्रमा की जाती है.है शिव जी की परिक्रमा करने से बुरे खयालात और अनर्गल स्वप्नों का खात्मा होता है।भगवान शिव की परिक्रमा करते समय अभिषेक की धार को न लांघे.
3. - "देवी मां" की एक परिक्रमा की जानी चाहिए.
4. - "श्रीगणेशजी और हनुमानजी" की तीन परिक्रमा करने का विधान है.गणेश जी की परिक्रमा करने से अपनी सोची हुई कई अतृप्त कामनाओं की तृप्ति होती है.गणेशजी के विराट स्वरूप व मंत्र का विधिवत ध्यान करने पर कार्य सिद्ध होने लगते हैं.
5. - "भगवान विष्णुजी" एवं उनके सभी अवतारों की चार परिक्रमा करनी चाहिए.विष्णु जी की परिक्रमा करने से हृदय परिपुष्ट और संकल्प ऊर्जावान बनकर सकारात्मक सोच की वृद्धि करते हैं.
6. - सूर्य मंदिर की सात परिक्रमा करने से मन पवित्र और आनंद से भर उठता है तथा बुरे और कड़वे विचारों का विनाश होकर श्रेष्ठ विचार पोषित होते हैं.हमें भास्कराय मंत्र का भी उच्चारण करना चाहिए, जो कई रोगों का नाशक है जैसे सूर्य को अर्घ्य देकर "ॐ भास्कराय नमः" का जाप करना.देवी के मंदिर में महज एक परिक्रमा कर नवार्ण मंत्र का ध्यान जरूरी है.इससे सँजोए गए संकल्प और लक्ष्य सकारात्मक रूप लेते हैं.
परिक्रमा के संबंध में नियम
१. - परिक्रमा शुरु करने के पश्चात बीच में रुकना नहीं चाहिए.साथ परिक्रमा वहीं खत्म करें जहां से शुरु की गई थी.ध्यान रखें कि परिक्रमा बीच में रोकने से वह पूर्ण नही मानी जाती
२. - परिक्रमा के दौरान किसी से बातचीत कतई ना करें.जिस देवता की परिक्रमा कर रहे हैं, उनका ही ध्यान करें.
३.- उलटी अर्थात बाये हाथ की तरफ परिक्रमा नहीं करनी चाहिये.
इस प्रकार देवी-देवताओं की परिक्रमा विधिवत करने से जीवन में हो रही उथल-पुथल व समस्याओं का समाधान सहज ही हो जाता है.इस प्रकार सही परिक्रमा करने से पूर्ण लाभ की प्राप्ती होती है.
22/07/2018
Common Opposites in English
An antonym is a word that has the opposite meaning of another word...