02/03/2026
॥ॐ॥
होलिका प्रह्लाद पूजन पर आराध्य देवता का आवाहन करते हुए उससे पूजा स्वीकार करने के लिए प्रार्थना
*शिशिरस्यान्तके देवि ! वसन्त-मदन-प्रिये ।*
*आगताऽसि विधानेन, पूजां में हर होलिके ॥*
अर्थात् - हे होलिके, देवि ! तुम वसन्त ऋतु और कामदेव की प्रिया हो । शिशिर ऋतु के अन्त में आई हो, मेरी स-विधि पूजा को स्वीकार करो ॥🙏
वयं राष्ट्रे जागृयाम
10/05/2022
जय श्रीराम 🙏ऐसे कर्म न करें जिससे कर्म बन्धन में बंध जाओ ..
भय लज्जा ग्लानि जिस कर्म करने से हो वह कर्म न करें..
जिस कर्म के करने से प्रसन्नता हो उत्साह बढ़े उसे करना चाहिए।
धन ऐश्वर्य से तृप्ति नहीं होती
शाश्वत शांति का एक ही मार्ग हैं मुक्ति का मार्ग .. ईश्वर शरणागति
परंतु युद्ध के मैदान में धर्म के पक्ष में खड़े हो कर युद्ध करना चाहिए ।
योगस्थ कृष्ण *
अधर्म के कारण आत्मा पर मैल का आवरण चढ़ा हुआ हैं अतः
योग के माध्यम से चित्त को निर्मल करने पर हम ईश्वर के समीप आ सकतें हैं।
यद्यपि हम लोगों से प्रेम करते हैं वह स्वार्थ वश होता हैं।
और परमेश्वर से तो निश्चित रूप से निस्वार्थ भाव से करना चाहिए।
जैसे नागा साधु वैसे तो नहीं दिखाई देते परंतु कुंभ मेले में दिखाई दे ते है ।
ईश्वर की भक्ति के लिए सतत् प्रयास करें न कि बुढ़ापे की प्रतीक्षा करें ।
नित्य सत्य विद्या का स्वाध्याय करें ।
26/01/2022
*❀━━❀꧁(((ॐ)))꧂❀━━❀*
🚩 🙏 जयहिंद 🙏 🇮🇳
मां भारती की सनातन-स्वाधीनता के लिए शीश चढ़ाने वाले अमर वीर सैनानियों को नमन् वंदन अभिनंदन ।
"गणतंत्र-दिवस" की ७३ वीं
वर्षगांठ मंगलमय हो !
🙏 वंदेमातरम् 🙏
*❀꧁꧂ _वयं राष्ट्रे जागृयाम_ ꧁꧂❀*
25/01/2022
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🌹 *सुविचार* 🌹
*"कर्म क्या हैं ? "*
हमारे विचार, हमारे शब्द, हमारे कार्य, हमारी भावनायें और हमारी गतिविधियाँ ही *"हमारे कर्म है ! "*
*"आनंद"*
एक "आभास" हैं जिसे हर कोई जगत में ढूंढ रहा हैं ।
जबकि वास्तव में "आनंद" का स्रोत हमारे भीतर ही हैं, हम बाहर खोज रहे हैं !
*"दु:ख"*
एक "अनुभव" है जो आज हर एक के पास है..!
जीवन में वही "सफल" है जिसको स्वयं पर "विश्वास" हैं ।
सत्य को कहने के लिए किसी, शपथ की आवश्यकता नहीं होती ।
नदियों को बहने के लिए किसी, पथ की आवश्यकता नहीं होती ॥
*जो जगत में अपने शुभ संकल्प के बल पर आगे बढ़ते हैं ,*
*उन्हें अपना लक्ष्य पाने के लिए, किसी रथ की आवश्यकता नहीं होती ॥*
🌞 प्रातः नमन🌞
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15/01/2022
* #ब्राह्मण_के_लक्षण*
*ज्ञानविज्ञानमास्तिकयं
ब्रह्मकर्म स्वभावजम्।( गीता)*
गीता में ब्राह्मण के लिए ज्ञान विज्ञान ( शिल्प) का जानना जरूरी शर्त है।
भारत के सार रूप इतिहास समुच्चय अध्याय ३७ में नहुष युधिष्ठिर संवाद में स्पष्ट लिखा है-
*शिल्पमध्ययनं नामवृत्त ब्राह्मणलक्षणम्।*
अर्थात- शिल्पकर्म का अध्ययन कर उसे क्रियात्मक रूप देना भी ब्राह्मण का लक्षण है। आज भ्रांति है कि केवल कर्मकांड ही ब्राह्मण का लक्षण हैं।
#वयं_राष्ट्रे_जागृयाम