05/02/2022
जिस तरह से SOG परतें खोल रही , इस स्थित में एक तैयारी करने वाले अभ्यर्थी पर क्या गुज़र रही है … इसकी व्याख्या शब्दों में करना असंभव .. मैं हर बार कहता हूँ की “माँ सरस्वती अपना ऋण नहीं रखती” इस आप्तवचन पर भी विश्वास उठने लग जाता है एक अभ्यर्थी का जब इस तरह की ख़बरें हर दिन देख रहा …
सिस्टम की कमियों को ठीक करना बहुत ज़रूरी … कड़े क़ानून ही काफ़ी नहीं बल्कि समाज द्वारा इस प्रकार के घिनौनी कार्य करने वालों का सामाजिक बहिष्कार भी ज़रूरी .. वर्तमान सच्चाई यह है कि हमें सब पता होने के बावजूद भी हम इस प्रकार के असुरों के कार्यक्रम में जाना अपनी शौभा और शान मानते है … सरकार इनकी सम्पत्ति ज़ब्त कर भी लेगी तो ये वापस बना लेंगे … उपाय पक्का होना चाहिए और ठोस होना चाहिए .. अन्यथा इस प्रकार के कांड आगे भी होते रहेंगे …
CBI जाँच की माँग करके हम सिर्फ़ मन को दिलासा ही दे सकते है .. क्योंकि कुछ सालों बाद जब रिपोर्ट आएगी तब तक लोग २ साल की नौकरी कर चुके होंगे … और ५ नयी भर्तियाँ निकालकर अभ्यर्थी को मुद्दे से हटा दिया जाएगा, बेहतर तो यह है जो निर्णय लेने है आगामी 1 महीने के भीतर लेने चाहिए अन्यथा मुद्दा राजनीति भेंट चढ़कर निष्क्रिय कर दिया जाएगा …
रीट का अभ्यर्थी हर दिन मुझे बड़ी आशा लेके पूछता है कि सर अब हमारा क्या होगा ? रीट का क्या होगा ? हम किसकी तैयारी करें ? इस प्रकार नक़ल से मेरा कैसे होगा ?? हज़ारों सवाल मस्तिष्क में विचरण कर रहे … जवाब क्या दें हम .. न हमारे हाथ में कुछ न हम नीति निर्माता न लागू करने वाले … बस एक ही जवाब देते है … बस माँ सरस्वती अपना ऋण नहीं रखेगी … काल निर्णय करेगा .. काल परिणामशील है … इस भर्ती को दिमाग़ से निकाल कर आगे की मेहनत शुरू कर …
अभ्यर्थी पुनः कहता है सर मैंने पिछले चार साल दिए है कैसे भूल जाऊँ की मैंने रीट दी ही नहीं … जवाब हमसे बन ही नहीं रहा .. फिर कहते है हम जो आपने चार साल दिए इस अवधि में ज्ञान हासिल किया .. वो ज्ञान ही तुझे ऊँचाई पर ले जाएगा एक दिन .. रीट तेरी नहीं हुई .. ज्ञान तेरा हुआ है .. और इसी ज्ञान को नींव रूप में उपयोग कर और भवन बना … आज नहीं तो कल काल निर्णय करेगा …
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गणपत सिंह राजपुरोहित
( कुछ दुराचारी प्रवृति के कारण नक़ल के दाग से कलंकित मेहनतकश लोगों के ज़िले बाड़मेर का एक अध्ययनशील विध्यार्थी )