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शैक्षिक सरोकार मंच, भारत शिक्षा के प्रति नज़रिए में तार्किक और जमीनी बदलाव हेतु संवाद की शुरुआत करना इस समूह का मकसद है।

06/06/2026
राजस्थान में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। शहरी क...
10/05/2026

राजस्थान में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। शहरी क्षेत्रों की रिक्तियां सार्वजनिक नहीं करने तथा अधूरी सूची जारी करने के आरोपों के बीच अब विभाग द्वारा शाला दर्पण पोर्टल पर लागू किए गए नए “स्टॉफ सिलेक्शन एंड पोस्टिंग मैनेजमेंट सिस्टम” ने भी विवाद को और गहरा दिया है।

प्रदेशभर के अनेक शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि विभाग ने बिना पर्याप्त तैयारी और प्रशिक्षण के इस नई ऑनलाइन व्यवस्था को आनन-फानन में लागू कर दिया, जिससे डीपीसी प्रक्रिया पारदर्शी होने के बजाय और अधिक जटिल तथा भ्रमपूर्ण बन गई है।

शिक्षकों का कहना है कि विभाग द्वारा जारी की गई रिक्तियों की सूची में कई जिले और ब्लॉक दिखाई ही नहीं दे रहे हैं। इससे शिक्षकों को यह आशंका है कि शहरी क्षेत्रों की वास्तविक रिक्तियों को सार्वजनिक नहीं किया गया है। कई शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सूची अधूरी होने के कारण उन्हें अपनी वरीयताएं सही तरीके से भरने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

इसके अलावा नए सिस्टम में तकनीकी खामियों की भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। शिक्षकों के अनुसार पोर्टल पर लगाया गया टाइमर बार-बार सत्र (Session) समाप्त कर देता है, जिसके कारण उन्हें पुनः लॉगिन करना पड़ता है। इससे विशेष रूप से दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की समस्या पहले से ही गंभीर है।

ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े शिक्षकों ने बताया कि कमजोर नेटवर्क के कारण पोर्टल बार-बार हैंग हो रहा है तथा विद्यालयों और जिलों को वरीयता क्रम में ऊपर-नीचे करने का विकल्प भी कई बार कार्य नहीं कर रहा। ऐसे में शिक्षकों को अपनी प्राथमिकताएं सही तरीके से दर्ज करने में कठिनाई हो रही है।

शिक्षकों का यह भी कहना है कि विभाग ने इस नए “स्टॉफ सिलेक्शन एंड पोस्टिंग मैनेजमेंट सिस्टम” के संचालन को लेकर किसी प्रकार का व्यापक प्रशिक्षण या डेमो उपलब्ध नहीं कराया। अधिकांश शिक्षक पहली बार इस प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन तकनीकी मार्गदर्शन के अभाव में वे असमंजस की स्थिति में हैं।

विवाद का एक बड़ा कारण यह भी है कि विभाग ने वरीयताएं अपलोड करने के लिए मात्र तीन दिन का समय दिया है, जो आज रात 12 बजे समाप्त हो रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए यह समय अत्यंत अपर्याप्त है। उनका तर्क है कि जब नई प्रणाली पहली बार लागू की गई है और तकनीकी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं, तब शिक्षकों को पर्याप्त समय और सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी।

कई शिक्षक संगठनों और कर्मचारी प्रतिनिधियों ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि वर्तमान डीपीसी काउंसलिंग प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही उन्होंने कार्यालय निदेशक माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर तथा राज्य सरकार से मांग की है कि सभी शहरी एवं ग्रामीण रिक्तियों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए तथा नियमानुसार पारदर्शी तरीके से डीपीसी प्रक्रिया दोबारा आयोजित की जाए।

शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया और वरीयता भरने की अवधि नहीं बढ़ाई, तो प्रदेशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है। शिक्षकों का कहना है कि पदोन्नति जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में तकनीकी अव्यवस्था और अपारदर्शिता से हजारों शिक्षकों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

डीपीसी काउंसलिंग पर उठा विवाद: शहरी रिक्तियां छिपाने और अधूरी सूची जारी करने के आरोप, शिक्षक संघों ने दी आंदोलन और कोर्ट...
07/05/2026

डीपीसी काउंसलिंग पर उठा विवाद: शहरी रिक्तियां छिपाने और अधूरी सूची जारी करने के आरोप, शिक्षक संघों ने दी आंदोलन और कोर्ट जाने की चेतावनी

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई डीपीसी वर्ष 2023-24 एवं वर्ष 2025-26 के अंतर्गत अर्थशास्त्र विषय की काउंसलिंग रिक्तियों की सूची को लेकर शिक्षकों और विभिन्न शिक्षक संगठनों में भारी रोष व्याप्त हो गया है। विभाग की ओर से जारी सूची में केवल चुनिंदा ग्रामीण और दूरस्थ विद्यालयों की रिक्तियां प्रदर्शित किए जाने तथा शहरी क्षेत्रों की सीटों को उजागर नहीं करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार कार्यालय निदेशक माध्यमिक शिक्षा राजस्थान, बीकानेर द्वारा जारी सूची में विभिन्न जिलों के विद्यालयों की रिक्तियां दर्शाई गई हैं। सूची में अधिकांश पद ग्रामीण या आंतरिक क्षेत्रों के विद्यालयों के दिखाई दे रहे हैं। जबकि शहर क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्यालयों की रिक्तियां सूची में नजर नहीं आ रही हैं। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि विभाग जानबूझकर शहरी क्षेत्र की रिक्तियों को सार्वजनिक नहीं कर रहा है, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि पहले से डीपीसी होकर पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे प्रधानाचार्यों और उपप्रधानाचार्यों को अभी तक समुचित पदस्थापन नहीं दिया गया, जबकि नई डीपीसी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

शिक्षक नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग ने आधी-अधूरी रिक्तियों की सूची जारी कर काउंसलिंग प्रक्रिया को जल्दबाजी में आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि वास्तविक रिक्तियों का पूर्ण विवरण सार्वजनिक किए बिना निष्पक्ष काउंसलिंग संभव नहीं है। कई जिलों में लंबे समय से रिक्त चल रहे शहरी विद्यालयों के पद सूची से गायब बताए जा रहे हैं।

विभिन्न शिक्षक संघों के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि वरिष्ठ अध्यापकों की व्याख्याता पद पर होने वाली डीपीसी में शहरी क्षेत्र की वास्तविक रिक्तियों को शामिल नहीं किया गया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। साथ ही विभाग के इस “एकतरफा और अपारदर्शी निर्णय” को न्यायालय में चुनौती देने की भी तैयारी की जा रही है।

संघ प्रतिनिधियों का कहना है कि डीपीसी प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है। यदि सभी रिक्तियां सार्वजनिक नहीं की गईं तो इससे न केवल योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होंगे बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया विवादों में घिर सकती है।

शिक्षकों ने मांग की है कि विभाग तत्काल सभी जिलों की वास्तविक और पूर्ण रिक्तियों की संशोधित सूची जारी करे, पूर्व में डीपीसी हो चुके प्रधानाचार्यों एवं उपप्रधानाचार्यों के पदस्थापन लंबित मामलों का निस्तारण करे तथा काउंसलिंग प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित करे।

19/07/2024

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