10/05/2026
राजस्थान में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। शहरी क्षेत्रों की रिक्तियां सार्वजनिक नहीं करने तथा अधूरी सूची जारी करने के आरोपों के बीच अब विभाग द्वारा शाला दर्पण पोर्टल पर लागू किए गए नए “स्टॉफ सिलेक्शन एंड पोस्टिंग मैनेजमेंट सिस्टम” ने भी विवाद को और गहरा दिया है।
प्रदेशभर के अनेक शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि विभाग ने बिना पर्याप्त तैयारी और प्रशिक्षण के इस नई ऑनलाइन व्यवस्था को आनन-फानन में लागू कर दिया, जिससे डीपीसी प्रक्रिया पारदर्शी होने के बजाय और अधिक जटिल तथा भ्रमपूर्ण बन गई है।
शिक्षकों का कहना है कि विभाग द्वारा जारी की गई रिक्तियों की सूची में कई जिले और ब्लॉक दिखाई ही नहीं दे रहे हैं। इससे शिक्षकों को यह आशंका है कि शहरी क्षेत्रों की वास्तविक रिक्तियों को सार्वजनिक नहीं किया गया है। कई शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सूची अधूरी होने के कारण उन्हें अपनी वरीयताएं सही तरीके से भरने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
इसके अलावा नए सिस्टम में तकनीकी खामियों की भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। शिक्षकों के अनुसार पोर्टल पर लगाया गया टाइमर बार-बार सत्र (Session) समाप्त कर देता है, जिसके कारण उन्हें पुनः लॉगिन करना पड़ता है। इससे विशेष रूप से दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की समस्या पहले से ही गंभीर है।
ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े शिक्षकों ने बताया कि कमजोर नेटवर्क के कारण पोर्टल बार-बार हैंग हो रहा है तथा विद्यालयों और जिलों को वरीयता क्रम में ऊपर-नीचे करने का विकल्प भी कई बार कार्य नहीं कर रहा। ऐसे में शिक्षकों को अपनी प्राथमिकताएं सही तरीके से दर्ज करने में कठिनाई हो रही है।
शिक्षकों का यह भी कहना है कि विभाग ने इस नए “स्टॉफ सिलेक्शन एंड पोस्टिंग मैनेजमेंट सिस्टम” के संचालन को लेकर किसी प्रकार का व्यापक प्रशिक्षण या डेमो उपलब्ध नहीं कराया। अधिकांश शिक्षक पहली बार इस प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन तकनीकी मार्गदर्शन के अभाव में वे असमंजस की स्थिति में हैं।
विवाद का एक बड़ा कारण यह भी है कि विभाग ने वरीयताएं अपलोड करने के लिए मात्र तीन दिन का समय दिया है, जो आज रात 12 बजे समाप्त हो रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए यह समय अत्यंत अपर्याप्त है। उनका तर्क है कि जब नई प्रणाली पहली बार लागू की गई है और तकनीकी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं, तब शिक्षकों को पर्याप्त समय और सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी।
कई शिक्षक संगठनों और कर्मचारी प्रतिनिधियों ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि वर्तमान डीपीसी काउंसलिंग प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही उन्होंने कार्यालय निदेशक माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर तथा राज्य सरकार से मांग की है कि सभी शहरी एवं ग्रामीण रिक्तियों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए तथा नियमानुसार पारदर्शी तरीके से डीपीसी प्रक्रिया दोबारा आयोजित की जाए।
शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया और वरीयता भरने की अवधि नहीं बढ़ाई, तो प्रदेशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है। शिक्षकों का कहना है कि पदोन्नति जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में तकनीकी अव्यवस्था और अपारदर्शिता से हजारों शिक्षकों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।