16/06/2023
एक शेरनी के बच्चे मिलजुल कर जंगल में सैर करने निकल जाते थे।एक सियार का बच्चा उन्हें छिप छिप कर देखा करता था।एक दिन हिम्मत कर के वह भी उछलता कूदता उनसे जा मिला और अपनी चतुर बातों का इस्तेमाल कर उनका मित्र बन गया और साथ खेलने लगा। खरगोश जैसे छोटे जानवरों का उनके साथ मिलकर श्रृगाल शावक शिकार भी कर लेता था।एक दिन खेल-खेल में सिंह शावकों के साथ यह श्रृगाल पुत्र जंगल में कुछ दूर निकल गये।यहां सबने एक छोटे हाथी को अपनी ओर आते देखा।जब हाथी कुछ पास आया तो शेर बालक हाथी पर आक्रमण को तैयार हो गए। श्रृगाल पुत्र ठिठक कर कहने लगा अरे नहीं नहीं यह हाथी है।इस पर आक्रमण बड़ी मूर्खता होगी।यह हम सबको चींटी की तरह मसल देगा,इसे छेड़ो नही चुपचाप चले जाने दो,यहकह कर उसने उन्हें आक्रमण करने से रोक दिया।श्रृगाल पुत्र चतुर था और उसकी बात सब मान गए।कुछ देर बाद जब सब घूम कर वापस लौटे तो सारा किस्सा सिहपुत्रो ने अपनी मम्मी को सुनाया और कहा कि मम्मी इस श्रृगाल पुत्र ने आज हमें मरने से बचा लिया नहीं तो वह हाथी हमें कुचल देता। सब-कुछ सुन लेने के बाद उस सियार पुत्र को अपने निकट बुलाया और कहने लगी बेटा अब तुम मेरे बच्चों का साथ छोड़ दो और अपने खेमे में लौट जाओ। यह सुन कर श्रृगाल ने शेरनी से पूछा बताओ मम्मी क्या बात हुई, मुझे मेरे दोस्तों से क्यों दूर कर रही हो।तब शेरनी नएगरज कर कहा बच्चे बात ये है कि तुम्हारे खानदान में हाथी नहीं मारे जाते और ये शेर के बच्चे है इन्हें बड़े होकर हाथी भी मारना पड़ेगा अगर इन्होंने वीरता की जगह तुम्हारी तरह खतरों से डरना सीख लिया तो ये इस बड़े जंगल के राजा बनने के योग्य नहीं रहेंगे।यह कह कर शेरनी ने श्रृगाल पुत्र को लौटा दिया अखंड भारत का सपना देखने वाले भारत जैसे बड़े देश का शासन भी कोई सियार जैसा नेता नहीं कर सकता। सियार के सर पर शेर का मुकुट शोभा नहीं देगा।इसके लिये कोई छप्पन इंच के की छाती वाला गिर का बब्बर शेर ही चाहिये। सिर्फ ऐसा शेर ही इतनी विभिन्नताओं वाले देशको एकता बद्ध और विश्व गुरु बना पाने की सामर्थ्य रखता है। वर्षो से भारत ऐसे बुद्धिजीवी अहिंसक पुत्रों के भ्रष्ट शासन में पिटते पिटते और निर्धनता का भार ढोते थक चुका है और अपने दुर्भाग्य से समझौता करना सीख गया है।अब आवश्यक है कि इन चालाक और भ्रष्ट सियारों की जगह कोई साहसी श शेर इस देश के पुनर्निर्माण और पुनर्जागरण का दायित्व सम्हाले।