01/04/2020
मैं चाहती हूँ....
कई महीनो बाद,
तुम एक रोज़ मुझे Call करो,
और वो Call, Receive ही न की जाये...
फिर तुम एक और कोशिश करो,
Call करने की,
और फिर Receive न हो...
फिर एक अरसे बाद,
तुम्हे थोड़ी फ़िक्र हो,
तुम Message करो मुझे...
वो Messages
जिसका कोई भी जवाब
अब कभी नहीं आएगा...
फिर तुम सच में
थोडे और परेशान हो जाओ...
तुम सोचो मेरे बारे में,
मेरी हर बात,
मेरी आवाज़,मेरा चेहरा...
तुम्हारे लिए मेरी फ़िक्र..
मेरे साथ बिताया हर एक लम्हा..
फिर तुम मुझे एक और Call करो,
और फिर कोई Response न मिले,
तुम फिर मुझे Message करो,
जिसका कोई जवाब न मिले..
तुम अचानक बहुत बेचैन हो जाओ,
तुम्हें सब कुछ याद आता रहे,
तुम लगातार मेरे बारे में सोचो...
तुम्हे सब कुछ याद आये..
सब कुछ...
और एक दिन जब तुम्हें नींद न आये..
बस मेरी याद आये...
तुम मुझे Social Media पर ढूँढो..
फिर Message करो..
फिर Call करो..
फिर कोई जवाब न मिले..
तब तुम Phone Gallery खोलकर..
मेरी तस्वीरें देखो...
तुम्हे गुस्सा आये,
चीढ हो, तुम्हे रोना आये..
तुम्हें एहसास हो
कि मैं किस हाल में रह रही हूँ..?
परेशान होना क्या होता है..?
टूट जाना क्या होता है...?
फिर कुछ अच्छा ही नहीं लगेगा..
तब तुम हर जगह मुझे ही ढूँढो,
बस एक आखिरी बार मुझे देखना चाहो,
मुझे सुनना चाहो..
मेरे सीने से लगना चाहो,
मुझसे लिपटकर रोना चाहो..
तुम पागल हो जाओ
उस प्यार के लिए,
जो सिर्फ और सिर्फ
मुझसे मिल सकता था..
और उस हाल में,
तुम्हे सुनने वाली
तुम्हारे माथे को चूमने वाली,
तुम्हे सीने से लगाने वाली...
"मैं"...
कहीं दूर..
किसी शहर में...
अपने कमरे में...
आधी रात को,,
वो हर एक Message पढ़कर,
तुम्हे याद करूँ...
फिर वो Message, Delete कर दूँ..
उसका कभी कोई जवाब नहीं आएगा..
तुम महसूस करो दिल का टूटना,
अकेलेपन में रोना..
किसी से कुछ न कह पाने की बेबसी..
सारे काम ज़बरदस्ती लगने लगे,
बस हर वक़्त किसी नशे की ज़रूरत लगे,
नींद की गोलियां भी
किसी काम की न रह जाएं..
हर वक़्त..
सोते जागते,मुझे याद करो..
बस मैं ही हर वक़्त
तुम्हारे दिमाग में रहूँ...
उस वक़्त...
जब ये सब हो..
शायद तुम्हे समझ आये..
कि तुम कितने गलत थे...
तुमने क्या किया..?
और तुम्हे क्या मिला था..?
और तुमने क्या खो दिया...?
तब तुम्हें समझ आएगा...
मैं किस हाल में थी...
मैं ये सब चाहती हूँ..
हाँ..सच में..
पर ये सच है..
आज भी तुम्हारी
हर Call और Message को
बड़ी मुश्किल से Ignore कर पाती हूँ..
आज भी हर WhatsApp Dp
Save कर लेती हूँ..
आज भी तुम्हे
Online देखने के लिए
Mobile देखती हूँ..
पर कभी कोई Message नहीं करती हूँ...
न ही करूँगी..
क्योंकि मैं चाहती हूँ..
तुम एक बार महसूस कर सको..
वो सब
जो मैं करती हूँ...!!!
💗
01/04/2020
मैं चाहती हूँ....
कई महीनो बाद,
तुम एक रोज़ मुझे Call करो,
और वो Call, Receive ही न की जाये...
फिर तुम एक और कोशिश करो,
Call करने की,
और फिर Receive न हो...
फिर एक अरसे बाद,
तुम्हे थोड़ी फ़िक्र हो,
तुम Message करो मुझे...
वो Messages
जिसका कोई भी जवाब
अब कभी नहीं आएगा...
फिर तुम सच में
थोडे और परेशान हो जाओ...
तुम सोचो मेरे बारे में,
मेरी हर बात,
मेरी आवाज़,मेरा चेहरा...
तुम्हारे लिए मेरी फ़िक्र..
मेरे साथ बिताया हर एक लम्हा..
फिर तुम मुझे एक और Call करो,
और फिर कोई Response न मिले,
तुम फिर मुझे Message करो,
जिसका कोई जवाब न मिले..
तुम अचानक बहुत बेचैन हो जाओ,
तुम्हें सब कुछ याद आता रहे,
तुम लगातार मेरे बारे में सोचो...
तुम्हे सब कुछ याद आये..
सब कुछ...
और एक दिन जब तुम्हें नींद न आये..
बस मेरी याद आये...
तुम मुझे Social Media पर ढूँढो..
फिर Message करो..
फिर Call करो..
फिर कोई जवाब न मिले..
तब तुम Phone Gallery खोलकर..
मेरी तस्वीरें देखो...
तुम्हे गुस्सा आये,
चीढ हो, तुम्हे रोना आये..
तुम्हें एहसास हो
कि मैं किस हाल में रह रही हूँ..?
परेशान होना क्या होता है..?
टूट जाना क्या होता है...?
फिर कुछ अच्छा ही नहीं लगेगा..
तब तुम हर जगह मुझे ही ढूँढो,
बस एक आखिरी बार मुझे देखना चाहो,
मुझे सुनना चाहो..
मेरे सीने से लगना चाहो,
मुझसे लिपटकर रोना चाहो..
तुम पागल हो जाओ
उस प्यार के लिए,
जो सिर्फ और सिर्फ
मुझसे मिल सकता था..
और उस हाल में,
तुम्हे सुनने वाली
तुम्हारे माथे को चूमने वाली,
तुम्हे सीने से लगाने वाली...
"मैं"...
कहीं दूर..
किसी शहर में...
अपने कमरे में...
आधी रात को,,
वो हर एक Message पढ़कर,
तुम्हे याद करूँ...
फिर वो Message, Delete कर दूँ..
उसका कभी कोई जवाब नहीं आएगा..
तुम महसूस करो दिल का टूटना,
अकेलेपन में रोना..
किसी से कुछ न कह पाने की बेबसी..
सारे काम ज़बरदस्ती लगने लगे,
बस हर वक़्त किसी नशे की ज़रूरत लगे,
नींद की गोलियां भी
किसी काम की न रह जाएं..
हर वक़्त..
सोते जागते,मुझे याद करो..
बस मैं ही हर वक़्त
तुम्हारे दिमाग में रहूँ...
उस वक़्त...
जब ये सब हो..
शायद तुम्हे समझ आये..
कि तुम कितने गलत थे...
तुमने क्या किया..?
और तुम्हे क्या मिला था..?
और तुमने क्या खो दिया...?
तब तुम्हें समझ आएगा...
मैं किस हाल में थी...
मैं ये सब चाहती हूँ..
हाँ..सच में..
पर ये सच है..
आज भी तुम्हारी
हर Call और Message को
बड़ी मुश्किल से Ignore कर पाती हूँ..
आज भी हर WhatsApp Dp
Save कर लेती हूँ..
आज भी तुम्हे
Online देखने के लिए
Mobile देखती हूँ..
पर कभी कोई Message नहीं करती हूँ...
न ही करूँगी..
क्योंकि मैं चाहती हूँ..
तुम एक बार महसूस कर सको..
वो सब
जो मैं करती हूँ...!!!
💗
The last मैसेज़
24/05/2019
भगवान से वरदान माँगा
कि दुश्मनों से
पीछा छुड़वा दो,
अचानक दोस्त
कम हो गए...
" जितनी भीड़ ,
बढ़ रही
ज़माने में..।
लोग उतनें ही,
अकेले होते
जा रहे हे...।
इस दुनिया के
लोग भी कितने
अजीब है ना ;
सारे खिलौने
छोड़ कर
जज़बातों से
खेलते हैं...
किनारे पर तैरने वाली
लाश को देखकर
ये समझ आया...
बोझ शरीर का नही
साँसों का था....
दोस्तो के साथ
जीने का इक मौका
दे दे ऐ खुदा...
तेरे साथ तो
हम मरने के बाद
भी रह लेंगे....
“तारीख हज़ार
साल में बस इतनी
सी बदली है…
तब दौर
पत्थर का था
अब लोग
पत्थर के हैं...
हम वक्त और
हालात के
साथ 'शौक'
बदलते हैं,,
दोस्त नही ... !!
सुबोध
18/05/2019
बाज
ऐसा पक्षी जिसे हम ईगल या शाहीन भी कहते है। जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे चिचियाना सीखते है उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर सबसे ऊंचा उड़ जाती है। पक्षियों की दुनिया में ऐसी Tough and tight training किसी भी ओर की नही होती।
मादा बाज अपने चूजे को लेकर लगभग 12 Kmt. ऊपर ले जाती है। जितने ऊपर अमूमन जहाज उड़ा करते हैं और वह दूरी तय करने में मादा बाज 7 से 9 मिनट का समय लेती है।
यहां से शुरू होती है उस नन्हें चूजे की कठिन परीक्षा। उसे अब यहां बताया जाएगा कि तू किस लिए पैदा हुआ है? तेरी दुनिया क्या है? तेरी ऊंचाई क्या है? तेरा धर्म बहुत ऊंचा है और फिर मादा बाज उसे अपने पंजों से छोड़ देती है।
धरती की ओर ऊपर से नीचे आते वक्त लगभग 2 Kmt. उस चूजे को आभास ही नहीं होता कि उसके साथ क्या हो रहा है। 7 Kmt. के अंतराल के आने के बाद उस चूजे के पंख जो कंजाइन से जकड़े होते है, वह खुलने लगते है।
लगभग 9 Kmt. आने के बाद उनके पंख पूरे खुल जाते है। यह जीवन का पहला दौर होता है जब बाज का बच्चा पंख फड़फड़ाता है।
अब धरती से वह लगभग 3000 मीटर दूर है लेकिन अभी वह उड़ना नहीं सीख पाया है। अब धरती के बिल्कुल करीब आता है जहां से वह देख सकता है उसके स्वामित्व को। अब उसकी दूरी धरती से महज 700/800 मीटर होती है लेकिन उसका पंख अभी इतना मजबूत नहीं हुआ है की वो उड़ सके।
धरती से लगभग 400/500 मीटर दूरी पर उसे अब लगता है कि उसके जीवन की शायद अंतिम यात्रा है। फिर अचानक से एक पंजा उसे आकर अपनी गिरफ्त मे लेता है और अपने पंखों के दरमियान समा लेता है।
यह पंजा उसकी मां का होता है जो ठीक उसके उपर चिपक कर उड़ रही होती है। और उसकी यह ट्रेनिंग निरंतर चलती रहती है जब तक कि वह उड़ना नहीं सीख जाता।
यह ट्रेनिंग एक कमांडो की तरह होती है।. तब जाकर दुनिया को एक बाज़ मिलता है अपने से दस गुना अधिक वजनी प्राणी का भी शिकार करता है।
हिंदी में एक कहावत है... *"बाज़ के बच्चे मुँडेर पर नही उड़ते।"*
बेशक अपने बच्चों को अपने से चिपका कर रखिए पर उसे दुनियां की मुश्किलों से रूबरू कराइए, उन्हें लड़ना सिखाइए। बिना आवश्यकता के भी संघर्ष करना सिखाइए।
वर्तमान समय की अनन्त सुख सुविधाओं की आदत व अभिवावकों के बेहिसाब लाड़ प्यार ने मिलकर, आपके बच्चों को "ब्रायलर मुर्गे" जैसा बना दिया है जिसके पास मजबूत टंगड़ी तो है पर चल नही सकता। वजनदार पंख तो है पर उड़ नही सकता क्योंकि..
_"गमले के पौधे और जंगल के पौधे में बहुत फ़र्क होता है।"
प्रेरणा दायक प्रसंग
13/05/2019
*मुख्य अतिथि*👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻
*प्रस्तुत है वो कहानी जो मेरे अंतर्मन को छू गई* (साभार. . . जैसी प्राप्त हुई ) -
*शहर के एक अन्तरराष्ट्रीय प्रसिद्धि के विद्यालय के बग़ीचे में तेज़ धूप और गर्मी की परवाह किये बिना, बड़ी लग्न से पेड़ - पौधों की काट छाँट में लगा था कि तभी विद्यालय के चपरासी की आवाज़ सुनाई दी, "गंगादास! तुझे प्रधानाचार्या जी तुरंत बुला रही हैं।"*
गंगादास को आख़िरी के पांँच शब्दों में काफ़ी तेज़ी महसूस हुई और उसे लगा कि कोई महत्त्वपूर्ण बात हुई है जिसकी वज़ह से प्रधानाचार्या जी ने उसे तुरंत ही बुलाया है।
शीघ्रता से उठा, अपने हाथों को धोकर साफ़ किया और चल दिया, द्रुत गति से प्रधानाचार्या के कार्यालय की ओर।
उसे प्रधानाचार्या महोदया के कार्यालय की दूरी मीलों की लग रही थी जो ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही थी। उसकी हृदयगति बढ़ गई थी। सोच रहा था कि उससे क्या ग़लत हो गया जो आज उसको प्रधानाचार्या महोदया ने तुरंत ही अपने कार्यालय में आने को कहा।
वह एक ईमानदार कर्मचारी था और अपने कार्य को पूरी निष्ठा से पूर्ण करता था। पता नहीं क्या ग़लती हो गयी। वह इसी चिंता के साथ प्रधानाचार्या के कार्यालय पहुँचा......
"मैडम, क्या मैं अंदर आ जाऊँ? आपने मुझे बुलाया था।"
"हाँ। आओ और यह देखो" प्रधानाचार्या महोदया की आवाज़ में कड़की थी और उनकी उंगली एक पेपर पर इशारा कर रही थी।
"पढ़ो इसे" प्रधानाचार्या ने आदेश दिया।
"मैं, मैं, मैडम! मैं तो इंग्लिश पढ़ना नहीं जानता मैडम!" गंगादास ने घबरा कर उत्तर दिया।
*"मैं आपसे क्षमा चाहता हूँ मैडम यदि कोई गलती हो गयी हो तो।* मैं आपका और विद्यालय का पहले से ही बहुत ऋणी हूँ। क्योंकि आपने मेरी बिटिया को इस विद्यालय में निःशुल्क पढ़ने की इज़ाज़त दी। मुझे कृपया एक और मौक़ा दें मेरी कोई ग़लती हुई है तो सुधारने का। मैं आप का सदैव ऋणी रहूंँगा।" गंगादास बिना रुके घबरा कर बोलता चला जा रहा था।
उसे प्रधानाचार्या ने टोका "तुम बिना वज़ह अनुमान लगा रहे हो। थोड़ा इंतज़ार करो, मैं तुम्हारी बिटिया की कक्षा-अध्यापिका को बुलाती हूँ।"
वे पल जब तक उसकी बिटिया की कक्षा-अध्यापिका प्रधानाचार्या के कार्यालय में पहुँची बहुत ही लंबे हो गए थे गंगादास के लिए। सोच रहा था कि क्या उसकी बिटिया से कोई ग़लती हो गयी, कहीं मैडम उसे विद्यालय से निकाल तो नहीं रहीं। उसकी चिंता और बढ़ गयी थी।
कक्षा-अध्यापिका के पहुँचते ही प्रधानाचार्या महोदया ने कहा, "हमने तुम्हारी बिटिया की प्रतिभा को देखकर और परख कर ही उसे अपने विद्यालय में पढ़ने की अनुमति दी थी। अब ये मैडम इस पेपर में जो लिखा है उसे पढ़कर और हिंदी में तुम्हें सुनाएँगी, ग़ौर से सुनो।"
कक्षा-अध्यापिका ने पेपर को पढ़ना शुरू करने से पहले बताया, "आज मातृ दिवस था और आज मैंने कक्षा में सभी बच्चों को अपनी अपनी माँ के बारे में एक लेख लिखने को कहा। तुम्हारी बिटिया ने जो लिखा उसे सुनो।"
उसके बाद कक्षा- अध्यापिका ने पेपर पढ़ना शुरू किया।
"मैं एक गाँव में रहती थी, एक ऐसा गाँव जहाँ शिक्षा और चिकित्सा की सुविधाओं का आज भी अभाव है। चिकित्सक के अभाव में कितनी ही माँयें दम तोड़ देती हैं बच्चों के जन्म के समय। मेरी माँ भी उनमें से एक थीं। उन्होंने मुझे छुआ भी नहीं कि चल बसीं। मेरे पिता ही वे पहले व्यक्ति थे मेरे परिवार के जिन्होंने मुझे गोद में लिया। पर सच कहूँ तो मेरे परिवार के वे अकेले व्यक्ति थे जिन्होंने मुझे गोद में उठाया था। बाक़ी की नज़र में तो मैं अपनी माँ को खा गई थी। मेरे पिताजी ने मुझे माँ का प्यार दिया। मेरे दादा - दादी चाहते थे कि मेरे पिताजी दुबारा विवाह करके एक पोते को इस दुनिया में लायें ताकि उनका वंश आगे चल सके। परंतु मेरे पिताजी ने उनकी
एक न सुनी और दुबारा विवाह करने से मना कर दिया। इस वज़ह से मेरे दादा - दादीजी ने उनको अपने से अलग कर दिया और पिताजी सब कुछ, ज़मीन, खेती बाड़ी, घर सुविधा आदि छोड़ कर मुझे साथ लेकर शहर चले आये और इसी विद्यालय में माली का कार्य करने लगे। मुझे बहुत ही लाड़ प्यार से बड़ा करने लगे। मेरी ज़रूरतों पर माँ की तरह हर पल उनका ध्यान रहता है।"
"आज मुझे समझ आता है कि वे क्यों हर उस चीज़ को जो मुझे पसंद थी ये कह कर खाने से मना कर देते थे कि वह उन्हें पसंद नहीं है, क्योंकि वह आख़िरी टुकड़ा होती थी। आज मुझे बड़ा होने पर उनके इस त्याग के महत्त्व पता चला।"
"मेरे पिता ने अपनी क्षमताओं में मेरी हर प्रकार की सुख - सुविधाओं का ध्यान रखा और मेरे विद्यालय ने उनको यह सबसे बड़ा पुरस्कार दिया जो मुझे यहाँ निःशुल्क पढ़ने की अनुमति मिली। उस दिन मेरे पिता की ख़ुशी का कोई ठिकाना न था।"
"यदि माँ, प्यार और देखभाल करने का नाम है तो मेरी माँ मेरे पिताजी हैं।"
"यदि दयाभाव, माँ को परिभाषित करता है तो मेरे पिताजी उस परिभाषा के हिसाब से पूरी तरह मेरी माँ हैं।"
"यदि त्याग, माँ को परिभाषित करता है तो मेरे पिताजी इस वर्ग में भी सर्वोच्च स्थान पर हैं।"
"यदि संक्षेप में कहूँ कि प्यार, देखभाल, दयाभाव और त्याग माँ की पहचान है तो मेरे पिताजी उस पहचान पर खरे उतरते हैं और मेरे पिताजी विश्व की सबसे अच्छी माँ हैं।"
आज मातृ दिवस पर मैं अपने पिताजी को शुभकामनाएँ दूँगी और कहूँगी कि आप संसार के सबसे अच्छे पालक हैं। बहुत गर्व से कहूँगी कि ये जो हमारे विद्यालय के परिश्रमी माली हैं, मेरे पिता हैं।"
"मैं जानती हूँ कि मैं आज की लेखन परीक्षा में असफल हो जाऊँगी। क्योंकि मुझे माँ पर लेख लिखना था और मैंने पिता पर लिखा,पर यह बहुत ही छोटी सी क़ीमत होगी उस सब की जो मेरे पिता ने मेरे लिए किया। धन्यवाद"।
आख़िरी शब्द पढ़ते - पढ़ते अध्यापिका का गला भर आया था और प्रधानाचार्या के कार्यालय में शांति छा गयी थी।
इस शांति में केवल गंगादास के सिसकने की आवाज़ सुनाई दे रही थी। बग़ीचे में धूप की गर्मी उसकी कमीज़ को गीला न कर सकी पर उस पेपर पर बिटिया के लिखे शब्दों ने उस कमीज़ को पिता के आँसुओं से गीला कर दिया था। वह केवल हाथ जोड़ कर वहाँ खड़ा था।
उसने उस पेपर को अध्यापिका से लिया और अपने हृदय से लगाया और रो पड़ा।
प्रधानाचार्या ने खड़े होकर उसे एक कुर्सी पर बैठाया और एक गिलास पानी दिया तथा कहा, "गंगादास तुम्हारी बिटिया को इस लेख के लिए पूरे 10/10 नम्बर दिए गए है। यह लेख मेरे अब तक के पूरे विद्यालय जीवन का सबसे अच्छा मातृ दिवस का लेख है। हम कल मातृ दिवस अपने विद्यालय में बड़े ज़ोर - शोर से मना रहे हैं। इस दिवस पर विद्यालय एक बहुत बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है। विद्यालय की प्रबंधक कमेटी ने आपको इस कार्यक्रम का मुख्य अतिथि बनाने का निर्णय लिया है। यह सम्मान होगा उस प्यार, देखभाल, दयाभाव और त्याग का जो एक आदमी अपने बच्चे के पालन के लिए कर सकता है। यह सिद्ध करता है कि आपको एक औरत होना आवश्यक नहीं है एक पालक बनने के लिए। साथ ही यह अनुशंषा करता है उस विश्वाश का जो विश्वास आपकी बेटी ने आप पर दिखाया। हमें गर्व है कि संसार का सबसे अच्छा पिता हमारे विद्यालय में पढ़ने वाली बच्ची का पिता है जैसा कि आपकी बिटिया ने अपने लेख में लिखा। गंगादास हमें गर्व है कि आप एक माली हैं और सच्चे अर्थों में माली की तरह न केवल विद्यालय के बग़ीचे के फूलों की देखभाल की बल्कि अपने इस घर के फूल को भी सदा ख़ुशबूदार बनाकर रखा जिसकी ख़ुशबू से हमारा विद्यालय महक उठा। तो क्या आप हमारे विद्यालय के इस मातृ दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बनेंगे?"
रो पड़ा गंगादास और दौड़ कर बिटिया की कक्षा के बाहर से आँसू भरी आँखों से निहारता रहा , अपनी प्यारी बिटिया को।
*संसार की समस्त प्यारी - प्यारी बेटियों को समर्पित l*
🌷🍃⛳😊💐
27/02/2019
RTE की धारा 12 के तहत निजी स्कूलों में 25% सीट गरीब बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं !
पता है ये 25% बच्चे कौन होते हैं ? ये सभी बच्चे वो होते हैं जो सरकारी स्कूल में होने चाहिए या होते हैं ! सरकारी स्कूलों से हर साल बच्चों को निजी स्कूलों में स्थानांतरित किया जा रहा है ! इन सभी बच्चों की मोटी फीस सरकार इन निजी स्कूल संचालकों को देती है,दरअसल पूरा का पूरा खेल कमीशन का है ! यही वजह है कि सरकारी स्कूलों में दिनोदिन बच्चे कम होते जा रहे हैं ! मध्यप्रदेश की बात करें तो आज हजारों स्कूल बच्चों की कमी के चलते बंद होने के स्तिथि में हैं,हजारों स्कूलों को मर्ज किया जा रहा है ! सच तो यही है कि सरकार भी चाहती हैं कि सरकार स्कूलों को निजी हाथों में सौपकर इस जिम्मेदारी से खुद को अलग किया जाए ! कमीशन तो आती रहेगी !
आप लोगों ने अतिथि शिक्षकों को नियमितीकरण या पेमेंट बढ़ाने की मांग,अध्यापकों को विभिन्न माँगों जैसे छठवें वेतनमान, सातवें वेतनमान आदि को लेकर धरना प्रदर्शन, आंदोलन आदि करते देखा हो,पर कभी किसी को इन बंद होने के कगार पर खड़े स्कूलों को बचाने के लिए आंदोलन करते नहीं देखा होगा ! दरअसल फल खाना सभी चाहते हैं,पर वृक्ष की सूख रही जड़ों को कोई बचाना नहीं चाहते !
Cp
कुमार अमलेश
24/02/2019
जय हिन्द
जय हिन्द की सेना
19/10/2018
आपको ओर आपके परिवार को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं
12/07/2017
देश के सच्चे सपूत अपने
मिशन पर
आओ आप हम सब अपना
कर्तव्य निभाये
जय हिंद
जय हिंद की सेना
मेरा आपको
सादर नमन
जय हिंद
16/06/2017
🙏 *अनिवार्य रूप से*
*सभी पर लागू हों* 🙏
जब कर्मचारियों, अधिकारियों एवं शिक्षकों को पचास वर्ष की उम्र में निकाले जाने पर सरकार द्वारा विचार किया जा सकता हैं तो क्यों नहीं निम्नलिखित विचार जनहित में किया जाय ।
*1-* नेताओं को भी पचास साल की उम्र में रिटायर कर दिया जाय ?
*2-* क्यों नहीं नेताओं को भी पुरानी पेंशन से वंचित किया जाय ?
*3-* क्यों नहीं नेताओं को विधानसभा सदस्य बनने के लिए स्नातक व लोकसभा सदस्य बनने के लिए परास्नातक होना अनिवार्य किया जाय ?
*4-* क्यों नहीं कानून मंत्री बनने के लिए LAW की डिग्री अनिवार्य हो, स्वास्थ्य मंत्री बनने के लिये MBBS की डिग्री अनिवार्य हो, समाज कल्याण के लिए समाजशास्त्र की डिग्री अनिवार्य हो, मानव संसाधन के लिए M.Ed. की डिग्री अनिवार्य हो, वित्त मंत्री को अर्थशास्त्री होना अनिवार्य हो इसी प्रकार सभी मंत्रीयों की योग्यता का मानक निर्धारित किया जाय ।
*5-* क्यों नहीं फ्री का डीजल, पेट्रोल, फोन की सुविधा, हवाई सुविधा, रेल सुविधा सहित तमाम सुविधाओं में जिसमें प्रतिवर्ष अरबों रूपये खर्च होता हैं उसमें कटौती की जाय ।
*6-* क्यों नहीं सभी नेताओं के खाते सार्वजनिक किये जाय ।
*7-* क्यों नहीं नेताओं की पुरानी पेंशन,मोटी तनख्वाह,सब्सिडी द्वारा भोजन बंद किया जाय जिसपर सरकार प्रतिवर्ष अरबों रूपये पानी की तरह खर्च करती हैं ।
*8-* क्यों नहीं नेताओं के पद से हटने के बाद फ्री मेडिकल सुविधा बंद किया जाय जिस पर देश का करोड़ों रूपये नुकसान होता हैं ।
*9-* क्या 50 साल का कर्मचारी बूढ़ा और 50 साल का नेता जवान होता हैं ? यह कौन सा मानक हैं ? नेताओं के पास क्या राहु व केतु वाला अमृत कलश हैं क्या ? जिससें यह पचास की उम्र में युवा नेता हो जाते हैं ?
*देश को कितना गर्त में आप नेताजी लोग ले जायेंगे?* जब स्वयं की तनख्वाह लाखों में करते हैं तो सभी पार्टियों के कोई भी नेता विरोध नहीं करता सभी मिलकर मेज थपथपा देते हैं । क्या देश पर आप की तनख्वाह की बेतहाशा वृद्धि से अरबों रूपये का भार नहीं पडता ? गजब की सोच हैं आप नेताओं की जब कर्मचारियों, अधिकारियों, शिक्षकों को पचास वर्ष में हटाने पर विचार किया जा सकता तो यह उपरोक्त बिन्दुओं पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता हैं !!
मोदी जी एक बार विचार करे
*"जनहित में शेयर जरूर करें !"*
सुबोध
11/05/2017
भारत को अग्रणी देश बनाना हो तो
विचार करो
जब कर्मचारियों,अधिकारियों एवं शिक्षकों को पचास वर्ष की उम्र में निकाले जाने पर सरकार द्वारा विचार किया जा सकता हैं तो क्यों नहीं निम्नलिखित विचार जनहित में किया जाय ।
1-नेताओं को भी पचास साल की उम्र में रिटायर कर दिया जाय ?
2-क्यों नहीं नेताओं को भी पुरानी पेंशन से वंचित किया जाय ?
3-क्यों नहीं नेताओं को विधानसभा सदस्य बनने के लिए स्नातक व लोकसभा सदस्य बनने के लिए परास्नातक होना अनिवार्य किया जाय ?
4- क्यों नहीं कानून मंत्री बनने के लिए LAW की डिग्री अनिवार्य हो,स्वास्थ्य मंत्री बनने के MBBS की डिग्री अनिवार्य हो,समाज कल्याण के लिए समाजशास्त्र की डिग्री अनिवार्य हो,मानव संसाधन के लिए M.ED की डिग्री अनिवार्य हो,वित्त मंत्री के अर्थशास्त्री होना अनिवार्य हो इसी प्रकार सभी मंत्रीयों की योग्यता का मानक निर्धारित किया जाय ।
5- क्यों नहीं फ्री का डीजल,पेट्रोल,फोन की सुविधा,हवाई सुविधा,रेल सुविधा सहित तमाम सुविधाओं में जिसमें प्रतिवर्ष अरबों रूपये खर्च होता हैं उसमें कटौती की जाय ।
6-क्यों नहीं सभी नेताओं के खाते सार्वजनिक किये जाय ।
7-क्यों नहीं नेताओं की पुरानी पेंशन,मोटी तनख्वाह,सब्सिडी द्वारा भोजन बंद किया जाय जिसपर सरकार प्रतिवर्ष अरबों रूपये पानी की तरह खर्च करती हैं ।
8-क्यों नहीं नेताओं के पद से हटने के बाद फ्री मेडिकल सुविधा बंद किया जाय जिस पर देश का करोड़ों रूपये नुकसान होता हैं ।
9-क्या 50 साल का कर्मचारी बूढ़ा और 50 साल का नेता जवान होता हैं ?यह कौन सा मानक हैं ?नेताओं के पास क्या राहु व केतु वाला अमृत कलश हैं क्या ?जिससें यह पचास की उम्र में युवा नेता हो जाते हैं ?
देश को कितना गर्त में आप नेताजी लोग ले जायेंगे?जब स्वयं का तनख्वाह लाखों में करते हैं तो सभी पार्टियों के कोई भी नेता विरोध नहीं करता सभी मिलकर मेज थपथपा देते हैं ।क्या देश पर आप की तनख्वाह की बेतहाशा वृद्धि से अरबों रूपये का भार नहीं पडता ?गजब की सोच हैं आप नेताओं की जब कर्मचारियों,अधिकारियों,शिक्षकों को पचास वर्ष में हटाने पर विचार किया जा सकता तो यह उपरोक्त चीजें क्यों नहीं किया जा सकता हैं ।