26/05/2026
Yaum e Arfa
اقامتِ دین #JIHJABALPUR #jihjabalpur
26/05/2026
Yaum e Arfa
#अरफ़ा
26/05/2026
21/05/2026
#अरफ़ा के दिन #रोज़ा रखने की बहुत बड़ी फ़ज़ीलत है। इस हदीस में Muhammad ने बताया कि जो इंसान 9 #ज़िलहिज्जा यानी यौमे अरफ़ा का रोज़ा रखता है, अल्लाह तआला उसके पिछले एक साल और आने वाले एक साल के छोटे गुनाहों को माफ़ फ़रमा देता है।
इसका मतलब यह नहीं कि इंसान जानबूझकर #गुनाह करता रहे, बल्कि यह अल्लाह की रहमत और इनाम है उन लोगों के लिए जो ईमान और सच्ची नीयत के साथ रोज़ा रखते हैं।
कुछ अहम बातें:
यहाँ ज़्यादातर “छोटे गुनाह” (सगीरा गुनाह) मुराद होते हैं। बड़े #गुनाहों (कबीरा गुनाह) के लिए सच्ची तौबा ज़रूरी है।
जो लोग हज पर हों और मैदान-ए-अरफ़ात में मौजूद हों, उनके लिए रोज़ा न रखना बेहतर माना गया है, ताकि वो दुआ और इबादत अच्छी तरह कर सकें।
यह रोज़ा गैर-हाजियों के लिए बहुत ज़्यादा अफ़ज़ल माना गया है।
यह फ़ज़ीलत Sahih Muslim की हदीस में भी आई है, जहाँ नबी ﷺ ने फ़रमाया कि: “मुझे अल्लाह से उम्मीद है कि अरफ़ा के दिन का रोज़ा एक साल पहले और एक साल बाद के गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन जाएगा।”
नौजवान नस्ल को बरबाद होने से बचाए
ज़िल-हिज्जा के पहले अशरे की फ़ज़ीलत