09/02/2013
स्वामी विवेकानंद जी ने कहा एक समय था, जब ग्रीक-सेनाओं के सैनिक संचलन के पदाघात से धरती कांपा करती थी। किन्तु, पृथ्वीतल पर से उसका अस्तित्व मिट गया। अब सुनाने के लिए उसकी एक गाथा भी शेष नहीं है। ग्रीकों का वह गौरव-सूर्य सदा-सर्वदा के लिए अस्त हो गया। एक समय था जब संसार की प्रत्येक उपभोग्य वस्तु पर रोम का श्येनांकित ध्वज उड़ा करता था। सर्वत्र रोम की प्रभुता का दबदबा था और वह मानवता के सर पर सवार थी। रोम का नाम लेते ही पृथ्वी कांप जाती थी, परन्तु आज उसी रोम का कैपिटोलिन पर्वत-खण्डहरों का ढेर बना हुआ है, जहां पहले सीजर राज्य करते थे वहीं आज मकड़ियां जाला बुनती हैं।
ऐसा इसलिए हुआ क्योकि उन्होंने केवल भोतिकता को अपना लिया ,संस्कृति को भूल गए,स्वामी विवेकानंद जी आगे कहतें है धर्म भारत का प्राण,धर्म के बिना भारत का कोई अस्तित्व नहीं है
संघ ने अपनी कोई विचारधारा नहीं बनायी, वह उन्हीं विचारों को लेकर चला जिसे लोग सदियों से मानते थे, समझते थे
इसलिए संघ कहता है “भगवान् श्रीराम का भव्य मंदिर यह केवल हमारा नहीं समूचे भारत की अस्मिता का प्रश्न है'' राम मंदिर का निर्माण देश का नव निर्माण है , जिस दिन विकास की आंधी में हम अपनी संस्कृति को भूल जायगे उस दिन हम भी मिट जायेगे
इसलिए संघ कहता है केवल भोतिक विकास नहीं सांस्कृति विकास भी करो
इसलिए संघ कहता है अब दिल्ली में वही बैठेंगे जो अयोध्या में राम मंदिर बनाएंगे ,अयोध्या हमारी सांस्कृति, आध्यात्मिक विरासत है ,
जिसने अपने पूर्वजों को इतिहास ,गैरवशाली पंम्पराओ ,संस्कृति को भुलाया उसे इस धरती से मिटना पड़ा है...........