2009 मेट्रो ट्रेन का सपना इस शहर को दिखाया गया था ,2012 में मेट्रो प्रॉजेक्टअस्तित्व में आया और बताया कि पाँच साल में शहर में मेट्रो ट्रेन चलने लगेगी , शहर में मेट्रो चलाने का उद्देश्य क्या है , इस पर कोई चर्चा नहीं होती । बस कही से भी मेट्रो को चला दो , और इतिश्री कर लो ।
साल भर पहले गांधी नगर से टीसीएस चौराहे तक मेट्रो चला कर शहर की जनता को संतुष्ट किया गया कि मेट्रो ट्रेन चलती भी है , फिर ट्रेन को कपड़े से ढक कर रख दिया ।
हम भी मेहमान को ले जाकर दिखा देते है , कि देखो, ये वाली मेट्रो , पीली कलर की हमारे यहाँ से चलेगी , एक दिन चलाकर भी दिखाई थी ।
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10/12/2018
ईशा अम्बानी की महिला संगीत कार्यक्रम में बॉलीवुड और हॉलीवुड के बड़े कलाकारों ने बिखेरे जलवे .. | C भारत के सबसे अमीर शख़्स मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी 12 दिसंबर को पीरामल समूह के चेयरमैन अजय पीरामल के बेटे आनंद .....
01/03/2018
जब पत्रकार कुलदीप नैयर लाल बहादुर शास्त्री का संदेश लेकर मोरारजी देसाई के पास गए | Campus-live भारत में राजनीतिक रूप से महत्वाकांक्षी होना बहुत अच्छा नहीं माना जाता है, कम से कम सार्वजनिक रूप से तो हरगिज़ नहीं. ...
01/05/2017
क्रॉप टॉप के साथ पहनें साड़ी , पाएं फ्यूज़न लुक ! क्रॉप टॉप पिछले साल से ट्रेंड में है. इसे आप सिर्फ वेस्टर्न वेयर की तरह ही नहीं, बल्कि इंडियन वेयर की तरह भी पहन सकती हैं. साड़ी या लहंगे के साथ ब्लाउज़ की जगह क्रॉप टॉप कैरी करें. इसी तरह आप धोती …
29/12/2016
www.campus-live.in Chawanni chal gayee...It is a satire film acted by new youn artist.
must watch!!!!!!!!!!!!!!
30/01/2016
IPS Academy Informal area 360 Degree Video. It has everything to enjoy in IPS Academy whether to relax or do any discussions, this is the campus greenery area of IPS Academy.
लगता है तथाकथित मीडिया के भूखे सियारों ने असहिषणुता की रोटी लेकर देश की जनता को अपना वजूद बताना शुरू कर दिया है ....बड़ी बिचित्र बात है ...कोई भी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में थोड़ी सी सुरसुरी असहिष्णुता की छोड़ देता है ,और मीडिया उसको लेकर कूदने लगती है...फिर देश की भोली जनता उसका विरोध करती है ...और ये सियार फिर जंगले की और लौट जाते है ....भाई लोगो समझो ये मुद्दा सहिष्णुता या असहिष्णुता का नही है ..ये तो देश की जनता को मुर्ख बनाने का है ..कि देखो बिना कोई वजह के भी इस देश की जनता को शब्दों के जाल में फसाया जा सकता है ....... अरे ये सम्मान लौटने वाले तो थूक के चाटने वाले लोग है ..कहा इनके चक्कर में पड़कर अपना वक्त
बर्बाद करते हो .....रुको अभी फिर कोई मुद्दा ढूँढ रहे है ...
परमाणु बम की परिकल्पना सबसे पहले अंग्रेज़ी भाषा के साहित्यकार एचजी वेल्स ने की
Posted by campus-live on July 10th, 2015
यही सच है. साल 1914 में एचजी वेल्स की किताब ‘द वर्ल्ड सेट फ़्री’ प्रकाशित हुई. इसमें उन्होंने यूरेनियम से बनने वाले एक ऐसे बम की परिकल्पना की थी जो अनंत काल तक फटता ही रहेगा. कल्पना की गई थी कि इस बम की ताक़त भी असीमित होगी.
atom bomb
हवाई जहाज़ से बमबारी की कल्पना
इतना ही नहीं. वेल्स ने तो यहां तक सोच लिया था कि इसे हवाई जहाज़ से ज़मीन पर गिराया जाएगा.
पर वेल्स ने शायद यह नहीं सोचा था कि उनके एक दोस्त विंस्टन चर्चिल और भौतिक शास्त्र के एक वैज्ञानिक लियो स्ज़िलर्ड उनकी परिकल्पना को सच्चाई में बदल देंगे.
उस समय यह माना जाता था कि ठोस पदार्थ बहुत ही छोटे छोटे कणों से बना होता है. साइंस म्यूज़ियम के क्यूरेटर एंड्र्यू नैहम का कहना है, “जब यह साफ़ हो गया कि रदरफ़ोर्ड के परमाणु में सघन न्यूक्लीयस है, तो यह समझा गया कि वह एक स्प्रिंग की तरह है.”
एचजी वेल्स नई नई खोजों से काफ़ी प्रभावित थे. यह भी देखा गया कि वे आने वाले आविष्कारों के बारे में पहले से ही अनुमान लगा लेते थे, जो कई बार सही साबित होते थे.
वेल्स-चर्चिल मुलाक़ात
ब्रिटिश राजनेता चर्चिल ने एचजी वेल्स के नोट्स पढ़े और बहुत ही प्रभावित हुए. वे ख़ुद भी साहित्यकार थे. उन्होंने वेल्स से मुलाक़ात भी की थी.
नारंगी के आकार के परमाणु बम के बारे में सबसे पहले सोचने का श्रेय ग्राहम फार्मलो को है. लेकिन यह एचजी वेल्स की किताब से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था.
ब्रितानी वैज्ञानिकों ने 1932 में परमाणु को विखंडित करने में कामयाबी हासिल कर ली, हालांकि उस समय भी ज़्यादातर लोग यह मानते थे कि इससे बहुत बड़े पैमाने पर ऊर्जा नहीं निकल सकती है.
उसी साल हंगरी के वैज्ञानिक लियो स्ज़िलर्ड ने वेल्स की किताब ‘द वर्ल्ड सेट फ़्री’ पढ़ी थी. उन्होंने इस पर यक़ीन किया कि परमाणु के विखंडन से बहुत बड़े पैमाने पर ऊर्जा निकल सकती है. उन्होंने इस पर एक लेख भी लिखा, जो वेल्स के विचारों के बहुत ही नज़दीक था.
02/02/2015
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