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21/10/2025
27/01/2018

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BIOCAN 19/09/2017

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Photos 24/08/2016
29/03/2016

कोलेस्ट्रोल के लक्षण (High cholesterol lakshan / Symtoms)–

वैसे इसके लिए आपको कुछ खास लक्षण अपने शरीर में समझ नहीं आयेंगे, लेकिन इसके होने से दूसरी बीमारी होने के चांस बढ़ जाते है| कोलेस्ट्रोल बढ़ने से आपको

हाई ब्लडप्रेशर
हार्ट अटैक
डायबटिक
का खतरा बढ़ जाता है| डॉक्टर सलाह देते है कि 20 साल की उम्र के बाद से हमें हर पांच साल में कोलेस्ट्रोल की जांच कराना चाहिए| इसके लिए आपको अपना ब्लड टेस्ट करवाना होगा|

उच्च कोलेस्ट्रोल से होने वाली अन्य बीमारी –

हाई ब्लडप्रेशर
शुगर
किडनी से जुडी परेशानी
लीवर की परेशानी
दिल से जुडी परेशानी
उच्च कोलेस्ट्रोल कम करने के इलाज (Cholesterol kam karne ke tarike)

हमें शरीर को चुस्त तंदुरुस्त बनाने के लिए जरूरत है कि हम उसका ख्याल रखे, कोलेस्ट्रोल को control में रखें उसे बढ़ने ना दें| इसे हम बिना दवाई के बस घर पर थोड़े से प्रयास के साथ कम कर सकते है|

धना – एक रिसर्च में पता चला था कि धना कोलेस्ट्रोल को बहुत हद तक कम करने में सहायक है साथ ही ये शुगर भी कंट्रोल करता है|
एक कप पानी में 2 चम्मच धनिया पावडर को डाल कर उबालें|
अब इसे छान लें, अब इसे में दिन में 1-2 बार पियें|
इसके अलावा धना को ½ कप पानी में रात भर भिगोयें सुबह खाली पेट इसे पियें| कुछ दिन में फर्क समझ आएगा|
प्याज – लाल प्याज कोलेस्ट्रोल कम करने में सहायक होती है| एक रिसर्च के अनुसार ये ख़राब कोलेस्ट्रोल को खत्म कर अच्छे कोलेस्ट्रोल को बढाता है|
एक चम्मच प्याज के रस में शहद डाल कर रोज पियें|
इसके अलावा एक कप छाछ में एक प्याज को बारीक़ काट काट कर मिलाएं, इसमें नमक व काल मिर्च डाल कर रोज पियें|
प्याज, लहसून व अदरक को अपने खाने में शामिल करें|
आवला – आवला भी कोलेस्ट्रोल control में सहायक है, जो हमारे घर में आसानी से मिल जायेगा|
एक चम्मच आवला पाउडर को 1 गिलास गुनगुने पानी में डाल कर पियें|
इसे आप रोज सुबह खली पेट पियें| बहुत जल्द फर्क समझ आएगा|
संतरे का जूस – संतरा में विटामिन c होता है जो ख़राब कोलेस्ट्रोल को हटाने में बहुत मददगार है| रोज 2-3 ग्लास संतरे का जूस पिने से आपके शरीर में कोलेस्ट्रोल बहुत जल्दी कंट्रोल हो जायेगा| जूस नहीं तो आप संतरा आपनी डाइट में शामिल करें|
नारियल का तेल – नारियल तेल शरीर में वसा को कम करता है जिससे कोलेस्ट्रोल नहीं बढ़ता| आर्गेनिक नारियल तेल को अपनी डाइट में शामिल करें, 1-2 चम्मच रोज खाएं|
ओट्स – ओट्स हर तरह से बेहतर है हमारे शरीर के लिए, ये शरीर में कोलेस्ट्रोल को कम करता है, वजन कंट्रोल रहता है| मैंने आपको ओट्स से बनी रेसिपी भी शेयर की है, जिससे आप इसे विभिन्न तरीके से अपने खाने में शामिल कर सकते है|
मेवा – मेवा को अपने खाने में शामिल करें, इसमें फाइबर अधिक होता है जो शरीर के लिए फायदेमंद है| 1 मुट्ठी मिले जुले मेवा खाने में शामिल करें, लेकिन ध्यान रखें इससे अधिक ना लें| इसमें प्राकतिक तेल होता है जो शरीर की बहुत सी जरूरतों को पूरा करता है|
कसरत (excercise) – रोज सुबह व्यायाम करें, दिन में 30 min चहलकदमी की आदत डालें|
बैगन – खाने में बैगन की सब्जी शामिल कीजिये, ये आसानी उपलब्ध होती है और खाने में भी टेस्टी होती है| इससे भी कोलेस्ट्रोल कंट्रोल होता है|
बीन्स – तरह तरह की बीन्स की सब्जी मिलती है इन्हें खाने में शामिल करें, ये पोष्टिक व कोलेस्ट्रोल control में सहायक है|
ये कुछ ऐसे तरीके है जिन्हें आप घर पर आसानी से इस्तेमाल कर सकते है और अपने कोलेस्ट्रोल को कंट्रोल कर सकते हो, इसके लिए आपको महंगी दवाइयां लेने की जरुरत नहीं है| लेकिन कभी परेशानी बढ़ जाये तो डॉक्टर से सलाह जरुर लें, समय समय पर कोलेस्ट्रोल की जांच करते रहें ताकि आपको पता चले की व कंट्रोल में है या नहीं| आपके पास भी को अन्य उपाय है तो हमारे साथ शेयर करें|

03/09/2015

क्या है स्वाइन फ्लू

स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है, जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है. यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है. 2009 में जो स्वाइन फ्लू हुआ था, उसके मुकाबले इस बार का स्वाइन फ्लू कम पावरफुल है, हालांकि उसके वायरस ने इस बार स्ट्रेन बदल लिया है यानी पिछली बार के वायरस से इस बार का वायरस अलग है.

कैसे फैलता है

जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में आ जाता है. यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं. मसलन, दरवाजे, फोन, कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह वायरस फैल सकते हैं, अगर इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो.

शुरुआती लक्षण

- नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाक जाम होना.

- मांसपेशियां में दर्द या अकड़न महसूस करना.

- सिर में भयानक दर्द.

- कफ और कोल्ड, लगातार खांसी आना.

- उनींदे रहना, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना.

- बुखार होना, दवा खाने के बाद भी बुखार का लगातार बढ़ना.

- गले में खराश होना और इसका लगातार बढ़ते जाना.

नॉर्मल फ्लू से कैसे अलग

सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के वायरस में एक फर्क होता है. स्वाइन फ्लू के वायरस में चिड़ियों, सूअरों और इंसानों में पाया जाने वाला जेनेटिक मटीरियल भी होता है. सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे ही होते हैं, लेकिन स्वाइन फ्लू में यह देखा जाता है कि जुकाम बहुत तेज होता है. नाक ज्यादा बहती है. पीसीआर टेस्ट के माध्यम से ही यह पता चलता है कि किसी को स्वाइन फ्लू है. स्वाइन फ्लू होने के पहले 48 घंटों के भीतर इलाज शुरू हो जाना चाहिए. पांच दिन का इलाज होता है, जिसमें मरीज को टेमीफ्लू दी जाती है.

कब तक रहता है वायरस

एच1एन1 वायरस स्टील, प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे, टिश्यू पेपर में 15 मिनट और हाथों में 30 मिनट तक एक्टिव रहते हैं. इन्हें खत्म करने के लिए डिटर्जेंट, एल्कॉहॉल, ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल कर सकते हैं. किसी भी मरीज में बीमारी के लक्षण इन्फेक्शन के बाद 1 से 7 दिन में डिवेलप हो सकते हैं. लक्षण दिखने के 24 घंटे पहले और 8 दिन बाद तक किसी और में वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा रहता है.

चिंता की बात

इस बीमारी से लड़ने के लिए सबसे जरूरी है दिमाग से डर को निकालना. ज्यादातर मामलों में वायरस के लक्षण कमजोर ही दिखते हैं. जिन लोगों को स्वाइन फ्लू हो भी जाता है, वे इलाज के जरिए सात दिन में ठीक हो जाते हैं. कुछ लोगों को तो अस्पताल में एडमिट भी नहीं होना पड़ता और घर पर ही सामान्य बुखार की दवा और आराम से ठीक हो जाते हैं. कई बार तो यह ठीक भी हो जाता है और मरीज को पता भी नहीं चलता कि उसे स्वाइन फ्लू था. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि जिन लोगों का स्वाइन फ्लू टेस्ट पॉजिटिव आता है, उनमें से इलाज के दौरान मरने वालों की संफ्या केवल 0.4 फीसदी ही है. यानी एक हजार लोगों में चार लोग. इनमें भी ज्यादातर केस ऐसे होते हैं, जिनमें पेशंट पहले से ही हार्ट या किसी दूसरी बीमारी की गिरफ्त में होते हैं या फिर उन्हें बहुत देर से इलाज के लिए लाया गया होता है.

यह रहें सावधान

5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं. जिन लोगों को निम्न में से कोई बीमारी है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए :

- फेफड़ों, किडनी या दिल की बीमारी

- मस्तिष्क संबंधी (न्यूरोलॉजिकल) बीमारी मसलन, पर्किंसन

- कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग

- डायबीटीजं

- ऐसे लोग जिन्हें पिछले 3 साल में कभी भी अस्थमा की शिकायत रही हो या अभी भी हो. ऐसे लोगों को फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

- गर्भवती महिलाओं का प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) शरीर में होने वाले हॉरमोन संबंधी बदलावों के कारण कमजोर होता है. खासतौर पर गर्भावस्था के तीसरे चरण यानी 27वें से 40वें सप्ताह के बीच उन्हें ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है.

अकसर पूछे जाने वाले सवाल

- अगर किसी को स्वाइन फ्लू है और मैं उसके संपर्क में आया हूं, तो क्या करूं?

सामान्य जिंदगी जीते रहें, जब तक फ्लू के लक्षण नजर नहीं आने लगते. अगर मरीज के संपर्क में आने के 7 दिनों के अंदर आपमें लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर से सलाह करें.

- अगर साथ में रहने वाले किसी शफ्स को स्वाइन फ्लू है, तो क्या मुझे ऑफिस जाना चाहिए?

हां, आप ऑफिस जा सकते हैं, मगर आपमें फ्लू का कोई लक्षण दिखता है, तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं और मास्क का इस्तेमाल करें.

- स्वाइन फ्लू होने के कितने दिनों बाद मैं ऑफिस या स्कूल जा सकता हूं?

अस्पताल वयस्कों को स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर सामान्यत: 5 दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखते हैं. बच्चों के मामले में 7 से 10 दिनों तक इंतजार करने को कहा जाता है. सामान्य परिस्थितियों में व्यक्ति को 7 से 10 दिन तक रेस्ट करना चाहिए, ताकि ठीक से रिकवरी हो सके. जब तक फ्लू के सारे लक्षण खत्म न हो जाएं, वर्कप्लेस से दूर रहना ही बेहतर है.

- क्या किसी को दो बार स्वाइन फ्लू हो सकता है?

जब भी शरीर में किसी वायरस की वजह से कोई बीमारी होती है, शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र उस वायरस के खिलाफ एक प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है. जब तक स्वाइन फ्लू के वायरस में कोई ऐसा बदलाव नहीं आता, जो अभी तक नहीं देखा गया, किसी को दो बार स्वाइन फ्लू होने की आशंका नहीं रहती. लेकिन इस वक्त फैले वायरस का स्ट्रेन बदला हुआ है, जिसे हो सकता है शरीर का प्रतिरोधक तंत्र इसे न पहचानें. ऐसे में दोबारा बीमारी होने की आशंका हो सकती है.

स्वाइन फ्लू से बचाव और इसका इलाज

स्वाइन फ्लू न हो, इसके लिए क्या करें?

- साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही सावधानी बरती जाए, तो इस बीमारी के फैलने के चांस न के बराबर हो जाते हैं.

- जब भी खांसी या छींक आए रूमाल या टिश्यू पेपर यूज करें.

- इस्तेमाल किए मास्क या टिश्यू पेपर को ढक्कन वाले डस्टबिन में फेंकें.

- थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ को साबुन और पानी से धोते रहें.

- लोगों से मिलने पर हाथ मिलाने, गले लगने या चूमने से बचें.

- फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

- अगर फ्लू के लक्षण नजर आते हैं तो दूसरों से 1 मीटर की दूरी पर रहें.

- फ्लू के लक्षण दिखने पर घर पर रहें. ऑफिस, बाजार, स्कूल न जाएं.

- बिना धुले हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से परहेज करें.

आयुर्वेद

ऐसे करें बचाव

इनमें से एक समय में एक ही उपाय आजमाएं.

- 4-5 तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम अदरक, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो-तीन बार पिएं.

- गिलोय (अमृता) बेल की डंडी को पानी में उबाल या छानकर पिएं.

- गिलोय सत्व दो रत्ती यानी चौथाई ग्राम पौना गिलास पानी के साथ लें.

- 5-6 पत्ते तुलसी और काली मिर्च के 2-3 दाने पीसकर चाय में डालकर दिन में दो-तीन बार पिएं.

- आधा चम्मच हल्दी पौना गिलास दूध में उबालकर पिएं. आधा चम्मच हल्दी गरम पानी या शहद में मिलाकर भी लिया जा सकता है.

- आधा चम्मच आंवला पाउडर को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिएं. इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

स्वाइन फ्लू होने पर क्या करें

यदि स्वाइन फ्लू हो ही जाए तो वैद्य की राय से इनमें से कोई एक उपाय करें:

- त्रिभुवन कीर्ति रस या गोदंती रस या संजीवनी वटी या भूमि आंवला लें. यह सभी एंटी-वायरल हैं.

- साधारण बुखार होने पर अग्निकुमार रस की दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें.

- बिल्वादि टैब्लेट दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें.

होम्योपैथी

कैसे करें बचाव

फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर इन्फ्लुएंजाइनम-200 की चार-पांच बूंदें, आधी कटोरी पानी में डालकर सुबह-शाम पांच दिन तक लें. इस दवा को बच्चों समेत सभी लोग ले सकते हैं. मगर डॉक्टरों का कहना है कि फ्लू ज्यादा बढ़ने पर यह दवा पर्याप्त कारगर नहीं रहती, इसलिए डॉक्टरों से सलाह कर लें. जिन लोगों को आमतौर पर जल्दी-जल्दी जुकाम खांसी ज्यादा होता है, अगर वे स्वाइन फ्लू से बचना चाहते हैं तो सल्फर 200 लें. इससे इम्यूनिटी बढ़ेगी और स्वाइन फ्लू नहीं होगा.

स्वाइन फ्लू होने पर क्या है इलाज

1: बीमारी के शुरुआती दौर के लिए

जब खांसी-जुकाम व हल्का बुखार महसूस हो रहा हो तब इनमें से कोई एक दवा डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं:

एकोनाइट (Aconite 30), बेलेडोना (Belladona 30), ब्रायोनिया (Bryonia 30), हर्परसल्फर (Hepursuphur 30), रसटॉक्स (Rhus Tox 30), चार-पांच बूंदें, दिन में तीन से चार बार.

2: अगर फ्लू के मरीज को उलटियां आ रही हों और डायरिया भी हो तो नक्स वोमिका (Nux Vomica 30), पल्सेटिला (Pulsatilla 30), इपिकॉक (Ipecac-30) की चार-पांच बूंदें, दिन में तीन से चार बार ले सकते हैं.

3: जब मरीज को सांस की तकलीफ ज्यादा हो और फ्लू के दूसरे लक्षण भी बढ़ रहे हों तो इसे फ्लू की एडवांस्ड स्टेज कहते हैं. इसके लिए आर्सेनिक एल्बम (Arsenic Album 30) की चार-पांच बूंदें, दिन में तीन-चार बार लें. यह दवा अस्पताल में भर्ती व ऐलोपैथिक दवा ले रहे मरीज को भी दे सकते हैं.

योग

शरीर के प्रतिरक्षा और श्वसन तंत्र को मजबूत रखने में योग मददगार साबित होता है. अगर यहां बताए गए आसन किए जाएं, तो फ्लू से पहले से ही बचाव करने में मदद मिलती है. स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले अभ्यास करें:

- कपालभाति, ताड़ासन, महावीरासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, मंडूकासन, अनुलोम-विलोम और उज्जायी प्राणायाम तथा धीरे-धीरे भस्त्रिका प्राणायाम या दीर्घ श्वसन और ध्यान.

- व्याघ्रासन, यानासन व सुप्तवज्रासन. यह आसन लीवर को मजबूत करके शरीर में ताकत लाते हैं.

डाइट

- घर का ताजा बना खाना खाएं. पानी ज्यादा पिएं.

- ताजे फल, हरी सब्जियां खाएं.

- मौसमी, संतरा, आलूबुखारा, गोल्डन सेव, तरबूज और अनार अच्छे हैं.

- सभी तरह की दालें खाई जा सकती हैं.

- नींबू-पानी, सोडा व शर्बत, दूध, चाय, सभी फलों के जूस, मट्ठा व लस्सी भी ले सकते हैं.

- बासी खाना और काफी दिनों से फ्रिज में रखी चीजें न खाएं. बाहर के खाने से बचें.

मास्क की बात

न पहने मास्क

- मास्क पहनने की जरूरत सिर्फ उन्हें है, जिनमें फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हों.

- फ्लू के मरीजों या संदिग्ध मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को ही मास्क पहनने की सलाह दी जाती है.

- भीड़ भरी जगहों मसलन, सिनेमा हॉल या बाजार जाने से पहले सावधानी के लिए मास्क पहन सकते हैं.

- मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर, नर्स और हॉस्पिटल में काम करने वाला दूसरा स्टाफ.

- एयरकंडीशंड ट्रेनों या बसों में सफर करने वाले लोगों को ऐहतियातन मास्क पहन लेना चाहिए.

कितनी देर करता है काम

- स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सामान्य मास्क कारगर नहीं होता, लेकिन थ्री लेयर सर्जिकल मास्क को चार घंटे तक और एन-95 मास्क को आठ घंटे तक लगाकर रख सकते हैं.

- ट्रिपल लेयर सजिर्कल मास्क लगाने से वायरस से 70 से 80 पर्सेंट तक बचाव रहता है और एन-95 से 95 पर्सेंट तक बचाव संभव है.

- वायरस से बचाव में मास्क तभी कारगर होगा जब उसे सही ढंग से पहना जाए. जब भी मास्क पहनें, तब ऐसे बांधें कि मुंह और नाक पूरी तरह से ढक जाएं क्योंकि वायरस साइड से भी अटैक कर सकते हैं.

- एक मास्क चार से छह घंटे से ज्यादा देर तक न इस्तेमाल करें, क्योंकि खुद की सांस से भी मास्क खराब हो जाता है.

कैसा पहनें

- सिर्फ ट्रिपल लेयर और एन 95 मास्क ही वायरस से बचाव में कारगर हैं.

- सिंगल लेयर मास्क की 20 परतें लगाकर भी बचाव नहीं हो सकता.

- मास्क न मिले तो मलमल के साफ कपड़े की चार तहें बनाकर उसे नाक और मुंह पर बांधें. सस्ता व सुलभ साधन है. इसे धोकर दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

ध्यान रखें कि

- जब तक आपके आस-पास कोई मरीज या संदिग्ध मरीज नहीं है, तब तक मास्क न लगाएं.

- अगर मास्क को सही तरीके से नष्ट न किया जाए या उसका इस्तेमाल एक से ज्यादा बार किया जाए तो स्वाइन फ्लू फैलने का खतरा और ज्यादा होता है.

- खांसी या जुकाम होने पर मास्क जरूर पहनें.

- मास्क को बहुत ज्यादा टाइट पहनने से यह थूक के कारण गीला हो सकता है.

- अगर यात्रा के दौरान लोग मास्क पहनना चाहें तो यह सुनिश्चित कर लें कि मास्क एकदम सूखा हो. अपने मास्क को बैग में रखें और अधिकतम चार बार यूज करने के बाद इसे बदल दें.

कीमत

- थ्री लेयर सजिर्कल मास्क : 10 से 12 रुपये

- एन-95 : 100 से 150 रुपये

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बॉलीवुड कारोबार दुनिया खेल इन्फो राशिफल

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15/10/2014

गले में खराश गृह उपचार और उपचार
मेडिकल लेखक:
जॉन पी. कुन्हा, डीओ, FACOEP
गले में खराश गृह उपचार और उपचार पर डॉक्टर देखें
FACOEP, मत करो, जॉन पी. कुन्हा द्वारा टिप्पणी
एंटीबायोटिक्स
आप (उदाहरण के लिए, strep गले) बैक्टीरिया की वजह से एक गले में खराश है, तो आपके स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर सबसे अधिक संभावना इस तरह के अमोक्सिसिल्लिन और दूसरों के रूप में एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज करेंगे. अपने गले में खराश एक वायरस के कारण होता था, तो आप की संभावना एंटीबायोटिक दवाओं निर्धारित या चिकित्सा उपचार दिया नहीं थे. आप आसानी लक्षण मदद कर सकते हैं कि घरेलू उपचार का उपयोग करने के लिए गले में खराश के किसी भी प्रकार के विकल्प हैं.
घरेलू उपचार और ओटीसी उपचार
• दोनों वयस्क और बच्चों के दर्द से राहत के साथ मदद करने के लिए सूखापन को राहत देने में मदद करने के लिए lozenges और कफ ड्रॉप का उपयोग करें, और संवेदनाहारी गले स्प्रे कर सकते हैं.
• शहद और गले को शांत करना नींबू के साथ चाय पीते हैं.
• ठंडा पेय पीना या ऐसी आइसक्रीम या पॉप्सिकल्स रूप में जमे हुए डेसर्ट खाना.
• गला साफ और बलगम ढीला मदद करने के लिए नमक पानी से कुल्ला - एक गले में खराश postnasal ड्रिप के कारण होता है जब यह विशेष रूप से उपयोगी है.
• हाइड्रेटेड और thins बलगम स्राव रहने के लिए तरल पदार्थ का खूब सेवन करें.
• मुंह और गले नम रखने और जलन को कम करने में मदद करने के लिए एक humidifier का प्रयोग करें.
ओटीसी दवाएं
• आप काउंटर पर ले जा सकते हैं जैसे कि एसिटामिनोफेन (Tylenol) या एक गले में खराश की वजह से दर्द और सूजन को कम करने में मदद करने के लिए इबुप्रोफेन (एडविल, Motrin) के रूप में (ओटीसी) दर्द दवाओं. याद रखें, बच्चों Reye है सिंड्रोम की संभावना की वजह से एस्पिरिन या एस्पिरिन युक्त दवाएं दे कभी नहीं.
• पर-the-काउंटर decongestants हटना बलगम झिल्ली मदद और गले में जलन पैदा कर सकते हैं जो एक नाक बह रही है या postnasal ड्रिप, को राहत देने के.
• Decongestants कुछ चिकित्सा शर्तों के साथ बच्चों, बुजुर्गों, या लोगों के लिए सुरक्षित नहीं हो सकता. पर-the-काउंटर दवा या किसी भी घर उपाय का उपयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से संपर्क करें.
Galē mēṁ kharāśa gr̥ha upacāra aura upacāra
Mēḍikala lēkhaka:
Jŏna pī. Kunhā, ḍī'ō, FACOEP
Galē mēṁ kharāśa gr̥ha upacāra aura upacāra para ḍŏkṭara dēkhēṁ
FACOEP, mata karō, jŏna pī. Kunhā dvārā ṭippaṇī
Ēṇṭībāyōṭiksa
Āpa (udāharaṇa kē li'ē, strep galē) baikṭīriyā kī vajaha sē ēka galē mēṁ kharāśa hai, tō āpakē svāsthya dēkhabhāla pēśēvara sabasē adhika sambhāvanā isa taraha kē amōksisillina aura dūsarōṁ kē rūpa mēṁ ēṇṭībāyōṭika davā'ōṁ kē sātha ilāja karēṅgē. Apanē galē mēṁ kharāśa ēka vāyarasa kē kāraṇa hōtā thā, tō āpa kī sambhāvanā ēṇṭībāyōṭika davā'ōṁ nirdhārita yā cikitsā upacāra diyā nahīṁ thē. Āpa āsānī lakṣaṇa madada kara sakatē haiṁ ki gharēlū upacāra kā upayōga karanē kē li'ē galē mēṁ kharāśa kē kisī bhī prakāra kē vikalpa haiṁ.
Gharēlū upacāra aura ōṭīsī upacāra
• Dōnōṁ vayaska aura baccōṁ kē darda sē rāhata kē sātha madada karanē kē li'ē sūkhāpana kō rāhata dēnē mēṁ madada karanē kē li'ē lozenges aura kapha ḍrŏpa kā upayōga karēṁ, aura sanvēdanāhārī galē sprē kara sakatē haiṁ.
• Śahada aura galē kō śānta karanā nīmbū kē sātha cāya pītē haiṁ.
• Ṭhaṇḍā pēya pīnā yā aisī ā'isakrīma yā pŏpsikalsa rūpa mēṁ jamē hu'ē ḍēsarṭa khānā.
• Galā sāpha aura balagama ḍhīlā madada karanē kē li'ē namaka pānī sē kullā - ēka galē mēṁ kharāśa postnasal ḍripa kē kāraṇa hōtā hai jaba yaha viśēṣa rūpa sē upayōgī hai.
• Hā'iḍrēṭēḍa aura thins balagama srāva rahanē kē li'ē tarala padārtha kā khūba sēvana karēṁ.
• Munha aura galē nama rakhanē aura jalana kō k**a karanē mēṁ madada karanē kē li'ē ēka humidifier kā prayōga karēṁ.
Ōṭīsī davā'ēṁ
• Āpa kā'uṇṭara para lē jā sakatē haiṁ jaisē ki ēsiṭāminōphēna (Tylenol) yā ēka galē mēṁ kharāśa kī vajaha sē darda aura sūjana kō k**a karanē mēṁ madada karanē kē li'ē ibuprōphēna (ēḍavila, Motrin) kē rūpa mēṁ (ōṭīsī) darda davā'ōṁ. Yāda rakhēṁ, baccōṁ Reye hai siṇḍrōma kī sambhāvanā kī vajaha sē ēspirina yā ēspirina yukta davā'ēṁ dē kabhī nahīṁ.
• Para-the- kā'uṇṭara decongestants haṭanā balagama jhillī madada aura galē mēṁ jalana paidā kara sakatē haiṁ jō ēka nāka baha rahī hai yā postnasal ḍripa, kō rāhata dēnē kē.
• Decongestants kucha cikitsā śartōṁ kē sātha baccōṁ, bujurgōṁ, yā lōgōṁ kē li'ē surakṣita nahīṁ hō sakatā. Para-the- kā'uṇṭara davā yā kisī bhī ghara upāya kā upayōga karanē sē pahalē apanē cikitsaka sē samparka karēṁ.

05/08/2014

Finally Good News For Diabetes.

A woman (65) was diabetic for the last 20+ years
and
was taking insulin
twice a day.
She used the enclosed homemade medicine for a fortnight and
now she is absolutely free of diabetes and taking all her food as normal
including sweets.

The doctors have advised her to stop insulin and any other blood sugar controlling drugs.
I request you all please circulate the email below to as many people as you
can and let them take maximum benefit from it.

AS RECEIVED :
DR. TONY ALMEIDA
( Bombay Kidney Speciality expert )
made the extensive experiments with perseverance and patience and discovered a
successful treatment for diabetes.
Now a days a lot of people, old men &
women in particular suffer a lot due to Diabetes.

Ingredients:
1 - Wheat 100 gm
2 - Gum(of tree) (gondh) 100 gm
3 - Barley 100 gm
4 - Black Seeds (kalunji) 100 gm

Method of Preparation :
Put all the above ingredients in 5 cups of water.
Boil it for 10 minutes and put off the fire.
Allow it to cool down by itself.
When it has become cold, filter out the
seeds and preserve water in a glass jug or bottle.

How to use it?
Take one small cup of this water every day early morning when your stomach is empty.
Continue this for 7 days.
Next week repeat the same but on alternate days. With these 2 weeks of
treatment you will wonder to see that you have become normal and can eat
normal food without problem.

Note:
A request is to spread this to as many as possible so that others can
also take benefit out of it.

SINCE THESE ARE ALL NATURAL INGREDIENTS,
TAKING THEM IS NOT HARMFUL.
SO THOSE WHO ARE SCEPTICAL ABOUT THIS TREATMENT
MAY STILL TRY IT WITHOUT ANY HARM.

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