03/02/2012
इंसान की जान भी ले सकते हैं हैकर!~
इस तकनीकी युग में जब कम्प्यूटरकीघुसपैठहरस्थानमें होते जा रही है तो जान लीजिए कि दुर्भावनाग्रस्त हैकर आपकीज़िंदगीकोभीखतरापहुँचा सकते हैं।
यह रह्स्योद्घाटन एक सुरक्षा शोधकर्ता ने किया है जो खुद डायबिटिज़ से पीड़ित है। अपने खुद के इंसुलिन पंप पर किए गए प्रयोग से उसने यह साबित कर दिया है कि दूर बैठा कम्प्यूटर हैकर खून में शक्कर की मात्रा नापने वाले यंत्र के परिणाम को घटा-बढ़ा सकता है और नतीजतन मरीज, आवश्यक इंसुलिन की अधिक या कम मात्रा ले अपनीजानकोखतरेमें डाल देगा।
शोधकर्ता जे रेडक्लिफ़ ने यह जानकारियाँ 10 अगस्त को लास वेगास में ब्लैक हैट सिक्युरिटी कॉंफ़्रेंस में साझा करते हुए कहा “मेरी प्रारंभिक प्रतिक्रिया थी कि एक तकनीकी नजरिए से यह वास्तव में मज़ेदार है लेकिन दूसरी प्रतिक्रिया सरासरआतंकितकरदेनेवालीरही कि मुझे जिंदा रखने वाले आवश्यक सक्रिय उपकरणों के लिए कोईसुरक्षानहींहै!”
यह एक कटु सत्य है कि अगरआपकाकम्प्यूटर हैकर के हमले में खराब हो जाता हैं बंद हो जाता है तो कोई नहीं मरने वाला लेकिन अगर आपका इंसुलिन पंप, पेसमेकर हैकर के कब्जे में आ गया तो बहुतमुश्किल हो जाएगी। पेसमेकर जैसे जीवनरक्षक उपकरणों पर मानव की निर्भरता बढ़ती जा रही है। ऑपरेशन थियेटरों व आईसीयू में लगे चिकित्सा उपकरणों के सहारे मरीज के शरीर में होने वाली हर गतिविधि को मॉनिटर किया जानाअबआमबात हो चुकी है। उनमें से भी कई उपकरणों को डॉक्टर आदि किसी दूसरे स्थान से नियंत्रित करते हैं।
हालांकि अब तक इस रेडक्लिफ़ तकनीक वाला कोई मामला सामने नहीं आया। फिर भी चिकित्सा उपकरणों को ले कर भय तो उत्त्पन्न हो ही गया है क्योंकि अधिकतर उपकरण अबइंटरनेटतकनीक से जुड़ते जा रहे हैं। पेसमेकर जैसे उपकरणों पर पहले भी इससे मिलते जुलते प्रदर्शन किए जा चुके हैं।
चिकित्सा उपकरण बनाने वाली कंपनियाँ ऐसे ‘आक्रमणों’ को नकार रहीं हैं।उनकातर्कहै कि यह प्रदर्शन एक विशेषज्ञ द्वारा किया गया है, आम जीवन में ऐसा होने की संभावना नहीं है। लेकिन जब चिकित्सा उपकरणों को स्वचालित बनाने, वायरलेस चिप्स शामिल करने, इंटरनेट से नेटवर्किंग का प्रचलन बढ़ रहा हो तो परिणाम के रूप में ऐसे उपकरण हैकरों की चपेट में नहीं हो सकते?