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रंगो के कारोबार का एक सिलसिला चलाजो रंग उमड़ा था वो सब पर चलाजिसके नूर से निकले थे कई रंग सहरा मेंउस सफेद से हर रंग रंगी...
01/08/2024

रंगो के कारोबार का एक सिलसिला चलाजो रंग उमड़ा था वो सब पर चलाजिसके नूर से निकले थे कई रंग सहरा मेंउस सफेद से हर रंग रंगीन चलापीली चादर ओढ़ के हल्दी जब हाथो में लगीशर्म से तर बतर उसका चेहरा चलालाल रंग ने चढ़ा दिया रंग इश्क काउसके ऊपर फिर कोई रंग न चला...

रंगो के कारोबार का एक सिलसिला चलाजो रंग उमड़ा था वो सब पर चलाजिसके नूर से निकले थे कई रंग सहरा मेंउस सफेद से हर रंग र....

बहुत सी उलझने है या तो उलझनों में मैं हूं। कोई सवाल करता है या सवाल दे जाता है क्या ? क्यों ? कैसे ? जब भी इन सवालों से ...
29/04/2024

बहुत सी उलझने है या तो उलझनों में मैं हूं। कोई सवाल करता है या सवाल दे जाता है क्या ? क्यों ? कैसे ? जब भी इन सवालों से घिरती हूं खुद के ही सवालों में घिर जाती हूं कोई जवाब न मैं दे पाती हूं न कोई जवाब मैं पा पाती हूं क्या? आखिर जवाब ही क्या होगा इसका …...

बहुत सी उलझने है या तो उलझनों में मैं हूं। कोई सवाल करता है या सवाल दे जाता है क्या ? क्यों ? कैसे ? जब भी इन सवालों से घि...

आईने में देखकर देखा करते थे तुझकोकी एक जैसे दिखते थे हम दोनोतू कही थोड़ा मुझमें मैं कही थोड़ी तुझमेंकी एक दूजे में गुम द...
22/11/2022

आईने में देखकर देखा करते थे तुझकोकी एक जैसे दिखते थे हम दोनोतू कही थोड़ा मुझमें मैं कही थोड़ी तुझमेंकी एक दूजे में गुम दिखते थे हम दोनोचलते चलते रुक जाते थे कदमकहते कहते चुप हो जाते थे लबखो जाते थे एक दूजे के खयालों मेंकी एक दूजे में गुम दिखते थे हम दोनो...

आईने में देखकर देखा करते थे तुझकोकी एक जैसे दिखते थे हम दोनोतू कही थोड़ा मुझमें मैं कही थोड़ी तुझमेंकी एक दूजे में ....

नन्ही हथेली से जब पन्नो को छुआ उसने, अक्षर अक्षर बोल पड़ा छंद कविता कहानी मौन हो गए जबउसके बोल से अपना नाम सुनाघर में मे...
20/11/2022

नन्ही हथेली से जब पन्नो को छुआ उसने, अक्षर अक्षर बोल पड़ा छंद कविता कहानी मौन हो गए जबउसके बोल से अपना नाम सुनाघर में मेरे रोशनी तो थी लेकिनदिवारे सुनी लगती थीआंगन मेरा चहक उठा जब उसने अपना पांव रखामेरे घर भी अब से एक नई चिड़िया बोलेगीरोज सवेरे चहकेगी और रोज रात को महकेगी...

नन्ही हथेली से जब पन्नो को छुआ उसने, अक्षर अक्षर बोल पड़ा छंद कविता कहानी मौन हो गए जबउसके बोल से अपना नाम सुनाघर मे.....

अब किसी बात में वो बात ही नहीं जोतेरी मेरी बात की बात में होती थीआजकल जो याद आती है उसमे वोयाद ही नहीं जो तुझे याद करने ...
19/11/2022

अब किसी बात में वो बात ही नहीं जोतेरी मेरी बात की बात में होती थीआजकल जो याद आती है उसमे वोयाद ही नहीं जो तुझे याद करने से आती थीतू इतना करीब रहा है मेरे दिल मेरे ज़हन मेंमुझे महसूस होता था मेरे हर तरफ मेंअब वो करीबी करीबी ही नहीं जोतेरे करीब होने से करीब लगती थी...

अब किसी बात में वो बात ही नहीं जोतेरी मेरी बात की बात में होती थीआजकल जो याद आती है उसमे वोयाद ही नहीं जो तुझे याद करन...

मेरे एहसास में मेरा वजूद ही नहीं हैतू जो नहीं है तो मेरी कायनात ही नहीं हैमैं बिखरा हूं तुझमें या सिमटा हूं तुझमेंतूने छ...
19/11/2022

मेरे एहसास में मेरा वजूद ही नहीं हैतू जो नहीं है तो मेरी कायनात ही नहीं हैमैं बिखरा हूं तुझमें या सिमटा हूं तुझमेंतूने छुआ मुझे और मेरे पास मेरा अक्स ही नही हैएक हवा के झोंके ने एक शाऊर दिया मुझेइतना महका हूं तुझे की मेरी अब महक ही नहीं है

मेरे एहसास में मेरा वजूद ही नहीं हैतू जो नहीं है तो मेरी कायनात ही नहीं हैमैं बिखरा हूं तुझमें या सिमटा हूं तुझमेंत....

कुछ तो कर कमाल की हम तुझे जान लेपहली ही मुलाकात से ये धड़कन तेरा नाम लेले चल कही दूर जहां न मैं रहूं न तू रहे खुद मेंखो ...
17/11/2022

कुछ तो कर कमाल की हम तुझे जान लेपहली ही मुलाकात से ये धड़कन तेरा नाम लेले चल कही दूर जहां न मैं रहूं न तू रहे खुद मेंखो जाने दे तुझमें और तू ही मुझे थाम लेरख दे मेरी पेशानी पर तकलीफ अपनीसिर उठा अदब से और जिंदगी के जाम लेअब तेरे आंसू मेरी पलकों पर ठहर जायेंगेमेरी सारी खुशियों की सौगात अपने नाम लेचलने को रास्ते में मुसाफिर मिलते है बहुतमंजिल चुनेंगे तुझे ही इतना इख्तियार ले #नीतू

कुछ तो कर कमाल की हम तुझे जान लेपहली ही मुलाकात से ये धड़कन तेरा नाम लेले चल कही दूर जहां न मैं रहूं न तू रहे खुद मेंख.....

मेरे शहर की बेचैनी कही इन्ही रास्तों में खो गई हैयहां परिंदो की भी सरगोशी कही खो गई हैजब से आया हूं गांव अपने शहर की भीड...
15/11/2022

मेरे शहर की बेचैनी कही इन्ही रास्तों में खो गई हैयहां परिंदो की भी सरगोशी कही खो गई हैजब से आया हूं गांव अपने शहर की भीड़ से दूरमेरे साथ आई उदासी भी कही खो गई हैदिन उगता है पपीहे की आवाज सेनदी में घड़े की खनक सेपगडंडियों पर बैल की घंटी सेचूल्हे की सोंधी सोंधी खुशबू से...

मेरे शहर की बेचैनी कही इन्ही रास्तों में खो गई हैयहां परिंदो की भी सरगोशी कही खो गई हैजब से आया हूं गांव अपने शहर की ....

तुम्हे अक्सर ख्यालों में देखा है तो खुद से पूछा है की ये खयाल क्यों हैतुम हो अगर नसीब में किसी केतो मेरे सामने ये किरदार...
14/11/2022

तुम्हे अक्सर ख्यालों में देखा है तो खुद से पूछा है की ये खयाल क्यों हैतुम हो अगर नसीब में किसी केतो मेरे सामने ये किरदार क्यों हैवजह जो भी हो तुम्हारे दिल मेंकहो तो मैं सुनना चाहती हूंअगर तुम किसी और के हो तो फिर मेरे साथ ये सरोकार क्यों हैमेरे पास बहुत सी वजाहत है...

तुम्हे अक्सर ख्यालों में देखा है तो खुद से पूछा है की ये खयाल क्यों हैतुम हो अगर नसीब में किसी केतो मेरे सामने ये कि.....

फिर इस दिल ने अपना इत्मीनान खोया हैजहां से लौट कर आना था वही से रास्ता खोया हैकुछ हिसाब है ही नही की क्या पाया हैकिससे क...
13/11/2022

फिर इस दिल ने अपना इत्मीनान खोया हैजहां से लौट कर आना था वही से रास्ता खोया हैकुछ हिसाब है ही नही की क्या पाया हैकिससे कहे कि उसकी चाहत में क्या क्या खोया हैनाम शोहरत रूतबा जो भी चाहिए था इस उम्र मेंएक ख्वाइश थी उसकी बदले में ये सब खोया हैबाजिचा बनकर रह गई उल्फत मेरी उसके हाथोकभी इख्तियार खुद पर कभी इज्तीरार खोया हैअपनी ही खुदी से नाराज़ रहने लगे है "ताशु"अपनी ही नजर में अपना किरदार खोया है #नीतू

फिर इस दिल ने अपना इत्मीनान खोया हैजहां से लौट कर आना था वही से रास्ता खोया हैकुछ हिसाब है ही नही की क्या पाया हैकिस.....

कारे - कारे नैनाभीगे - भीगे बदरासूखी - सूखी आसबिखरे - बिखरे अरमाँउलझी - उलझी हयातआधी - अधूरी बातरूठे - रूठे साजनउखड़ी- उख...
12/11/2022

कारे - कारे नैनाभीगे - भीगे बदरासूखी - सूखी आसबिखरे - बिखरे अरमाँउलझी - उलझी हयातआधी - अधूरी बातरूठे - रूठे साजनउखड़ी- उखड़ी साँसटूटे - टूटे सपनेबिखरे - बिखरे ख़्वाबझूटी - मुठी रंजिशगहरे - उथले जज़्बातथोड़ी - थोड़ी खुद मैंपूरे - पूरे एहसासपूरा -पूरा वो मुझमेंथोड़ी - थोड़ी उसके पास निधी गर्ग

कारे – कारे नैनाभीगे – भीगे बदरासूखी – सूखी आसबिखरे – बिखरे अरमाँउलझी – उलझी हयातआधी – अधूरी बातरूठे – रूठे साजनउख...

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