Kautilya Academy Guna

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02/12/2018

मन को शांति और हमे सफलता कैसे मिलेगी।

आज की दुनिया में हर इंसान सिर्फ अपना अपना देखने में लगा है। किसी को भी किसी और की चिंता नहीं है। थोड़ी सी भी दया आज किसी में बची नहीं है कभी धर्म के नाम पर लड़ रहे है तो कभी दौलत और लालच के नाम पर तो कभी अमीरी गरीबी के नाम पर बस एकता और भाईचारे को तो जैसे हमने ज़मीं में दफ़न ही कर दिया है। दोस्तों वाकई अगर हम सब एक हो जाए तो किसी देश की इतनी हिम्मत नहीं की वो हमारी तरफ आँख उठा कर भी देख सके घर में घुसने की तो बात ही छोड़ दो ।

बस एक बार अगर हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई आपस मे है सब भाई भाई का नारा एक आवाज में लग जाए और हम सब देश के प्रति ,लोगो के प्रति, समाज के प्रति परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझ ले दोस्तों और जान ले की अगर हम सब एक साथ नहीं रहे तो हमारा देश और हम सब अपनी ताकत खो देंगे। शायद हम खुद ही अपने देश, अपने संस्कार , अपने समाज और अपने आप को खोखला और कमजोर कर रहे है। कोशिश करता हूँ एक कहानी के माध्यम से समझने की एक बार एक शरीर की सारी इन्द्रियाँ एकमत हुई और हड़ताल कर दी |

इन्द्रियाँ मानती थी कि वो अथाह मेहनत करती है लेकिन फिर भी उन्हें उनका श्रेय नहीं मिलता और उन्होंने कहा सारा दिन मेहनत हम करें और मेहनत का सारा माल ये सारा पेट हजम कर जाए वो भी अकेला ये तो हमारे लिए असहनीय है | आँख कान नाक पांव सबने अपने अपने दल बना लिए सभी का कहना था कि अब वो लोग खुद कमाई करेंगे |उस कमाई को वो खुद खायेंगे और किसी दुसरे के साथ वो इसे साझा नहीं करेंगे ।

पेट ने सबको समझाया कि तुम लोग जितनी मेहनत करते हो और कमाकर मुझे खिलाते हो वो सब मैं तुम्ही को तो लौटा देता हूँ ताकि तुम लोग मजबूत बनो और इसलिए तुम अपनी हड़ताल करने का इरादा त्याग दो और इसमें भी तुम्हारा ही नुकसान है ये सही नहीं है लेकिन किसी ने भी उसकी एक नहीं सुनी |सभी इन्द्रियों ने कहा तुम तानाशाह हो और पेट की नहीं मानते हुए उन्होंने अपनी हड़ताल शुरू रखी और काम करना बंद कर दिया |

पेट को कुछ नहीं मिलने के कारण शरीर ने रक्त रस कम हो गया और इन्द्रियां भी कमजोर होने लगी | सभी अंगो की शक्तियाँ भी कम होने लगी और धीरे धीरे पूरा शरीर कमजोर पड़ने लगा। तो अब इन्द्रियों को अपने किये पर पछतावा होने लगा और दिमाग ने उनको चेताया कि तुम्हारे काम करने के तुम्हारी मेहनत न केवल पेट भरता है बल्कि जो तुम उसके लिए करते हो वो उतना बल्कि उस से अधिक तुम्हारे पास लौट कर वापिस आता है | दूसरों की सेवा कर हम कभी घाटे में नहीं रहते बाकि ये हमेशा अच्छा होता है |

तुम अपना कर्तव्य पूरा करो और तुम्हे उसका फल अवश्य ही मिलेगा | दिमाग की बाते सुनकर इन्द्रियां काम पर लौट आई | और फिर सारी इन्द्रियां स्वस्थ हो गई पूरा शरीर स्वस्थ हो गया और फिर तब से शरीर के सभी अंग एक साथ रह कर एक साथ काम करने लगे और एक दूसरे को ताकत देने लगे तो तो पाया कि शरीर भी स्वस्थ और ताक़तवर होते चला गया।

इसी प्रकार ये देश हमारा शरीर है और हम सब इसके अंग अगर हम अगर हम आपस में ही एक दुसरो के प्रति ईर्ष्या , द्वेष और बदले की भावना रखेंगे तो नुकसान पुरे शरीर को होगा और हर अंग को होगा। एक बनो नेक बनो और एक दूसरे को आगे बढ़ने की ताक़त दो , हो सके उतना सहयोग करो और फिर देखो देश को और हमारे मन को कितनी शांति और तरक्की मिलती है।

30/04/2018
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