Pancham Nishad Sangeet Santhan Indore

Pancham Nishad Sangeet Santhan Indore One of the best Music Institute in Indore M.P. Contact 9425800085

20/08/2026

फिल्मी गीतों का शौक है? 🎶
अब अपने पसंदीदा गीत सही सुर, ताल, भाव, उच्चारण और आवाज़ की अभिव्यक्ति के साथ गाना सीखिए!
पंचम निषाद संगीत संस्थान लेकर आया है —
फिल्मी संगीत एवं कराओके सिंगिंग क्लासेस
कराओके ट्रैक पर गायन का अभ्यास
🎵 सुर एवं ताल की समझ
🎵 गीत के भाव और अभिव्यक्ति पर विशेष ध्यान
🎵 मंच प्रस्तुति के लिए तैयारी
कक्षाएँ शुरू:
30 अगस्त 2026 रविवार से
सुबह 11 बजे
सप्ताह मे एक दिन ...
आपकी सुविधा के अनुसार कक्षा का दिन और समय तय किया जाएगा।

पंचम निषाद संगीत संस्थान इंदौर
सीमित प्रवेश — आज ही संपर्क करें!
📞 9425800085 (शाम 4 बजे के बाद)

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Everyone Products

फिल्मी गीतों का शौक है? 🎶अब अपने पसंदीदा गीत सही सुर, ताल, भाव, उच्चारण और आवाज़ की अभिव्यक्ति के साथ गाना सीखिए! पंचम न...
20/08/2026

फिल्मी गीतों का शौक है? 🎶
अब अपने पसंदीदा गीत सही सुर, ताल, भाव, उच्चारण और आवाज़ की अभिव्यक्ति के साथ गाना सीखिए!
पंचम निषाद संगीत संस्थान लेकर आया है —
फिल्मी संगीत एवं कराओके सिंगिंग क्लासेस
कराओके ट्रैक पर गायन का अभ्यास
🎵 सुर एवं ताल की समझ
🎵 गीत के भाव और अभिव्यक्ति पर विशेष ध्यान
🎵 मंच प्रस्तुति के लिए तैयारी
कक्षाएँ शुरू:
30 अगस्त 2026 रविवार से
सुबह 11 बजे
सप्ताह मे एक दिन ...
आपकी सुविधा के अनुसार कक्षा का दिन और समय तय किया जाएगा।

पंचम निषाद संगीत संस्थान इंदौर
सीमित प्रवेश — आज ही संपर्क करें!
📞 9425800085 (शाम 4 बजे के बाद)

पुराने समय के गायक केवल गाना सीखने के लिए संगीत नहीं सीखते थे। उनके लिए संगीत साधना था। वे रोज सुबह जल्दी उठते, तानपुरा ...
20/08/2026

पुराने समय के गायक केवल गाना सीखने के लिए संगीत नहीं सीखते थे। उनके लिए संगीत साधना था। वे रोज सुबह जल्दी उठते, तानपुरा लगाते और घंटों तक केवल स्वरों का अभ्यास करते थे।
वे राग को सिर्फ गाते नहीं थे, बल्कि राग को महसूस करते थे। कई बार उन्हें समय का भी पता नहीं चलता था। भूख-प्यास भूलकर वे स्वरों में डूबे रहते थे।
उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात तालियाँ या प्रसिद्धि नहीं थी। वे मानते थे—
“मैं गा रहा हूँ तो सबसे पहले भगवान के लिए गा रहा हूँ। अगर मेरा गायन ईश्वर को अच्छा लगा, तो श्रोताओं को भी अवश्य अच्छा लगेगा।”
इसी को हम ‘स्वर-साधना’ और ‘स्वर-समाधि’ कह सकते हैं।
बच्चों, आज हमें पुराने गायकों से एक बहुत बड़ी बात सीखनी चाहिए—
गाना केवल आवाज़ से नहीं, मन से भी होता है।
रोज थोड़ा-थोड़ा अभ्यास करके, धैर्य रखकर और स्वरों का सम्मान करके ही गायन में सुंदरता और गहराई आती है।
और सबसे सुंदर बात—
“सच्चा संगीतकार प्रसिद्धि के पीछे नहीं भागता, वह स्वरों के पीछे चलता है। प्रसिद्धि तो उसके पीछे स्वयं आती है।”
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संगीताचार्य संत स्व.बाबा भगवान दास जी
Indoregenz

सफाई अभियान शिरपुर तालाब
18/08/2026

सफाई अभियान
शिरपुर तालाब

18/08/2026

वृक्षा रोपण

संगीत के साथ संस्कार और जिम्मेदारी…पंचम निषाद संगीत संस्थान में संगीत शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को जागरूक, संवेदनशील ए...
18/08/2026

संगीत के साथ संस्कार और जिम्मेदारी…

पंचम निषाद संगीत संस्थान में संगीत शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को जागरूक, संवेदनशील एवं जिम्मेदार नागरिक बनाने का भी प्रयास किया जाता है।
इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों से विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रोजेक्ट करवाए जाते हैं।जैसे सफाई अभियान,पर्यावरण के प्रति जागरूकता आदि।

क्योंकि हमारा उद्देश्य केवल अच्छे कलाकार बनाना नहीं, बल्कि अच्छे इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। 🇮🇳

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Nature Portfolio
CA Subhash Mathur
Abhishek Bablu Sharma
Prashant Badwe
संगीताचार्य संत स्व.बाबा भगवान दास जी
Arvind Tiwari
Abhishek Gawde
Sanjay Patel

Thank you Naiduniya ,and Prajatantra 🙏
18/08/2026

Thank you Naiduniya ,and Prajatantra 🙏

17/08/2026

Workshop

16/08/2026
16/08/2026

पंचम निषाद संगीत संस्थान में पद्मश्री पंडित उमाकांत गुंदेचा के मार्गदर्शन में “वॉइस कल्चर एवं ध्रुपद गायकी” विषय पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में संगीत विद्यार्थियों एवं साधकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए स्वर-साधना, रियाज़ और ध्रुपद की परंपरा को समझने का महत्वपूर्ण अवसर बनी।
पंडित उमाकांत गुंदेचा ने कार्यशाला की शुरुआत विद्यार्थियों के रियाज़ से जुड़े प्रश्नों से की। उन्होंने रियाज़ की सही पद्धति, स्वर को साधने की प्रक्रिया तथा खर्ज साधना के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उन्होंने व्यावहारिक एवं समाधानकारक उत्तर दिए और बताया कि स्वर में गहराई, स्थिरता और परिपक्वता लाने के लिए नियमित एवं अनुशासित साधना कितनी आवश्यक है।
ध्रुपद की ऐतिहासिक यात्रा को समझाते हुए उन्होंने सामवेद की ऋचाओं से प्रबंध गायकी और प्रबंध से ध्रुपद गायकी के विकास की परंपरा को सरलता से समझाया। उन्होंने ध्रुपद के प्रारंभिक नोम-तोम आलाप के अक्षरों एवं उनके प्रयोग की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों से उसका अभ्यास भी करवाया।
व्यावहारिक सत्र में राग भूपाली को आधार बनाकर विद्यार्थियों से नोम-तोम आलाप करवाया गया। पंडित उमाकांत गुंदेचा ने स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करते हुए आलाप, जोड़ और झाला के माध्यम से ध्रुपद गायकी की विशेषताओं को स्पष्ट किया। इस दौरान विद्यार्थियों को ध्रुपद में स्वर-विस्तार, लयबद्धता और गायकी की गंभीरता का प्रत्यक्ष अनुभव मिला।
कार्यशाला के दूसरे महत्वपूर्ण सत्र में पंडित अखिलेश गुंदेचा ने पखावज के तालों की संरचना और तबले पर प्रयुक्त होने वाले तालों के साथ उनके संबंध को समझाया। उन्होंने आदिताल से लेकर ब्रह्म ताल तक विभिन्न तालों का मूलभूत अभ्यास विद्यार्थियों से करवाया। पखावज की बोल-परंपरा, ताल की संरचना और गायन के साथ उसके सामंजस्य को भी उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
पूरी कार्यशाला में विद्यार्थियों ने अत्यंत गंभीरता और उत्साह के साथ सहभागिता की। गायन के व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ उन्हें ध्रुपद की ऐतिहासिक परंपरा, नोम-तोम, खर्ज साधना, स्वर-साधना तथा ताल-पद्धति की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यक्रम में पंडित उमाकांत गुंदेचा एवं पंडित अखिलेश गुंदेचा का स्वागत संतोष चौधरी एवं मनीष मोडक ने किया। कार्यक्रम के अंत में शोभा चौधरी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। पंचम निषाद संगीत संस्थान द्वारा आयोजित यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रही

Address

73/1 Bhawanipur Colony, Annpurna Road
Indore
452009

Opening Hours

Monday 4pm - 9pm
Tuesday 4pm - 9pm
Wednesday 4pm - 9pm
Thursday 4pm - 9pm
Friday 4pm - 9pm
Saturday 4pm - 9pm

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