16/08/2026
पंचम निषाद संगीत संस्थान में पद्मश्री पंडित उमाकांत गुंदेचा के मार्गदर्शन में “वॉइस कल्चर एवं ध्रुपद गायकी” विषय पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में संगीत विद्यार्थियों एवं साधकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए स्वर-साधना, रियाज़ और ध्रुपद की परंपरा को समझने का महत्वपूर्ण अवसर बनी।
पंडित उमाकांत गुंदेचा ने कार्यशाला की शुरुआत विद्यार्थियों के रियाज़ से जुड़े प्रश्नों से की। उन्होंने रियाज़ की सही पद्धति, स्वर को साधने की प्रक्रिया तथा खर्ज साधना के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उन्होंने व्यावहारिक एवं समाधानकारक उत्तर दिए और बताया कि स्वर में गहराई, स्थिरता और परिपक्वता लाने के लिए नियमित एवं अनुशासित साधना कितनी आवश्यक है।
ध्रुपद की ऐतिहासिक यात्रा को समझाते हुए उन्होंने सामवेद की ऋचाओं से प्रबंध गायकी और प्रबंध से ध्रुपद गायकी के विकास की परंपरा को सरलता से समझाया। उन्होंने ध्रुपद के प्रारंभिक नोम-तोम आलाप के अक्षरों एवं उनके प्रयोग की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों से उसका अभ्यास भी करवाया।
व्यावहारिक सत्र में राग भूपाली को आधार बनाकर विद्यार्थियों से नोम-तोम आलाप करवाया गया। पंडित उमाकांत गुंदेचा ने स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करते हुए आलाप, जोड़ और झाला के माध्यम से ध्रुपद गायकी की विशेषताओं को स्पष्ट किया। इस दौरान विद्यार्थियों को ध्रुपद में स्वर-विस्तार, लयबद्धता और गायकी की गंभीरता का प्रत्यक्ष अनुभव मिला।
कार्यशाला के दूसरे महत्वपूर्ण सत्र में पंडित अखिलेश गुंदेचा ने पखावज के तालों की संरचना और तबले पर प्रयुक्त होने वाले तालों के साथ उनके संबंध को समझाया। उन्होंने आदिताल से लेकर ब्रह्म ताल तक विभिन्न तालों का मूलभूत अभ्यास विद्यार्थियों से करवाया। पखावज की बोल-परंपरा, ताल की संरचना और गायन के साथ उसके सामंजस्य को भी उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
पूरी कार्यशाला में विद्यार्थियों ने अत्यंत गंभीरता और उत्साह के साथ सहभागिता की। गायन के व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ उन्हें ध्रुपद की ऐतिहासिक परंपरा, नोम-तोम, खर्ज साधना, स्वर-साधना तथा ताल-पद्धति की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यक्रम में पंडित उमाकांत गुंदेचा एवं पंडित अखिलेश गुंदेचा का स्वागत संतोष चौधरी एवं मनीष मोडक ने किया। कार्यक्रम के अंत में शोभा चौधरी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। पंचम निषाद संगीत संस्थान द्वारा आयोजित यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रही