06/10/2025
2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “Make in India” का नारा बुलंद किया, तो विपक्ष ने इसे “जुमला” करार देकर खूब मज़ाक उड़ाया। राहुल गांधी और कांग्रेस ने इसे “फेल प्रोग्राम” कहकर खारिज किया, दावा किया कि यह सिर्फ़ शब्दों का खेल है।
लेकिन आज, 2025 में, तस्वीर पूरी तरह पलट चुकी है। दुनिया का आर्थिक नक्शा बदल रहा है, और यूरोपियन यूनियन (EU) भारत के दरवाज़े पर दस्तक दे रहा है, कह रहा है, “हमें Make in India का हिस्सा बनने दो!” यह सिर्फ़ बातें नहीं, बल्कि वैश्विक भरोसे की जीती-जागती मिसाल है।
6 अक्टूबर 2025 से भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड अग्रीमेंट (FTA) की 14वीं राउंड की वार्ता ब्रुसेल्स में शुरू हो रही है। इससे पहले ही यूरोपीय कारोबारियों का उत्साह सातवें आसमान पर है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, ग्रीन एनर्जी, फार्मास्यूटिकल्स, और हाई-टेक सेक्टर—EU की नज़र भारत के हर बड़े अवसर पर टिकी है।
EU दूत हर्वे डेल्फिन ने साफ़ कहा, “भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग का नया हब है।” 6,000 से ज़्यादा यूरोपीय कंपनियाँ भारत में पहले ही 30 लाख नौकरियाँ दे रही हैं, और FEBI सर्वे बताता है कि 80% कंपनियाँ FTA के बाद निवेश बढ़ाने को बेताब हैं।
EU को भारत में क्या दिख रहा है ?
एक स्थिर सरकार, जो 6-7% की रफ्तार से बढ़ती अर्थव्यवस्था का आधार बनी है। 1.4 अरब लोगों का विशाल बाज़ार, जो दुनिया में बेजोड़ है। और सबसे बड़ी बात—“आत्मनिर्भर भारत” की वह ताकत, जो भारत को सिर्फ़ उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन का सिरमौर बना रही है।
EU कमीशन ने 2025 में भारत को “भविष्य का साझेदार” करार दिया है। यह कोई छोटी बात नहीं—जो भारत कभी दबाव में समझौते करता था, आज वही भारत अपनी शर्तों पर दुनिया से बात कर रहा है।
भारत को इस FTA से क्या मिलेगा?
विदेशी निवेश में उछाल (€34.7 बिलियन से ज़्यादा), Make in India को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में अग्रणी स्थान, लाखों नई नौकरियाँ, अत्याधुनिक तकनीक का हस्तांतरण, और भारत की ब्रांड वैल्यू का और बुलंद होना। सेमीकंडक्टर से लेकर ग्रीन टेक्नोलॉजी तक, भारत अब दुनिया की ज़रूरत बन चुका है। 2024-25 में FDI में 25% की वृद्धि इसका जीवंत सबूत है।
तनिक विचार करिए... जिस “Make in India” को विपक्ष ने 2014 में हँसी का पात्र बनाया, वही आज यूरोप को अपनी ओर खींच रहा है।
अंतर स्पष्ट है: मोदी जी की दूरदृष्टि ने भारत को वैश्विक मंच पर स्थापित किया है, जबकि विपक्ष कुर्सी की सियासत में ही उलझा रहा..!
राहुल गांधी ने 2025 में संसद में कहा था, “Make in India फेल है,” लेकिन EU का उत्साह और निवेश की बाढ़ उनके दावों को आईना दिखा रही है।
बेशक, FTA की राह आसान नहीं। कृषि (डेयरी और सब्सिडी), डेटा लोकलाइजेशन, और बौद्धिक संपदा जैसे मुद्दों पर निश्चित रूप से तीखी बातचीत होगी। EU का CBAM (कार्बन बॉर्डर टैक्स) और ऑटो ड्यूटीज़ जैसे दबाव भी हैं। लेकिन भारत अब वह देश नहीं, जो दबाव में झुक जाए। UK और EFTA के साथ डील्स में भी भारत ने अपनी शर्तें मनवाईं, और EU के साथ भी यही होगा।
भारत आज अपनी ज़मीन पर खड़ा है, अपनी शर्तें तय करता है, और दुनिया उसका लोहा मान रही है। EU का भारत की ओर झुकाव इस बात का ज़ोरदार सबूत है कि 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था का इंजन भारत बनने जा रहा है। “Make in India” सिर्फ़ नारा नहीं, बल्कि वैश्विक भरोसे का प्रतीक बन चुका है।
यह मोदी सरकार की वह दूरदर्शिता है, जो भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। जो भारत पर भरोसा करता है, वही भविष्य गढ़ता है—और EU ने यह भरोसा दिखा दिया है।
भारत तैयार है, दुनिया तैयार है, अब बस इतिहास बनने और बनाने का समय है!