Dhanwantri Ayurved Pre-PG/PSC Classes
Enhance students towards their Target...
25/07/2022
PUBLIC NOTICE
25 July 2022
Inviting Online Applications for All India Ayush Post Graduate Entrance Test 2022
20/09/2021
*पथरी* (किडनी स्टोन)
जब हमारा खानपान तथा जीवनशैली बुरी तरीके से प्रभावित हो जाती है तब हमारे शरीर में बहुत सारी बीमारियों के होने का खतरा बना रहता है। इन्हीं बीमारियों में से एक है किडनी में स्टोन होना। कई बार तो ऐसा भी होता है कि लोग किडनी स्टोन की सर्जरी तक करवा लेते हैं मगर फिर भी यह ठीक नहीं होता है। कई बार सर्जरी करने वाले डॉक्टर भी यह कहते हुए पाए जाते हैं कि, 'सर्जरी के बाद दोबारा पथरी बनने की संभावना है। आयुर्वेद में इसके कारणों तथा लक्षणों के आधार पर ऐसी औषधियां मौजूद हैं जो प्राकृतिक तरीके से किडनी स्टोन को बाहर निकालने में सक्षम हैं। किडनी स्टोन के कुछ कारण इस प्रकार से हैं:
पथरी बनने का मुख्य कारण कम पानी का सेवन करना बताया गया है।
यूरीन में केमिकल की मात्रा बढ़ जाना।
अधिक मात्रा में जंक फूड तथा फास्ट फूड का सेवन करना।
शरीर में खानिज तथा मिनरल की कमी होना।
खराब जीवन शैली और व्यायाम की कमी इत्यादि पथरी होने के कारण हो सकते हैं।
गुर्दे की पथरी या किडनी स्टोन का आयुर्वेदिक उपचार:-
आयुर्वेद में किडनी स्टोन का सबसे अच्छा उपचार उपलब्ध है। आयुर्वेदिक उपचार ऐलौपैथी के मुकाबले बहुत ही कारगर साबित हो रहा है। आयुर्वेदिक उपचार के द्वारा किडनी स्टोन की समस्या से निजात हमेशा के लिए मिल जाता है जबकि ऐलोपैथी में ऐसा बिल्कुल भी नही है। आयुर्वेद सीधा बीमारी की जड़ पर वार करके उसको हमेशा के लिए नष्ट कर देता है, जिससे बीमारी के दुबारा होने की संभावना बिल्कुल समाप्त हो जाती है।
आयुर्वेदिक चिकित्सा किडनी स्टोन को ठीक करने के लिए एक प्राचीन उपचार है, जिसमें एक भी साइड इफेक्ट नहीं होता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा के द्वारा शरीर का शोधन करके उसका शुद्धिकरण कर दिया जाता है, जिससे शरीर के विषाक्त पदार्थ शरीर के बाहर आ जाते हैं और पथरी की समस्या से निजात मिल जाती है।
14/06/2020
Stay home ...stay with ayurved
22/01/2020
For New Batches...
19/11/2019
MP NHM CHO POST SYLLABUS
12/01/2019
Vacancy IN aiims jodhpur
Happy Diwali to all ✨🙏✨
1. " प्रततं कासमानश्च ज्योतिषिव च पश्यति " लक्षण है (चरक)
A. तमक श्वास
B. पित्तज कास
C. क्षतज कास
D. क्षयज कास
2. " प्रमोह कासमानश्च " लक्षण है ( चरक)
A. तमक श्वास
B. पित्तज कास
C. क्षतज कास
D. क्षयज कास
3.पंचकर्म किसकी चिकित्सा है
A.अस्थिप्रदोषज विकार
B. सन्निपातज ग्रहणी
C. मद व मूर्च्छा
D. सभी
4. " शिरस्तोऽनिलसम्भवः " - किसका लक्षण है
( च. चि. 3/72)
A. वातज ज्वर
B. चतुर्थक ज्वर
C. तृतीयक ज्वर
D. सन्निपातज ज्वर
5.चरक ने किस आसव के लिए " रोगानिक विनाशन : " कहा है -( च. चि. 15/161)
A. मूलासव
B. मध्वासव
C. पिण्डासव
D. द्राक्षासव
6." लंघन स्वेदन तिक्त दीपनानि कटुनि च...." किस रोग की चिकित्सा में वर्णीत है
A. तरुण ज्वर
B. नव ज्वर
C. आमवात
D. शूल
7. आदान काल मे दुर्बल देह के साथ ..... भी दुर्बल दिखाई देता है
A. अग्नि
B. रक्त
C. शरीर
D. मन
8. चरक अनुसार निद्रानाश का कारण है
A. क्रोध
B. दुषिविष
C. अभ्यंग
D. मद्य
13/09/2018
गणेश चतुर्थी तिथि की हार्दिक शुभकामनाएं...
06/09/2018
Uppsc ayurved amo question pattern...
26/08/2018
Happy raksha Bandhan...
Click here to claim your Sponsored Listing.
Location
Category
Telephone
Website
Address
Indore
452001