28/12/2025
नही है तू तो इंकार कैसा,,
नफी तो तेरे होने का पता है,,,,,
अक्ल में जो घिर गया क्यों कर हुआ
जो समझ में आ गया वो खुदा क्यों कर हुआ,,
न था कुछ तो खुदा था,,
जो न कुछ होता तो खुदा होता
डुबोया मुझको कुछ होने ने
न मै होता तो क्या होता
मेरे पिछले उन्वांन की पहली लाइन ही
GOD EXIST थीं
मैने जानबूझ कर DOES हटाया था
लाइन से मेरे तास्सुरात साफ थे
खुदा का वजूद है,,
इस डिबेट के लिए पिछले दो सालों से तैयारी चल रही थी ,, जावेद साहब हर बार कोई खूबसूरत बहाना बना कर निकल लेते थे (यह एक लंबी कहानी है जो फिर कभी,,)
A
पूरी डिबेट गोदी मीडिया पर करारा तमाचा थी
क्योंकि नेशनल चेनल पर कैसे मुर्गे लड़ाए जा रहे है यह सर्वविदित है
B
मुफ्ती शर्माइल के आर्ग्युमेंट (दलीलें) इस कदर पुख्ता थी जिसे नकार पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन लगने लगा था जिसके चलते जावेद साहब के हाथों में कंपकपी साफ दिखाई दे रही थी,,
C
*मदरसों पर उठती उंगलियों के मुंह बंद*
मुफ्ती शर्माइल के चंद अंग्रेजी अल्फाजों पर जावेद साहब बोल गए इट्स डिफिकल्ट इसे आसान भाषा में कर दीजिए
जैसे
मेटाफिजिकल,
कांटीजेंट
इन्फिनेट रिग्रेस ऑफ काजेस
नेसेसिटी बिंग
D
जावेद साहब इमोशनल ग्राउंड का सहारा लेते दिखे
जमीन पर गाजा में मरने वाले बच्चों पर सवाल रखा
छुरी बनाने वाला गलत नहीं उसका इस्तेमाल करने वाला गलत शैतान की रहनुमाई में चलने वाला गलत होगा
E
कमेंट बॉक्स जब मैने खंगाला तो ईमान लाने वालो के कमेंट्स से भरा पड़ा था
एक खबर को सही माने तो ४५०० से ३० हजार तक लोग ईमान में दाखिल हुवे
एक साहिबे हैसियत शेख ने मुफ्ती साहब को एक करोड़ की पेशकश की जिसे आपने मदरसों में तकसीम करने का फैसला कर दिया
F
पूरी डिबेट में दोनों पक्षों की तरफ से एक भी अल्फ़ाज़ ऐसा नहीं था जो अभद्र या शिष्टाचार विरूद्ध हो यह इस डिबेट की बड़ी खासियत रही
नो घुस्सा
नो तू तू, मै मै,,
नो गाली
नो तेवर बदलना
नो चिल्ला चोट
पूरी शालीनता सभ्यता, सौम्यता के साथ डिबेट चली
इंटलेक्चुअल तार्किक, बुद्धिजीवी डिबेट
करारा तमाचा गोदी मीडिया को
G
नो फ़िरका परस्ती
इक्का दुक्का इख़्तेफी पोस्ट आई जो कोई मायने नहीं रखती
इस मोज़ू पर लगभग सभी फ़िरके एक साथ ही खड़े मिले
कुछ पढ़ने वाले दोस्तो ने काफी की दावत देकर और भी कुछ लिखने को कहा तो दूसरी किश्त भी निष्कर्ष में लिखी गई है
इदरीस नामा