20/01/2022
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𝐅𝐨𝐫 𝐌𝐨𝐫𝐞 𝐃𝐞𝐭𝐚𝐢𝐥𝐬 𝐂𝐨𝐧𝐭𝐚𝐜𝐭 𝐔𝐬 𝐎𝐧 -𝟗𝟏𝟏𝟏𝟎𝟏𝟎𝟗𝟗𝟏 𝐨𝐫 𝐂𝐨𝐦𝐦𝐞𝐧𝐭 / 𝐢𝐧𝐛𝐨𝐱 𝐲𝐨𝐮𝐫 𝐜𝐨𝐧𝐭𝐚𝐜𝐭 𝐝𝐞𝐭𝐚𝐢𝐥𝐬.
18/01/2022
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07/01/2022
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06/08/2021
पूर्व विदेश मंत्री व प्रखर राष्ट्रवादी स्व. सुषमा स्वराज जी की पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन.
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31/07/2021
उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब में संगरूर जिले के सुनाम गांव में हुआ था। कम उम्र में ही माता-पिता का साया उठ जाने से उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा और अनाथालय में शरण लेनी पड़ी। लेकिन 1919 में हुए जालियांवाला बाग हत्याकांड के बाद उन्होंने पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन में कूदने का फैसला किया और अपनी जिंदगी आजादी की जंग के नाम कर दी। उस वक्त वे मैट्रिक की परीक्षा पास कर चुके थे।
आजादी की इस लड़ाई में वे 'गदर' पार्टी से जुड़े और उस वजह से बाद में उन्हें 5 साल की जेल की सजा भी हुई। जेल से निकलने के बाद उन्होंने अपना नाम बदला और पासपोर्ट बनाकर विदेश चले गए. लाहौर जेल में उनकी मुलाकात भगत सिंह से हुई. उधम सिंह भी किसी भी धर्म में विश्वास नहीं रखते थे।
माइकल ओ डायर पर चलाई गोली:-
13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन और रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की एक बैठक चल रही थी। जहां वो भी पहुंचे और उनके साथ एक किताब भी थी। इस किताब में पन्नों को काटकर एक बंदूक रखी हुई थी। इस बैठक के खत्म होने पर उधम सिंह ने किताब से बंदूक निकाली और माइकल ओ’ड्वायर पर फायर कर दिया। ड्वॉयर को दो गोलियां लगीं और पंजाब के इस पूर्व गवर्नर की मौके पर ही मौत हो गई।
जनरल डायर से जलियांवाला बाग का बदला कुछ इस तरह लिया ऊधम सिंह ने:-
गोली चलाने के बाद भी उन्होंने भागने की कोशिश नहीं की और गिरफ्तार कर लिए गए। ब्रिटेन में ही उन पर मुकदमा चला और 4 जून 1940 को उधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई। माइकल ओ डायर वो शख्स नहीं है, जिसने जलियावाला बाग में गोली चलाने का आदेश दिया था।
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29/07/2021
फिलीपींस बना दुनिया का पहला ऐसा देश, जिसने आनुवंशिक रूप से संशोधित 'गोल्डन राइस' के उत्पादन को दी मंजूरी
इस 23 जुलाई, 2021 को फिलीपींस आनुवंशिक रूप से संशोधित 'गोल्डन राइस' के व्यावसायिक उत्पादन को मंजूरी देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह मानना है कि, फिलीपींस द्वारा विकसित 'गोल्डन राइस' बचपन के अंधेपन से लड़ने और विकासशील देशों में लोगों की जान बचाने में मदद करेगा।
चावल, सोयाबीन और गेहूं जैसी फसलों के साथ-साथ फलों और सब्जियों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान एक प्राकृतिक गड़बड़ी होती है, जिसके दौरान पौधे ऐसे संसाधनों और ऊर्जा का उपभोग करते हैं और जिससे खराब उत्पादकता होती है।
फिलीपींस ने आनुवंशिक रूप से संशोधित 'गोल्डन राइस' को दी मंजूरी:-
कृषि विभाग-फिलीपीन चावल अनुसंधान संस्थान और अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) ने यह गोल्डन राइस (सुनहरा चावल) विकसित करने में 20 साल बिताए हैं। इसके चमकीले पीले रंग के कारण इस चावल को गोल्डन राइस नाम दिया गया है।
गोल्डन राइस पहला आनुवंशिक रूप से संशोधित ऐसा चावल है जिसे दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में वाणिज्यिक प्रसार के लिए मंजूरी दी गई है।
अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में खाद्य सुरक्षा नियामकों ने इस गोल्डन राइस का विश्लेषण किया था और इसे फसल के तौर पर मंजूरी दी गई थी लेकिन, व्यावसायिक उत्पादन के लिए नहीं। बांग्लादेश फिलहाल इसकी समीक्षा कर रहा है।
गोल्डन राइस का महत्व: यह अधिक पौष्टिक क्यों है?
सरकारी नियामकों ने चावल को अधिक पौष्टिक बनाने के लिए उसे विटामिन ए-अग्रदूत बीटा-कैरोटीन से समृद्ध बनाने के लिए जैव सुरक्षा परमिट जारी किया है।
सामान्य चावल में बीटा-कैरोटीन पौधे में पैदा होता है लेकिन अनाज/ चावल के दानों में नहीं। लेकिन गोल्डन राइस के दानों में बीटा-कैरोटीन होता है।
छोटे बच्चों में विटामिन ए की अनुमानित आवश्यकता का 50 प्रतिशत प्रदान करने के लिए इस गोल्डन राइस को विकसित किया गया है।
यह गोल्डन राइस उपभोग के लिए कब उपलब्ध होगा?
IRRI के रसेल रिंकी ने यह कहा है कि, अभी यह परियोजना नियामक चरण से गुजरी है।
वर्ष, 2022 में फिलीपींस के चुनिंदा प्रांतों में विभिन्न किसानों को सीमित मात्रा में गोल्डन राइस के बीज वितरित किए जाएंगे। इस गोल्डन चावल का उत्पादन सामान्य चावल की तरह ही होता है। इसके लिए किसी अतिरिक्त उर्वरक या प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता नहीं होती है।
विटामिन ए की कमी से प्रति वर्ष 50,000 बच्चों में बचपन का अंधापन होता है: WHO
IRRI के अनुसार, फिलीपींस में 05 वर्ष से कम आयु के लगभग 17 प्रतिशत बच्चे विटामिन ए की कमी से पीड़ित हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार हर साल 50,000 बच्चों में विटामिन ए की कमी पाई जाती है, जिनमें से आधे बच्चों की आंखों की रोशनी जाने के 12 महीने के भीतर ही इन बच्चों की मौत हो जाती है।
29/07/2021
The theme for 2021 is - “Their Survival is in our hands”
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस का इतिहास
दुनियाभर के मात्र 13 देशों में ही बाघ पाए जाते हैं, वहीं इसके 70 प्रतिशत बाघ केवल भारत में हैं। साल 2010 में भारत में बाघों की संख्या 1 हजार 7 सौ के करीब पहुंच गई थी। जिसके बाद लोगों में बाघों के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए साल 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में एक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें हर साल अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाए जाने की घोषणा की गई। इस सम्मेलन में कई देशों ने 2022 तक बाघों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।
भारत में भारतीय वन्य जीव बोर्ड द्वारा 1972 में शेर के स्थान पर बाघ को भारत के राष्ट्रीय पशु के रूप में अपनाया गया था। देश के बड़े हिस्सों में इनकी मौजूदगी के कारण ही इन्हें भारत के राष्ट्रीय पशु के रूप में चुना गया था। इसके बाद सरकार ने बाघों की कम होती संख्या को देखते हुए 1973 में बाघ बचाओ परियोजना शुरू की थी। जिसके तहत चुने हुए बाघ आरक्षित क्षेत्रों को विशिष्ट दर्जा दिया गया और वहां विशेष संरक्षण के लिए प्रयास किए गए, इसी परियोजना को अब नेशनल टाइगर अथॉरिटी बना दिया गया है।
बाघ संरक्षण:-
वाइल्फ लाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते दो सालों में देश में 201 बाघो की मौत हुई है। इनमें से 63 बाघों का शिकार किया गया है। साल 2017 में 116 और 2018 में 85 बाघों की मौत हुई है। 2018 में हुई गणना के अनुसार 308 है। साल 2016 में 120 बाघों की मौत हुई थी, जो साल 2006 के बाद सबसे अधिक थी। साल 2015 में 80 बाघों की मौत की पुष्टि की गई थी। इससे पहले साल 2014 में यह संख्या 78 थी। आज दुनिया में केवल 3,890 बाघ ही बचे हैं। अकेले भारत में दुनिया के 60 फीसदी बाघ पाए जाते हैं, लेकिन भारत में बाघों की संख्या मं बीते सालों में काफी गिरावट हाई है। एक सदी पहले भारत में कुल एक लाख बाघ हुआ करते थे। यह संख्या आज घटकर महज 1500 रह गई है।
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28/07/2021
World Nature Conservation Day
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस
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