31/12/2025
❗भागीरथ नाम का अर्थ इतिहास में संकल्प, प्रयास और शुद्धता से जुड़ा रहा है। लेकिन इंदौर का भागीरथपुरा आज किसी पौराणिक गौरव का दावा नहीं करता। यह एक साधारण इलाक़ा है, जहाँ रहने वाले लोग भी वही उम्मीद रखते हैं जो किसी भी शहरवासी की होती है कि नल से आने वाला पानी ज़हर नहीं होगा।
हाल की घटना ने इसी सबसे बुनियादी भरोसे को तोड़ दिया। शौचालय के नीचे से गुजर रही मेन पाइपलाइन में लीकेज हुआ, दूषित पानी पेयजल लाइन में मिला, और नतीजा, 3 लोगों की मौत, 35 से अधिक नागरिक अस्पतालों में भर्ती। यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं, बल्कि वर्षों से बुनियादी ढांचे के साथ बरती जा रही अदृश्य उपेक्षा का परिणाम है। कुछ लोग ठीक हो जाएंगे, कुछ जीवन भर इसके असर झेलेंगे। लेकिन जो भरोसा टूटा है, उसकी भरपाई कौन करेगा?
इंदौर को बार-बार देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है। मंच सजते हैं, तालियाँ बजती हैं, बैनर लगते हैं। लेकिन स्वच्छता का अर्थ केवल साफ़ सड़कें नहीं होता। स्वच्छता का पहला और आख़िरी पैमाना शुद्ध पानी है। अगर वही संदिग्ध है, तो सारी रैंकिंग अर्थहीन लगने लगती हैं। यह सवाल असहज है, लेकिन ज़रूरी है क्या हमारी नगर व्यवस्था ज़मीन के ऊपर दिखने वाले विकास में व्यस्त है, और ज़मीन के नीचे सड़ती पाइपलाइनों से आँखें मूँद चुकी है?
विडंबना यह है कि यह त्रासदी ऐसे समय सामने आई है जब इंदौर मेट्रो सिटी बनने के सपने देख रहा है। मेट्रो लाइनें, फ्लाईओवर, स्मार्ट सिग्नल सब कुछ भविष्य की तस्वीर गढ़ रहा है। लेकिन यह भविष्य कैसा होगा, अगर वर्तमान में नागरिकों को पीने का सुरक्षित पानी भी न मिल सके? विकास का अर्थ केवल गति या ऊँचाई नहीं होता। विकास का असली मूल्यांकन वहाँ होता है जहाँ आम आदमी की ज़िंदगी निर्भर करती है पानी, हवा और स्वास्थ्य पर और यही तीनों आज सबसे ज़्यादा उपेक्षित हैं।
आज इंदौर आगे बढ़ रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि शहर अपने नागरिकों को शुद्ध पानी तक सुनिश्चित नहीं कर पा रहा। यह विकास नहीं, विरोधाभास है। आने वाले समय में पेड़ों की कटाई के साथ शुद्ध हवा भी दुर्लभ होगी। तब शायद हम कहेंगे कोई बात नहीं, विकल्प हैं। जैसे आज कहते हैं बोतलबंद पानी है। यही सोच सबसे खतरनाक है। बिना विकास के जीवन चल सकता है, लेकिन बिना स्वच्छ हवा और पानी के नहीं। यह प्रकृति का संकेत है कि अब भी समय है प्राथमिकताओं के पुनर्निर्धारण का। जवाबदेही तय किए बिना और बुनियादी ढांचे को राजनीति से ऊपर रखे बिना, ऐसी घटनाएँ दोहराई जाती रहेंगी।
भागीरथपुरा आज सिर्फ़ एक इलाक़ा नहीं है। यह एक सवाल है और यह सवाल पूरे इंदौर से जवाब मांग रहा है।