23/01/2026
या कुन्देन्दुतुषाहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निशेषजाद्यपहा || 🙏🏻
वसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का उत्सव नहीं, बल्कि चेतना, ज्ञान और नव-आरंभ का संदेश है। 🌸✨
माँ सरस्वती से प्रार्थना है कि हम सभी के भीतर सीखने की जिज्ञासा, सोचने की स्पष्टता और समाज के लिए कुछ सकारात्मक करने का साहस सदेव जागृत रहे 🙏🏻💡
आप सभी को ‘वसंत पंचमी’ ‘सरस्वती पूजा’ की हार्दिक शुभकामनाएँ।🌼🙏
11/02/2024
एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर शत शत नमन.
पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के सह-संस्थापक थे. साल 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की नींव रखी थी फरवरी 1968 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया
13/08/2022
तिरंगा यात्रा का हुआ आयोजन * * स्वाधीनता के 75वर्ष के निमित्त आज़ादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत प्रेरणा बाल निकेतन स्कूल बामनखेड़ी द्वारा तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। तिरंगा यात्रा मे मुख्यरुप से छात्रों ने अपनी सहभागिता की, रैली गांव बामनखेड़ी में मुख्य मार्गों से होती हुई पुनः विद्यालय पहुंची। इस अवसर पर ग्रामवासी विद्यालय परिवार के समस्त शिक्षक उपस्थित रहे।*
#आजादी_का_अमृत_महोत्सव 2022
PRO Ratlam
12/04/2022
परिक्षा उपरांत कक्षा आठवीं के चयनित विद्यार्थियों का शैक्षणिक भ्रमण सैलाना कैक्टस गार्डन, केदारनाथ मंदिर सैलाना रतलाम मध्यप्रदेश किया गया
कांटों की ये दुनिया बसती है, रतलाम शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर सैलाना में, जिसे लोग कैक्टस गार्डन के नाम से जानते है। कांटों से भरे इस बगीचे में करीब 1800 प्रजाती के कैक्टस मौजूद है, जिसके चलते यह एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन कहलाता है। कैक्टस की यहां जितनी प्रजातियां हैं, उतनी शायद ही कहीं होगी। यहीं कारण है, कि आज भी एशिया में यह अपनी कांटों भरी चमक बिखेर रहा है। इसका निर्माण सैलाना महाराज दिगविजय सिंह ने कराया था। वह 1958 में जर्मनी की यात्रा पर गए थे और वहां उन्होंने कैक्टस देखें और उसके दीवाने हो गए। उसके बाद उन्होंने सैलाना में इसका बगीचा बनाने की ठानी और विदेशों से कैक्टस के पौधे बुलाकर एक ऐसा बगीचा तैयार कर लिया।
विदेशों से आए पौधे और मिट्टी
सैलाना के कैक्टस गार्डन में जर्मनी, टेक्सास, मैक्सिको, चिली सहित अन्य कई देशों से आए कैक्टस के पौधे लगे हंै। पौधे यहां जीवित रह सके इसके लिए विदेशों से पौधों के साथ मिट्टी भी मंगवाई गई थी। आम तौर पर लोग कांटों से बचते है, लेकिन यहां आने वाले लोग इनकी खूबसूरती को देख उन्हें छूने का प्रयास करते है। उस जमाने में बने इस बगीचे में फिल्म जीने नहीं दूंगा में धर्मेंद्र का एक गाना भी इस बगीचे में फिल्माया गया था। धर्मेंद्र जब शूटिंग के लिए गार्डन में पहुंचे थे, तो वह भी इसके दीवाने हो गए।
कैक्टस का जड़ीबूटी में भी उपयोग होता है लेकिन यह भी सच है कि इस पौधे में खिलने वाले फूल भी दुनिया के सबसे सुंदर फूलों में गिने जाते है। यहां पर वनस्पतिशास्त्र में शोध करने वाले भी बहुत से प्रोफेसर और छात्र आते हैं। सैलानियों के लिए भी यह स्पॉट बहुत अच्छा है। नए साल और क्रिसमस सेलिब्रेशन में बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचेंगे। हर साल टूरिस्टों के स्वागत के लिए यहां विशेष इंतजाम किया जाता है। यहां राजाओं के समय का महाकेदारेश्वर मंदिर है। इस मंदिर के पास ही बहुत सुंदर कुंड जो कि एक झरने के गिरने से बना है।
14/09/2021
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।
आप सभी को राष्ट्रीय #हिंदी_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई।