12/04/2022
परिक्षा उपरांत कक्षा आठवीं के चयनित विद्यार्थियों का शैक्षणिक भ्रमण सैलाना कैक्टस गार्डन, केदारनाथ मंदिर सैलाना रतलाम मध्यप्रदेश किया गया
कांटों की ये दुनिया बसती है, रतलाम शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर सैलाना में, जिसे लोग कैक्टस गार्डन के नाम से जानते है। कांटों से भरे इस बगीचे में करीब 1800 प्रजाती के कैक्टस मौजूद है, जिसके चलते यह एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन कहलाता है। कैक्टस की यहां जितनी प्रजातियां हैं, उतनी शायद ही कहीं होगी। यहीं कारण है, कि आज भी एशिया में यह अपनी कांटों भरी चमक बिखेर रहा है। इसका निर्माण सैलाना महाराज दिगविजय सिंह ने कराया था। वह 1958 में जर्मनी की यात्रा पर गए थे और वहां उन्होंने कैक्टस देखें और उसके दीवाने हो गए। उसके बाद उन्होंने सैलाना में इसका बगीचा बनाने की ठानी और विदेशों से कैक्टस के पौधे बुलाकर एक ऐसा बगीचा तैयार कर लिया।
विदेशों से आए पौधे और मिट्टी
सैलाना के कैक्टस गार्डन में जर्मनी, टेक्सास, मैक्सिको, चिली सहित अन्य कई देशों से आए कैक्टस के पौधे लगे हंै। पौधे यहां जीवित रह सके इसके लिए विदेशों से पौधों के साथ मिट्टी भी मंगवाई गई थी। आम तौर पर लोग कांटों से बचते है, लेकिन यहां आने वाले लोग इनकी खूबसूरती को देख उन्हें छूने का प्रयास करते है। उस जमाने में बने इस बगीचे में फिल्म जीने नहीं दूंगा में धर्मेंद्र का एक गाना भी इस बगीचे में फिल्माया गया था। धर्मेंद्र जब शूटिंग के लिए गार्डन में पहुंचे थे, तो वह भी इसके दीवाने हो गए।
कैक्टस का जड़ीबूटी में भी उपयोग होता है लेकिन यह भी सच है कि इस पौधे में खिलने वाले फूल भी दुनिया के सबसे सुंदर फूलों में गिने जाते है। यहां पर वनस्पतिशास्त्र में शोध करने वाले भी बहुत से प्रोफेसर और छात्र आते हैं। सैलानियों के लिए भी यह स्पॉट बहुत अच्छा है। नए साल और क्रिसमस सेलिब्रेशन में बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचेंगे। हर साल टूरिस्टों के स्वागत के लिए यहां विशेष इंतजाम किया जाता है। यहां राजाओं के समय का महाकेदारेश्वर मंदिर है। इस मंदिर के पास ही बहुत सुंदर कुंड जो कि एक झरने के गिरने से बना है।