14/04/2026
आज कुछ अपनी बातें....
दो दिन पहले शकेब जलाली साहब का एक शेर पढ़ा..
"आज भी शायद कोई फूलों का तोहफ़ा भेज दे
तितलियाँ मंडला रही हैं काँच के गुल-दान पर..
पौधों का बहुत शौक रहा, बचपन बीता शहर पटना में जहाँ चारों ओर हरियाली थी, गंगा नदी घर से कुछ ही दूरी पर थी l शादी के बाद बड़ी सी छत वाले घर में पौधे लगाने शुरू किए, हर रविवार एक माली भैया आते , खाद देना, मिट्टी की गुदाई करना, पौधों की मौसम अनुसार फेर बदल करना बखूबी करते l मेहनत उनकी और मैं छत की हरियाली देख गर्व करती.. सालों ये सिलसिला चलता रहा.. फ़िर आया covid.. माली भैया गाँव चले गए और मुड़ वापस नहीं आए...nursery जाकर उनका पता किया पर किसी को कुछ नहीं मालूम था l तो इतने पौधों के रख रखाव की ज़िम्मेदारी आ गई मेरे ही सिर पर, "भई शौक तुम्हें है तो करो देखभाल" सुनाया गया...
बस अब शुरू हुई मेरी पढ़ाई, पौधों की पढ़ाई, facebook पर एक plant group से जुड़ी, बहुत कुछ सीखा, compost बनाना, नींबू और संतरे के छिलकों से bio-enzyme बनाए.. Adenium का लगभग बीस साल पुराना पौधा कुछ मुरझाने लगा, सीखे हुए एक एक बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए पिछले साल इतने बड़े पौधे की कटाई की और फिर अकेले repot किया.. रोज़ इस पौधे से बातें करती, कुछ पंद्रह बीस दिनों बाद जब पहली हरि पत्ती दिखाई दी तो लगा जैसे जग जीत लिया हो मैंने... इस साल तो adenium फूलों से भरा है..माली भैया को याद अब भी करती हूँ..पौधे कुछ कम कर दिए है.. खुले आसमान के नीचे रखे इन पौधों में एक कोना मेरा भी है जहाँ बैठ कर सर्दियों में किताबें पढ़ती हूँ, इन्हें देखकर एक सुकून मिलता है, क्योंकि कुछ नया सीखा है मैंने..
कुछ photos साँझा कर रही हूँ आपके साथ..
#छत
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