कंजूस सास - 4/10 | बेवकूफ बहू
Bedtime Dreams
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कंजूस अत्याचारी सास और बहु : -
कमला कंजूस और अत्याचारी सास थी ।वह अपनी बहु रेखा के ऊपर बहुत अत्याचार करती थी ।इतना अत्याचार करती थी की आस पास रहने वालों को भी रेखा के ऊपर दया आ जाती थी मगर कमला के अंदर रत्ती भर भी दया न थी
महिला :अरे कमला देख तो बेचारी के हाथों का हाल कितना बुरा हो गया है रहने दे कुछ दिन इससे काम मत करवा
कमला :अच्छा तो अब तू मुझे सिखाएगी क्या करना है क्या नहीं पहले जा अपने बेवरे पति को संभाल मेरे घर पे ध्यान देना बंद कर
महिला :भगवान् तेरी जैसी सास दुश्मन को भी न दे
कमला के बेटे अमन ने रेखा से लव मैरेज की थी कमला को ये बात बिल्कुल पसंद नहीं आयी थी
अमन :माँ रेखा कहाँ है ...?कब से ढूंढ रहा हूँ मिल ही नहीं रही
कमला :कहाँ होगी मुझे कैसे पता रहेगा क्या यही काम रह गया है मेरा उसके आगे पीछे घूमती रहूं और पता करूं वो कहाँ है
अमन :ओह्ह माँ आप तो एक बात का सही जवाब नहीं दे सकती जब पूछूं आम तो आप बोलती है इमली जब पूछूं इमली तो आप बोलती है आम ।मैं ही पागल हूँ जो आपसे रेखा के बारे में पूछने आता हूँ
कमला :हाँ तो जब इतना दिमाग है ही तेरे पास तो क्यों आता है जा खुदही जाकर ढूंढ अपनी फूलकुमारी को
कमला रेखा को कुए से पाने लाने भेजी थी मगर उसने जान बूझकर अमन को कुछ नहीं बताया
रेखा कुए से पानी लेकर घर आती है
अमन :अरे रेखा तुम कहाँ चली गयी थी मैं कबसे तुम्हे ढूंढ रहा
रेखा :जी मैं तो कुए से पानी लाने गयी थी बोलिये क्या बात है
अमन :आज शाम में तुम्हे मेरे साथ चलना है
रेखा :कहाँ चलना है ...?
अमन :अरे देखो तो सही तुम्हारी साड़ी का हाल कितना बुरा हो गया है एक नयी साड़ी खरीद दूंगा तुम्हारी पसंद का
कमला यह सब सुन रही थी ।नयी साड़ी की बात सुनते ही कमला के कान खड़े हो जाते है
कमला :क्या !नयी साड़ी नहीं बिल्कुल नहीं एक रूपये बर्बाद करनी की आवश्यकता नहीं मेरी कुछ फटी पुरानी साड़ी पड़ी है वही पहनेगी ये
अमन :माँ आप हमेशा रेखा के साथ ऐसा क्यों करती है आखिर आपको इससे क्या दिक्क्त है
रेखा :अरे आप माँ के साथ बहस क्यों कर रहे है
अमन गुस्सा होकर वहां से चला जाता है
कमला :बस कर मैं सब समझती हूँ मेरे बेटे के सामने बहुत शरीफ बन रही मगर इससे कुछ भी नहीं होने वाला ,मैंने तीन मटका दिया था पानी लाने के लिए एक मटका कहाँ है अपने मायके दे आयी क्या ?
रेखा :माजी एक वहीँ कुए के पास है लेकर आती हूँ
कमला :आधा अधूरा काम करना तो तुझे आता है आज तक कभी पूरा काम किया है अब जा ही रही है तो और मटके लेती जा इनमे भी पानी ले आना
रेखा अकेली सुबह से लेकर रात तक काम करती थी ।कमला जान बूझकर रेखा से बहुत काम करवाया करती थी
कमला :जल्दी जल्दी सारे बर्तन निकालकर रेख देती हूँ कुए से वापस आएगी तब तक ये काम दे दूंगी
जैसे ही रेखा कुएं से पानी लेकर आती है तब तक कमला सारे बर्तन निकालकर रख दी थी
कमला :सुन अब इस काम में लग जा सभी बर्तन अच्छे से धो दे
रेखा :जी माजी
कमला :और हाँ बर्तन धोने के बाद कपड़े भी धो देना
अमन आता है और रेखा को बर्तन धोते हुए देखता है
अमन :अरे रेखा तुम अभी भी काम में ही लगी हो कितना काम करोगी
कमला :कहाँ काम कर रही है तबसे तो बैठी ही थी अभी ही काम दी हूँ
अमन चला जाता है कुछ घंटो बाद लौटता है तो देखता है रेखा कपडे धोने में लगी है
अमन :ओह्ह अरे माँ आप भूल गयी है क्या रेखा इंसान है मशीन नहीं है
कमला :मुझे सब समझ आ रहा अब घर की बहु है तो काम भी नहीं करेगी क्या तू जा..जाकर बैठ
काम करके रेखा की हालत बहुत ख़राब हो चुकी थी
रेखा :माजी अब मैं कुछ खा लेती हूँ बहुत भूख लगी है
कमला :हाँ हाँ ठीक है लेकिन हाँ कम कम खाना और इसी में से रात के लिए भी बचा लेना
रेखा का एक मुंहबोला भाई था किशन ।वो रेखा से मिलने आता है
किशन :अरे रेखा दी कहाँ हो बहुत दिन हो गए आपसे मिले हुए
रेखा :किशन तू यहाँ मैं बता नहीं सकती तुझे देखकर कितनी ख़ुशी हो रही है मुझे
किशन :आप मेरे साथ बाजार चलिए बहुत दिन हो गए गोलगप्पे खाये याद है न कैसे हम दोनों गोलगप्पे खाया करते थे हमारे बिच तो कम्पटीशन भी होती थी (हा हा हा)
रेखा :हाँ भाई याद है मुझे मगर अभी माजी घर में नहीं है और ये भी घर पे नहीं है घर को अकेला छोड़कर कैसे चली आऊं
किशन :दीदी ज्यादा वक़्त नहीं लगेगा
रेखा :हाँ वैसे माजी तो अब आती ही होंगी चल चलते है
रेखा किशन के साथ बाजार गोलगप्प्पे खाने आती है ।गोलगप्पे खाकर दोनों वापस घर आने लगते है तभी रास्ते में कमला रेखा को किशन के साथ देख लेती है
कमला :ये लड़का कौन है ?रेखा किस लड़के के साथ घूम रही आज तो इसकी खैर नहीं
किशन वापस चला जाता है और रेखा घर आती है कमला पहले से ही पहुंची हुयी थी
कमला :आज तो तूने सारी हदे पार कर दी एक अनजान आदमी के साथ गाँव में घूम रही है गाँव वाले देखेंगे तो क्या बोलेंगे कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं रहने देगी तू
रेखा :अरे माजी आप मेरी बात तो सुनिए
कमला :नहीं नहीं मुझे नहीं सुन्ना तुझे इसकी सजा तो मिलकर रहेगी
कमला एक डंडा लेकर आती है और रेखा की पिटाई करने लगती है
रेखा :मुझे मत मारिये मेरी बात तो सुनिए
अमन घर आता है और यह सब देख हैरान रह जाता है
अमन :अरे माँ ये आप क्या कर रही है दीजिये ये डंडा मुझे दीजिये क्या बात हो गयी जो आज आप ये तक करने पे आ गयी
रेखा :नहीं नहीं यह सब गलत बिल्कुल झूठ है वो कोई अनजान इंसान नहीं बल्कि मेरा मुंहबोला भाई किशन था वो घर आया था उसने मुझे बोला गोलगप्पे खाने चलने के लिए तो मैं मना नहीं कर पायी
अमन :अच्छा तो किशन आया था ..मां आप पहले पूरी बात तो जानिये आज आपने बहुत गलत किया है रेखा के साथ
।
कमला कुछ भी नहीं सुनती है और अपने कमरे में चली जाती है
अमन :रेखा मुझे माफ़ कर दो मुझे ऐसा लगता है मुझे तुमसे शादी ही नहीं करनी चाहिए थी सारी गलती मेरी ही है
एक दिन रेखा कुए से पानी लेने गयी हई थी अमन भी काम की वजह से बाहर ही था। केवल कमला घर पर थी और घर के बाहर थोड़ी आग जल रही थी जो की कमला ने ही जलाया था ठंडी की वजह से।
वो आग पूरी तरह से बुझी नहीं थी उसके कुछ तिनके उड़कर झोपड़ी में लग जाते है और तुरंत ही पुरे घर में आग लग जाती है
कमला :बचाओ बचाओ कोई मुझे बचाओ आग लग गयी कोई बचाओ मैं जल जाउंगी
वहां भीड़ लग जाती है मगर कोई भी अंदर जाने का साहस नहीं कर पा रहा था
रेखा :अरे यहां इतनी भीड़ क्यों लगी है हे भगवान आग ….अंदर तो माजी है कोई बचाओ
रेखा मदद के लिए पुकारती पुकारती घर के अंदर घुश जाती है
रेखा :माजी आप कहाँ है इधर आईये मैं आपको बाहर लेकर चलती हूँ जल्दी चलिए
रेखा कमला को बचाकर बाहर लाती है तब तक सभी पानी मार रहे थे कुछ समय बाद आग काबु में आ जाता है
कमला ;रेखा तू ठीक तो है न ...मुझे माफ़ कर दे मैंने आज तक तेरे साथ बहुत बुरा किया और आज अपनी जान की परवाह किये बिना ही तू मुझे बचाने आग में कूद पड़ी आज मुझे अपने किये पर बहुत पछतावा हो रहा
रेखा :माजी रोईए मत आपकी रक्षा करना तो मेरा फ़र्ज़ है
दोनों गले लग जाती है और दोनों के बीच सब ठीक हो जाता है ।
कंजूस सास और बहु की शॉपिंग :
माया अपनी कंजूस सास सुरेखा और अपने पति मुकेश के साथ रहती थी ।माँ और बीवी के चक्कर में बेचारा मुकेश फंस कर रह जाता था पत्नी की बात माने तो माँ का मुँह बन जाता था और माँ की बातें माने तो पत्नी का ।
मुकेश :हे भगवान् मैं करूं तो क्या करूं मेरी माँ बिल्कुल पैसे नहीं खर्च करना चाहती और माया को तो ढेर सारी शॉपिंग करने का शौक है ।इनदोनो को जो भी करना है करे मैं तो अब दोनों के बच में बोलने ही वाला नहीं हूँ
सुरेखा :अरे मुकेश तू क्या फुसफुसाकर खुदसे ही बातें किये जा रहा तबियत तो ठीक है न तेरी या तेरी बीवी की हरकतों की वजह से तू भी परेशान है जैसे मैं हूँ
मुकेश :मैं तो आपदोनो से ही परेशान हो चुका हूँ
सुरेखा :वापस से फुसफुसाकर बोल रहा क्या हुआ है तेरा गला ख़राब हो गया है क्या ?
माया :सुनिए आप मेरी बात सुनिए माजी तो हमेशा कुछ न कुछ बिना मतलब की बात कहती ही रहती है
सुरेखा :ओहोहो मैं बिना मतलब की बात करती हूँ तो तू कौनसी मतलब की बात करती है ।जरा मैं भी तो सुनु
माया :उफ़ माजी कितनी बार कहती हूँ आप मुझसे बहस मत किया कीजिए मुझे बहुत जरुरी काम है आपसे बहस करने के अलावा
माया :हाँ हाँ मैं समझ रही तेरे जरुरी काम । तीन घंटे अपनी दोस्त से फ़ोन पर बात करती रहेगी फिर मिलकर कहीं जाने का प्लान बनाएगी और सारे पैसे उड़ाकर आ जाएगी
मुकेश :अरे अरे ये दोनों तो फिरसे शुरू हो गए मुझे यहाँ से निकल लेना चाहिए
मुकेश ऑफिस चला जाता है मगर सास बहु अब तक बहस में ही लगी थी तभी दरवाजे की घंटी बजती है
सुरेखा :जा देखकर आ दरवाजे पर कौन है
माया :हाँ हाँ जा रही वैसे भी मुझे आपसे बहस करने में कोई दिलचस्पी नहीं
माया की दोस्त चंदा आयी थी
माया :अरे चन्दा तू आ गयी ..
चंदा :अरे हाँ माया आज तो बहुत दिक्कत हो गयी आने में मगर मैंने किसी भी तरह सबको मना लिया और यहाँ आयी चल अब जल्दी चल
सुरेखा :कहाँ चली महारानी ..
माया :आती हूँ माजी बाजार से आज अच्छी सेल लगी है कुछ कपडे खरीद लुंगी
सुरेखा :नहीं कोई जरूरत नहीं पैसे बर्बाद करने की चुप चाप घर में रहो
माया अपना बैग उठाती है
माया :ठीक है माजी दो घंटे में आती हूँ
माया अपनी दोस्त के साथ चली जाती है
सुरेखा :ये तो एक बात मानती ही नहीं है आखिर पैसे कैसे बचाऊ जितना मैं साल भर में खर्च नहीं करती हूँ ये लड़की महीने भर में खत्म कर देती है
माया बाजार आती है और ढेर सारे कपडे खरीदकर वापस घर लौटती है
सुरेखा :दिखा तो जरा क्या क्या ले आयी है
माया :नहीं नहीं माजी आपके समझ से बाहर है आप रहने दीजिये आप वापस से मुझे सुनाने लगेंगी इसलिए आप यह सब मत देखिये
सुरेखा :हाँ हाँ मुकेश इसलिए तो कमा ही रहा की तू सुबह शाम दिन रात शॉपिंग कर सके वो भी फ़ालतू चीजों का
माया :देखिये तो जरा अभी तो कुछ दिखाई भी नहीं तब आप मुझे सुनाने लगी दिखा दूंगी तो मेरा क्या होगा
माया सारा सामान लेकर कमरे में जाने लगती है सुरेखा सभी सामान की ओर ही देख रही थी
माया :(हा हा हा) दुखी क्यों होती है दिखा देती हूँ क्या क्या लायी हूँ लीजिये देखिये बिना देखे और पैसे जाने तो आपके गले से पानी भी नहीं उतरेगा लीजिये देख लीजिये (हा हा हा )
सुरेखा :हाँ हाँ ज्यादा मत बोल ला देखूं तो सही कितने रूपये बर्बाद हुए
शाम के वक़्त मुकेश ऑफिस से वापस आता है
मुकेश :हाँ तो बताओ क्या बना है खाने में \
सुरेखा :मैडम जी को खाना बनाने का होश कहाँ रहता है शॉपिंग करने से फुर्सत मिले इन्हे तब तो ये खाना पर ध्यान दे
मुकेश :इसका मतलब आज मुझे भूखा ही रहना होगा क्या ?
सुरेखा :तू क्यों भूखा रहेगा मैंने खाना बनाया है
मुकेश :उफ़ यही चीज पहली बार में बोलना चाहिए था न मैं तो डर ही गया लगा जैसे आपदोनो के चक्कर में मुझे भूखा ही सोना होगा
सुरेखा :मेरा क्या चक्ककर है बेटा तू अपनी बीवी को समझा ले आज भी इतनी खरीदी करके आयी है लग रहा है पुरे शहरवालो के तरफ से खरीदारी करने की जिम्म्मेद्दारी इसे ही मिली है ।हर रोज खरीदारी पर निकल जाती है
माया :ओह्ह्ह माजी आप न हमेशा कंजूसी की ही बात करती रहती है कैसे क्या बचा लूँ । मैं थोड़ी बहुत खरीदारी करती हूँ इसमें भी आपको दिक़्क़्क़त ही है
सुरेखा :(हा हा हा)\ क्या बोला तूने थोड़ी बहुत (हा हा हा) बस बस भगवान् से डर ये सब बोलने से पहले । भगवान् सब देख रहे है
माया :हाँ हाँ थोड़ा बहुत से थोड़ा ज्यादा
मुकेश :एक काम करता हूँ रात भर भूखा बैठकर आपदोनो का बहस देख लेता हूँ बताईये कैसा रहेगा
सुरेखा :नही नहीं बेटा रात भर नहीं बस आधा घंटा बैठ मैं इसकी सारी करतूत बताती हूँ
मुकेश :हे भगवान् माँ अब भी आपको यही सब सूझ रहा मुझे भूख लगी है कोई मुझे खाना देगा या नहीं ..
सुरेखा :तू इतनी देर से खड़ी होकर क्या कर रही है जा खाना निकालकर ला ...बेटा तू मेरी बात सुन
माया :नहीं नहीं आप इनकी बात मत सुनियेगा ये झूठी बातें बोलेंगी मैं खाना लेकर आती हूँ फिर आप मेरी बात सुनियेगा
मुकेश :क्या करूँ मैं आपलोगो का ...
सुरेखा :कुछ नहीं बेटा तू मेरी बात सुन
मुकेश :हाँ हाँ बोलिये सुन ही रहा हूँ अरे माया आज तुमने ऐसा क्या खरीद लिया है कोई नया घर खरीद ली हो क्या ..
सुरेखा :नहीं नहीं बेटा मगर इसका बस चले तो ये भी कर सकती है नयी सास भी खरीद लेगी नया पती भी खरीद लाएगी
माया :बस कीजिए माजी आप हमेशा मुझे खड़ी खोटी सुनाती है मैं सोने जा रही हूँ कल सेल लगने वाला है मुझे जाना भी है
सुरेखा :लो सुन लो .....
अगले दिन माया बाजार जाने के लिए रेडी हो जाती है
सुरेखा :सुन माया आज मैं तेरे साथ बाजार चलूंगी
माया :क्या !नहीं नहीं माजी फिर तो आप मुझे कुछ लेने ही नहीं देंगी
सुरेका :वो सब मैं नहीं जानती आज मैं चलूंगी देखूं तो जरा क्या क्या लेती है
माया :अच्छा ठीक है अब आप इतनी जिद्द कर रही है तो चलिए
सास बहु बाजार आती है और माया सामान खरीदने लगती है
माया :माजी ये साड़ी अच्छी लग रही ले लेती हूँ
सुरेख :ठीक है मैं पास वाले दूकान में देखती हूँ कुछ सस्ता मिल जाए तो ले लुंगी तेरी तरह तो नहीं खरीद सकती
सुरेखा को एक साड़ी पसंद तो आती है मगर बहुत महंगी थी इसलिए वो नहीं खरीदती है
माया :क्या हुआ माजी आपको कुछ नहीं पसंद आया क्या उस दूकान में?
सुरेखा :नहीं चल अब घर चलते है
दोनों घर आ जाती है
माया :माजी मैं आधे घंटे में आती हूँ ..
सुरेखा :अब कहाँ चली
माया :बस आती हूँ
माया आधे घंटे के बाद घर वापस आती है और सुरेखा के पास आती है
माया :ये लीजिये माजी ये आपको पसंद आयी थी न ...
सुरेखा :तुझे कैसे पता चला और तू इसे क्यों खरीद ले आयी ये महंगी थी
माया :कोई बात नहीं माजी आप इसे रखिये मैंने देख लिया था आपको ये साड़ी पसंद आयी है जब दुकानदार से पूछी तो सच्चाई पता चली इसलिए ये लायी आपके लिए और हाँ अबसे आप चिंता मत कीजिए मैं फिजूल खर्च बिल्कुल भी नहीं करुँगी
सुरेखा :अरे तुझे अचानक क्या हो गया ?
माया :माजी आज मैंने देखा एक महिला के कपड़े बिल्कुल फटे थे वो चाह रही थी कपड़े खरीदना मगर वो दुकानदार उसे कपडे नहीं दे रहा था क्युकी उसके पास कम पैसे थे मैंने सोचा मैं कितनी फिजूल खर्च कर देती हूँ और दुनिया में कितने लोग है जिन्हे थोड़ा भी नहीं मिल पाता इसलिए सोच समझकर खर्च करना चाहिए मैंने एक साड़ी उसे दिलवा दी
सुरेखा :तू तो बहुत अच्छी है मैं खामखा तुझे बुरा भला कहती थी
अब सब ठीक हो जाता है दोनों सास बहु मिलजुलकर रहने लगती है और मुकेश की चिंता भी खत्म हो जाती है ।
Story : भुक्कड़ बहु और कंजूस सास
संगीता ने कुछ महीने पहले ही अपने बेटे मुकेश की शादी कमला नामक लड़की से की थी । कमला खाने की सौखिन थी वह हर थोड़ी थोड़ी देर पर कुछ न कुछ खाने का खोजने लगती थी उसे बहुत भूख लगता था। संगीता बहुत कंजूस थी वह पैसे खर्च करना नही चाहती थी और नाही घर में किसी को खर्च करने देती थी।
संगीता की कुछ सहेलियां कमला को देखने आती है और साथ में कुछ फल और मिठाइयां भी लाती है।
संगीता: अरे आओ आओ बैठो …जाओ कमला इनके लिए कुछ खाने पीने का इंतजाम करो।
कमला की नजर तो फल और मिठाइयां पर ही थी।
संगीता: अरे तुझे सुनाई नही दे रहा क्या..? जाओ इनके लिए कुछ खाने पीने का इंतजाम करो।
कमला: जी माजी अभी जाती हूं । ये फल और मिठाइयां किचन में रख देती हूं।।
कमला फल और मिठाई लेकर किचन में आती है और मिठाई निकालकर खाने ही वाली होती हैं की तभी उसकी सास संगीता वहां आ जाती है।
संगीता: अरे कमला मैने बाहर उनलोगो के सामने कह दिया खाने पीने का इंतजाम करने को मगर सुनो आराम से किचन में रहो और आधे घंटे के बाद चाय ले आना दूध कम डालना और बिस्किट तीन चार ही रखना ज्यादा चीजे खर्च करने की जरूरत नही समझ गई।
कमला: हां माजी सब समझ गई
संगीता वापस अपने दोस्तो के पास आ जाती है।
कमला: हे भगवान मेरी सास कितनी कंजूस है इन्हे अगर मेरे खाने के शौख के बारे में पता लगा तो ये मुझे कुछ खाने भी नही देगी इनसे छिपछिप कर खाना होगा मुझे।
कमला मिठाइयां खाने लगती है और उसे पता भी नही चलता और डब्बे की पूरी मिठाई खत्म हो जाति है।
कमला: अरे सारी मिठाई तो खत्म हो गई माजी पूछेंगी तो क्या बोलूंगी।
कमला सोच में पड़ जाती है । आधा घंटा बीत चूका था।
कमला: पहले चाय देकर आती हूं इसके बाद सोचूंगी क्या करना है।
जैसा संगीता ने बताया था कमला बिल्कुल वैसा ही करती है ।
संगीता: अरे तू आ गई रख चाय यहां रख। लो तुम सभी चाय पियो।
बहुत समय बीत चुका था सभी चाय पीते है और चले जाते है
संगीता: बहुत बढ़िया मैं तुम्हे भी सबकुछ सिखा दूंगी कैसे पैसे बचाने है कैसे कम कम सामान इस्तेमाल करना है।
संगीता किचन में जाती है ।
संगीता: अरे कमला ये मिठाई का डब्बा खुला क्यू है और इसमें की मिठाइयां कहां गई?
कमला: मुझे नही पता माजी मै तो चाय बनाकर आ गई थी ..अरे हां अभी थोड़ी देर पहले ही मैने एक मोटे चूहे को भागते देखा था लगता है उसी चूहे ने खा लिया
संगीता: ओह ये क्या हो गया तुमने संभाल कर क्यों नहीं रखा
कमला : माफ कर दीजिए माजी आगे से ध्यान रखूंगी।
कमला को वापस से भूख लग गई थी । वह खाने की चीजे ढूढने लगती है।
कमला: चुपके से ये बिस्किट खा लेती हूं माजी पूछेंगी तो कह दूंगी मुझे नही पता चूहे ने खा लिया होगा।
घर में रखी सारी बिस्किट कमला खा जाति है।
आधी रात हो रही थी कमला को वापस से भूख लग जाति है।
कमला: अब क्या खाऊं बहुत जोर से भूख लगी है ।
कमला आधी रात में किचन में आती है ।
कमला: कुछ रोटियां बना लेती हूं सब्जी तो बची ही हुई है जल्दी जल्दी रोटी बनाकर खा लेती हूं माजी को पता भी नही चलेगा।
कमला रोटी बनाकर रोटी सब्जी खा लेती है और किचन को अच्छे से साफ करके जाने लगती है तभी संगीता वहां आ जाती है।
संगीता: क्या हुआ कमला तुम यहां?
कमला: माजी आप यहां..?
संगीता: मै तो पानी पीने आई हूं
कमला: हां हां मै भी वही पानी ही पीने आई हूं।
कमला को बाहर के खाने का भी शौख था मगर वह ज्यादा बाहर नही जा पाती थी इसलिए वह बाहर का कुछ भी नही खा पा रही थी।
कमला: मुझे बाहर जाना होगा और कुछ खाना होगा बहुत दिन हो गए ।
कमला मुकेश से थोड़े पैसे लेकर किसी भी बहाने से बाहर जाति है और चिकन बिरयानी खाने आती है ।
कमला: आ हा हा मजा आ गया कितने दिनो बाद चिकन बिरयानी खा रही वाह वाह ।
कमला चिकन बिरयानी खाती है और थोड़ा पैक भी करवा लेती है।
कमला एक थैले में चिकन बिरयानी छिपाकर ले आती है।
संगीता: कहां गई थी कमला?
कमला: माजी बस यहीं आस पास घूम रही थी मैं अभी आती हूं।
कमला भागती हुई कमरे में आती हैं और चिकन बिरयानी का थैला छिपा देती है।
घर का राशन इस बार बहुत जल्दी खत्म हो गया था।
संगीता: कमला तू सही से सामान का इस्तेमाल नही करती है आखिर इतनी जल्दी राशन कैसे खत्म हो गया जब मैं बनाती थी तब तो ऐसा नही होता था।
कमला: माजी मुझे नही पता और आप तो जानती ही है एक चूहा हमेशा आता है वो भी बहुत सामान बर्बाद कर देता है ।
आधी रात होते ही कमला को वापस से भूख लग जाति है ।वह चुपके से चिकन बिरयानी लेकर कमरे से बाहर आती है और एक कोने में बैठकर खाने लगती है।
संगीता पानी पीने किचन में आती है तभी उसकी नज़र कमला पर पड़ती है जो चुपके से बिरयानी खा रही थी । संगीता वहीं खड़ी होकर ये देखने लगती है।
संगीता: ये इस वक्त कमला वहां बैठकर क्या खा रही ।
कमला बिरयानी खाकर किचन में आती है।
कमला: चिकन बिरयानी से तो कुछ भी नही हुआ। मुझे अभी भी भूख लगी है एक काम करती हूं बाकी दिनों की तरह ही आज भी थोड़ी रोटियां बनाकर खा लेती हूं।
संगीता यह सब सुन लेती हैं और वापस अपने कमरे में आ जाति है।
संगीता: अच्छा तो इस वजह से राशन जल्दी खत्म हो रहा ये कमला तो मुझे कंगाल बना देगी इस तरह तो बहुत पैसे खर्च हो जाएंगे।
अगले दिन से संगीता कमला पर नजर रखती है और उसके खाने पीने पे भी नजर रखती है तब जाकर संगीता को पता चलता है कमला भुक्कड़ है उसे बहुत भूख लगता है।
मुकेश के ऑफिस से चॉकलेट का एक डब्बा मिला था। मुकेश वो चॉकलेट का डब्बा घर में रख कर चला जाता है ।कमला की नजर उसपर ही थी । कमला तुरंत उस डब्बे को उठाकर किचन में ले जाती है और सारी चॉकलेट खा जाति है । संगीता वह खाली डब्बा देखती है और कमला के पास आती है।
संगीता: ये भी चूहे ने ही खाया हैं न?
कमला: जी जी हां माजी उसी ने।
संगीता: कितना झूठ बोलोगी कमला मुझे सब पता चल गया है कल रात ही मैने तुम्हे चिकन बिरयानी खाते देखा फिर तुमने रोटियां भी बनाई और न जाने क्या क्या ..
कमला: माजी मै क्या करूं मुझे बहुत भूख लगती है मै खाने को देखकर खुद को रोक ही नही पाती । खाने की चीज देखते ही मेरा मन करता है मै तुरंत उसे खा लूं।
संगीता: देखो कमला इससे खर्च तो बहुत होगा ही और मैं इतना खर्च नही कर सकती साथ ही यह तुम्हारे सेहत के लिए बिल्कुल अच्छा नही आगे चलकर तुम्हे बहुत सारी बीमारियां भी हो सकती इसलिए कोशिश करो और थोड़ा थोड़ा कम खाना शुरु करो और हां कभी कभी तुम खा सकती हो मगर हर रोज़ इस तरह से नही खाओ।
कमला: माजी आप सही कह रही मुझे कोशिश करना चाहिए
कमला थोड़ा कम खाने की कोशिश करने लगती है और अब वो अपनी सेहत पर ध्यान देने लगती है ।कुछ महीनों में एकदम फिट हो जाती हैं और खाने के ऊपर भी नियंत्रण कर लेती है।
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