09/02/2024
कंजूस अत्याचारी सास और बहु : -
कमला कंजूस और अत्याचारी सास थी ।वह अपनी बहु रेखा के ऊपर बहुत अत्याचार करती थी ।इतना अत्याचार करती थी की आस पास रहने वालों को भी रेखा के ऊपर दया आ जाती थी मगर कमला के अंदर रत्ती भर भी दया न थी
महिला :अरे कमला देख तो बेचारी के हाथों का हाल कितना बुरा हो गया है रहने दे कुछ दिन इससे काम मत करवा
कमला :अच्छा तो अब तू मुझे सिखाएगी क्या करना है क्या नहीं पहले जा अपने बेवरे पति को संभाल मेरे घर पे ध्यान देना बंद कर
महिला :भगवान् तेरी जैसी सास दुश्मन को भी न दे
कमला के बेटे अमन ने रेखा से लव मैरेज की थी कमला को ये बात बिल्कुल पसंद नहीं आयी थी
अमन :माँ रेखा कहाँ है ...?कब से ढूंढ रहा हूँ मिल ही नहीं रही
कमला :कहाँ होगी मुझे कैसे पता रहेगा क्या यही काम रह गया है मेरा उसके आगे पीछे घूमती रहूं और पता करूं वो कहाँ है
अमन :ओह्ह माँ आप तो एक बात का सही जवाब नहीं दे सकती जब पूछूं आम तो आप बोलती है इमली जब पूछूं इमली तो आप बोलती है आम ।मैं ही पागल हूँ जो आपसे रेखा के बारे में पूछने आता हूँ
कमला :हाँ तो जब इतना दिमाग है ही तेरे पास तो क्यों आता है जा खुदही जाकर ढूंढ अपनी फूलकुमारी को
कमला रेखा को कुए से पाने लाने भेजी थी मगर उसने जान बूझकर अमन को कुछ नहीं बताया
रेखा कुए से पानी लेकर घर आती है
अमन :अरे रेखा तुम कहाँ चली गयी थी मैं कबसे तुम्हे ढूंढ रहा
रेखा :जी मैं तो कुए से पानी लाने गयी थी बोलिये क्या बात है
अमन :आज शाम में तुम्हे मेरे साथ चलना है
रेखा :कहाँ चलना है ...?
अमन :अरे देखो तो सही तुम्हारी साड़ी का हाल कितना बुरा हो गया है एक नयी साड़ी खरीद दूंगा तुम्हारी पसंद का
कमला यह सब सुन रही थी ।नयी साड़ी की बात सुनते ही कमला के कान खड़े हो जाते है
कमला :क्या !नयी साड़ी नहीं बिल्कुल नहीं एक रूपये बर्बाद करनी की आवश्यकता नहीं मेरी कुछ फटी पुरानी साड़ी पड़ी है वही पहनेगी ये
अमन :माँ आप हमेशा रेखा के साथ ऐसा क्यों करती है आखिर आपको इससे क्या दिक्क्त है
रेखा :अरे आप माँ के साथ बहस क्यों कर रहे है
अमन गुस्सा होकर वहां से चला जाता है
कमला :बस कर मैं सब समझती हूँ मेरे बेटे के सामने बहुत शरीफ बन रही मगर इससे कुछ भी नहीं होने वाला ,मैंने तीन मटका दिया था पानी लाने के लिए एक मटका कहाँ है अपने मायके दे आयी क्या ?
रेखा :माजी एक वहीँ कुए के पास है लेकर आती हूँ
कमला :आधा अधूरा काम करना तो तुझे आता है आज तक कभी पूरा काम किया है अब जा ही रही है तो और मटके लेती जा इनमे भी पानी ले आना
रेखा अकेली सुबह से लेकर रात तक काम करती थी ।कमला जान बूझकर रेखा से बहुत काम करवाया करती थी
कमला :जल्दी जल्दी सारे बर्तन निकालकर रेख देती हूँ कुए से वापस आएगी तब तक ये काम दे दूंगी
जैसे ही रेखा कुएं से पानी लेकर आती है तब तक कमला सारे बर्तन निकालकर रख दी थी
कमला :सुन अब इस काम में लग जा सभी बर्तन अच्छे से धो दे
रेखा :जी माजी
कमला :और हाँ बर्तन धोने के बाद कपड़े भी धो देना
अमन आता है और रेखा को बर्तन धोते हुए देखता है
अमन :अरे रेखा तुम अभी भी काम में ही लगी हो कितना काम करोगी
कमला :कहाँ काम कर रही है तबसे तो बैठी ही थी अभी ही काम दी हूँ
अमन चला जाता है कुछ घंटो बाद लौटता है तो देखता है रेखा कपडे धोने में लगी है
अमन :ओह्ह अरे माँ आप भूल गयी है क्या रेखा इंसान है मशीन नहीं है
कमला :मुझे सब समझ आ रहा अब घर की बहु है तो काम भी नहीं करेगी क्या तू जा..जाकर बैठ
काम करके रेखा की हालत बहुत ख़राब हो चुकी थी
रेखा :माजी अब मैं कुछ खा लेती हूँ बहुत भूख लगी है
कमला :हाँ हाँ ठीक है लेकिन हाँ कम कम खाना और इसी में से रात के लिए भी बचा लेना
रेखा का एक मुंहबोला भाई था किशन ।वो रेखा से मिलने आता है
किशन :अरे रेखा दी कहाँ हो बहुत दिन हो गए आपसे मिले हुए
रेखा :किशन तू यहाँ मैं बता नहीं सकती तुझे देखकर कितनी ख़ुशी हो रही है मुझे
किशन :आप मेरे साथ बाजार चलिए बहुत दिन हो गए गोलगप्पे खाये याद है न कैसे हम दोनों गोलगप्पे खाया करते थे हमारे बिच तो कम्पटीशन भी होती थी (हा हा हा)
रेखा :हाँ भाई याद है मुझे मगर अभी माजी घर में नहीं है और ये भी घर पे नहीं है घर को अकेला छोड़कर कैसे चली आऊं
किशन :दीदी ज्यादा वक़्त नहीं लगेगा
रेखा :हाँ वैसे माजी तो अब आती ही होंगी चल चलते है
रेखा किशन के साथ बाजार गोलगप्प्पे खाने आती है ।गोलगप्पे खाकर दोनों वापस घर आने लगते है तभी रास्ते में कमला रेखा को किशन के साथ देख लेती है
कमला :ये लड़का कौन है ?रेखा किस लड़के के साथ घूम रही आज तो इसकी खैर नहीं
किशन वापस चला जाता है और रेखा घर आती है कमला पहले से ही पहुंची हुयी थी
कमला :आज तो तूने सारी हदे पार कर दी एक अनजान आदमी के साथ गाँव में घूम रही है गाँव वाले देखेंगे तो क्या बोलेंगे कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं रहने देगी तू
रेखा :अरे माजी आप मेरी बात तो सुनिए
कमला :नहीं नहीं मुझे नहीं सुन्ना तुझे इसकी सजा तो मिलकर रहेगी
कमला एक डंडा लेकर आती है और रेखा की पिटाई करने लगती है
रेखा :मुझे मत मारिये मेरी बात तो सुनिए
अमन घर आता है और यह सब देख हैरान रह जाता है
अमन :अरे माँ ये आप क्या कर रही है दीजिये ये डंडा मुझे दीजिये क्या बात हो गयी जो आज आप ये तक करने पे आ गयी
रेखा :नहीं नहीं यह सब गलत बिल्कुल झूठ है वो कोई अनजान इंसान नहीं बल्कि मेरा मुंहबोला भाई किशन था वो घर आया था उसने मुझे बोला गोलगप्पे खाने चलने के लिए तो मैं मना नहीं कर पायी
अमन :अच्छा तो किशन आया था ..मां आप पहले पूरी बात तो जानिये आज आपने बहुत गलत किया है रेखा के साथ
।
कमला कुछ भी नहीं सुनती है और अपने कमरे में चली जाती है
अमन :रेखा मुझे माफ़ कर दो मुझे ऐसा लगता है मुझे तुमसे शादी ही नहीं करनी चाहिए थी सारी गलती मेरी ही है
एक दिन रेखा कुए से पानी लेने गयी हई थी अमन भी काम की वजह से बाहर ही था। केवल कमला घर पर थी और घर के बाहर थोड़ी आग जल रही थी जो की कमला ने ही जलाया था ठंडी की वजह से।
वो आग पूरी तरह से बुझी नहीं थी उसके कुछ तिनके उड़कर झोपड़ी में लग जाते है और तुरंत ही पुरे घर में आग लग जाती है
कमला :बचाओ बचाओ कोई मुझे बचाओ आग लग गयी कोई बचाओ मैं जल जाउंगी
वहां भीड़ लग जाती है मगर कोई भी अंदर जाने का साहस नहीं कर पा रहा था
रेखा :अरे यहां इतनी भीड़ क्यों लगी है हे भगवान आग ….अंदर तो माजी है कोई बचाओ
रेखा मदद के लिए पुकारती पुकारती घर के अंदर घुश जाती है
रेखा :माजी आप कहाँ है इधर आईये मैं आपको बाहर लेकर चलती हूँ जल्दी चलिए
रेखा कमला को बचाकर बाहर लाती है तब तक सभी पानी मार रहे थे कुछ समय बाद आग काबु में आ जाता है
कमला ;रेखा तू ठीक तो है न ...मुझे माफ़ कर दे मैंने आज तक तेरे साथ बहुत बुरा किया और आज अपनी जान की परवाह किये बिना ही तू मुझे बचाने आग में कूद पड़ी आज मुझे अपने किये पर बहुत पछतावा हो रहा
रेखा :माजी रोईए मत आपकी रक्षा करना तो मेरा फ़र्ज़ है
दोनों गले लग जाती है और दोनों के बीच सब ठीक हो जाता है ।