30/12/2014
लिरिकल होना बाधा नहीं प्रगतिशीलता में
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जयप्रकाश मानस की कलम से
शोध, समीक्षण, सृजन एवं संचार जैसे गंभीर प्रसंगों पर केंद्रित पत्रिका 'अभिव्यंजना' का नया अंक मेरे हाथ लगी है नये नाम से - 'मुक्तांचल' । इसे मुक्तांचल का पहला अंक कहें या फिर अभिव्यंजना का 5 वाँ अंक । ऐसा पंजीयन की औपचारिकताओं के कारण हो जाता है ।
संपादकीय धार-दार है - ''हर बात में कुछ अजीब-सी लगने वाली चीज़ हमें अधिक खींचती है क्योंकि तमाशा उसी से बनता है । आज ज़माना तमाशे का है, नुमाइशों का है, धमाकों का है । प्रपंच की भाषा हावी होती जा रही है । ऐसा भाषा जो केवल ज़हर छोड़ती है, धुआँ फैलाती है - संशय से ग्रस्त संवेदनहीन परिवेश खड़ा कर देती है ।'' क्या हम इस परिवेश को शिद्दत से पहचानना चाहते हैं औऱ पाठकीय समाज को बचाने की जद्दोजहद को अख़्तियार करना चाहते हैं ? बहुतों के पास इसके लिए फूर्सत नहीं है आज ।
कृष्णदत्त पालीवाल ने अपने आलेख कवि कर्म में तप औऱ ताप का नया पाठ में भवानी भाई की कविता की व्यापक औऱ विश्वसनीय परीक्षण किया है । गीत काव्य - रचना और अभिग्रहण में रवि रंजन फिर से याद दिलाते हैं - कविता का लिरिकल होना राष्ट्रीयता, प्रगतिशीलता या प्रतिबद्धता के आड़े नहीं आता । वस्तुतः कविता की काव्यात्मकता को लिरिक से अलग कर कतई नहीं देखा जा सकता । बिलकुल मार्के की बात है । जो नहीं इसे नहीं मानते उनकी कविताओं पर मक्खी भी भिनभिनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाती ।
व्यासमणि त्रिपाठी ने मुक्तिबोध की क्रांतिकारी कविताओं को अपने तईं देखा-परखा है - अंगारी चेतना के क्रांतिकारी कारीगर में । रामदरश मिश्र जैसे प्रतिष्ठित और वरिष्ठ कवि के उत्तरवर्ती काव्य-कर्म की रोचक पड़ताल पाण्डेय शशिभूषण शीतांशु ने यहाँ की है । मधुरेश जैसे कथा-आलोचक को पढ़ना सच्चे अर्थों में कहानी को समझना होता है । वे भारतीय समाज के बरक्स अल्पसंख्यक समाज की बारीक़ी पर यहाँ गंभीर विमर्श कर रहे हैं, जिसे नकारना भूल होगी ।
114 पृष्ठों में बहुत सारी और पठनीय सामग्री के साथ संपादकीय टीम को बधाई कि इस त्रैमासिक लघुपत्रिका में शिवकुमार अर्चन, सुधीर रंजन सिंह, काली प्रसाद जायसवाल, डॉ. मजुला चतुर्वेदी की कविता को भी ख़ास तौर पर प्रकाशित किया है । साहित्य के गंभीर पाठकों और लेखकों के लिए ऐसी पत्रिका का सदैव स्वागत ही होता है । हर अंक अपना छाप छोड़ेगा ।
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पत्रिका - मुक्तांचल
संपादक - डॉ. मीरा सिन्हा
वार्षिक शुल्क - 200 रूपए
संपर्क - आधुनिक अपार्टमेटं, 62//1, आशुतोष मुखर्जी लेन, सलकिया, हावड़ा-711106, ईमेल- [email protected]
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