Bright Future Public School Kishangarh

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शिक्षा व संस्कार साथ साथ

Photos from NOTES PDF's post 09/05/2023
31/10/2022

हमारे बगल के गाँव में रहने वाले एक शर्मा जी है जिन्होंने अपने एकलौते लड़के को खूब पढ़ाया लिखा कर इंजीनियर बनाया, बेटा अमेरिका में सेटल हो गया। वहीं पर जयपुर की रहने वाली एक अप्रवासी महिला डॉक्टर से लव मैरिज कर अमेरिकन नागरिकता भी हासिल कर लिया।

इधर बूढ़े शर्मा जी अपनी पत्नी के साथ बनारस के सारनाथ में फ्लैट लेकर, बेटे बहू की याद में जैसे तैसे अपना जीवन गुजर बसर कर रहे है।

सात साल बाद अपने NRI बेटे बहू के आने सूचना पाकर, बड़े हर्ष के साथ शर्मा जी ने खूब सारी तैयारियां की। लेकिन यह क्या, बेटा भारत आकर भी मां बाप के सभी अरमानों पर पानी फेरते हुए, मां बाप से मिलने की जगह दीपावली इंजॉय करने अपनी पत्नी के मायके जयपुर चला गया।

और वहाँ से लौट कर मां बाप के मकान में न रहकर होटल ताज गैंगेज में रुक गया, और शाम को सिर्फ आधे घंटे के लिए कल मां बाप से मिलने जा पहुँचा। मां के हाथ की बनी कोई भी मिठाई व्यंजन खाने से इनकार कर दिया। उसे डर है कि बाहर का कोई भी चीज खाने से उसे संक्रमण हो जाएगा। उसने मां के हाथ का चाय पीने से भी सीधे-सीधे इंकार कर दिया।

अब उस वर्णशंकर मंद बुद्धि नकली अमेरिकन को कौन समझाये, कि संक्रमण मां के हाथ के बने पकवानों में नही उसके दो कौड़ी के दिमाग में है।

जिस मां बाप ने जन्म दिया उनके साथ रहने खाने पीने से उसे संक्रमण हो जाएगा। बेटा दो दिनों बाद वापस जाने की तैयारी कर रहा है, उसका यहाँ दम घुट रहा है ।

शर्मा जी ने बेटे को पढ़ा लिखाकर योग्य और सफल तो बना दिया, किंतु भारतीय संस्कार देना भूल गये।

इसलिए अपने बच्चों को शिक्षा के साथ साथ संस्कार भी देना बहुत जरूरी है, वरना अगले शर्मा जी आप भी हो सकते है।

- साभार

07/10/2022

2022 का मेडिसिन/फिजियोलॉजी का नोबेल पुरस्कार डॉ. स्वांते पेबो को मिला है।
और इन्होंने खोजा क्या है?
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आज के समय विज्ञान मानता है कि आधुनिक मानव यानि होमो सेपियंस यानि हम लोग इस धरती पर सबसे पहले अफ्रीका में 300000 साल पहले दिखाई दिए थे। लेकिन हमसे पहले एक अन्य मानव प्रजाति अफ्रीका से बाहर विचरण कर रही थी। यह प्रजाति थी नियंडरथल मानवों की। नियंडरथल मानव 400000 लाख साल पहले धरती पर आये थे और यूरोप व एशिया के अधिकतर भूभाग में फैले हुए थे।

लगभग 70000 साल पहले आधुनिक मानवों ने अफ्रीका से एशिया की धरती पर कदम रखा था। आज से 30000 हजार साल पहले नियंडरथल मानव विलुप्त हो गए। तो इसका मतलब यह हुआ कि लगभग 40000 साल तक होमो सेपियंस और नियंडरथल मानव एक साथ यूरोप और एशिया में विचरण कर रहे थे।

1990 के दशक में वैज्ञानिकों ने मानव के जेनेटिक कोड को देखना शुरू किया। इसके लिए नए नए औजार और नई तकनीकें विकसित हो रही थी। डॉ स्वांते पेबो ने इन्हीं औजारों और तकनीकों की मदद से नियंडरथल मानव के जेनेटिक कोड का अध्ययन करने करने लगे। लेकिन ये तकनीकें नियंडरथल मानव के डीएनए को समझने के लिए कारगर सिद्ध नहीं हो रही थीं क्योंकि नियंडरथल का डीएनए पूर्ण अवस्था में मिलता ही नहीं था।

म्युनिख विश्वविद्यालय में काम करते हुए डॉ पेबो ने माईटोकॉन्डरिया (हमारी कोशिकाओं में मौजूद एक विशेष संरचना जिसे कोशिका का पावर हाउस भी कहा जाता है) में मौजूद डीएनए का अध्ययन करने पर ध्यान केंद्रित किया। हालांकि माईटोकॉन्डरिया के डीएनए में कोशिका के डीएनए से कम जानकारी होती है लेकिन नियंडरथल के केस में यह कोशिका के डीएनए से ज्यादा अच्छी हालत में मिल रहा था इसलिए सफलता की संभावना ज्यादा हो गई थी।
अपनी नई तकनीक के द्वारा पेबो ने नियंडरथल मानव की एक 40000 हजार साल पुरानी हड्डी के माईटोकॉन्डरिया के डीएनए का सीक्वेन्स बनाने में सफलता हासिल कर ली। और यह पहला सबूत था जो यह बताता है कि आधुनिक मानव नियंडरथल से जेनेटिक तौर पर भिन्न है। यानि यह एक भिन्न प्रजाति है।
2010 में पेबो और उनकी टीम ने नियंडरथल का पहला जेनेटिक सीक्वेन्स छापा। पेबो की इस खोज ने हमें यह बताया कि आज से आठ लाख साल पहले हमारा यानि होमो सेपियंस और नियंडरथल मानव का एक कॉमन पूर्वज इस धरती पर था।

पेबो और उनकी टीम को आधुनिक मानव के डीएनए में नियंडरथल के डीएनए के अंश भी मिले जिससे यह पता चलता है आधुनिक मानव और नियंडरथल मानव के बीच में इंटरब्रीडिंग होती रही है।

लेकिन सिर्फ यही काफ़ी नहीं था। पेबो को दक्षिणी साइबेरिया की एक गुफा में 40000 साल पुरानी इंसानी ऊँगली की हड्डी मिली थी। जब पेबो ने इसकी डीएनए सीक्वेन्सिंग की तो उन्हें कुछ ऐसा मिला जोकि आज तक किसी को नहीं मिला था। इस हड्डी का डीएनए न तो नियंडरथल के डीएनए से मिलता था और न ही आधुनिक मानव के डीएनए से। यह मानव की एक सर्वथा नई प्रजाति थी। इस नई प्रजाति को डेनिसोवा नाम दिया गया क्योंकि जिस जगह यह हड्डी मिली थी उस जगह को डेनिसोवा ही कहा जाता है। डेनिसोवा और नियंडरथल लगभग 600000 साल पहले एक दूसरे से अलग हुए थे।
लेकिन अभी एक महत्वपूर्ण खोज और बाक़ी थी। दक्षिण पूर्व एशिया के लोगों में से 6% में डेनिसोवा मानव के डीएनए के अंश भी मिले हैं, जिससे पता चलता है कि इन दोनों समूहों के बीच भी सम्पर्क रहा होगा।

बहरहाल इन खोजों ने हमारे पूर्वजों के बारे में हमारी जानकारी को विकसित किया है। साथ ही इनसे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास को समझने में भी मदद मिली है।

तीस साल पहले शुरू हुई विज्ञान की इस नई शाखा ने अब फल देने शुरू किये हैं, उम्मीद है कि आगे भी मानव अपने ज्ञान का दायरा बढ़ाता रहेगा।

इसके अलावा एक और बात। डॉ स्वांते पेबो 1982 के फिजियोलॉजी/मेडिसिन के नोबेल पुरस्कार विजेता सुनये बेर्गस्त्रोम के पुत्र हैं। सुनये बेर्गस्त्रोम को नोबेल पुरस्कार प्रोस्टाग्लैंडिन नामक एक बायोकेमिकल के ऊपर उनके काम के लिए मिला था।

नवमीत नव
Navmeet Nav

#नोबेलपुरस्कार

11/09/2022
16/04/2020
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