Rising India Networks & Education

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Rising India Networks & Education

RISING INDIA NETWORKS & EDUCATION is Started their Works for Student and indigent people to make their life easy and they come join growth of world and make over life style according to world. RINE Institute of Information Technology is working for students and its mission to provide every student to Technical Education in less fee and more valuable education to every student and also trying to indigent students to teach in very minimum cost that can help to make a bright future

12/04/2013

Rising India Networks are Coming Soon in a new Luck and with new Responsibility and Duty you can join it and help to get improve our social value and do Something better for Other that's need that.................:)

Photos 11/01/2013

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11/01/2013

HELLo Friends Rising India Networks Louche Rising India Marketing

03/10/2012

Coming soon ..............................

26/05/2012

हंसने का प्रारंभ कब और कैसे हुआ था? वैज्ञानिकों ने इस प्रश्न का जवाब खोज निकाला है। उनके अनुसार अब से चालीस लाख साल पहले जब व्यक्ति ने चार के बजाए दो पैरों पर चलने का प्रयास किया तो वह लड़खड़ाया और गिरा। उसके इस लड़खड़ाने एवं गिरने पर उसके साथी हंसे। यही हंसने की शुरुआत है।

26/05/2012

जान देकर जीता मैच

टबॉल के इतिहास की यह हैरतअंगेज घटना 1942 की है। इस समय जर्मनी की नाजी सेनाएँ रूस को रौंद रही थीं। नाजी सेनाएँ छल-बल से एक के बाद एक रूसी नगरों पर कब्जा करती जा रही थीं। जब उन्होंने रूस के कीव नगर पर विजय पाई तो नगर के जिन प्रमुख नागरिकों को बंदी बनाया, उनमें रूस की विश्वविख्यात फुटबॉल टीम 'डायनेमो' के खिलाड़ी भी थे। इस टीम ‍की गिनती उन दिनों विश्व की बेहतरीन फुटबॉल टीमों में होती थी।

जर्मनों ने इस टीम के खिलाड़ियों को बंदी बनाकर एक बेकरी में साधारण कर्मचारियों के रूप में काम करने को बाध्य कर दिया। कुछ दिनों तक तो खिलाड़ी चुपचाप बेकरी में मामूली कर्मचारियों की तरह काम करते रहे, लेकिन कुछ समय बाद उनमें फुटबॉल के प्रति प्रेम जागा और वे छुट्‍टी के घंटों में बेकरी के पास के एक मैदान में रोज फुटबॉल खेलने लगे।

उन्हें रोज फुटबॉल खेलते देख जर्मनों के मन में एक विचार आया। उन्होंने सोचा, क्यों न इन फुटबॉल खिलाड़ियों के माध्यम से स्थानीय नागरिकों का विश्वास जीतने की कोशिश की जाए। उन्होंने ‍इन खिलाड़ियों से कहा कि यदि वे चाहें तो निडर होकर बेकरी के पास के मामूली मैदान के स्थान नगर के फुटबॉल स्टेडियम में खेल सकते हैं। जब रूसी खिलाड़ी इस प्रस्ताव से चौंके तो जर्मनों ने कहा कि जर्मन लोग न फुटबॉल के खिलाफ हैं और न फुटबॉल खिलाड़ियों के, वे तो फुटबॉल और उसके खिलाड़ियों से बेहद प्यार करते हैं। इतना ही नहीं अगर रूसी खिलाड़ी चाहें तो जर्मन सेना की फुटबॉल टीम के खिलाफ भी मैच खेल सकते हैं - एक मैच नहीं, बल्कि कई मैच। हालाँकि 'डायनेमो' के खिलाड़ियों के मन का संदेह पूरी तरह गया नहीं था, फिर भी उन्होंने 'स्टार्ट' नाम से एक नई टीम का गठन किया और मिलजुलकर फैसला किया कि वे मैच में जर्मनों को हराने की पूरी कोशिश करेंगे।

पहला मैच 12 जून 1942 को कीव के फुटबॉल स्टेडियम में हुआ। स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा था। जर्मन खिलाड़ी बड़े आत्मविश्वास के साथ खेलने आए, मगर अनुभवी और जोशीले रूसी खिलाड़ियों ने उन्हें बुरी तरह हराया। जर्मन इस हार से बहुत नाराज हुए, मगर क्या कर सकते थे? उन्हें ज्यादा अनुभवी साहसी खिलाड़ियों की टीम बनाई और 17 जुलाई को दूसरा मैच खेलने की घोषणा की।

इस मैच से पहले जर्मन टीम के कप्तान अपने खिलाड़ियों से कहा कि इस बार रूसी खिलाड़ियों को अवश्य हराना है, मगर भरपूर कोशिशों के बावजूद जर्मन खिलाड़ी एक बार फिर 'स्टार्ट' के खिलाड़ियों के हाथों बुरी तरह पराजित हुए। दूसरी हार ने जर्मनों की नाराजगी और बढ़ा दी। वे भला यह कैसे सहन कर सकते थे कि 'मानवों की सर्वोच्च आर्य जाति' के विजेता, विजित सैनिकों से विजित देश की भूमि पर हार जाए, भले ही वह हार फुटबॉल-मैच की ही क्यों न हो। जर्मनों ने यह बहाना किया कि उनकी पहली दो टीमों के खिलाड़ियों ने पर्याप्त अभ्यास नहीं किया था, इसलिए वे हार गए।

19 जलाई को होने वाले तीसरे मैच में वे अवश्य विजयी होंगे, लेकिन इस मैच में जर्मन पहले से भी ज्यादा अंतर के साथ हारे- एक के मुकाबले पाँच गोलो से। जर्मनी को लगा कि इस तीसरी हार द्वारा रूसियों ने जर्मन राष्ट्र का अपमान किया है। 26 जुलाई को हुए चौथे मैच को देखने आए हजारों रूसी दर्शक खुशी-खुशी घर लौटे। जर्मनी फिर हारा। चूँकि जर्मनी चौथे मैच में रूसियों से सिर्फ एक गोल से हारा था, इसलिए उन्होंने निश्चय किया कि 6 अगस्त को होने वाले पाँचवे मैच में अवश्य विजयी होंगे, लेकिन 'स्टार्ट' के दिलेर और हिम्मती खिलाड़ियों के आगे वे टिक नहीं पाए और फिर हारे।

अब जर्मनी के उच्च सेनाधिकारियों के क्रोध का ठिकाना न था। उन्होंने आदेश दिया कि 'स्टार्ट' टीम के सब गुस्ताख खिलाड़ियों को फौरन गिरफ्‍तार कर लिया जाए, पर बाद में पुनर्विचार के बाद उन्होंने तय किया कि इन 'गुस्ताख' खिलाड़ियों को जिंदा रहने का एक और शायद अंतिम अवसर दिया जाए।

लिहाजा घोषणा की गई कि 9 अगस्त को इस मैच-श्रृंखला का अंतिम मैच होगा। जर्मनों द्वारा रूसी खिलाड़ियों को साफ-साफ बता दिया गया था कि यदि इस मैच में भी उन्होंने जर्मनों को हराने की धृष्टता की तो इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकाना होगी। उन्हें किसी भी हालत में बख्‍शा नहीं जाएगा।

रूसी खिलाड़ियों ने जर्मनों की इस चेतावनी का कोई उत्तर नहीं दिया, लेकिन अपने निवास स्थान पर आकर एकमत से यह निश्चय किया कि वे जानबूझकर जर्मनों से हारने के स्थान पर मरना ज्यादा पसंद करेंगे। 9 अगस्त को मैच शुरू हुआ ही था कि रूसियों ने जर्मनों पर एक गोल दा‍ग दिया। मध्यांतर तक जर्मन खिलाड़ी इस गोल को नहीं उतार पाए।

मध्यांतर के अवकास में एक जर्मन सेनाधिकारी ने रूसी खिलाड़ियों को फिर चेतावनी दी कि यदि इस मैच में भी जर्मनी को हारना पड़ा तो कोई रूसी खिलाड़ी जिंदा नहीं बचेगा, पर इस चेतावनी ने रूसियों के गुस्से को भड़का दिया। उन्होंने पहले से भी ज्यादा उत्साह से तथा और ‍अधिक गोल करने के इरादे से खेलना आरंभ किया। जर्मन रेफरी ने जर्मन खिलाड़ियों द्वारा किए गए सब 'फाउल' नजरअंदाज करने शुरू कर दिए, लेकिन जर्मनों पर हुए साफ गोल को वह कैसे नजरअंदाज करता? मैच के अंत में जर्मनी दो गोल से हारा।

रूसी दर्शक जब अपने खिलाड़ियों की इस जीत पर तालियाँ बजाने लगे तो जर्मन सैनिकों ने उन्हें बंदूक दिखाकर ऐसा करने से रोका। सहमे हुए दर्शक, जिन्हें रूसी खिलाड़ियों को दी जाने वाली मौत की चेतावनी के बारे में कोई जानकारी न थी, चुपचाप, सिर झुकाए स्टेडिटम से बाहर चले गए। निडर और हिम्मती रूसी खिलाड़ियों को ट्रक में बिठाकर, बाबीदार नामक स्थान ले जाया गया, जहाँ उन्हें एक लाइन में खड़ा करके गोलियों से भून दिया गया।

26/05/2012

क्या आप जानते हैं, भारत के रोचक तथ्य

भारत विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश है।

जनसंख्या के मामले में यह विश्व में दूसरे नंबर पर है।

भारत में एक करोड़ से ज्यादा लोग करोड़पति हैं।

विश्व विख्यात खेल शतरंज का जन्म भारत में ही हुआ था।

भारत की फिल्म इंडस्ट्री विश्व की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री है।

इसके बॉलीवुड नाम का इजाद बाम्बे के 'बी' से हुआ।

मुबंई भारत का सबसे बड़ा शहर है।

इसके साथ ही भारत विश्व का सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है।

26/05/2012

दरियाई घोड़ा एक इंसान से तेज भाग सकता है।

- 24 कैरेट का सोना शुद्ध सोना नहीं होता है, इसमें कॉपर की कुछ मात्रा शामिल होती है।

- इंसान के शरीर में कुल 206 हड्डियां होती हैं ‍जिनमें से लगभग आधी हड्डियां हाथ-पैर में होती हैं।

- 300 साल पहले इसहाक न्यूटन ने ‍गति के नियमों की खोज की।

- Almost अंग्रेजी का सबसे लंबा शब्द है जिसमें सारे अक्षर अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम में हैं।

- तीन चतुर बंदरों के नाम हैं-

मिजारु (बुरा मत देखो)
मिकाजारु (बुरा मत सुनो)
मजारु (बुरा मत बोलो)

01/05/2012

RINE Institute of Information Technology is an organization that provide Technical Education in all Technical field Currently its started with only Computer Education and its provide Computer Education in low price to Indigent Students and for this aim RINE invite NGO or whose people that want to do something for our Society and want to help learning all Intelligent Indigent Students

06/03/2012

. Task switching in windows 8

The Metro screen doesn't have a taskbar, so you'll soon lose track of the apps you've run. To see what's running, though, just press Alt+Tab. Pressing Win+Tab will switch from one running app to the next, and on a touch screen, swiping repeatedly from the left also cycles through running apps.

You could also simply launch an app again and, if there's another copy running, that one will be displayed.

If you have a keyboard, repeatedly pressing the Windows key will always toggle you between the Metro screen and the last app.

And if you have a mouse, move its cursor to the far left of the screen (roughly in the centre, vertically) and a thumbnail of the last app you used should appear. Click this to relaunch it.

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