15/05/2025
भारतीय रेल द्वारा स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल घड़ियों की डिजाइनिंग के लिए प्रतियोगिता और आकर्षक पुरस्कार जीतने का सुनहरा अवसर। इच्छुक विद्यार्थी भाग ले सकता है 🕒️📚️🎉️
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दड़ौली, हिसार
के पेज़ पर आपका स्वागत है। पेज पर विद्यालय में आयोजित होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों एवं कार्यक्रमों की झलकियां सांझा की जाएगी।
राकेश बैनीवाल (विद्यालय सूचना प्रबंधक)
15/05/2025
भारतीय रेल द्वारा स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल घड़ियों की डिजाइनिंग के लिए प्रतियोगिता और आकर्षक पुरस्कार जीतने का सुनहरा अवसर। इच्छुक विद्यार्थी भाग ले सकता है 🕒️📚️🎉️
15/05/2025
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दड़ौली हिसार में प्रवेश जारी है, कृप्या ज्यादा से ज्यादा बच्चे विद्यालय में प्रवेश पाएं. 📚🎓👍
15/05/2025
दिनांक 09/05/2025 को श्री प्रकाश चन्द्र जी ने विद्यालय में प्राचार्य के पद पर ज्वाइन किया। प्राचार्य पद पर ज्वॉइन करने के लिए उनको बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं 🎉👏💐🌹
15/05/2025
विद्यालय में 8 वर्षों तक अपनी सेवाएं देने उपरांत दिनांक 08/05/2025 को श्री सुभाष चन्द्र कुंडू जी प्रवक्ता इतिहास की पदोन्नति रा व मा वि निमला, ब्लॉक ऐलनाबाद, जिला सिरसा में प्राचार्य के पद पर हो गई। इस दौरान उन्होंने विद्यालय को बहुत अच्छे से सींचा और विद्यालय को प्रगति देने का कार्य किया। उनकी रिलीविंग और ज्वाइनिंग की कुछ खास झलकियां 🎉👏💥
15/05/2025
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दड़ौली जिला हिसार में सरकार के निर्देशानुसार पोषण पखवाड़ा कार्यक्रम अभियान में मध्याह्न भोजन योजना के तहत भोजन करते हुए विद्यार्थी, पोषण भी और पढ़ाई भी विद्यालय में दोनों कुक द्वारा साफ सफ़ाई का विशेष ध्यान रखा जाता है और भोजन से पहले व बाद बच्चों के हाथ साबुन से धुलवाएं जाते हैं । कार्यक्रम की कुछ खास झलकियां🍴👨🍳🚮
23/04/2025
*जन्म तिथि आदि मे विद्यालय स्तर पर बदलाव अधिकार*
23/04/2025
*स्कूलों में वर्ष 2025 के स्थानीय अवकाश*
23/04/2025
*निःशुल्क विधार्थी परिवहन सुरक्षा योजना बारे विभागीय दिशा-निर्देश*
22/04/2025
*विश्व पृथ्वी दिवस आज*
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विश्व पृथ्वी दिवस (WED) हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला एक वैश्विक कार्यक्रम है , जो पिछले 53 वर्षों से पिछले लक्ष्यों पर विभिन्न नीति निर्माताओं, कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की उपलब्धियों का सम्मान करता है। पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र और मानव जाति के साथ इसके संबंधों की रक्षा के लिए कई जागरूकता अभियान और गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। इस दिन, दुनिया भर के शासन अधिकारी, पर्यावरणविद और प्रकृति प्रेमी प्रकृति और पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के महत्व के संबंध में जन जागरूकता बढ़ाने के एजेंडे के साथ गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक साथ आते हैं। इन गतिविधियों में पेड़ लगाना, प्लास्टिक के इस्तेमाल के खिलाफ़ आवाज़ उठाना, वन संरक्षण के लिए रैली निकालना, कागज़ की बर्बादी को कम करना आदि शामिल हैं, लेकिन ये यहीं तक सीमित नहीं हैं।
*विश्व पृथ्वी दिवस (WED)का महत्व*
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प्राकृतिक आपदाएँ मानवता के लिए लगातार ख़तरनाक होती जा रही हैं, जनसंख्या में वृद्धि और ग्लोबल वार्मिंग के कारण जलवायु परिवर्तन और समुद्र के स्तर में वृद्धि हो रही है। यह अधिक संभावना है कि भविष्य में, मानव जाति हर साल कई आपदाओं का सामना करेगी, जिससे हज़ारों लोग मारे जाएँगे। 2022 में, दुनिया भर की सरकारों द्वारा कई महत्वपूर्ण हरित नीति प्रस्तावों को अपनाया गया। हालाँकि, 2050 तक ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) तटस्थता प्राप्त करने के उपायों को केवल कुछ ही लागू कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए तत्काल अतिरिक्त कदम नहीं उठाए गए, तो पृथ्वी का तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 3.2 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाएगा, जो मानव जीवन के लिए विनाशकारी होगा।
पृथ्वी को प्राकृतिक आपदाओं से बचाना और रहने तथा जीवित रहने के लिए बेहतर स्थान प्रदान करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। विश्व पृथ्वी दिवस स्थानीय पर्यावरण अधिकारियों द्वारा नई नीतियों का मसौदा तैयार करने और मौजूदा पर्यावरणीय मुद्दों पर कार्रवाई को लागू करने के महत्व को दर्शाता है। इसके अलावा, WED पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करने वाले कारकों और पृथ्वी के वनस्पतियों और जीवों की रक्षा के तरीकों के बारे में जनता को शिक्षित करता है।
*विश्व पृथ्वी दिवस (WED)का इतिहास*
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पहला पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल, 1970 को मनाया गया था, और विस्कॉन्सिन के सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने एक युवा कार्यकर्ता डेनिस हेस के साथ मिलकर इसे आयोजित किया था। 1969 में तेल रिसाव की घटना के नुकसान को देखकर उन्हें इस आयोजन की शुरुआत करने की प्रेरणा मिली और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में बताने के लिए जागरूकता दिवस की आवश्यकता महसूस हुई।
1990 में, पृथ्वी दिवस को विश्व स्तर पर मान्यता मिली, क्योंकि 141 देशों के 20 करोड़ लोग विश्व भर में पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए एक साथ आए, जिसने 1992 में ब्राजील (रियो डी जेनेरो) में पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के लिए आधार तैयार किया।
2010 में, EARTHDAY.ORG ने पृथ्वी दिवस को दुनिया भर के लोगों के लिए पर्यावरण के लिए कदम उठाने का एक महत्वपूर्ण अवसर बनाया। EARTHDAY.ORG के नेतृत्व में 193 देशों के लाखों लोग पर्यावरण आंदोलन में शामिल हुए हैं। संगठन ने हर साल पृथ्वी दिवस कार्यक्रम में 100 करोड़ से ज़्यादा लोगों को शामिल किया है, जिससे यह वैश्विक पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम बन गया है।
*प्लास्टिक प्रदूषण से बचाव के उपाय*
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एकल-उपयोग प्लास्टिक की खपत को कम करना।
पुन: प्रयोज्य बैग, बोतलें और कंटेनरों का उपयोग करना।
प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से निपटान करें, जब भी संभव हो पुनर्चक्रण करें।
प्लास्टिक के विकल्प को बढ़ावा देने वाली पहलों का समर्थन करना।
प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभाव के बारे में दूसरों को शिक्षित करना।
*हरियाणा में स्कूल बैग नीति लागू, बच्चों के गले में लटकी मिली पानी की बोतल तो स्कूल होंगे जिम्मेदार; बस्ते का भी वजन तय*
*हरियाणा में स्कूल बैग नीति 2020 लागू हो गई है। अब विद्यार्थियों के गले में पानी की बोतल लटकी मिलने या बैग का वजन अधिक होने पर स्कूल जिम्मेदार होंगे। शिक्षा विभाग ने वजन सीमा तय कर दी है पहली कक्षा के लिए 1.5 किलोग्राम और 10वीं के लिए 5 किलोग्राम है। वर्दी के लिए भी किसी विशेष दुकान से खरीदने का दबाव नहीं बनाया जा सकता।*
*हरियाणा में लागू हो गई स्कूल बैग नीति*
*सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए स्कूल बैग नीति 2020 लागू कर दी गई है। इस नीति के हिसाब से अब कोई स्कूल अपनी मनमानी नहीं कर सकेगा। ऐसे नियम बनाए गए है कि अगर किसी तरह से स्कूल संचालकों ने नियमों की अवहेलना की तो सीधे तौर पर स्कूल ही जिम्मेदार होंगे।*
*अगर विद्यार्थियों के गले पानी की बोतल लटकी मिली या स्कूल बैग का वजन पांच किलोग्राम से अधिक मिला तो सीधे तौर पर स्कूल जिम्मेदार होंगे। यह नियम सभी स्कूलों के लिए एक सम्मान होंगे।*
*तय हुआ स्कूल बैग का वजन*
*शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सभी डीईओ व डीईईओ को पांच अप्रैल को पत्र जारी कर नियमों का पालन करने के आदेश दिए हैं। इसमें पांच कैटेगरी में पहली कक्षा से लेकर 10वीं कक्षा तक के स्कूल बैग का वजन तय किया गया है, जिसमें पहली व दूसरी कक्षा के लिए डेढ़ किलोग्राम व 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए पांच किलोग्राम वजन तय किया गया है।*
*इतना ही नहीं यूनिफार्म को लेकर भी बात कहीं गई है, जिसमें अगर किसी स्कूल ने वर्दी को लेकर किसी एक दुकान विशेष से खरीदने को लेकर दबाव बनाया तो वह भी नियमों की अवहेलना माना जाएगा। अगर कोई भी स्कूल ऐसा करता पाया गया तो कार्रवाई होना तय है।*
*इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी को विशेष तौर पर नजर रखने के आदेश दिए हैं।*
*इस तरह रहेगा कक्षा के हिसाब से स्कूल बैग का वजन*
- कक्षा पहली से दूसरी: स्कूल बैग का वजन 1.5 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए।
- कक्षा तीसरी से पांचवीं: स्कूल बैग का वजन 2 से 3 किलोग्राम तक होना चाहिए।
- कक्षा छठी से सातवीं: स्कूल बैग का वजन 4 किलोग्राम तक होना चाहिए।
- आठवीं से नौवीं: स्कूल बैग का वजन 4.5 किलो तक होना चाहिए।
- कक्षा 10वीं: स्कूल बैग का वजन 5 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए।
*नोट: शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार डाटा।*
*विद्यार्थियों को होती है कई तरह की परेशानियां**
*अक्सर देखा जाता है कि विद्यार्थियों के स्कूल बैग में जरूरत से ज्यादा वजन होता है और साथ ही खासकर गर्मियों के समय ठंडे पानी की बोतल गले में लटकी मिलती है। ऐसे में अभिभावक व बच्चे दोनों को काफी परेशानियां होती थी।*
*इसका मुख्य कारण है कि स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव या फिर प्राइवेट किताबें बैगों के अंदर मिल रही थी। जिस कारण बैग का वजन भी काफी अधिक होता था।*
*इस कारण विद्यार्थी कई तरह की बीमारियों से भी शिकार होते है और यहां तक आंखों की कम होती रोशनी या फिर सिर-दर्द की शिकायतें सबसे ज्यादा आती है। अब पांच वर्ष बाद 2020 स्कूल बैग नीति को लागू किया गया है और इस एक्ट को सख्ती से पालना करने के लिए शिक्षा विभाग प्रदेशभर में आदेश जारी किए हैं।*