Rudra Shiva Business School

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तुम दस मिनट अपने घर के कोने में बैठकर मन में जो भी चलता हो, उसे एक कागज पर लिख लेना। तो तुम जो भी पाओगे, तुम अपने मित्र ...
17/02/2017

तुम दस मिनट अपने घर के कोने में बैठकर मन में जो भी चलता हो, उसे एक कागज पर लिख लेना।

तो तुम जो भी पाओगे,

तुम अपने मित्र को—निकटतम मित्र को भी बताने को राजी न होओगे। क्योंकि वह बिलकुल पागलपन मालूम पड़ेगा। जो तुम्हारे मन में चलता है, उसे लिखना कागज पर और बेईमानी मत करना — जो चलता हो, वही लिखना। तुम बड़े हैरान होओगे: मन कैसी छलांगें लगा रहा है।

…रास्ते से गुजरते हो, कुत्ता दिखाई पड़ता है। कुत्ता दिखाई पड़ा कि यात्रा शुरू हो गई। मित्र का कुत्ता याद आ गया। मित्र के कुत्ते की वजह से मित्र याद आ गया। मित्र की वजह से मित्र की पत्नी याद आ गई। और चल पड़े तुम! अब इस कुत्ते से उसको कोई लेना—देना नहीं। पर भीतर की यात्रा शुरू हो गई; अंतरंग वार्तालाप, इंटरनल डायलाग चल पड़ा।

अगर तुम किसी से कहोगे कि कुत्ते को देखकर यह सब हुआ…। यह भी हो सकता है कि मित्र की पत्नी के प्रेम में पड़ गए, शादी हो गई, बाल—बच्चे हो गए। उनका तुम विवाह कर रहे हो!

तुमने शेखचिल्लियों की कहानियां पढ़ी हैं?

वह तुम्हारी ही कहानियां हैं। मन शेखचिल्ली है। यह मत समझना कि वे बच्चों को बहलाने के लिए लिखी गई कहानियां है, यह तुम चौबीस घंटे कर रहे हो। यही तंद्रा है, यही नींद है।

जिसको कबीर कहते हैं: संतों जागत नींद न कीजै।

जागे तुम ऊपर—ऊपर से लग रहे हो, भीतर बड़े सपने चल रहे हैं। पर्त—दर—पर्त सपनों ही तुम्हें घेरे हुए हैं। पर्त—दर—पर्त बादलों की आकाश को घेरे हुए है। और यह पर्त—दर—पर्त जो पागलपन है, इसे तुम दूसरे पर उलीचते रहते हो; इसे तुम दूसरों पर फेंकते रहते हो। वही तुम्हारा वार्तालाप है।

मन मस्त हुआ तब क्यों बोल।…लेकिन जब तुम मस्त हो जाओगे, नील गगन हो जाओगे, खुलेगी गगन की गुफा और बरसेगी अजर धार—तब तुम क्यों बोलोगे! तब तुम चुप हो जाओगे।

|| ओशो ||

सुन भई साधो–(प्रवचन–10)

कभी कभी कुछ सामान बेवजह भी खरीद लिया करोदोस्तोये वो खुद्दार है जो भीख नहीं मांगते ......!!
05/11/2015

कभी कभी कुछ सामान बेवजह भी खरीद लिया करो
दोस्तो
ये वो खुद्दार है जो भीख नहीं मांगते ......!!

29/10/2015
19/10/2015

कहा जाता है कि अच्छी संगति और अच्छे विचार इंसान की प्रगति का द्वार खोल देते हैं । संगति इंसान के जीवन में बहुत बड़ा महत्व रखती है , अगर आप बुरी संगति में हों तो आप कितने भी बुद्धिमान क्यों ना हों आप कभी भी जीवन में आगे नहीं बढ़ पाएंगे और वहीँ अगर आप अच्छे लोगों की संगति में हैं तो आपको बड़ी बड़ी समस्याएँ भी छोटी लगने लगेंगी । ऐसी ही एक सच्ची घटना आपके सामने प्रस्तुत है , आपको कहानी कैसी लगी हमें Comment के माध्यम से जरूर बताएं -
अल्बर्ट आइंस्टीन, दुनिया के महान वैज्ञानिक जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अपना बहुत बड़ा योगदान दिया है । एक बार आइंस्टीन Relativity नामक Physics के टॉपिक पर रिसर्च कर रहे थे और इसी के चक्कर में वो बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटीज और कॉलेज में जाते थे और लोगों को लेक्चर देते थे । उनका ड्राइवर उनको बहुत बारीकी से देखा करता था ।
एक दिन एक यूनिवर्सिटी में सेमिनार ख़त्म करके आइंस्टीन घर लौट रहे थे , अचानक उनके ड्राइवर ने कहा – सर जो आप Relativity पर यूनिवर्सिटी में लेक्चर देते हो ये तो बहुत आसान काम है ये तो मैं भी कर सकता हूँ । आइंस्टीन ने हँसते हुए कहा – ओके ,चिंता ना करो तुम्हें एक मौका जरूर दूंगा ।
फिर अगले दिन जब आइंस्टीन नई यूनिवर्सिटी में लेक्चर देने गए तो उन्होंने अपने ड्राइवर को अपने कपडे पहना दिए और खुद ड्राइवर के कपडे पहन लिए और ड्राइवर से लेक्चर लेने को कहा । उस बिना पढ़े लिखे ड्राइवर ने बिना किसी दिक्कत के बड़े बड़े प्रोफेसरों के सामने लेक्चर दिया, किसी को पता ही नहीं चला कि वो आइंस्टीन नहीं है । लेक्चर खत्म होते ही एक प्रोफ़ेसर ने उस ड्राइवर से कुछ सवाल पूंछे तो इस पर ड्राइवर ने कहा – इतना आसान सवाल, इसका जवाब तो मेरा ड्राइवर ही दे देगा । ड्राइवर के रूप में आइंस्टीन आगे आये और सारे सवालों का जवाब दिया ।
बाद में आइंस्टीन ने सबको बताया कि लेक्चर देने वाला शख्स आइंस्टीन नहीं आइंस्टीन का ड्राइवर है तो वहां बैठे सभी प्रोफेसरों ने दातों तले उँगलियाँ चबा लीं किसी को यकीन नहीं हुआ कि जो Reletivity बड़े बड़े प्रोफेसरों को समझ नहीं आती इस ड्राइवर ने उसे कितनी आसानी से दूसरों को समझाया है ।
इसे कहते है संगति का असर , आइंस्टीन के साथ रहकर एक बिना पढ़ा ड्राइवर भी इतना बुद्धिमान हो गया । मित्रों अच्छे विचार और अच्छी संगति इंसान में हिम्मत और सकारात्मकता का भाव लाती है , तो कोशिश करिये कि बुरे व्यसन, बुरी आदतों और बुरी संगति से बचा जाये फिर उसके बाद जीवन बहुत उज्जवल होने वाला है

18/10/2015

लोहे की एक छड़ का मूल्य होता है 250 रूपये.
इससे घोड़े की नाल बना दी जाये
तो इसका मूल्य हो जाता है 1000 रूपये.
इससे सुईयां बना दी जायें तो इसका मूल्य हो जाता है 10,000 रूपये.
इससे घड़ियों के बैलेंस स्प्रिंग बना दिए जायें तो इसका मूल्य हो जाता है 1,00,000 रूपये... --
"आपका अपना मूल्य-- इससे निर्धारित नहीं होता कि आप क्या है बल्कि इससे निर्धारित होता है कि आप में खुद को क्या बनाने की क्षमता है"!!!!
इतने छोटे बनिए कि
हर कोई आपके साथ बैठे,.ओर इतने बड़े बनिए कि
आप खड़े हो तो कोई बैठा न रहे..!!

16/10/2015

रावण बनना भी कहां आसान...
रावण में अहंकार था
तो पश्चाताप भी था
रावण में वासना थी
तो संयम भी था
रावण में सीता के अपहरण की ताकत थी
तो बिना सहमति परस्त्री को स्पर्श भी न करने का संकल्प भी था
सीता जीवित मिली ये राम की ही ताकत थी
पर पवित्र मिली ये रावण की भी मर्यादा थी
राम,
तुम्हारे युग का रावण अच्छा था..
दस के दस चेहरे, सब "बाहर" रखता था...!!

13/10/2015

ईश्वर "टूटी" हुई चीज़ों का इस्तेमाल कितनी ख़ूबसूरती से करता है
जैसे
बादल टूटने पर पानी की फुहार आती है
मिट्टी टूटने पर खेत का रुप लेती है
पौधा टूटने पर बीज अंकुरित हो जाता है
और बीज टूटने पर एक नये पौधे की संरचना होती है
इसीलिये जब आप ख़ुद को टूटा हुआ महसूस करे तो समझ लिजिये ईश्वर आपका इस्तेमाल किसी बड़ी उपयोगिता के लिये करना चाहता है ।
BE POSITIVE....

10/10/2015

हरियाणा खास क्यों हैं...???
जैसा हिंदी फिल्मों में
दिखाया जाता है.....वैसा मेरा हरियाणा
नहीं है ........!
हिंदी सिनेमा जगत में
हरियाणा को माफिया लोगो का अड्डा - गुंडा राज
दिखा कर... हरियाणा
की छवि लोगों ने खराब
बना दी है.....!!
जैसे हरियाणा में लड़की रोड पर अकेले नहीं निकल सकती...
एक शरीफ इन्सान...यहाँ नहीं रह सकता...!!
हरियाणा हर बात में
गाली का इस्तेमाल करता हैं
लेकिन .......
सच तो सच है....??? देखिये...
1. हमारे राज्य में बलात्कार के
मामले दिल्ली के मुकाबले... 1/10 है.......
जबकि आबादी दिल्ली से कई
गुना अधिक...!!
2. दंगो में हज़ारो लोग यूपी
में मारे गए हैं हरियाणा में 1 भी नहीं ..!!
3. Murder Rate 1/2 है
मुंबई से... कही कम ही..!!
4. हमें बेबकूफ समझा जाता है...तो दोस्त सुनो हमारा हरियाणा अकेले इतने
सैनिक देश को देता है जितना केरला, आन्ध्र-प्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात मिलकर भी नहीं दे पाते.....!!
5. कर्नल सूबेदार सबसे ज्यादा हरियाणा से है...!!
6. उच्च शिक्षण संस्थानों में हरियाणावी इतने हैं कि महाराष्ट्र और गुजरात
मिलाने से भी बराबरी नहीं कर सकते.........
7. हरियाणा अकेला ऐसा राज्य है जहाँ किसान कृषि कारणों से आत्म-
हत्या नहीं करतें जैसा कि मीडिया दिखाता है क्यूकि हरियाणा में बुज़दिल नही दिलेर पैदा होते है...!!
8. आज भी हरियाणा में सबसे ज्यादा संयुक्त परिवार है...!!
9. हम एक रिक्शा चलाने
वालों को भी भाई कह कर
बुलाते हैं...!!
10. खेलो में तो हरयाणे पुरे देश में कोई तोड़ नही है चाहे ओलम्पिक हो या कॉमनवेल्थ या एशियाड...।
" मैं हरियाणा से हूँ " और हरियाणा से ज्यादा महफूज अपने आप को
कहीं नहीं पाता...
हमारे लोगों ने
कभी किसी राज्य के लोगों का विरोध नहीं किया... किसी सम्प्रदाय को नही दबाया....
यूपी में दंगे होते रहते है हरियाणा में धर्म के नाम पर कभी दंगा नही हुआ ।
यहाँ संस्कार बसतें है...!!.
मुझे नाज है मैं हरियाणा से हूँ
हरयाणा मेरे रगों में
बसता है...
जय हरियाणा.....

06/10/2015

'वो 5 लीटर दूध देने वाली गाय को इंजेक्शन लगाकर उससे 7 लीटर दूध निकालने की कोशिश करता है .. गाय को खिलाने से उसकी कमाई पर असर न पड़े इसलिए वो उसे आवारा घूमने और कचरा-पॉलिथिन खाने के लिए सड़क पर छोड़ देता है .. पर सुबह शाम उसका दूध निकालना नहीं भूलता .. लालच इस कदर बैठा है उसके जहन में कि वो गाय से बछड़े के हक का दूध भी निचोड़ लेता है .. और गाय जब बूढ़ी होने लगती है, उसके किसी काम की नहीं रहती तो वह उसे भटकने के लिए छोड़ देता है या गाड़ी पर लादकर घर से दूर, बहुत दूर छोड़ आता है ताकि वह लौटकर वापस न आ सके और उसपर उसके रख-रखाव का बोझ न आए .. कभी जिस गाय को वह हजारों में खरीदकर लाया था उसके बूढ़े हो जाने पर वह उसे कौढिय़ों के दामों पर बेच देता है? क्या होता है बिकने के बाद उस बूढ़ी गाय का? ... यह बेचने वाला शख्स भी जानता है और खरीदने वाला भी ... पर आपको न कभी वो बेचने वाला शख्स समाज में नजर आएगा, न खरीदने वाला क्योंकि दोनों ही गाय का जिक्र छिडऩे पर इतनी जोर-जोर से 'गाय माता, गाय माता' चिल्लाते हैं कि किसी का इस बात पर ध्यान ही नहीं जाता कि ये भले लोग भी किसी तरह से गाय को कोई नुकसान पहुंचा सकते हैं .. ये पोस्ट मैंने क्यों कि है मुझे नहीं पता.. क्योंकि गाय आज की डेट में *हॉट टॉपिक* है इसलिए मैं आप सबसे एक रिक्वेस्ट करना चाहता हूं कि मेरी कही बाकी बातों को भूलकर सिर्फ इतना करें कि खाने-पीने की चीजें पॉलिथिन में भरकर कचरे में न फेंके क्योंकि खाने की थोड़ी सी महक आने पर भी ऐसे जानवर पूरी पॉलिथिन खा जाते हैं, जो उनकी मौत का कारण बन जाती है ...
~ पोस्ट ने कंफ्यूज किया हो तो क्षमा करें ~

मालिक हम बहुत मेहनत करेंगे खेत में। आप आत्महत्या मत करो ।इस पेंटिंग को पूना में प्रथम स्थान मिला ।
05/10/2015

मालिक हम बहुत मेहनत करेंगे खेत में। आप आत्महत्या मत करो ।इस पेंटिंग को पूना में प्रथम स्थान मिला ।

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