News content 5
Pratapgarh व्यापारी की पत्नी का शव मिला
उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क नगर कोतवाली के कटरा मेदनीगंज कस्बे में भोर घर से निकली महिला का शव करीब 11 बजे एक कुंए में पाया गया. हालांकि ससुराल व मायके वालों की सहमति पर पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव परिजनों के हवाले कर दिया.
कटरा मेदनीगंज निवासी मोइनुलहक और उनके परिवार के लोग शहर में गल्लामंडी के पास दुकान चलाते हैं. मोइनुलहक की पत्नी सरवर जहां (44) का शव करीब 11 बजे कस्बे के बुढ़िया देवी मंदिर के पास कुंए में दिखा. कुछ ही देर में वहां भीड़ जमा हो गई. चौकी इंचार्ज कबीरदास के पहुंचने पर शव बाहर निकाला गया. कस्बे में उसे कुंए में धक्का देकर गिराने की चर्चा रही. हालांकि ससुराल व मायके वाले उसे मानसिक बीमार बताते हुए शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार करने लगे. चौकी इंचार्ज ने बताया कि सीसीटीवी चेक करने के बाद वह अकेले आते हुए दिख रही थी. परिजनों ने उसके मानसिक इलाज का पर्चा भी दिखाया. अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराने के बाद शव का पंचनामा कर परिजनों को दे दिया गया.
वाराणसी से आ रही युवती ट्रेन से कूदी, जीआरपी ने ढूंढा
वाराणसी से मां के साथ आ रही मनोरोगी युवती काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस से पृथ्वीगंज स्टेशन के पास कूद गई. युवती की मां की सूचना पर जीआरपी ने उसे ढूंढ निकाला.
सुल्तानपुर के देहात कोतवाली की की रहने वाली समरीन की बेटी महजबीन (19) मनोरोगी है. समरीन को उसे इलाज के लिए वाराणसी ले गई थी. शाम को काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस से लौटते समय वह पृथ्वीगंज स्टेशन से आगे ट्रेन से कूद गई. ट्रेन स्टेशन पहुंचने पर समरीन ने जीआरपी थाने में घटना की जानकारी दी. इस पर एसओ मो. राशिद खां, शिवनारायण कुमार व महिला आरक्षी प्रियंका वर्मा के साथ उसकी तलाश करने लगे. इस दौरान वह पृथ्वीगंज के पास रेलवे लाइन किनारे मिल गई. उसका उपचार कराने के बाद परिजनों के हवाले कर दिया गया. एसओ मो. राशिद खां ने बताया कि युवती मनोरोगी है.
Bamc 203042370007
bamc prectical
news content 4
अज्ञात शव बरामद:बोरी में बंद मिली महिला की लाश, शिनाख्त नहीं
अज्ञात शव बरामद:बोरी में बंद मिली महिला की लाश, शिनाख्त नहीं
नावानगर3 वर्ष पहले
बोरी में बंद मिली महिला की लाश
महिला की लाश देखने जुटी ग्रामीणों की भीड़।
परमानपुर गांव में एनएच-30 किनारे लाश मिलने से सनसनी, सभी थानों को भेजी गई तस्वीर
परमानपुर गांव के पास एनएच-30 सड़क किनारे से पुलिस ने शुक्रवार की अल सुबह बोरी में बंद एक अज्ञात महिला का शव बरामद किया है। वहीं, अज्ञात महिला का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस महिला की पहचान कराने में काफी कोशिश किया, पर सफलता नहीं मिली। बाद में शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। महिला की उम्र लगभग 35 वर्ष बताई जा रही है। शव देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि महिला जिउतिया व्रत कर रखा था। जिसकी हत्या गला दबाकर हत्या कर दी गयी है। साथ ही हत्या कही और कर शव को यहां लाकर फेंका गया है।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार की अहले सुबह गांव के युवक हाईवे पर टहल रहे थे। तभी सड़क किनारे बोरी पर उनकी नजर पड़ी। युवकों ने बोरी के पास पहुंचकर उसका बांध खोला तो देखकर दंग रह गए। बोरी में महिला का शव था। जिसके बाद युवकों ने शोर मचाने लगे। शोर सुन ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। बाद में ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दिया।
महिला की गला दबाकर की गई है हत्या
थानाध्यक्ष संजय कुमार ने बताया कि प्रथमदृष्टया यह प्रतीत होता है कि महिला की गला दबाकर हत्या की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो पायेगा कि मौत कैसे हुई है। उन्होंने बताया कि ऐसा लग रहा है कि हत्या अन्य जगह की गई है। महिला की पहचान छिपाने के लिए परमानपुर हाईवे किनारे फेंक दिया गया है।
सभी गुमशुदा मामलों की रिपोर्ट खंगाली जा रही
मृतका की पहचान के लिए आसपास के सभी जिलों में उसकी तस्वीर भेजी गई है। साथ ही, जिले के सभी थानों व ओपी में गुमशुदा की शिकायत पर नजर बनाए रखने के लिए भी कहा गया है। जैसे ही कोई सुराग मिलेगा, पुलिस उस पर त्वरित कार्रवाई करेगी।
news content 3
पानीपत में स्कूटी की डिग्गी से 2 लाख चोरी:दुकान पर आए ग्राहकों ने दुकानदार से मांगी लिफ्ट; रास्ते में किया हाथ साफ
हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा कस्बे में एक दुकान पर आए 2 युवकों ने दुकानदार से लिफ्ट मांग कर उसकी एक्टिवा से 2 लाख कैश चोरी कर लिया। दरअसल, बीच रास्ते में दुकानदार की आंखों में जलन हुई। वह रुक कर आंखें धोने लगा तो इसी बीच दोनों युवकों ने डिग्गी में रखे रुपए चोरी कर लिए। कुछ देर बाद जब डिग्गी चेक की तो उसमें से कैश गायब था। मामले की शिकायत पुलिस को दी गई है।
समालखा थाना पुलिस को दी शिकायत में विश्वनाथ कुमार ने बताया कि वह गोढ़ी बिशनरामपुर, बिहार का रहने वाला है। हाल में वह दुर्गा कॉलोनी समालखा में रहता है। वह एक कंपनी में बतौर सुपरवाइजर की नौकरी करता है।
उसने घर के सामने एक करियाना की दुकान खोली हुई है जिस पर उसकी पत्नी बैठती है। 26 मार्च की दोपहर करीब 3 बजे वह दुकान पर अकेला था। इसी दौरान वहां दो युवक सामान लेने आए। उनको सामान दे दिया। इसके बाद उसकी पत्नी दुकान पर आ गई। करीब 5 मिनट बाद वह अपनी दुकान से 2 लाख कैश लेकर जाने लगा। कैश में सभी 500-500 के नोट थे।
पट्टीकल्याणा के लिए मांगी थी लिफ्ट
विश्वनाथ ने बताया कि उसने कैश को एक्टिवा की डिग्गी में रख लिया था। जब वह चलने लगा तो उक्त दोनों युवकों ने उससे लिफ्ट मांगी। जिन्हें लिफ्ट दी और उन्होंने पट्टीकल्याणा जाने की बात कही। रास्ते में CNG पंप और 70 माइल ढाबा के बीच उसकी आंखों में जलन हुई।
उसने एक्टिवा रोक कर पानी से अपनी आंखों साफ की। इसके बाद वे वहां से फिर से चल पड़े। पट्टीकल्याणा पुल के पास दोनों युवकों को छोड़ दिया। कुछ देर बाद एक्टीवा को फिर से चेक किया तो उसमें रखा कैश गायब था।
News content 2
Charkhi Dadri: बिना डिग्री और अनुमति के चल रहे दांतों के अस्पताल का भंड़ाफोड़, बिजली चोरी भी पकड़ी
जांच के दौरान अस्पताल में मरीजों के रिकॉर्ड का रजिस्टर, दवाओं का स्टॉक और दांत उखाड़ने के औजार मिले। इन तमाम सामान को स्वास्थ्य विभाग ने अपने कब्जे में लेकर पुलिस को सौंप दिया।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने चरखी दादरी के बौंदकलां में स्वास्थ्य विभाग से अनुमति लिए बिना चलाए जा रहे दंत अस्पताल का भंड़ाफोड़ किया है। इतना ही नहीं यहां मरीजों का उपचार करने वाले शख्स के पास डिग्री भी नहीं मिली। इसके अलावा यहां बिजली चोरी करने का मामला भी पकड़ में आया। तमाम अनियमितताओं पर संज्ञान लेकर संबंधित विभाग ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री उड़नदस्ते को सूचना मिली थी कि बौंदकलां में स्वास्थ्य विभाग से अनुमति लिए बिना ही चौहान दांतों का अस्पताल चलाया जा रहा है। इस आधार पर मुख्यमंत्री उड़नदस्ता ने सोमवार को गुप्तचर विभाग टीम, स्वास्थ्य विभाग से डेंटल सर्जन डॉ. राजकुमार, बिजली निगम से जेई सुमित व दमकल विभाग से सचिन को साथ लेकर सोमवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे यहां दबिश दी।
टीम ने यहां पहुंचते ही संचालक से स्वास्थ्य विभाग का अनुमति पत्र और चिकित्सक की डिग्री मांगी। इस पर अस्पताल संचालक टीम के समक्ष अनुमति पत्र और डिग्री पेश नहीं कर पाया। इसके बाद दमकल विभाग की टीम ने अस्पताल संचालक से एनओसी मांगी तो वो भी उसके पास नहीं मिली।
जांच के दौरान अस्पताल में मरीजों के रिकॉर्ड का रजिस्टर, दवाओं का स्टॉक और दांत उखाड़ने के औजार मिले। इन तमाम सामान को स्वास्थ्य विभाग ने अपने कब्जे में लेकर पुलिस को सौंप दिया। अस्पताल संचालक नाहर सिंह को भी पुलिस टीम अपने साथ थाने ले गई।
पहले भी तीन अस्पतालों पर हो चुकी कार्रवाई
बौंदकलां क्षेत्र में बिना अनुमति चलाए जा रहे तीन निजी अस्पतालों का मुख्यमंत्री उड़नदस्ता पहले भी भंड़ाफोड़ कर चुका है। उन मामलों में भी चिकित्सक की डिग्री के साथ अस्पताल चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग का अनुमति पत्र नहीं मिला था। ऐसे में स्पष्ट है कि जिले में काफी अस्पताल अनुमति लिए बिना चलाए जा रहे हैं और विभाग को इनकी भनक तक नहीं है।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने मारा छापा, बिना डिग्री और लाइसेंस के चल रहा था अस्पताल
रोहतक ब्यूरो
कस्बे के सतनाली रोड पर मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने दबिश देकर बिना डिग्री और लाइसेंस के चलाए जा रहे अस्पताल का पर्दाफाश किया है। बाढड़ा एमओ की शिकायत पर पुलिस ने इस संबंध में दो नामजद आरोपियों पर केस दर्ज किया है। दबिश के दौरान चिकित्सक की कुर्सी पर बैठे शख्स ने हिसार निवासी एक चिकित्सक के दस्तावेज टीम के समक्ष प्रस्तुत किए। टीम ने इन्हें जांच के लिए कब्जे में ले लिया है।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता में शामिल रोहतक से एसआई अनूप सिंह, एसआई कर्मबीर सिंह ने गुप्त सूचना के आधार पर बाढड़ा स्थित निजी अस्पताल में औचक छापा मारा। टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि बिना लाइसेंस के ही यह अस्पताल चलाया जा रहा है। अस्पताल के संचालक के पास चिकित्सक की डिग्री भी नहीं है। पुलिस को दी शिकायत में मेडिकल ऑफिसर भूपेंद्र ने बताया कि मुख्यमंत्री उड़नदस्ता के साथ जब अस्पताल में टीम पहुंची तो चिकित्सक की कुर्सी पर एक शख्स बैठा मिला। पूछताछ में उसने अपना नाम अशोक कुमार बताया। टीम ने जब उससे डिग्री और अस्पताल चलाने का लाइसेंस मांगा तो उसने टीम को एक फोटोकॉपी दी, जो हिसार के सैनियान मोहल्ला वासी डॉ. हरीश की थी। इसके अलावा अशोक ने आयुर्वेदिक कॉलेज के तृतीय वर्ष के दस्तावेज की फोटोकॉपी भी टीम के समक्ष पेश की। डॉक्टर भूपेंद्र के अनुसार अशोक ने बताया कि डॉ. हरीश हिसार में रहता है और बुलाने पर ही यहां आता है। उसके नाम से रजिस्ट्रेशन करवाकर वह अस्पताल चला रहा है। टीम ने यहां रखीं दवाओं को सील कर दिया और हिसार निवासी हरीश और हंसावास खुर्द निवासी अशोक के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी। बाढड़ा थाना पुलिस ने इस संबंध में संचालक के खिलाफ धारा 420, इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 की धारा 15 व 25 और इंडियन मेडिकल डिग्री एक्ट की धारा 6-ए (1) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
News content 1
काठमांडू: नेपाल ने सोमवार को भगोड़े कट्टरपंथी उपदेशक अमृतपाल सिंह को अपनी निगरानी सूची में डाल दिया है. अमृतपाल सिंह के बारे में माना जा रहा है कि वह नेपाल में भी छिपा हो सकता है. भारत ने नेपाल से अनुरोध किया था कि भारतीय पासपोर्ट या किसी अन्य नकली पासपोर्ट के सहारे अमृतपाल सिंह को किसी तीसरे देश में भागने की अनुमति नहीं दी जाए और यदि वह भागने का प्रयास करता है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाए. नेपाल के अधिकारियों ने बताया कि भारतीय दूतावास के अनुरोध के बाद आव्रजन विभाग (Immigration Department) ने अमृतपाल को अपनी निगरानी सूची में डाल दिया है. आव्रजन विभाग के सूचना अधिकारी कमल प्रसाद पांडे ने कहा, "हमें (भारतीय) दूतावास से उसके पासपोर्ट की एक प्रति के साथ एक लिखित नोट मिला है, जिसमें संदेह जताया गया है कि अमृतपाल सिंह नेपाल में घुसा है और आसपास कहीं छिपा हुआ है."
नेपाल में तो नहीं अमृतपाल सिंह
इससे पहले, काठमांडू पोस्ट अखबार ने खबर दी थी कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को कांसुलर सर्विसेज विभाग को भेजे पत्र में सरकारी एजेंसियों से अनुरोध किया है कि यदि अमृतपाल सिंह नेपाल से भागने की कोशिश करता है तो उसे गिरफ्तार किया जाए. अखबार ने प्राप्त पत्र की प्रति का हवाला देते हुए कहा, "अमृतपाल सिंह फिलहाल नेपाल में छिपा हुआ है. सम्मानित मंत्रालय से अनुरोध किया जाता है कि वह आप्रवासन विभाग को सूचित करें कि अमृतपाल सिंह को नेपाल के माध्यम से किसी तीसरे देश की यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाए और यदि वह इस मिशन की सूचना के तहत भारतीय पासपोर्ट या किसी अन्य फर्जी पासपोर्ट का उपयोग करके नेपाल से भागने का प्रयास करता है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाए."
भारत सरकार ने नेपाल सरकार को भेजा पत्र
काठमांडू पोस्ट अखबार ने खबर दी है कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को काउंसलर सेवा विभाग को भेजे चिट्ठी में सरकारी एजेंसियों से अनुरोध किया है कि यदि अमृतपाल सिंह नेपाल से भागने की कोशिश करता है तो उसे गिरफ्तार किया जाए। जानकारी के मुताबिक अमृतपाल नेपाल में छिपा है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को वाणिज्य सेवा विभाग को भेजे पत्र में यहां की विभिन्न सरकारी एजेंसी से अनुरोध किया है कि यदि अमृतपाल नेपाल से भागने की कोशिश करता है, तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाए। अखबार ने एक पत्र का हवाला देते हुए कहा, ‘‘सिंह फिलहाल नेपाल में छिपा हुआ है।’’ अखबार ने संबंधित पत्र की एक प्रति उसके पास होने का दावा किया है।
नेपाल के होटल में भेजी गई अमृतपाल की जानकारी
भारत सरकार की ओर से नेपाल सरकार भेजी गई चिट्ठी में लिखा गया है, "सम्मानित मंत्रालय से अनुरोध किया जाता है कि वह आप्रवासन विभाग को सूचित करें कि अमृतपाल सिंह को नेपाल के माध्यम से किसी तीसरे देश की यात्रा करने की अनुमति न दी जाए।
समाचार-पत्र ने कहा है, ‘‘सम्मानित मंत्रालय से अनुरोध किया जाता है कि वह आव्रजन विभाग को सूचित करे कि अमृतपाल सिंह को नेपाल के माध्यम से किसी तीसरे देश की यात्रा करने की अनुमति न दी जाये और यदि वह इस मिशन की सूचना के तहत भारतीय पासपोर्ट या किसी अन्य फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल करके नेपाल से भागने का प्रयास करता है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाए।’’
अखबार ने कई स्रोतों का हवाला देते हुए कहा कि पत्र और सिंह के व्यक्तिगत विवरण को होटल से लेकर एयरलाइंस तक सभी संबंधित एजेंसी को भेज दिया गया है। माना जाता है कि सिंह के पास अलग-अलग पहचान वाले कई पासपोर्ट हैं। पंजाब पुलिस ने 18 मार्च को अमृतपाल के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी, तभी से वह फरार है। कट्टरपंथी अलगाववादी अमृतपाल ने पुलिस को भी चकमा दे दिया और पंजाब के जालंधर जिले में उसके काफिले को रोके जाने के बावजूद वह पुलिस के जाल से बच निकलने में कामयाब रहा।
28/03/2023
photo feature 2
Victoria Mahal
विक्टोरिया मेमोरियल हॉल न केवल कलकत्ता शहर बल्कि हमारे पूरे देश के सबसे शानदार स्मारकों में से एक है। शानदार और राजसी ब्रिटिश वास्तुकला का प्रतिनिधित्व करते हुए, विक्टोरिया मेमोरियल हॉल आज कोलकाता शहर के एक वास्तविक प्रतीक के रूप में खड़ा है। 1 रानियां वे स्थित हैं, वैश्वएच की परिकल्पना ब्रिटिश भारत के वायसराय लॉर्ड कर्जन ने ज़ेंग महारानी विक्टोरिया के स्मारक के रूप में की थी। इसलिए, ऋण के अनुसार, इस स्मारक को एक महान संगमरमर हॉल के रूप में लिया जाना चाहिए, जो मुख्य रूप से रानी के स्मारक के रूप में और भारतीय साम्राज्य की राष्ट्रीय गैलरी और वलहैला के रूप में सेवा करने के लिए कलकत्ता मैदान में बनाया गया था।
कर्जन जिस राष्ट्रीय दीर्घा की बात करता है, वह भविष्य में एक संग्रहालय के रूप में ले जाएगा। इसलिए विक्टोरिया मेमोरियल हॉल को डेड क्वीन विक्टोरिया के लिए केवल एक स्मारक से अधिक कार्य करने के लिए स्थापित किया गया था। इसके घेरे में स्थित एक संग्रहालय के साथ स्मारक को डिजाइन किया गया था। संग्रहालय के साथ स्मारक "हमारे अद्भुत इतिहास के स्थायी रिकॉर्ड" के रूप में कार्य करेगा। यह एक ऐतिहासिक संग्रहालय होना था जहां लोग अपने सामने उन पुरुषों की तस्वीरों और मूर्तियों को देख सकते थे जिन्होंने इस देश के इतिहास में एक प्रमुख भूमिका निभाई और एक गौरवपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी घटना में। ऋण के लेखन से पता चलता है कि महारानी विक्टोरिया के योग्य और भारत के योग्य "महान शाही स्मारक" स्थापित करने के लिए निष्पादन करना उनके शाही कर्तव्य का एक हिस्सा था।
जनवरी 1901 में रानी की मृत्यु के कुछ ही सप्ताह में 6 फरवरी, 1901 को कलकत्ता के टाउन हॉल में एक महान बैठक बुलाई गई, जिसमें स्मारक के निर्माण के लिए एक अखिल भारतीय स्मारक निधि के गठन का प्रस्ताव रखा गया। भारत के राजकुमारों और लोगों ने धन के लिए उनकी अपील का औपचारिक रूप से जवाब दिया और इस स्मारक के निर्माण की कुल लागत एक करोड़, पांच लाख रुपये थी, जो पूरी तरह से उनकी सदस्यता से ली गई थी। वेल्स के करीबी राजकुमार जॉर्ज पंचम ने 4 जनवरी, 1906 को इसकी आधारशिला रखी और 1921 में इसे अधिकृत रूप से जनता के लिए खोल दिया गया।
विक्टोरिया दक्षिणपूर्वी ऑस्ट्रेलिया में एक राज्य है। यह ऑस्ट्रेलिया में सबसे अधिक घनी आबादी वाला एवं दूसरा सबसे छोटा राज्य है। इसकी सीमा न्यू साउथ वेल्स के साथ उत्तर में, साउथ ऑस्ट्रेलिया के साथ पश्चिम में लगती है।
पश्चिम बंगाल में जॉय शहर, कोलकाता (पूर्व कलकत्ता) के केंद्र में स्थित सफेद संगमरमर से बना विक्टोरिया मेमोरियल एक विशाल स्मारक है और पश्चिम बंगाल में सबसे प्रसिद्ध स्मारकों में से एक है जो एक संग्रहालय और लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है. इसे महारानी विक्टोरिया की स्मृति में बनाया गया था.
15वीं शताब्दी में निर्मित, बाल्मोरल महल 1852 में राजकुमार अल्बर्ट द्वारा रानी विक्टोरिया के लिए खरीदा गया था। रानी विक्टोरिया ने 28 सितंबर 1853 को नए भवन की आधारशिला रखी। महल ग्लेन गेल्डर की पड़ोसी खदानों से ग्रेनाइट से बनाया गया था, जो उत्पादन करते हैं लगभग सफेद पत्थर।
लॉर्ड कर्जन ने एक संग्रहालय और उद्यानों के साथ एक भव्य इमारत के निर्माण का प्रस्ताव रखा। वेल्स के राजकुमार, जो बाद में जार्ज पंचम के रूप में सिंहासनारूढ़ हुए, ने 4 जनवरी 1906 को इसका शिलान्यास किया और इसे औपचारिक रूप से 1921 में जनता के लिए खोल दिया गया।
स्मारक के अंदर 25 दीर्घाएँ हैं, जिनमें कलकत्ता गैलरी, पोर्ट्रेट गैलरी, रॉयल गैलरी, मूर्तिकला गैलरी और नेशनल लीडर्स गैलरी शामिल हैं। विक्टोरिया मेमोरियल संग्रहालय 28,000 से अधिक कलाकृतियों का घर है, जिनमें हथियार और कवच, मूर्तियां और पुरातन पुस्तकें, पेंटिंग आदि शामिल हैं
28/03/2023
Photo feature 1
Taj Mahal
ताजमहल भारतीय शहर आगरा में यमुना नदी के दक्षिण तट पर एक हाथीदांत-सफेद संगमरमर का मकबरा है। इसे 1632 में मुगल सम्राट शाहजहां (1628 से 1658 तक शासन किया गया) द्वारा अपनी पसंदीदा पत्नी मुमताज महल की मकबरे के लिए शुरू किया गया था।
तेजोमहालय उर्फ ताजमहल को नागनाथेश्वर के नाम से जाना जाता था, क्योंकि उसके जलहरी को नाग के द्वारा लपेटा हुआ जैसा बनाया गया था। यह मंदिर विशालकाय महल क्षेत्र में था। आगरा को प्राचीनकाल में अंगिरा कहते थे, क्योंकि यह ऋषि अंगिरा की तपोभूमि थी। अंगिरा ऋषि भगवान शिव के उपासक थे।
ताजमहल बनवाने के पिछे की वजह क्या थी? बात सन् 1631 की है, मुग़ल बादशाह शाहजहां हिन्दुस्तान की सरज़मीं पर अपनी बेग़म मुमताज़ महल की मृत्यु का मातम मना रहे थे और उस मातम में एक धड़कन उनकी पीछे छूटी मोहब्बत की भी थी, जिसे आने वाली पीढ़ियों के सामने वे मिसाल के रूप में देना चाहते थे।
ताजमहल मुग़ल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इसकी वास्तु शैली फ़ारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला के घटकों का अनोखा सम्मिलन है। सन् १९८३ में, ताजमहल युनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना। इसके साथ ही इसे विश्व धरोहर के सर्वत्र प्रशंसा पाने वाली, अत्युत्तम मानवी कृतियों में से एक बताया गया।
ताजमहल को लेकर कई मिथक और दंतकथाएं
Tajmahal 22 rooms: मुमताज और शाहजहां की कब्र ताजमहल को लेकर दावा किया जा रहा है कि 700 से अधिक ऐसे सबूत मौजूद हैं जो इसे मंदिर इमारत घोषित करते हैं। यानी वर्तमन ताजमहल पर ऐसे 700 चिन्ह खोजे गए हैं जो इस बात को दर्शाते हैं कि इसका रिकंस्ट्रक्शन किया गया है। इसी के साथ ही इसके बंद 22 तहखानों में छुपा सबसे बड़ा रहस्य।
भारतीय इतिहास के पन्नो में यह लिखा है कि ताजमहल को शाहजहां ने मुमताज के लिए बनवाया था। वह मुमताज से प्यार करता था। दुनिया भर में ताजमहल को प्रेम का प्रतीक माना जाता है, लेकिन कुछ इतिहासकार इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका मानना है कि ताजमहल को शाहजहां ने नहीं बनवाया था वह तो पहले से बना हुआ था। उसने इसमें हेर-फेर करके इसे इस्लामिक लुक दिया था।
शाहजहां के बादशाह बनने के बाद ढाई-तीन वर्ष में ही मुमताज की मृत्यु हो गई थी। इतिहास में मुमताज से शाहजहां के प्रेम का उल्लेख जरा भी नहीं मिलता है। यह तो अंग्रेज शासनकाल के इतिहासकारों की मनगढ़ंत कल्पना है जिसे भारतीय इतिहासकारों ने विस्तार दिया। शाहजहां युद्ध कार्य में ही व्यस्त रहता था। वह अपने सारे विरोधियों की की हत्या करने के बाद गद्दी पर बैठा था। ब्रिटिश ज्ञानकोष के अनुसार ताजमहल परिसर में अतिथिगृह, पहरेदारों के लिए कक्ष, अश्वशाला इत्यादि भी हैं। मृतक के लिए इन सबकी क्या आवश्यकता?
ताजमहल के हिन्दू मंदिर होने के सबूत...
इतिहास में पढ़ाया जाता है कि ताजमहल का निर्माण कार्य 1632 में शुरू और लगभग 1653 में इसका निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। अब सोचिए कि जब मुमताज का इंतकाल 1631 में हुआ तो फिर कैसे उन्हें 1631 में ही ताजमहल में दफना दिया गया, जबकि ताजमहल तो 1632 में बनना शुरू हुआ था। यह सब मनगढ़ंत बातें हैं जो अंग्रेज और मुस्लिम इतिहासकारों ने 18वीं सदी में लिखी।
ताजमहल के गुम्बद पर जो अष्टधातु का कलश खड़ा है वह त्रिशूल आकार का पूर्ण कुंभ है। उसके मध्य दंड के शिखर पर नारियल की आकृति बनी है। नारियल के तले दो झुके हुए आम के पत्ते और उसके नीचे कलश दर्शाया गया है। उस चंद्राकार के दो नोक और उनके बीचोबीच नारियल का शिखर मिलाकर त्रिशूल का आकार बना है। हिन्दू और बौद्ध मंदिरों पर ऐसे ही कलश बने होते हैं। कब्र के ऊपर गुंबद के मध्य से
अगले पन्ने पर, कब्रगाह या महल...
अगले पन्ने पर, ताज नहीं पहले था तेजो महालय...
शाहजहां के समय यूरोपीय देशों से आने वाले कई लोगों ने भवन का उल्लेख 'ताज-ए-महल' के नाम से किया है, जो कि उसके शिव मंदिर वाले परंपरागत संस्कृत नाम 'तेजोमहालय' से मेल खाता है। इसके विरुद्ध शाहजहां और औरंगजेब ने बड़ी सावधानी के साथ संस्कृत से मेल खाते इस शब्द का कहीं पर भी प्रयोग न करते हुए उसके स्थान पर पवित्र मकबरा शब्द का ही प्रयोग किया है।
।
Short story 2
एक व्यापारी व्यापर करने के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाता था बिच में रेगिस्तान का कुछ इलाका पड़ता था। वह आदमी एक Negative सोच वाला इंसान था हमेशा शिकायत करता रहता था की मेरे पास ये नहीं है वो नहीं है इसकी कमी है उसकी कमी है।
एक दिन वह रेगिस्तान में से गुजर रहा था तभी उसकी पानी की बोतल खाली हो जाती है उसे बड़ी जोर की प्यास लगती है लेकिन रेगिस्तान में पानी ना मिलने की वजह से उसे बहुत गुस्सा आता है और बोलता है की कितना ख़राब जगह है ना कोई पेड़ ना पानी रास्ता भी लम्बा है रेगिस्तान पार करना पड़ता है।
तभी आसमान की तरफ देख करके कहता है की भगवान ये कैसा जगह बना दी है आप ने। अगर मेरे पास में बहुत सारा पानी होता बहुत सारे संसाधन होते तो इस जगह पर हरियाली कर देता बहुत सारा पेड़ लगा देता। वह आदमी ऊपर देखकर ये सब बाते कह रहा होता है और ऐसा लग रहा था की जैसे ऊपर वाले से जवाब का प्रतीक्षा कर रहा हो की भगवान कुछ कह दे।
अब चमत्कार ये हुआ की वह जैसे ही निचे देखा उसे अपने आँखों के सामने एक कुआ दिखाई दिया वह पूरी तरह से घबड़ा गया क्योकि उसने कभी भी उस रेगिस्तान में कुआ नहीं देखा था।
वह कुए के पास पंहुचा और देखा की कुआ पूरी तरह पानी से भरा हुआ है परन्तु वह आदमी Negative सोच वाला था और हमेशा शिकायत करता रहता था और फिर से आसमान की तरफ देखते हुए बोला भगवान पानी से भरा हुआ कुआ तो दे दिया लेकिन पानी निकलूंगा कैसे। तो इस बार जब वह निचे देखा तो फिर से चमत्कार हुआ उसे कुए के पास रस्सी और बाल्टी दिखाई दी लेकिन आदमी फिर से ऊपर देखा और बोला भगवान अब इस पानी को ले जाऊंगा कैसे।
तभी उसको अहसास हुआ जैसे उसके पीछे कोई है वह पीछे मुड़कर देखा तो एक ऊंट खड़ा हुआ होता है वह पूरी तरह से घबड़ा गया सोचने लगा की ये तो सच में होने लग रहा है मै बातो बातो में कह तो दिया अब मुझे यहाँ हरियाली करनी पड़ेगी और पेड़ लगाने की जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी।
आदमी को पानी से भरा हुआ कुआ मिल गया, बाल्टी और रस्सी मिल गयी, पानी को ले जाने के लिए ऊंट भी मिल गया सब कुछ मिल गया। अब वह आदमी सोच रहा था की ये मै बातो बातो में क्या बोल दिया ये तो गड़बड़ हो गया। अब वह तेजी से दौड़कर भागने लगा। वह भाग रहा था उस जिम्मेदारी से बच रहा था तभी एक कागज उड़ते हुए आया और इसके सरीर से चिपक गया।
उसने जब उस कागज को देखा तो उसपर लिखा हुआ था की मैंने तुम्हे पानी दिया, कुआ दिया, रस्सी और बाल्टी दिया, पानी को ले जाने के लिए साधन दिया फिर भी क्यों बचकर भाग रहे हो। उस आदमी को लगा की मेरे साथ पता नहीं क्या हो रहा है। वह दौड़ते-दौड़ते रेगिस्तान को पार कर लिया लेकिन उस रेगिस्तान को हरा भरा नहीं बनाया।
यह कहानी हमें सिखाती है की हम में से बहुत सारे लोग ये कहते है की बड़े स्कूल में पढ़ लिया होता या बड़े कॉलेज में चला गया होता तो ये कर लेता, अगर मेरे पास बहुत सारा पैसा होता तो ये कर लेता, मेरा बॉस मेरा साथ नहीं देता है नहीं तो मै पता नहीं क्या कर देता। हम हमेशा शिकायते ढूढ़ा करते है, अपनी जिम्मेदारी से बचकर भाग रहे होते है। ये कहानी हमें सिखाती है की लाइफ में हम जो कुछ भी कर रहे है 100 % जिम्मेदारी हमारी है की उस काम को बिना किसी शिकायत के पूरा करे तो दुसरो पर दोष देना उनकी गलतिया बताना बंद कीजिये अपनी गलतियों को सुधारना सुरु कीजिये।
Short story 1
एक बार एक शिकारी शिकार करने के लिए जंगल में पहुंचा। उसने अपने तीर पर बहुत ही खतरनाक जहर लगाया और शिकार को निशाना बना करके उसने तीर को छोड़ा लेकिन उसका तीर चूक गया और तीर एक पेड़ पर जा लगा। वह पेड़ बहुत ही हरा-भरा और बहुत सारे तोते उस पेड़ पर रहते थे।
जैसे ही वह जहरीला तीर उस पेड़ पर जाकर लगा वह पेड़ धीरे-धीरे सूखने लगा और उस पेड़ पर जो भी तोते रहते थे वह एक-एक करके उस पेड़ को छोड़कर जाने लगे।
उस बड़े से पेड़ के कोटर में एक बहुत ही बूढ़ा तोता रहता था जो बहुत ही धर्मात्मा और अच्छे मन का था। सभी तोते उस पेड़ को छोड़कर जाने लगे थे लेकिन वह बूढ़ा तोता जाता था दाना लेकर के आता और उसी कोटर में आ करके बैठ जाता था परन्तु उस पेड़ को छोड़ने को तैयार नहीं था।
बूढ़े तोते के साथियो ने कई बार आकर के उसे समझाया की यह पेड़ सुख रहा है और किसी दिन गिर भी जायेगा, चलो किसी और पेड़ पर चल कर रहा जाये परन्तु वह बूढ़ा तोता वहा से जाने को तैयार नहीं हो रहा था।
अब यह बात देवराज इंद्र तक पहुंची उन्हें बताया गया की एक तोता है वह जिस पेड़ पर रहता है उस पेड़ पर एक जहरीला तीर लगने के कारण सूखने, गिरने और ख़त्म होने के कगार पर आ पंहुचा है और एक बूढ़ा तोता अभी भी वही पर रह रहा है वह दाना लेकर आता है और वही पर रहता है जब की उस जंगल में बहुत सारे पेड़ है लेकिन वह उसी पेड़ पर रह रहा है।
देव राज इंद्र प्रगट हुए और उस बूढ़े तोते से कहने लगे की आप बहुत धर्मात्मा है, बहुत ही अच्छे मन के है लेकिन आप इस पेड़ को छोड़कर किसी और पेड़ पर चले जाईये क्योकि यह पेड़ कुछ ही दिनों में गिर जायेगा। तालाब के पास में बहुत से बड़े-बड़े, हरे-भरे पेड़ है, बड़े-बड़े कोटर है उन पेड़ो पर फल भी लगे हुए है उन्हें वही पर तोड़कर खा सकते है, परन्तु यहाँ से आप चले जाये।
तोता बोला माफ़ कीजियेगा, इस पेड़ ने मुझे जीवन दिया है शिकारियों से मेरी रक्षा की है, हर मौषम में मेरे साथ रहा है ये कोटर मेरा घर है यहाँ मै पला बढ़ा हूँ, इस पेड़ को मै छोड़कर कैसे जा सकता हूँ। इस पर संकट आया है तो क्या मै इसे छोड़कर चला जाऊ, मै ऐसा कभी नहीं कर सकता।
देवराज इंद्र तोते के इस बात से बहुत ही प्रसन्न हुए उन्होंने तोते से कहा मै आपके इस बात से बहुत ही खुश हूँ मागो जो आपको मागना हो। उस बूढ़े तोते ने कहा मुझे बस इतना मागना है की जिस पेड़ ने मुझे जन्म दिया, जहा मै रहा, पला बढ़ा जिसे आप मेरा जन्म भूमि कह सकते हो आप इसे फिर से वैसा ही हरा-भरा कर दो जैसा यह था।
देवराज इंद्र ने अमृत से उस पेड़ को सिच दिया और पहले की तरह हरा-भरा कर दिया। अब वापस से उस पेड़ पर आकर के बाकि तोते रहने लगे वह बूढ़ा तोता कुछ समय तक और जिन्दा रहा फिर उसकी मृत्यु हो गयी और वह स्वर्ग में चला गया।
यह कहानी हमें सिखाती ये है की जब भी किसी इंसान का बुरा दौर आता है तो Emotionally वह टुटा हुआ होता है उसे किसी के सहारे की जरुरत होती है किसी की आवश्यकता होती है अगर आप ऐसे समय में उसे छोड़कर चले जायेंगे, उससे बात नहीं करेंगे मुँह मोड़ लेंगे तो आपसे बुरा कोई नहीं है क्योकि आप किसी के सुख का साथी बने या ना बने लेकिन आपको हमेशा किसी के दुःख का साथी जरूर बनना चाहिए।
Article 3
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे भारत में बालिकाओं को बचाने और बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढाओ नाम की लड़कियों के लिए एक योजना शुरू की है। कार्यक्रम का शुभारंभ 22 जनवरी, गुरुवार को पानीपत में, 2015 में किया गया था। यह योजना विशेष रूप से हरियाणा में शुरू की गई थी क्योंकि इस राज्य में पूरे देश में सबसे कम महिला लिंग अनुपात (775 लड़कियां / 1000 लड़के) हैं।
लड़कियों की स्थिति में सुधार लाने के लिए इसे देश भर के सौ जिलों में प्रभावी रूप से लागू किया गया है। 12 जिलों (अंबाला, कुरुक्षेत्र, रेवाड़ी, भिवानी, महेंद्रगढ़, सोनीपत, झज्जर, रोहतक, कैथल, पानीपत, करनाल, और यमुनानगर) को कम बाल लिंगानुपात होने के कारण हरियाणा राज्य से ही चुना गया है।
लड़कियों की स्थिति में सुधार लाने और उन्हें महत्व देने के लिए, हरियाणा सरकार ने 14 जनवरी को बेटी के लोहड़ी नामक एक कार्यक्रम का आयोजन किया। बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना शुरू करने का उद्देश्य लड़कियों को उनके उचित अधिकारों और उच्च शिक्षा का उपयोग करके सामाजिक और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना है।
यह आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं को दी जाने वाली कल्याण सेवाओं की दक्षता में सुधार करने में मदद करता है। यदि 2011 की नवीनतम जनगणना रिपोर्ट पर हमारी दृष्टि पड़े, तो हमें पिछले कुछ दशकों से महिला बाल लिंगानुपात (आयु समूह 0-6 वर्ष) में निरंतर कमी दिखाई दे रही है।
2001 में, यह 927/1000 था जबकि 2011 में यह केवल 919/1000 रह गया। अस्पतालों में आधुनिक नैदानिक उपकरणों के माध्यम से लिंग निर्धारण के बाद लड़कियों के गर्भपात के अभ्यास के कारण लड़कियों की संख्या में भारी कमी है। समाज में लैंगिक भेदभाव के कारण यह बुरी प्रथा अस्तित्व में आई।
एक बालिका के जन्म के बाद, उसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा, अधिकारों और बालिका की अन्य जरूरतों के मामले में एक और प्रकार के भेदभाव का सामना करना पड़ता है। हम कह सकते हैं कि महिलाएं सशक्त होने के बजाय तिरस्कृत थीं।
महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें उनका पूरा अधिकार दिलाने के लिए भारत सरकार ने इस योजना को शुरू किया है। महिलाओं को सशक्त बनाने से परिवार और समाज में विशेष रूप से प्रगति होती है। बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना लड़कियों के लिए मानवीय नकारात्मक मानसिकता में सकारात्मक बदलाव लाने का तरीका है।
यह योजना लोगों को बेटों और बेटियों के बीच भेदभाव को समाप्त करने और कन्या भ्रूण हत्या को समाप्त करने के लिए एक कुंजी के रूप में काम कर सकती है। योजना की शुरुआत करते हुए, पीएम ने पूरी चिकित्सा बिरादरी को याद दिलाया कि चिकित्सा व्यवसाय का उद्देश्य जीवन को बचाना है और जीवन को समाप्त नहीं करना है।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Location
Category
Contact the school
Telephone
Website
Address
VPO Dhani Garan
Hisar
125001