30/06/2023
झारखण्ड के वीर सिद्धू कान्हू की जयंती पर जी.एम ग्रुप ऑफ कॉलेज के डायरेक्टर विनय मेहता एवं शंभू महेता के द्वारा कॉलेज के बगल में स्थित वीर सिद्धू कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। कॉलेज के डायरेक्टर विनय मेहता ने कहा कि वीर सिद्धू-कान्हू मुर्मू का जन्म भोगनाडीह नामक गाँव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था जो कि वर्तमान में झारखण्ड के साहेबगंज जिला के बरहेट प्रखंड में है। सिदो मुर्मू का जन्म 1815 ई0 में हुआ था एवं कान्हू मुर्मू का जन्म 1820 ई0 में हुआ था। सिदो-कान्हू ने 1855-56 मे ब्रिटिश सत्ता, साहुकारो, व्यपारियों व जमींदारो के अत्याचारों के खिलाफ एक विद्रोह कि शुरूवात कि जिसे संथाल विद्रोह या हूल आंदोलन के नाम से जाना जाता है। संथाल विद्रोह का नारा था करो या मरो अंग्रेजो हमारी माटी छोड़ो। 30 जून 1855 की सभा में 5000 से भी ज्यादा आदिवासी एकत्र हुए जिसमें सिद्धू, कान्हू, चाँद एवं भैरव को उनका नेता चुना गय ... और शंभू मेहता ने कहा सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू सगे भाई थे जिन्होने 1855–1856 के सन्थाल विद्रोह का नेतृत्व किया था। सन्थाल विद्रोह ब्रिटिश शासन और भ्रष्ट जमींदारी प्रथा दोनों के विरुद्ध था। जिसमें ज्ञान ज्योति कॉलेज फार्मेसी एवं पारामेडिकल के शिक्षिकाएं काजल कुमारी, नीतू सिंहा,वीरेश यादव पूनम कुमारी, गायत्री कुमारी, मनीष कुमारी,नेहा कुमारी, पम्मी कुमारी, शिक्षक दयानन्द कुमार,उमेश कुमार, मुकेश कुमार, राज आर्यन और कॉलेज के विद्यार्थी ज्योति वर्मा, स्वीटी कुमारी, देविका कुमारी, पूर्णिमा मालाकार, आदित्य कुमार, करण कुमार, ऋतु कुमार, शिवम कुमार, आयुष कुमार, अमन कुमार, अंकित कुमार, एम.डी शहजाद,
ज्ञान ज्योति ग्रुप ऑफ कॉलेज, और ज्ञान ज्योति कॉलेज ऑफ फार्मेसी एवं पारामेडीकल हजारीबाग के सभी शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे।