22/04/2026
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के 21 वें स्थापना दिवस पर श्री केदार मानस पञ्चाङ्ग लोकार्पण 21/04/2026
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पादौ तु वेदस्य हस्तौ कल्पोऽथ पठ्यते। ज्योतिषामयनं चक्षुर्निरुक्तं श्रोत्रमुच्यते।।"
अर्थ: जैसे वेदों के छन्द पैर हैं, कल्प हाथ हैं, निरुक्त कान हैं, शिक्षा नाक है और व्याकरण मुख है, वैसे ही ज्योतिष शास्त्र वेदों की आंख (चक्षु) है।
22/04/2026
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के 21 वें स्थापना दिवस पर श्री केदार मानस पञ्चाङ्ग लोकार्पण 21/04/2026
21/04/2026
20/04/2026
06/04/2026
ज्योतिष विभाग उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रों का पोस्टर चार्ट द्वारा विषय प्रस्तुतिकरण (presentation)
06/04/2026
ज्योतिष विभाग उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय
06/04/2026
ज्योतिष विभाग के छात्रों द्वारा ज्योतिष संबंधी पोस्टर चार्ट सारणी निर्माण किया गया
05/04/2026
नक्षत्र चरण द्वारा राशि ज्ञान
01/04/2026
पंचांग परिचय
*“जैसे स्टेथोस्कोप डॉक्टर की पहचान है, वैसे ही पंचांग ज्योतिषी की आत्मा है।”*
जैसे एक डॉक्टर के लिए स्टेथोस्कोप केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि रोगी के शरीर की आंतरिक स्थिति को समझने का माध्यम होता है, वैसे ही एक ज्योतिषी के लिए पंचांग मात्र कैलेंडर नहीं, बल्कि समय, ग्रह और कर्म के सूक्ष्म रहस्यों को जानने का दिव्य आधार है।
🔶 *पंचांग क्या है?*
पंचांग का अर्थ है “पाँच अंगों वाला समयज्ञान”
तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।
ये पाँचों मिलकर किसी भी दिन और समय की गुणवत्ता बताते हैं।
*तिथि* → मन और भावनाओं की स्थिति
*वार* → ग्रह का प्रभाव
*नक्षत्र* → कार्य की दिशा और स्वभाव
*योग* → शुभ-अशुभ ऊर्जा का संकेत
*करण* → कार्य सिद्धि की क्षमता
🔶 *फल-कथन (Prediction) में पंचांग का महत्व*
ज्योतिष केवल कुंडली देखकर भविष्य बताना नहीं है।
सही फल-कथन के लिए समय का सटीक ज्ञान जरूरी है—और यह ज्ञान पंचांग देता है।
👉 उदाहरण से समझिए:
यदि किसी की कुंडली में शुभ योग है, लेकिन वह कार्य अशुभ तिथि या अशुभ नक्षत्र में किया जाए, तो परिणाम कमजोर हो सकता है।
वहीं साधारण योग भी शुभ मुहूर्त में किया जाए तो सफलता मिल सकती है।
🔸 इसलिए एक सच्चा ज्योतिषी केवल ग्रहों की स्थिति नहीं देखता, बल्कि पंचांग के आधार पर यह भी बताता है,
कब कार्य शुरू करना चाहिए
कौन सा समय अनुकूल है
किस दिन सावधानी रखनी चाहिए
🔶 *बिना पंचांग के ज्योतिष अधूरा क्यों?*
जैसे डॉक्टर बिना स्टेथोस्कोप के सही जांच नहीं कर सकता,
वैसे ही ज्योतिषी बिना पंचांग
सही मुहूर्त नहीं निकाल सकता
घटनाओं का सटीक समय नहीं बता सकता
फल-कथन में गहराई नहीं ला सकता
📌 कुंडली बताती है क्या होगा,
📌 लेकिन पंचांग बताता है कब और कैसे होगा।
🔶 *आधुनिक समय में भी पंचांग क्यों जरूरी?*
आज भले ही मोबाइल ऐप और सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं,
लेकिन वे भी पंचांग के सिद्धांतों पर ही आधारित हैं।
पंचांग ही वह मूल स्रोत है जिससे सारा ज्योतिष चलता है।
✨ *निष्कर्ष*
फल-कथन की सटीकता, मुहूर्त की शुद्धता और समय का ज्ञान—
ये तीनों केवल पंचांग से ही संभव हैं।
26/03/2026
प्राचीन परंपरा को बनाये रखने का कार्य कर रहा है उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय प्रो०रमाकांत हरिद्वार (कुलभूषण)उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित “केदारमानस पञ्चाङ्ग” संशोधन त्रिदिवसीय कार्यशाल...
26/03/2026
समाचार पत्रों के आलोक में केदार मानस पञ्चाङ्ग संशोधन कार्यशाला
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