14/10/2025
संस्कृतभारत्याः अखिलभारतीयसंपर्कप्रमुखः श्रीशदेवपुजारि-महोदयस्य नेतृत्वे संस्कृतभारत्याः प्रतिनिधिमण्डलेन माननीयप्रधानमन्त्रि-श्रीनरेन्द्रमोदिमहोदयेन सह मेलनं कृतम्।
सुभाषितों से 'आशय' शीघ्र समझ में आता है - नरेन्द्र मोदी।
पुस्तकसमर्पण के कार्यक्रम में संस्कृतभारती के कार्यकर्ताओं के सामने व्यक्त की भावना !
नवी दिल्ली
दि. 10/10/25
जहां लम्बा भाषण सुनकर समझ विकसित नहीं होती वहां केवल एक सुभाषित से बात स्पष्ट हो जाती है, यह कहना था माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का। वें अपने आवास पर संस्कृतभारती के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित कर रहे थे।
'मन की बात' कार्यक्रम एवं 'संसद' में दिए हुए आदरणीय प्रधानमंत्री के भाषणों में उल्लिखित सुभाषितों एवं सूक्तियों का संकलन पुस्तक के रूप में संस्कृतभारती (विदर्भ) न्यास ने छापा है। पुस्तक का नाम है "उद्गारा:"। संस्कृतभारती की पुणे में कार्यरत दो कार्यकर्त्रियों ने, वैखरी कुलकर्णी (सेनाड) एवं रञ्जना फडणीस, इस पुस्तक का सम्पादन किया है। पुस्तक में सुभाषितों का पदच्छेद, अन्वय, संस्कृत; हिन्दी; अंग्रेजी और मराठी भाषाओं में अनुवाद तो है ही साथ में सुभाषितों का स्रोत, जिस संदर्भ में सुभाषित कहे गये वें श्रीमान् मोदीजी के वाक्य उद्घृत किये गये हैं। लेखिकाओं की टिप्पणियां सुभाषितों के संदर्भ में अतिरिक्त जानकारियां प्रदान करती है। पुस्तक का आकर्षण है सौ से अधिक रंगीन चित्र, जो सुभाषितों के अर्थ को अधिक स्पष्ट करते हैं। इन कारणों से यह पुस्तक पूरे विश्व के सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए मार्गदर्शक बन गयी है।
संस्कृतभारती (विदर्भ) न्यास की ओंर से यह पुस्तक श्रीयुत् प्रधानमंत्री जी को समर्पित करने के लिए न्यास के पदाधिकारी एवं संकलनकर्त्रियां दिल्ली गयी थी। सम्माननीय प्रधानमंत्री जी के आवास पर यह समर्पण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस समय संस्कृतभारती के अखिल भारतीय सम्पर्क प्रमुख श्रीश देवपुजारी उपस्थित थे। दो तप यानी २४ वर्ष सत्ता के केन्द्र में रहकर देशसेवा करने के लिए श्रीशजी ने अङ्गवस्त्र पहनाकर पूर्वप्रचारक मोदीजी का सत्कार किया।
इस प्रसङ्ग पर बोलते हुए माननीय मोदीजी ने कहा सुभाषितों का उपयोग करने की प्रेरणा उन्हें प.पू.सरसंघचालक माननीय बालासाहब देवरस से मिली। वें सुयोग्य सुभाषितों का उपयोग कर विषय समझाते थे। कुछ काल पूर्व तक संस्कृत केवल विद्वानों की भाषा थी। किन्तु संस्कृतभारती ने सरलता से उसे लोगों तक पहुंचाया।
पुस्तक भेंट करते समय, सौ. वैखरी कुलकर्णी (सेनाड), सौ. रञ्जना फडणीस, सौ. वन्दना देशपांडे, कुमारी श्रीया कुलकर्णी, श्रीश देवपुजारी, साहित्य प्रसार केन्द्र के मकरंद कुलकर्णी, अभिजीत टेणी, श्रीनिवास वर्णेकर, दिलीप सेनाड, प्रमोद देशपांडे उपस्थित थे।
उपस्थित सभी का परिचय प्राप्त कर मोदीजी ने सबकी पूछताछ की। उस समय उन्होंने सन्देश दिया - "जिज्ञासा के कारण कृति होती है। इसलिए जिज्ञासा जागृत हो।" वें आत्मीय भाव से सबके साथ वार्ता कर रहे थे। सङ्घ प्रचारक का व्यवहार जैसा होना चाहिए, वैसा ही था। भावविभोर करने वाली इस भेंट को सभी अपनी स्मृति में संजोएंगे।
नोव्हेंबर महिने में कोईम्बतूर में होने वाले संस्कृतभारती के अखिल भारतीय सम्मेलन में पुस्तक का लोकार्पण होने के बाद इस पुस्तक की बिक्री आरम्भ होगी। सम्माननीय मोदीजी ने अखिल भारतीय सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं दी।